एसडीएम दादरी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध लामबंद हुए वकील : कहा – तहसील को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने में एसडीएम आलोक कुमार गुप्ता का विशेष योगदान

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दादरी। (अजय आर्य / संजय कुमार ) कहने के लिए तो योगी सरकार इस समय भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करती हुई दिखाई दे रही है , परंतु बहुत ही आश्चर्य का विषय है कि एसडीएम दादरी श्री आलोक कुमार गुप्ता योगी सरकार की नजरों में धूल झोंक कर इस समय भी अपने आप को बचाए हुए हैं। इस समय तहसील दादरी में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। कोई भी अधिकारी और कर्मचारी बिना पैसे लिए कुछ भी काम नहीं कर रहा है। दादरी तहसील इस समय बिल्कुल सूनी पड़ी रहती है। चुनाव की बहानेबाजी करके एसडीएम सहित सभी कर्मचारी और अधिकारी तहसील से गायब रहते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि एसडीएम दादरी मुखिया के नाते स्वयं भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं और लोगों से अवैध वसूली के लिए अपनी प्राइवेट गाड़ी का प्रयोग करके इधर उधर जाकर मिलते हैं और वहां से पैसे की वसूली सुनिश्चित करते हैं।
  इस संबंध में अब एसडीएम दादरी के विरुद्ध दादरी के वकीलों ने कमर कस ली है। आज अधिवक्ताओं के अध्यक्ष राजपाल सिंह नागर की अध्यक्षता में एक आम बैठक हुई ।जिसमें निर्णय लिया गया कि उपरोक्त अधिकारी के भ्रष्टाचार पूर्ण आचरण और कार्यशैली के विरुद्ध अब निर्णायक लड़ाई लड़ाई लड़ी जाएगी।
  इस संबंध में जानकारी देते हुए अध्यक्ष श्री नागर ने बताया कि एसडीएम दादरी की शिकायतें लंबे समय से भ्रष्टाचार की मिलती रही हैं। जिनको लेकर अधिवक्ताओं में पहले दिन से ही असंतोष रहा है, परंतु वह अपनी कार्यशैली को सुधारने और कर्मचारियों को ठीक करने का आश्वासन समय समय पर देते रहे। जिसके कारण उनके विरुद्ध अधिवक्ता हड़ताल पर जाकर भी समझौता वादी दृष्टिकोण अपनाकर चुप हो गए। परंतु अब पानी सिर से गुजर चुका है। उपरोक्त अधिकारी के विरुद्ध सभी अधिवक्ताओं ने एकमत होकर उनकी कार्यशैली की निंदा करते हुए उनके विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है।
  अधिवक्ताओं ने मीटिंग में खुलकर अपने विचार व्यक्त किए जिसमें आरोप लगाया गया कि एसडीएम दादरी श्री गुप्ता प्रातः काल जल्दी तहसील में आकर अपनी प्राइवेट गाड़ी से कंपनियों में अवैध वसूली के लिए निकल जाते हैं और अक्सर बिसाहडा रोड पर अपनी प्राइवेट गाड़ी से कंपनियों के लोगों से बातचीत करते देखे जाते हैं। जिससे पता चलता है कि वह अवैध तरीके से धन कमाने के लिए इस प्रकार के कार्यों को अंजाम देते हैं।
श्री गुप्ता किसी भी फाइल को बिना पैसे नहीं करते हैं ।उनकी कार्यशैली बड़ी अजीबोगरीब है। वह मुख्य दरवाजे से अपने ऑफिस में घुसते हैं और लोगों को मुख्य दरवाजे पर रोककर चोर दरवाजे से बाहर निकल जाते हैं । उसके बाद उनके कर्मचारी लोगों से यह झूठ बोलते रहते हैं कि साहब यहां नहीं हैं और ना आज आए । इस अधिकारी के चलते तहसील दिवस भी सूने पड़े रहे हैं। जिनमें एक भी अधिकारी तहसील दिवस में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बैठा हुआ दिखाई नहीं देता।
  जब तक किसी फाइल में कोई सी पार्टी मोटी रकम देने को तैयार न हो जाए, तब तक एसडीएम दादरी किसी काम को नहीं करते। बस, यही कारण है कि तहसील के मुखिया की इस कार्यशैली को देखकर प्रत्येक कर्मचारी यहां पर लूटने और किसानों की खाल उतारने के लिए काम करता हुआ दिखाई देता है  तहसील प्रांगण में ही एनटीपीसी से पीड़ित किसान पिछले लगभग एक महीने से हड़ताल पर बैठे हैं, परंतु एसडीएम दादरी उधर से आंखें मूंदकर अपनी अवैध वसूली के कार्यों में लगे हुए हैं । जिससे मालूम पड़ता है कि वास्तव में वे किसानों की समस्याओं के प्रति किसी भी प्रकार की संवेदना नहीं रखते।
इस संबंध में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री नागर ने बताया कि उनकी अध्यक्षता में आज अधिवक्ताओं की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एसडीएम दादरी की इस कार्यशैली को सुधारने के लिए अब निर्णायक लड़ाई लड़ने का समय आ गया है। बैठक में श्री नागर के अतिरिक्त पूर्व अध्यक्ष महिपाल सिंह भाटी, बृजपाल सिंह भाटी, ऋषिपाल भाटी , ऋषिराज नागर, राकेश कुमार आर्य, महेंद्र सिंह भाटी, अनिल भाटी, दयानंद नागर, मनिन्द्र मोहन शर्मा, रामकुमार खटाना,  वीपी शर्मा जयपाल सिंह नागर, देव शर्मा कौशिक सहित दर्जनों अधिवक्ता उपस्थित थे।
  एसडीएम दादरी के द्वारा किस प्रकार किन किन कामों में किसानों पर ज्यादतियां की जा रही हैं और सरकारी जमीनों पर भू माफियाओं से पैसे ले लेकर किस प्रकार कब्जा करवाया जा रहा है, उनके समय में किस प्रकार लेखपाल कानूनगो अपनी मनमानी करते हुए धारा 24 यूपीआरसी के मामलों में लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं या तहसीलदार व नायब तहसीलदार किस प्रकार धारा 34 की पत्रावलिओं में मामलों को लटका रहे हैं, साथ ही साथ किस प्रकार बहुत सुबह सुबह कर्मचारी आकर तहसील में किसानों को बुलाकर उनके जमीन के दाखिल खारिज के नाम पर पैसे की लूट मचा रहे हैं ?
    इस सब पर हम क्रमशः धारावाहिक रूप में आप तक इस सारे लूट के खेल को प्रस्तुत करेंगे। जिससे आपको पता चलेगा कि एक भ्रष्ट अधिकारी के चलते किस प्रकार पूरी मशीनरी ठप होकर रह जाती है ? दादरी तहसील का यह दुर्भाग्य है कि श्री गुप्ता जैसे भ्रष्ट अधिकारी के रहते सब कुछ अस्त-व्यस्त होकर रह गया है। वह मीठी मीठी बातों से लोगों और अधिवक्ताओं को बहलाने, भटकाने और अपने ऑफिस से बाहर निकल जाने के लिए बातें करते दिखते हैं। इस दौरान यदि कहीं से पैसे की बात बन जाए तो काम करते हुए भी दिखाई देते हैं । आप समझेंगे कि ऐसे अधिकारी के चलते योगी सरकार की नीतियां किस प्रकार बाधित होकर रह गई हैं ,?  एसडीएम दादरी अपने ऊपर डीएम का खुला वरदहस्त बताते हैं । संभवत: वहां से ही इस अधिकारी को लूट मचाने की प्रेरणा मिल रही है। इस संबंध में अध्यक्ष श्री नागर का कहना है कि बार एसोसिएशन की ओर से डीएम गौतम बुध नगर को भी ज्ञापन दिया गया है, परंतु इस अधिकारी के विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं हुई।
  
(शेष कल)

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