शनि अमावस्या 22  नवम्बर, 2014  को मनाई जाएगी

पं0 दयानंद शास्‍त्री

सभी जानते हैं की मार्गशीर्ष अमावस्या का एक अन्य नाम अगहन अमावस्या भी है. इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है. जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी पूजन कर दिपावली बनाई जाती है. इस दिन भी श्री लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है. इसके अतिरिक्त अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान- दान आदि कार्य भी किये जाते है. अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रुप से किये जाते है. तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन होता है.

इस वर्ष यह अमावस्या शनिवार (22  नवम्बर,2014  )के दिन होने से इसका महत्त्व और भी बढ़ गया हैं..

 धर्म ग्रंथों के अनुसार सूर्य की द्वितीय पत्नी छाया के गर्भ से शनिदेव का जन्म हुआ। शनि के श्याम वर्ण को देखकर सूर्य ने अपनी पत्नी छाया पर आरोप लगाया कि शनि मेरा पुत्र नहीं है, तभी से शनि अपने पिता से शत्रुभाव रखते हैं। शनिदेव ने अपनी साधना-तपस्या द्वारा शिवजी को प्रसन्न कर अपने पिता सूर्यदेव की भाँति शक्ति को प्राप्त किया और शिवजी ने शनि को वरदान माँगने के लिए कहा। तब शनिदेव ने प्रार्थना की कि युगों-युगों से मेरी माता छाया की पराजय होती रही है। मेरे पिता सूर्य द्वारा बहुत ज्यादा अपमानित व प्रताडि़त किया गया है। अतः माता की इच्छा है कि मेरा पुत्र शनि अपने पिता से मेरे अपमान का बदला ले और उनसे भी ज्यादा शक्तिशाली बने। तब भगवान शंकर ने वरदान देते हुए कहा कि नवग्रहों में तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ स्थान रहेगा। मानव तो क्या देवता भी तुम्हारे नाम से भयभीत रहेंगे। आज के इस भौतिक युग में हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से व्यथित रहता है। इसका मुख्य कारण ग्रह दोष होता है। ग्रह प्रतिकूल होने के कारण ऐसी परेशानियाँ आती हैं।

शनि अमावस्या के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंती हैं. श्री शनिदेव भाग्यविधाता हैं, यदि निश्छल भाव से शनिदेव का नाम लिया जाये तो व्यक्ति के सभी कष्टï दूर हो जाते हैं. श्री शनिदेव तो इस चराचर जगत में कर्मफल दाता हैं जो व्यक्ति के कर्म के आधार पर उसके भाग्य का फैसला करते हैं. इस दिन शनिदेव का पूजन सफलता प्राप्त करने एवं दुष्परिणामों से छुटकारा पाने हेतु बहुत उत्तम होता है. इस दिन शनि देव का पूजन सभी मनोकामनाएं पूरी करता है.

शनिचरी अमावस्या का दिन काफी शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए उपाय से कुंडली के दोष शांत होते हैं और परेशानियां समाप्त होती है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद शनि की वस्तुओं का दान करना चाहिए।ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ फल देने वाला हो या जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो उन सभी के लिए यह योग खास फल देने वाला है। अत: इस दिन शनि दोष को दूर करने के लिए ज्योतिषीय उपाय अवश्य करने चाहिए।

शनि मंदिरों पर शनिश्चरी अमावस्या के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ेगा। जहां आने वाले भक्त शनि के प्रकोप से बचने के लिए उनकी आराधना करते नजर आऐंगे। शनिचरी अमावस्या के चलते लोगों में यह ज्यादा महत्व रखता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाऐं पूर्ण होती है। इस के लिए भक्तों में उत्साह भी नजर आ रहा है।शनिचरी अमावस्या के दिन शनि मंदिरों पर भक्तों का तांता लगता है। जहां शनिचरी अमावस्या को शनि आराधना करने से कष्ट से मुक्ति मिलती है।

 शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव का विधिवत पूजन कर सभी लोग पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं. शनि देव क्रूर नहीं अपितु कल्याणकारी हैं. इस दिन विशेष अनुष्ठान द्वारा पितृदोष और कालसर्प दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है. इसके अलावा शनि का पूजन और तैलाभिषेक कर शनि की साढेसाती, ढैय्या और महादशा जनित संकट और आपदाओं से भी मुक्ति पाई जा सकती है…

इन प्रयोगों / उपायों से होगा लाभ—-

शनि की पूर्ण दृष्टि धनु एवं कर्क राशि पर पड़ने से अशांति, बीमारी, मानसिक तनाव एवं सामाजिक परेशानियां से इस राशि वाले भी प्रभावित हो रहे हैं। शनिवार को आने वाली शनिश्चरी अमावस्या के दिन शनि दोष से प्रभावित व्यक्ति , काल सर्प दोष, पित्र  दोष, ग्रहण दोष एवं चाण्डाल दोष  से प्रभावित लोग इस अमावस्या पर पूजन एवं दान कर परेशानियों से राहत प्राप्त कर सकते हैं।

—–भगवान सूर्यदेव के पुत्र शनिदेव को खुश करने के लिए शनिचरी अमावस्या पर तिल, जौ और तेल का दान करना चाहिए, ऐसा करने पर मनोवांछित फल मिलता है।

——-जिन राशियों के लिए शनि अशुभ है, वे खासकर इस अद्भुत योग पर शनि की पूजा करें तो उन्हें शनि की कृपा प्राप्त होगी और अशुभ योगों को टाला जा सकता है।

— शनि को तेल से अभिषेक करना चाहिए, सुगंधित इत्र, इमरती का भोग, नीला फूल चढ़ाने के साथ मंत्र के जाप से शनि की पी़ड़ा से मुक्ति मिल सकती है।

—-इस दिन शनि मं-दिर में जाकर शनि देव के श्री विग्रह पर काला तिल, काला उड़द, लोहा, काला कपड़ा, नीला कपड़ा, गुड़, नीला फूल, अकवन के फूल-पत्ते अर्पण करें.

—अमावस्या के दिन काले रंग का कुत्ता घर लें आएं और उसे घर के सदस्य की तरह पालें और उसकी सेवा करें. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो किसी कुत्ते को तेल चुपड़ी हुई रोटी खिलाएं. कुत्ता शनिदेव का वाहन है और जो लोग कुत्ते को खाना खिलाते हैं उनसे शनि अति प्रसन्न होते हैं.

—-अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम और 8 काजल की डिब्बी काले वस्त्र में बांधकर संदूक में रखें.

—–शनि अमावस्या के दिन शनि ग्रह शांति के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले अपने इष्टदेव, गुरु और माता-पिता का आशीर्वाद लें. सूर्य आदि नवग्रहों को नमस्कार करते हुए श्रीगणेश भगवान का पंचोपचार (स्नान, वस्त्र, चंदन, फूल, धूप-दीप) पूजन करें.

इस वर्ष 22 नवम्बर 2014 को शनिवार के दिन शनि अमावस्या मनाई जाएगी..

शनिचरी अमावस्या को की जाने वाली पूजा अर्चना से विशेष पुण्यदायी फल भी मिलता है जिसका परिणाम बहुत लाभकारी होता हैं..शनिदेव की पूजा करने का सबसे बड़ा अवसर शनिचरी अमावस्या होता है इसलिए ऐसे अवसर का लाभ उठाकर ईश्वरीय आराधना अवश्य करें।

शनि अमावस्या पितृदोष से मुक्ति दिलाए—–

शनि अमावस्या, पितृकार्येषु अमावस्या के रुप में भी जानी जाती है. कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता है जब शनिवार के दिन अमावस्या का समय हो जिस कारण इसे शनि अमावस्या कहा जाता है.

शनि अमावस्या के अवसर पर  अनेक श्रद्धालु नदियों एवं सरोवर में श्रद्धा की डुबकी लगते । अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंड दान भी करते हैं । पंडित ने बताया कि है आज के दिन ही सावित्री ने शनिदेव से अपने पति की प्राण वापस लिए थे और शनिचरी अमावस्या के दिन दान औऱ तृपण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।सनातन संस्कृति के अनुसार वंशजों का यह कर्तव्य है कि वे अपने माता-पिता और पूर्वजों के निमित्त कुछ ऐसे शास्त्रोक्त कर्म करें जिससे उन मृत आत्माओं को परलोक में अथवा अन्य योनियों में भी सुख की प्राप्ति हो सके।

शास्त्रोक्त विधि से किया हुआ श्राद्ध सदैव कल्याणकारी होता है परन्तु जो लोग शास्त्रोक्त समस्त श्राद्धों को न कर सकें, उन्हें कम से कम आश्विन मास में पितृगण की मरण तिथि के दिन श्राद्ध अवश्य ही करना चाहिए।

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