भारत के शीर्ष संवैधानिक पद अर्थात राष्ट्रपति के रूप में श्री रामनाथ कोविन्द ने 25 जुलाई को अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने राष्ट्रपति का पद संभालते समय देश के सवा अरब लोगों को संविधान की रक्षा का भरोसा दिलाया और बड़ी विनम्रता व सादगी का प्रदर्शन किया। नये राष्ट्रपति को संसद के केन्द्रीय हॉल में दोपहर 12.15 बजे पद की शपथ जैसे ही दिलायी गयी वैसे ही उपस्थित लोगों ने मेजों की थपथपाहट से अपने नये राष्ट्रपति का अभिनंदन किया, जबकि समस्त राष्ट्रवासियों की ओर से 21 तोपों की सलामी देकर अपने गणतंत्र के संवैधानिक प्रहरी का अभिनंदन किया गया।
हमारे गणतंंत्र की अपनी ही पहचान है। जब देश ने 1947 के पश्चात इस शासन प्रणाली को अपनाने का संकल्प लिया था, तो उस समय ब्रिटेन की संसद में एक सांसद ने भारत को इस डगर पर न चलने की सलाह दी थी। ऐसा उस सांसद ने इसलिए कहा था कि उसे और उसके देश को यह भ्रांति थी कि इस प्रकार की शासन प्रणाली को तो केवल हम ही चला सकते हैं। भारत ने अपने 70 वर्षीय गणतंत्र को सफलता से चलाकर यह सिद्घ कर दिया है कि भारत हर स्थिति परिस्थिति से जूझना जानता है और अपनी ‘सत्यमेव जयते’ की परम्परा में विश्वास रखते हुए सफलता प्राप्त करना भी जानता है। हमने यह सफलता प्राप्त की है तो इसमें देश के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री तक के प्रत्येक प्रधानमंत्री ने अपना न्यूनाधिक प्रशंसनीय सहयोग दिया है। इंदिरा गांधी ने चाहे आपातकाल लगाकर एक बार इसका गला घोंटने का असंवैधानिक कार्य किया पर ‘जनता के दण्ड’ को भुगतकर वह भी ‘राष्ट्रपति भवन’ की गरिमा समझ गयी थीं। उन्हें यह पता चल गया था कि गणतंत्र की शक्ति क्या होती है और देश की जनता अपने गणतंत्र के प्रतीक राष्ट्रपति भवन से क्या अपेक्षाएं करती है?
आज देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि ‘राष्ट्रपति भवन’ में कोई गैर कांग्रेसी राष्ट्रपति पहुंचा है। इससे पूर्व कलाम साहब जैसे गैर राजनीतिक राष्ट्रपतियों के एक दो उदाहरणों को छोडक़र शेष सभी राष्ट्रपति कांग्रेसी पृष्ठभूमि के रहे हैं। यद्यपि उन सभी की राष्ट्रपति के रूप में कार्यशैली लगभग निर्विवाद ही रही। इसके उपरांत भी यह सत्य है कि राष्ट्रपति भवन में अपनी ‘रबर स्टाम्प’ के रूप में व्यक्ति को भेजने की परम्परा भी कांग्रेस की इंदिरा जी की ही देन थी।
देश के नये राष्ट्रपति को कुछ नई पहल करने की आवश्यकता है। माना कि उनकी अपनी संवैधानिक सीमाएं हैं पर वह संवैधानिक सीमाएं इतनी संकीर्ण भी नहीं हैं कि वे उन सीमाओं के भीतर रहकर देश को नई दिशा देने के अपने दायित्व से विमुख रहें। हमने 1600 बीघा में फैले, 340 कमरों वाले और 7 करोड़ ईंटों से बने राष्ट्रपति भवन को इसलिए अपने देश के प्रथम नागरिक के लिए इसलिए तैयार नहीं किया है कि वह वहां स्थानबद्घता (नजरबंदी) का जीवनयापन करेगा। इसके विपरीत हमने अपने गणतंत्र का यह मंदिर उसे इसलिए दिया है कि यहां सर्वमंगल की कामना के नये-नये सूत्र गढ़े जायें और देश के लोगों को यह विश्वास दिलाया जाए कि इस भवन से निकलने वाली आवाज लोककल्याण की ही आवाज होगी।
देश में राष्ट्रपति संवैधानिक परम्पराओं का और संविधान की मूल भावना का संरक्षक होता है। हमारे देश के जिन राष्ट्रपतियों को दुर्बल राष्ट्रपति माना गया-उन्होंने स्वयं को सरकार का एक ‘स्थानबद्घ प्राणी’ बनाकर रख लिया था, जिससे सरकारों को संविधान की मनमानी व्याख्या करने का अवसर मिल गया और उस मनमानी व्याख्या पर राष्ट्रपति की स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गयी। फलस्वरूप देश में जातिवादी आरक्षण को लेकर खुल्लमखुल्ला नारेबाजी और आंदोलन हुए, नेताओं के भाषण हुए और हमने देखा कि जिस जातिवाद को भस्म करने की सौगंध हमारा संविधान बार-बार उठाता रहा-वह एक आतंकवादी की भांति खुल्लमखुल्ला सडक़ों पर छाती चौड़ी करके चलता रहा। इतना ही नहीं वह जाति के नाम पर लोगों को चिन्हित कर उनकेप्राण भी लेता रहा। ‘राष्ट्रपति भवन’ मौन रहा, तब हमने देखा कि राष्ट्रपति भवन के मौन रहने से देश की राजनीति का रातों-रात जातिवादीकरण हो गया। आज मायावती भी एक वर्ग या जाति की आवाज को न उठाने देने के अपने भ्रामक आरोप को लगाकर राज्यसभा से त्याग पत्र दे गयी हैं। सारी राजनीति मौन रही, किसी ने भी उन्हें नहीं रोका कि तुम एक वर्ग या जाति की बात क्यों करती हो, देश की संसद में खड़े होकर तुम्हें ऐसा बोलने का अधिकार किसने दे दिया? यदि इसी कार्य को कोई ब्राह्मण या ठाकुर या जाट या गुर्जर कर देता तो कोहराम मच जाता और कहा जाता कि-ये देखिये! इनकी सोच कितनी संकीर्ण है?-ये संसद में खड़े होकर भी कैसी घिनौनी बात कर रहे हैं?
हम चाहेंगे कि नये राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द देश की राजनीति से जातिवाद के इस विष को समाप्त करने का कार्य करें। वह ‘स्थानबद्घ’ राष्ट्रपति की सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रबद्घ और संकल्पबद्घ राष्ट्रपति के रूप में अपने आपको स्थापित करेंगे हमें ऐसी अपेक्षा है। उनकी शालीनता बोलती है कि वह ऐसा कर सकते हैं। ऐसी ही एक दूसरी समस्या है-जिसे देश में साम्प्रदायिकता के नाम से जाना जाता है। यह साम्प्रदायिकता देश में कथित धर्मनिरपेक्षता की देन है। संविधान के 74वें संशोधन के माध्यम से शब्द ‘धर्मनिरपेक्षता’ के स्थान पर पंथनिरपेक्षता अर्थात सम्प्रदायनिरपेक्षता शब्द स्थापित कर दिया गया है, परंतु हमारे नेता इसके उपरांत भी ‘धर्मनिरपेक्षता’ ही बोलते हैं। संविधान के संरक्षक के रूप में संविधान की मूलभावना का सम्मान करने के लिए राष्ट्रपति देश के जनप्रतिनिधियों को प्रेरित कर सकते हैं। ऐसी प्रेरणा से कितने ही ‘ओवैसियों’ की आवाज संवैधानिक हो जाएगी और हिन्दू विरोध की राजनीति को धर्मनिरपेक्षता मानने की मूर्खता भी समाप्त हो जाएगी। आवाज का संवैधानिक हो जाना भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा है, जिसे कुछ देशविरोधी लोग हर स्थिति में बनाये रखना चाहते हैं, इस क्षेत्र में राष्ट्रपति श्री कोविन्द एक अच्छी पहल कर सकते हैं। भारत की राजनीति के इन दो शत्रुओं ने देश में जातिवादी आरक्षण, बदमाशों को राजनीतिक संरक्षण और अपने विरोधियों को अपने सजातीय लोगों के माध्यम से समाप्त करने की अलोकतांत्रिक और असामाजिक विसंगतियों जैसी कुरीतियों को जन्म दिया है। जिससे सारा भारतीय समाज इस समय व्याकुल है।
कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए इन विसंगतियों का भरपूर लाभ उठाया और देश में सामाजिक समरसता स्थापित नहीं होने दी। अच्छा हो कि श्री कोविंद अब लीक से हटकर चलें और एक क्रांतिकारी राष्ट्रपति के रूप में इतिहास में जाने जाएं।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betparibu giriş
betlike giriş
parmabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
parmabet giriş
betlike giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
klasbahis giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betebet giriş