बढ़ता जा रहा है आवारा कुत्तों का आतंक, सरकार को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देना होगा

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अशोक मधुप

गाजियाबाद में पार्क में पिटबुल डॉग ने 11 साल के बच्चे पुष्प त्यागी पर हमला कर दिया था। उसका एक कान और गाल नोच दिया था। पिटबुल का हमला इतना घातक था कि बच्चे के चेहरे पर 150 से ज्यादा टांके लगे थे। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया था।

भारत में आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों और बड़ों पर हमले की घटनाएं चौंकाने वाली हैं। हर साल देश में कम से कम 20 हजार लोगों की मौत कुत्ता काटने की वजह से हो जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, देश के सभी राज्यों को मिलाकर लगभग 77 लाख लोगों को प्रतिवर्ष कुत्ते काटते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या सड़क पर रहने वाले कुत्तों स्ट्रीट डाग की है। अब तो ये कुत्ते सरकारी अस्पताल से बच्चों को भी उठाकर ले जाने लगे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, कम से कम 20 हजार लोग रेबीज संक्रमण से जान गंवाते हैं। रेबीज संक्रमण कुत्तों के काटने से होता है। कुत्तों की काटने की घटनाओं की वजह से नोएडा-गाजियाबाद की कई सोसायटी में कुत्ता पालने पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, नगर निकायों की ओर से भी तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री की ओर से पेश किये गये आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में की गई गणना के अनुसार, देश में सड़क पर रहने वाले कुत्तों की संख्या 1.5 करोड़ थी। वहीं, 2012 में यही संख्या 1.71 करोड़ थी। 2019 में 72,77,523 व्यक्तियों को कुत्तों ने काटा। 2020 में 43,33,493, 2021 में 17,01133 और 2022 में 14,50,666 व्यक्तियों को कुत्तों ने काटा। हालत इतने गंभीर हैं कि 10 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्ट्रीट डाग के काटने की घटनाओं का समाधान निकालने की जरूरत है।

हाल में राजस्थान के सिरोही के सरकारी अस्पताल में अपनी मां के पास सो रहे एक महीने के बच्चे को कुत्ते उठाकर ले गए। सिरोही के पिंडवाड़ा में रहने वाले महेंद्र का टीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है। सोमवार रात को उसके बेड के पास नीचे फर्श पर उसकी पत्नी रेखा एक बेटी और दो बेटों को लेकर सो रही थी। वार्ड में घूम रहे आवारा कुत्ते उसके एक महीने के बेटे विकास को उठाकर ले गए। रात करीब 1:30 बजे रेखा की नींद खुली तो बच्चा गायब था। फौरन बच्चे को ढूंढ़ना शुरू किया। बच्चे की तलाश शुरू की गई तो वार्ड के बाहर पानी की टंकी के पास कुछ कुत्ते उसे नोंचते दिखे। महिला दौड़कर वहां गई तब तक एक कुत्ता बच्चे का हाथ मुंह में दबाकर भाग गया। कुत्तों ने उसे नोंच-नोंचकर मार डाला था।

उधर हैदराबाद के बाग अंबेरपेट इलाके में दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहां आवारा कुत्तों ने सड़क पर जा रहे चार साल के मासूम बच्चे को नोंच खाया। छह कुत्तों का झुंड मासूम को तब तक नोंचता रहा, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। बाद में कुत्ते उसे घसीटकर पास खड़ी कार के नीचे ले गए। कुछ माह पहले देश भर में पालतू पिटबुल का आतंक सामने आया था। उसने कई जगह अपने मालिक या अन्यों पर हमले किए।

लखनऊ के कैसरबाग के बंगाली टोला इलाके में रिटायर्ड शिक्षक सुशीला 13 जुलाई 2022 को अपनी छत पर अपने पालतू पिटबुल के साथ टहल रही थी, कि कुत्ते के गले में बंधी चेन खुल गई। पिटबुल ने सुशीला को बुरी तरह घायल कर दिया। इससे उसकी मौत हो गई। बरेली में घर के बाहर खेल रही ढाई साल की बच्ची को कुत्तों के झुंड ने नोच-नोचकर मार डाला। कुत्ते मासूम को घर से करीब 100 मीटर दूर घसीटकर ले गए। फिर उसे नोचने लगे। उसके शरीर पर 150 से ज्यादा चोट के निशान मिले हैं। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर जब लोग उसे बचाने पहुंचे तो कुत्ते उन पर भी झपट पड़े। आस-पड़ोस के लोग उसे किसी तरह से बचाकर अस्पताल ले गए लेकिन तब तक मासूम ने दम तोड़ दिया था। बच्ची के शरीर पर ऐसी कोई जगह नहीं बची जहां पर घाव न मिले हों। यहां 15 दिन पहले भी कुत्तों ने 7 साल के जुबैर पर हमला कर दिया था।

ग्रेटर नोएडा के पाई दो सेक्टर की यूनीटेक होराइजन सोसाइटी में एक पालतू कुत्ते ने सुरक्षाकर्मी पर हमला कर दिया था। इससे सुरक्षाकर्मी बुरी तरह घायल हो गया था। रात को सुरक्षाकर्मी अपनी सीट पर बैठा हुआ था। तभी अचानक कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया था। कुत्ते की मालकिन ने किसी तरह सुरक्षाकर्मी की जान बचाई थी। नोएडा की लोटस बुलेवार्ड सोसाइटी में कुत्तों ने एक साल के बच्चे अरविंद पर हमला कर दिया था। कुत्तों ने बच्चे का पेट फाड़ दिया था। इससे उसकी आंतें बाहर आ गईं थीं। किसी तरह बच्चे को कुत्तों से बचाकर सोसाइटी के लोगों ने अस्पताल में भर्ती कराया था। हालांकि सर्जरी के बाद भी बच्चे को बचाया नहीं जा सका था। लखनऊ के कृष्णा नगर में रहने वाले एक युवक को पालतू कुत्ते ने प्राइवेट पार्ट में काट लिया था। ब्लीडिंग होने की वजह से दो दिन तक वह अस्पताल में भर्ती रहा था। कृष्णा नगर के प्रेम नगर में रहने वाले संकल्प निगम 3 सितंबर की रात 10:30 बजे जागरण देखकर घर लौट रहे थे। घर के पास पहुंचे, तो एक पालतू कुत्ते ने प्राइवेट पार्ट में बुरी तरीके से काट लिया था। उस समय कुत्ते का मालिक शिव शंकर पांडेय यह सब देखता रहा था। उसने कोई मदद नहीं की थी।

गाजियाबाद में पार्क में पिटबुल डॉग ने 11 साल के बच्चे पुष्प त्यागी पर हमला कर दिया था। उसका एक कान और गाल नोच दिया था। पिटबुल का हमला इतना घातक था कि बच्चे के चेहरे पर 150 से ज्यादा टांके लगे थे। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया था। पीड़ित बच्चे के पिता ने पुलिस को तहरीर दी थी। ये तो कुछ ही घटनाएं हैं, वरना अखबारों में रोज इस तरह की घटनाएं पढ़ने को मिलती रहती हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने पालतू कुत्ते रखने वालों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए है। सरकार ने कहा है कि जो लोग घर में लोग पालतू कुत्ता रखते हैं, कुत्तों को सड़कों पर ले जाकर गंदगी न पैदा करवाएं। जरूरत पड़ने पर उनका रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में 22 मई 2022 को हिदायत दी थी। उन्होंने कहा कि जानवरों को रोड़ पर लेकर निकलते वक्त साफ-सफाई का ध्यान रखें। इस आदेश को लगभग दस माह हो चुके हैं। जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले योगी जी के आदेश पर प्रदेश में कहीं कार्रवाई नहीं हुई। कार्यपालिका का मानना है कि इस तरह के आदेश तो आते ही रहते हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में मुहल्ला कुंवर बाल गोविंद में एक कुत्ते ने दो−तीन दिन में रोज एक दर्जन के आसपास व्यक्तियों को काटा। एक बच्चे का तो कान ही बुरी तरह से फाड़ दिया। इसकी शिकयत नगरपालिका में की गई तो उत्तर मिला कि ये हमारा काम नहीं। हम तो मरे कुत्ते को उठवाकर फेंक सकते हैं। मजबूरन दूसरे मुहल्ले के लोगों ने इस कुत्ते को घेर कर मार दिया। शहर की घटनाएं तो रिकॉर्ड हो जाती हैं किंतु गांव की घटनाएं रिकॉर्ड तक नहीं आ पातीं। जबकि वहां हडवार (मृतक पशुओं की खाल निकालने के स्थान) पर रहने वाले कुत्ते बहुत खतरनाक होते हैं। वह कई बार अकेले व्यक्ति को देख कर हमला कर देते हैं।

लेखक को तीन बार छह-छह माह के लिए अमेरिका में रहने का अवसर मिला। वहां स्ट्रीट डॉग और स्ट्रीट एनीमल नहीं है। वहां के लोगों ने स्ट्रीट एनिमल को पूरी तरह खत्म कर दिया। कुत्ता−बिल्ली आदि के पालने के लिए वहाँ स्वामी को टैक्स देना पड़ता है। टैम्पा में यह टैक्स प्रति माह 50 डॉलर है। पशु पालक यह टैक्स अपनी सोसाइटी को चुकाता है। इसके बावजूद घर से निकलते समय कुत्ता/बिल्ली स्वामी एक हाथ में अपने पशु का पट्टा पकड़े होता है। दूसरे हाथ के पंजे पर पॉलिथीन को उल्टी करके चढ़ाए हुए होता है। पशु के गंदगी करने के बाद पशु स्वामी उस गंदगी को उठाकर पॉलिथीन में रख लेता है। पॉलिथीन का मुंह बंद करके डस्टबिन में डाल दिया जाता है। कुछ सोसाइटी में जगह−जगह बॉक्स भी लगे हैं। इसके ऊपर के भाग में रोल की पोलिथिन की खाली थैली होती है। पशु पालक यहां से पॉलीथिन लेकर उल्टी कर अपने हाथ पर चढ़ा लेता है। इस पोलीथिन बॉक्स के नीचे पशु की गंदगी की भरी पॉलीथिन डालने की भी व्यवस्था है। टैम्पा की हमारी सोसाइटी में कुत्तों को घुमाने का पार्क भी था। इस पार्क के चारों और लोहे की जाली लगी है। कुत्ता स्वामी कुत्ते को पार्क में लेकर गेट बंद कर देता है। उसके बाद पशु का पट्टा खोलकर उसे घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है।

हालांकि हाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्ती करने के कारण पालिकाओं की सफाई व्यवस्था सुधरी है। आवारा सुअर घूमते दिखाई देने बंद हो गए हैं, किंतु कुत्ता स्वामी घर से निकलते ही कुत्ते का पट्टा खेल देते हैं। उसे आजाद कर दिया जाता है कि कहीं भी गंदगी करे। सार्वजनिक पार्क में भी ऐसी ही हालत है। किंतु कुत्ता−बिल्ली पालकों में पड़ी गलत आदत का सुधारने में समय लगेगा। ये उत्तर प्रदेश की नहीं पूरे देश की समस्या है। इसके लिए सख्ती करनी होगी। शहरों की बड़ी समस्या आवारा कुत्ते भी हैं। उनको भी शहरों से बाहर का रास्ता दिखाना होगा या स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी देनी होगी कि वह आवारा पशुओं पर नियंत्रण करे। उनको समय से वैक्सीन लगवाए। सरकारी अस्पताल और सोसायटी में आवारा पशुओं और कुत्तों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी तो अस्पताल और सोसायटी प्रबंधन को उठानी होगी।

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