महानायक वीर महाराणा प्रताप

maharana pratap9 मई पर विशेष-

मृत्‍युंजय दीक्षित

भारत माता की एक कोख मेें से एक से बढ़कर एक महान सपूत पैदा हुये हैं जिन्होनें भारतमाता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व सुखों का त्याग कर अपनीे मातृभूमि की पूरंे मनोयोग के साथ सुरक्षा की। ऐसे ही महान सपूतों की श्रेणी में नाम आता है महाराणा प्रताप का। भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम साहस ष्षौर्य त्याग एवं बलिदान के लिए प्रेरणा देने वाला रहा है। मेवात के सीसौदिया वंष में बप्पा रावल राणा हमीर राणा सांगा ऐसे एक से बढ़कर एक महान प्रतापी ष्षूरवीर राजा हो गये। वे सभी राणा के नाम से जाने जाते थे। परन्तु महाराणा यह गौरवयुक्त संबोधन केवल प्रताप सिंह को ही मिला। जिससे उनका पूरा नाम महाराणा प्रताप हो गया।

म्ुागल सम्राट अकबर के द्वारा दिये गये झूठे आष्वासन आमिष उच्चस्थान पदाधिकार आदि प्रलोभनों के वषीभूत होकर कई राजपूत राजाओं ने उनका प्रभुत्व मान लिया था। परन्तु सुखी जीवन की लालसा से साहसी वीर राजपूत अपना गौरव खो चुके थे। ऐसा प्रतीत होता था कि मानो राजस्थान ही क्या सारा भारत अपना आत्मगौरव खो चुका है। ऐसे कठिन समय में मेवाड़ के महाराणा प्रताप का मातृभूमि की रक्षा के लिए राजनैतिक क्षेत्र में प्रवेष हुआ।

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था। महाराणा प्रताप की मां का नाम जैयन्ती बाई था। महाराणा प्रताप के पिता का नाम उदय सिंह थ। यह अपने पिता की सबसे बड़ी संतान थे। वह बहुत ही स्वाभिमानी तथा सदगुणी थे। महाराणा प्रताप का बचपन से ही यु़द्ध कला सीखने का मन होता था। उनका अध्ययन में कभी मन नहीं लगा। उनका अधिकतर समय अपने भाई शक्तिसिंह के साथ जंगलों में शिकार करने में ही बीतता था। जिस समय उनका राज्याभिषेक होना था उस समय भारत में मुगल सम्राट अकबर का बहुत ही मजबूत व षक्तिषाली षासन था। वह बहुत ही चतुर तथा कूटनीतिज्ञ था। वह हिन्दुओं के ही बल से हिन्दुओं को गुलाम बनाता था। तत्कालीन हिंदू राजाओं की मूर्खता का अकबर ने भरपूर लाभ उठाया। हिन्दू स्वाभिमान को कुचलने के लिए अकबर ने सभी प्रकार के उपाय किये थे। इस प्रकार वह लगभग सभी राजपूज राजाओं को अपने अधीन करने में सफल रहा । कई राजपूत राजाओं ने तो अपने मान सम्मान को ताक पर रखकर अपनी बेटियों व बहुओं को भी अकबर के दरबार में पहुॅचा दिया। यह भारतीय इतिहास का सबसे काला अध्याया माना गया है। हिन्दुओं पर असहनीय अत्याचार भी खूब हुये। लेकिन इतने विपरीत समय में भी मेवाड़, बूंदी तथा सिरोही वंष के राजा अंत तक अकबर से संघर्ष करते रहे। मेवाड़ के राणा उदयसिंह का स्वतंत्र रहना अकबर के लिए असहनीय था। चूंकि मेवाड़ के राजा उदय सिंह विलासी प्रवृत्ति का राजा था इसलिए अकबर ने मेवाड़ विजय के लिए भारी भरकम सेना से मेवाड़ पर हमला बोल दिया। विलासी उदय सिंह का मनोबल बहुत ही गिरा हुआ था इसलिए वह मैदान छोड़कर भाग गया और अरावली की पहाडि़यों पर छुप गया। वहीं पर उसने उदयपुर नामक नगर बसाया और राजधानी भी। इस बीच उदय सिहं ने अपनी मृत्यु के पूर्व अपनी कनिष्ठ पत्नी के पुत्र जगमल्ल को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। लेकिन वहां के अन्य सरदारों ने जगमल्ल के खिलाफ विद्रेाह कर दिया। अतः इन सरदारों ने बगावत का झंडा बुलंद करके महाराणा प्रताप को अपना राजा घोषित कर दिया।

जिस समय महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक हुआ उस समय देष के हालात बहुत ही विकट थे। महाराणा प्रताप को राजा बनाने के कारण उनके भाई षक्ति सिंह और जगमल्ल मुगलों से जाकर मिल गये। षत्रुओं का मुकाबला करने के लिए मजबूत सैन्य षक्ति की महती आवष्यकता थी। राणा प्रताप सदेव इसी चिंता में लगे रहते थे कि अपनी मातृभूमि को मुगलों से किस प्रकार मुक्त कराया जाये। परम पवित्र चितौड़ का नाष उनके लिए बेहद असहनीय था। इसी कारणवष उन्होनें एक दिन दरबार लगाकर अपनी ओजस्वी वाणी में सरदारों को स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए सम्बोधित किया और सरदारों मेें नया जोष भरने का काम किया तथा प्रेरणा प्रदान की।

महाराणा प्रताप ने अकबर के साथ युद्ध करने के लिए नई योजनायें बनायीं। उन्होनें संकरी घाटियों में अकबर की सेना से लोहा लेने का निर्णय लिया। महाराणा प्रताप बहुत ही स्वाभिमानी प्रवृत्ति के नायक थे। एकबार उनके दरबार में षीतल नामक भाट उनके दरबार आ पहुचा और उसने महाराणा प्रताप पर कविता सुनायीं। अप्रतिम वीरता कासंदेष देने वाली कविता सुनकर महाराणा ने अपनी पगड़ी उतारकर भाट को दे दी। जिसे पाकर वह बेहद प्रसन्न हुआ और महाराणा की प्रषंसा करके वापस चला गया। महाराणा प्रताप अपनी सत्ता व राज्य के स्वतंत्रता के लिए सतत संघर्षषील रहे। महाराणा प्रताप को अपने अधीन करने के लिए अकबर ने चार बार दूत भेजे लेकिव वह सभी प्रयास विफल रहेे। अकबर ने महाराणा प्रताप को मनाने के लिए जिन चार षांति दूतों को भेजा उनमें जलाल खान, मान सिंह , भगवानदास और टोडरमल के नाम इतिहास में मिलते हैं।

राणा प्रताप को अपने वस में करने के लिए अकबर के सभी प्रयास विफल रहे। जिसके कारण हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया। अकबर बहुत ही धूत था इसलिए उसने अपनी दो लाख सेना का नेतृत्व युवराज सलीम व मानसिंह को सौंपा। यह युद्ध बहुूत ही विकट हुआ था।महाराणा प्रताप ने पूरी सजगता और अप्रतिम वीरता के साथ युद्ध लड़ा। यह बहु ही भयान यु़द्ध हुआ था। लेकिन यह निर्णायक नहीं था।इस युद्ध उनका प्रिय चेतक षहीद हो गया। महाराणा प्रताप की लड़ाई अंत तक चलती रही। इस संघर्ष में दानवीर भामाशाह ने अपनी संपत्ति दान करके अतुलनीय योगदान दिया। अपने अंतिम दिनों में महाराणा प्रताप ने आर्थिक सहायता के बल पर अपनी खोई हुई सैन्य ताकत को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया। इस समय प्रताप के ष्षत्रु समढ रहे थे कि वह अपना प्रदेष छोड़कर भाग गये हैं तथा अपने अंतिम दिन कंदराओं में बितायेंगे। लेकिन ऐसा नहीं था। मुगल सेनापति ष्षहाबाज खान हलबीर नामक एक स्थान पर अपना डेरा डाल रखा था। महाराणा प्रताप ने अचानक उस पर धावा बोल दिया। अचानक हमले ये सभी मुगल सैनिक भाग खड़े हुये। इसी प्रकार उन्होनें कई अन्य किले भी अपने अधीन कर लिये। बाद में उदयपुर भी राणाप्रताप के कब्जे में आ गया। इस प्रकार महाराणा प्रताप एक के बाद एक किले जीतते चले गये। यह सारी विजय उन्होनें अपने बलबूते ही प्राप्त की। महाराणा प्रताप की वीरता की बातें सुनकर अकबर षांत रह गया और अब उसने अपना सारा ध्यान दक्षिण की ओर लगा दिया। इस बीच संकटों से लोहा लेने के कारण उनका षरीर लगातार कमजोर होता जा रहा था।19 जनवरी 1597 के दिन अंतिम सांस ली।

भारतीय अतीत के पुराण पुरूष महाराण प्रताप सिंह स्वाधीनता की रक्षा करने वाले मेवाड़ के स्वनामधन्य वीरों की मणिमाला में सुर्कीतिमान हैं। आज महाराणा का नाम इतिहास मेें अमर हैं।

Comment:

betnano giriş
betparibu giriş
efesbet giriş
efesbetcasino giriş
efesbetcasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
romabet giriş
sekabet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
romabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
batumslot giriş
vaycasino giriş
betplay giriş
efesbet giriş
efesbetcasino giriş
efesbet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
yakabet giriş
norabahis giriş
yakabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
tlcasino
fiksturbet giriş
noktabet
noktabetgiriş
noktabet
noktabetgiriş
noktabet
noktabetgiriş
noktabet
noktabetgiriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
Restbet giriş
Restbet güncel
vaycasino giriş
vaycasino giriş
meybet giriş
meybet giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
casival
casival
betnano giriş
betnano giriş
betplay giriş
betplay giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
betplay giriş
betplay giriş
betnano giriş
timebet giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
nesinecasino giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
efesbet giriş
efesbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş