पिछले जन्मों के भिखारी ही हैं आज के ये रिश्वतखोर

पूर्वजन्म के संस्कारों का इंसान पर खूब प्रभाव रहता ही है। चित्त के संस्कारों में से काफी कुछ संस्कार अपने पिछले जन्मों से जुड़े हुए होते हैं और इनका प्रभाव अपने वर्तमान जन्म पर भी पड़ता है। कुछ लोगों का स्वभाव, व्यवहार और सोच आदि पूर्वजन्मों से न्यूनाधिक रूप से मेल खाती है चाहे वे पहले के जन्मों में मनुष्य रहे हों अथवा कोई न कोई पशु।

हममें से खूब सारे लोग ऎसे हैं जिनके मन-वचन और कर्म पर पूर्वजन्मों का न्यूनाधिक असर बरकरार है ही। हम अपने इस पूर्वजन्मी गुणावगुणों का मूल्यांकन खुद कभी नहीं कर पाते। आत्ममूल्यांकन के लिए नीर-क्षीर विवेक, जीवन व्यवहार में पारदर्शिता, निरपेक्ष दृष्टि और सात्ति्वक भावनाओं के साथ चरम स्तर की शुचिता होती है तभी इंसान सत्य को स्वीकार करने का साहस कर पाता है अन्यथा कोई भी सामान्य इंसान जीवन में किसी भी क्षण कटु सत्य को न सुनना चाहता है, न कड़वे सच को सुनकर अपने में बदलाव लाना। कुछेक को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश लोग अपने बारे में अच्छा और मीठा ही मीठा सुनना चाहते हैं भले ही वह झूठा, भ्रामक और बिना बुनियाद का ही क्यों न हो।

इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी ही है यही है तभी वह सज्जनों, सत्यभाषियों और स्वस्थ मूल्यांकन करने की दिशा-दृष्टि रखने वाले लोगों से सायास दूर भागता है और जो लोग उसका मिथ्या व निराधार जयगान करते हैं, उनके बारे में बढ़ा-चढ़ा कर महिमा मण्डन में रमे रहते हैं और जी हुजूरी करते हुए चरणस्पर्शी परंपरा को धन्य करते हैं, जो उनके सामने अपनी सारी लाज-शरम भुलाकर सब कुछ समर्पित कर पसर जाने को सदैव उद्यत रहते हैं, अपने माता-पिता, गुरु, वंश परंपराओं, मानवी मर्यादाओं और मनुष्य होने का स्वाभिमान भुलाकर चरणों में सर झुकाते रहने के आदी होते हैं, उन चापलुस और खुदगर्ज लोगों को वह अपने जीवन का निर्णायक और सच्चा साथी मानता रहता है, जो कि उसके अहंकार को सदैव पल्लवित-पुष्पित और संरक्षित करते रहकर आसमान की ऊँचाइयों को छू लेने का भ्रम बनाए रखते हैं।

जो जितना अधिक स्वच्छ, स्वस्थ और पारदर्शी होगा वह सामने वाले के मन-मस्तिष्क और विचारों की थाह पा लेने में समर्थ होगा। पूर्वजन्म में कौन क्या था? इस बारे में थोड़ा सा गहन चिंतन कर लिया जाए तो यह कोई मुश्किल काम नहीं है।रिश्वतखोर

अपने देश में सर्वाधिक सहज, सरल और सर्वसुलभ कोई धंधा है तो वह है भीख मांगना। धर्म, इंसानों और बाबाओं से लेकर शनिदेव तक के नाम पर भीख मांगने से लेकर हमारे यहाँ बिना मेहनत के कुछ भी मांगने को हम पूर्ण स्वतंत्र हैं। देश में हर साल लाखों भिखारी पैदा होते हैं और उतने ही अनुपात में हर साल इनकी मौत होना भी स्वाभाविक ही है।

हर इंसान कमाने के लिए ही पढ़ता-लिखता और उद्यम करता है और यही उसकी जीवन भर की आजीविका के लिए आधार बनता है लेकिन जब बिना कुछ किए भीख के नाम पर यह सब मिल जाए, तो कौन ऎसा होगा जो मेहनत करने में समय गँवाएगा। यही कारण है कि भिक्षावृत्ति सार्वजनीन और सार्वभौमिक हो गई है। और कोई कहीं मिले न मिले, भिखारी हर कहीं मिल ही जाएंगे।

भिखारियों की भी गई किस्में हैं। इन लोगों के लिए भिक्षावृत्ति किसी अभिनय से कम नहीं है। ये किसी भी तरह से कोई सा स्वाँग रचकर भिक्षावृत्ति करने के लिए स्वतंत्र हैं। भीख माँगने में न स्वाभिमान की जरूरत होती है, न हुनर की,  अपने आपको दीन-हीन बताकर कोई भी दूसरों के भीतर पुण्य और करुणा जगा सकता है।

भारतीय संस्कृति के पुनर्जन्म सिद्धान्त में विश्वास रखने वालों के लिए भिखारियों का मनोविज्ञान और पुनर्जन्म अपने आप में कई सारी संभावनाओं को दर्शाने वाला है। भिखारियों की अब दो किस्में हो गई हैं। एक वे हैं जो वर्तमान जन्म के भिखारी हैं, दूसरे वे हैं जो पूर्व जन्मों के भिखारी हैं। फुटबाल और वालीबाल के मैचों की ही तरह वर्तमान भिखारी भीख के डायरेक्ट मैच में यकीन रखते हैं, और पूर्वजन्मों के भिखारी इन-डायरेक्ट मैच में माहिर हैं।

आजकल इन-डायरेक्ट गेम में यकीन करने वाले भिखारियों का बोलबाला ज्यादा ही है। इन्हें ढूँढ़ने कहीं दूर नहीं जाना पड़ता बल्कि अपने आस-पास से लेकर हर कहीं ये अपनी पूर्ण तरुणाई के साथ विद्यमान हैं। तमाम प्रकार के बाड़ों, गलियारों से लेकर सर्कलों, चौराहों और राजमार्गों तक इनका वजूद सर चढ़ कर बोलता दिखता ही है।

सीधी और सपाट भाषा में कहा जाए तो आजकल के जो लोग रिश्वतखोर हैं उनके कर्म, व्यवहार और चरित्र को गंभीरता से देखें तो साफ-साफ पता चल जाएगा कि ये सारे के सारे पूर्व जन्मों में उच्चतम श्रेणी के लोकमान्य भिखारी ही रहे हैं और उनका पहले के जन्मों का यह नालायकी स्वभाव आज तक कायम है। बिना मेहनत किए सब कुछ हासिल करने की इनकी आदत इस जन्म में भी इतनी बिगड़ी हुई है कि कुछ कहा नहीं जा सकता। फिर इन भिखारियों का पूर्वजन्मों में दो-चार मर्तबा हिंसक पशु योनि में जन्म हो चुका हो तो इनमें भीख और पशुता इतनी हावी हो जाती है कि ऎसे लोगों के छीनाझपटी भरे अभद्र व्यवहार,  एकतरफा लूट-खसोट तथा भीख ही भीख माँगते रहने की प्रवृत्ति के मारे जीवन और जगत सभी त्रस्त हो उठते हैें।

अपने आस-पास भी ऎसे खूब सारे भिखारियों का जमावड़ा है। कोई छोटा है, कोई बड़ा, कोई हाईलेवल का भिखारी है, कोई सिम्पल भिखारी। किसी को इतनी भीख चाहिए कि पाताल कूओं की तरह कितनी ही रिश्वत खाते जाएं, फिर भी पेट कभी भरने का नाम न ले।

यकीन न हो तो इन रिश्वतखोरों और भिखारियों का तुलनात्मक अध्ययन कर लें, मेलापक में नब्बे फीसदी से अधिक ‘गुण’ मिल ही जाएंगे। इस अध्ययन के बाद हम यह भी निर्णय निकाल सकते हैं कि इनसे तो वे भिखारी कई गुना अच्छे ही हैं जो भीख मांगते हैं और साफ-साफ भिखारियों की तरह दिखते भी हैं, अपने आपको भिखारी साबित करने की हरचंद कोशिश भी करते हैं और जैसे हैं वैसे ही बने रहते हैं, इनमें न कोई आडम्बर है, न कोई दूराव-छिपाव। पूर्ण सत्य और यथार्थ का प्रकटीकरण करते हैं ये भिखारी।

जबकि रिश्वतखोर भिखारियों के चेहरे-मोहरे, काम-धाम और व्यवहार सब कुछ में लगता है कि जाने कैसा दोहरा-तिहरा चरित्र, असत्य, झूठ-फरेब और पाखण्ड है। ये लोग दिखते कैसे हैं और वास्तव में होते कैसे हैं? शहंशाहों का अभिनय करने वाले ये लोग इतने बड़े भिखारी हो भी सकते हैं, यह आसानी से कोई जान नहीं सकता।

अपने आस-पास के उन सभी लोगों के व्यक्तित्व, व्यवहार और कर्मयोग को देखें जो रिश्वत लिए बिना रह नहीं सकते, रिश्वत न मिले तो अधमरे और मरे जैसे हो जाते हैं। इन लोगों की भिखारियों से तुलना करें, अपने आप यह पता चल जाएगा कि पूर्वजन्मों में ये क्या थे और इसका कितना असर वर्तमान जन्म में भी बरकरार है।

जब भी ऎसे लोगों को भीख दें, अपने सामने दीन-हीन और मलीन भिखारी का चेहरा रखें और उनके पूर्वजन्मों की कल्पित छवि का मानसिक स्मरण करना न भूलें। ये सारे भिखारी हमारे लिए आदरणीय हैं क्योंकि इनका जन्म हमें पुण्य प्रदान करने के लिए ही हुआ है।

इसके साथ ही यह भी सत्य ही है कि आज जो लोग रिश्वत खाने और घर भरने में आनंद पा रहे हैं उन्हें हमारी अगली पीढ़ियाँ जरूर कहीं न कहीं भीख मांगते हुए प्रत्यक्ष भिखारियों के रूप में देखेंगी और यह आकलन करेंगी कि यही वे लोग हैं जो बीते जन्म में रिश्वतखोर रहे हैं। यह रिश्वत किसी भी रूप में हो सकती है। सभी प्रकार के भिखारियों की समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। भगवान से निवेदन करें कि हर जन्म में इनके लिए पर्याप्त भीख का इंतजाम बनाए रखे और इन लोगों को कुपोषण से बचाए।

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