जब तैमूर को हराया था मेरठ के वीर योद्धा गुर्जरों व जाटों ने

images (10)

 

डॉ. विवेक आर्य

पिछले दिनों करीना कपूर ने जब अपने बेटे का नाम तैमूर रखा तो देश में एक चर्चा चल पडी कि एक विदेशी आक्रांता और निर्मम हत्यारे के नाम पर कोई अपने बेटे का नाम कैसे रख सकता है? इस क्रम में यह बात तो सबने कहा कि तैमूर ने लाखों लोगों जिनमें बडी संख्या में हिंदू शामिल थे, की हत्याएं की, परंतु किनी ने यह नहीं बताया कि तैमूर को भारत में पराजित भी किया गया था और उसकी मृत्यु का कारण भी भारत के हिंदू योद्धा ही थे।
तैमूर लंग ने मार्च सन् 1398 में भारत पर 92000 घुडसवारों की सेना से तूफानी आक्रमण कर दिया। तैमूर के सार्वजनिक कत्लेआम, लूट खसोट और सर्वनाशी अत्याचारों की सूचना मिलने पर संवत् 1455 (सन् 1398) कार्तिक बदी 5 को देवपाल राजा (जिसका जन्म निरपडा गांव जिला मेरठ में एक जाट घराने में हुआ था) की अध्यक्षता में हरयाणा सर्वखाप पंचायत का अधिवेशन मेरठ के गाँव टीकरी, निरपडा, दोगट और दाहा के मध्य जंगलों में हुआ।

सर्वसम्मति से निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किये गये – (1) सब गांवों को खाली कर दो। (2) बूढे पुरुष-स्त्रिायों तथा बालकों को सुरक्षित स्थान पर रखो। (3) प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति सर्वखाप पंचायत की सेना में भर्ती हो जाये। (4) युवतियाँ भी पुरुषों की भांति शस्त्रा उठायें। (5) दिल्ली से हरिद्वार की ओर बढती हुई तैमूर की सेना का छापामार युद्ध शैली से मुकाबला किया जाये तथा उनके पानी में विष मिला दो। (6) 500 घुडसवार युवक तैमूर की सेना की गतिविधियों को देखें और पता लगाकर पंचायती सेना को सूचना देते रहें।

पंचायती सेना
तैमूर लंग के खिलाफ पंचायती झण्डे के नीचे अस्सी हजार मल्ल योद्धा सैनिक और चालीस हजार युवा महिलायें शस्त्रा लेकर एकत्रा हो गये। इन वीरांगनाओं ने युद्ध के अतिरिक्त खाद्य सामग्री का प्रबन्ध भी सम्भाला। दिल्ली के सौ-सौ कोस चारों ओर के क्षेत्रा के वीर योद्धा देश रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने रणभूमि में आ गये। सारे क्षेत्रा में युवा तथा युवतियां सशस्त्रा हो गये। इस सेना को एकत्रा करने में धर्मपालदेव जाट योद्धा जिसकी आयु 95 वर्ष की थी, ने बडा सहयोग दिया था। उसने घोडे पर चढकर दिन रात दूर-दूर तक जाकर नर-नारियों को उत्साहित करके इस सेना को एकत्रा किया। उसने तथा उसके भाई करणपाल ने इस सेना के लिए अन्न, धन तथा वस्त्रा आदि का प्रबन्ध किया।

सेनापतियों की नियुक्ति
सर्वखाप पंचायत के इस अधिवेशन में सर्वसम्मति से वीर योद्धा जोगराजसिंह गुर्जर को प्रधान सेनापति बनाया गया। यह खूबड परमार वंश का योद्धा था जो हरिद्वार के पास एक गाँव कुंजा सुन्हटी का निवासी था। बाद में यह गाँव मुगलों ने उजाड दिया था। वीर जोगराजसिंह के वंशज उस गांव से भागकर लंढोरा (जिला सहारनपुर) में आकर आबाद हो गये जिन्होंने लंढोरा गुर्जर राज्य की स्थापना की। जोगराजसिंह बालब्रह्मचारी एवं विख्यात पहलवान था। उसका कद 7 फुट 9 इंच और वजन 8 मन था। उसकी दैनिक खुराक थी चार सेर अन्न, 5 सेर सब्जी-फल, एक सेर गऊ का घी और 20 सेर गऊ का दूध।
महिला वीरांगनाओं की सेना की चुनी गई सेनापतियों के नाम इस प्रकार हैं –
(1) रामप्यारी गुर्जर युवति (2) हरदेई जाट युवति (3) देवीकौर राजपूत युवति (4) चन्द्रो ब्राह्मण युवति (5) रामदेई त्यागी युवति। इन सब ने देशरक्षा के लिए शत्राु से लडकर प्राण देने की प्रतिज्ञा की।
चुने गए उप प्रधान सेनापति के नाम थे – (1) धूला भंगी (बालमीकी) (2) हरबीर गुलिया जाट चुने गये। धूला भंगी हिसार के हांसी गांव (हिसार के निकट) का निवासी था। यह महाबलवान, निर्भय योद्धा, गोरिल्ला (छापामार) युद्ध का महान विजयी जानकार था। उपप्रधान सेनापति चुने जाने पर इसने भाषण दिया कि – “मैंने अपनी सारी आयु में अनेक धाडे मारे हैं। आपके सम्मान देने से मेरा खूब उबल उठा है। मैं वीरों के सम्मुख प्रण करता हूं कि देश की रक्षा के लिए अपना खून बहा दूंगा तथा सर्वखाप के पवित्रा झण्डे को नीचे नहीं होने दूंगा। मैंने अनेक युद्धों में भाग लिया है तथा इस युद्ध में अपने प्राणों का बलिदान दे दूंगा।” यह कहकर अपनी जांघ से खून निकालकर प्रधान सेनापति के चरणों में उसने खून के छींटे दिये। उसने म्यान से बाहर अपनी तलवार निकालकर कहा “यह शत्राु का खून पीयेगी और म्यान में नहीं जायेगी।” इस वीर योद्धा धूला के भाषण से पंचायती सेना दल में जोश एवं साहस की लहर दौड गई और सबने जोर-जोर से मातृभूमि के नारे लगाये।
दूसरा उपप्रधान सेनापति हरबीरसिंह जाट था जिसका गोत्रा गुलिया था। यह हरियाणा के रोहतक गांव बादली का रहने वाला था। इसकी आयु 22 वर्ष की थी। यह निडर एवं शक्तिशाली वीर योद्धा था।
निर्वाचित सेनापतियों के नाम इस प्रकार थे – (1) गजेसिंह जाट गठवाला (2) तुहीराम राजपूत (3) मेदा रवा (4) सरजू ब्राह्मण (5) उमरा तगा (त्यागी) (6) दुर्जनपाल अहीर।
निम्न लोग उपसेनापति चुने गये थे –
(1) कुन्दन जाट (2) धारी गडरिया जो धाडी था (3) भौन्दू सैनी (4) हुल्ला नाई (5) भाना जुलाहा (हरिजन) (6) अमनसिंह पुंडीर राजपुत्रा (7) नत्थू पार्डर राजपुत्रा (8) दुल्ला (धाडी) जाट जो हिसार, दादरी से मुलतान तक धाडे मारता था। (9) मामचन्द गुर्जर (10) फलवा कहार। भिन्न-भिन्न जातियों के 20 सहायक सेनापति चुने गये।
प्रचण्ड विद्वान् चन्द्रदत्त भट्ट (भाट) को वीर कवि नियुक्त किया गया जिसने तैमूर के साथ युद्धों की घटनाओं का आंखों देखा इतिहास लिखा था। प्रधान सेनापति जोगराजसिंह गुर्जर के ओजस्वी भाषण के कुछ अंश –
“वीरो! भगवान कृष्ण ने गीता में अर्जुन को जो उपदेश दिया था उस पर अमल करो। हमारे लिए स्वर्ग (मोक्ष) का द्वार खुला है। ऋषि मुनि योग साधना से जो मोक्ष पद प्राप्त करते हैं, उसी पद को वीर योद्धा रणभूमि में बलिदान देकर प्राप्त कर लेता है। भारत माता की रक्षा हेतु तैयार हो जाओ। देश को बचाओ अथवा बलिदान हो जाओ, संसार तुम्हारा यशोगान करेगा। आपने मुझे नेता चुना है, प्राण रहते-रहते पग पीछे नहीं हटाऊंगा। पंचायत को प्रणाम करता हूँ तथा प्रतिज्ञा करता हूँ कि अन्तिम श्वास तक भारत भूमि की रक्षा करूंगा। हमारा देश तैमूर के आक्रमणों तथा अत्याचारों से तिलमिला उठा है। वीरो! उठो, अब देर मत करो। शत्राु सेना से युद्ध करके देश से बाहर निकाल दो।”
यह भाषण सुनकर वीरता की लहर दौड गई। अस्सी हजार वीरों तथा चालीस हजार वीरांगनाओं ने अपनी तलवारों को चूमकर प्रण किया कि हे सेनापति! हम प्राण रहते-रहते आपकी आज्ञाओं का पालन करके देश रक्षा हेतु बलिदान हो जायेंगे।

मेरठ युद्ध
तैमूर ने अपनी विषाल एवं शक्तिशाली सेना, जिसके पास आधुनिक शस्त्रा थे, के साथ दिल्ली से मेरठ की ओर कूच किया। इस क्षेत्रा में तैमूरी सेना को पंचायती सेना ने दम नहीं लेने दिया। दिन भर युद्ध होते रहते थे। रात्रि को जहां तैमूरी सेना ठहरती थी वहीं पर पंचायती सेना धावा बोलकर उनको उखाड देती थी। वीर देवियां अपने सैनिकों को खाद्य सामग्री एवं युद्ध सामग्री बडे उत्साह से स्थान-स्थान पर पहुंचाती थीं। शत्राु की रसद को ये वीरांगनाएं छापा मारकर लूटतीं थीं। आपसी मिलाप रखवाने तथा सूचना पहुंचाने के लिए पांच सौ घुडसवार अपने कर्त्तव्य का पालन करते थे। रसद न पहुंचने से तैमूरी सेना भूखी मरने लगी। उसके मार्ग में जो गांव आता उसी को नष्ट करती जाती थी। तंग आकर तैमूर हरिद्वार की ओर बढा।

हरिद्वार युद्ध
मेरठ से आगे मुजफ्फरनगर तथा सहारनपुर तक पंचायती सेनाओं ने तैमूरी सेना से भयंकर युद्ध किए तथा इस क्षेत्रा में तैमूरी सेना के पांव न जमने दिये। प्रधान एवं उपप्रधान और प्रत्येक सेनापति अपनी सेना का सुचारू रूप से संचालन करते रहे। हरिद्वार से पांच कोस दक्षिण में तुगलुकपुर पथरीगढ में तैमूरी सेना पहुंच गई। इस क्षेत्रा में पंचायती सेना ने तैमूरी सेना के साथ तीन घमासान युद्ध किए।
उप-प्रधान सेनापति हरबीर सिंह गुलिया ने अपने पंचायती सेना के पच्चीस हजार वीर योद्धा सैनिकों के साथ तैमूर के घुडसवारों के बडे दल पर भयंकर धावा बोल दिया जहां पर तीरों तथा भालों से घमासान युद्ध हुआ। इसी घुडसवार सेना में तैमूर भी था। हरबीरसिंह गुलिया ने आगे बढकर शेर की तरह दहाड कर तैमूर की छाती में भाला मारा जिससे वह घोडे से नीचे गिरने ही वाला था कि उसके एक सरदार खिजर ने उसे सम्भालकर घोडे से अलग कर लिया। (तैमूर भाले के इस घाव से ही अपने देश समरकन्द में पहुंचकर मर गया)। वीर योद्धा हरबीरसिंह गुलिया पर शत्राु के साठ भाले तथा तलवारें एकदम टूट पडीं जिनकी मार से यह योद्धा अचेत होकर भूमि पर गिर पडा।
(1) उसी समय प्रधान सेनापति जोगराजसिंह गुर्जर ने अपने बाईस हजार मल्ल योद्धाओं के साथ शत्राु की सेना पर धावा बोलकर उनके पांच हजार घुडसवारों को काट डाला। जोगराजसिंह ने स्वयं अपने हाथों से अचेत हरबीरसिंह को उठाकर यथास्थान पहुंचाया। परन्तु कुछ घण्टे बाद यह वीर योद्धा वीरगति को प्राप्त हो गया। जोगराजसिंह को इस योद्धा की वीरगति से बडा धक्का लगा।
(2) हरिद्वार के जंगलों में तैमूरी सेना के दो हजार आठ सौ पांच सैनिकों के रक्षादल पर भंगी कुल के उपप्रधान सेनापति धूला धाडी वीर योद्धा ने अपने एक सौ नब्बे सैनिकों के साथ धावा बोल दिया। शत्राु के काफी सैनिकों को मारकर ये सभी एक सौ नब्बे सैनिक एवं धूला धाडी अपने देश की रक्षा हेतु वीरगति को प्राप्त हो गये।
(3) तीसरे युद्ध में प्रधान सेनापति जोगराजसिंह ने अपने वीर योद्धाओं के साथ तैमूरी सेना पर भयंकर धावा करके उसे अम्बाला की ओर भागने पर मजबूर कर दिया। इस युद्ध में वीर योद्धा जोगराजसिंह को पैंतालीस घाव आये परन्तु वह वीर होश में रहा। पंचायती सेना के वीर सैनिकों ने तैमूर एवं उसके सैनिकों को हरिद्वार के पवित्रा गंगा घाट (हर की पौडी) तक नहीं जाने दिया। तैमूर हरिद्वार से पहाडी क्षेत्रा के रास्ते अम्बाला की ओर भागा। उस भागती हुई तैमूरी सेना का पंचायती वीर सैनिकों ने अम्बाला तक पीछा करके उसे अपने देश हरियाणा से बाहर खदेड दिया। वीर सेनापति दुर्जनपाल अहीर मेरठ युद्ध में अपने दो सौ वीर सैनिकों के साथ दिल्ली दरवाजे के निकट स्वर्ग लोक को प्राप्त हुये।
इन युद्धों में बीच-बीच में घायल होने एवं मरने वाले सेनापति बदलते रहे थे। कच्छवाहे गोत्रा के एक वीर राजपूत ने उपप्रधान सेनापति का पद सम्भाला था। तंवर गोत्रा के एक जाट योद्धा ने प्रधान सेनापति के पद को सम्भाला था। एक रवा तथा सैनी वीर ने सेनापति पद सम्भाले थे। इस युद्ध में केवल पांच सेनापति बचे थे तथा अन्य सब देशरक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त हुये। इन युद्धों में तैमूर के ढाई लाख सैनिकों में से हमारे वीर योद्धाओं ने एक लाख साठ हजार को मौत के घाट उतार दिया था और तैमूर की आशाओं पर पानी फेर दिया।
हमारी पंचायती सेना के पैंतीस हजार वीर एवं वीरांगनाएं देश के लिये वीरगति को प्राप्त हुए थे।
दलीप सिंह अहलावत लिखित जाट वीरों का इतिहास, के अनुसार वीर योद्धा और प्रधान सेनापति जोगराज सिंह गुर्जर युद्ध के पश्चात् ऋषिकेश के जंगल में स्वर्गवासी हुये थे।
ध्यान दीजिए। एक सवर्ण सेना का उपसेनापति वाल्मीकि था। अहीर, गुर्जर से लेकर सभी छत्तीस बिरादरियां उसके महत्वपूर्ण अंग थे। तैमूर को हराने वाली सेना को हराने वाली कौन थे? क्या वो जाट थे? क्या वो राजपूत थे? क्या वो अहीर थे? क्या वो गुर्जर थे? क्या वो बनिए थे? क्या वो भंगी या वाल्मीकि थे? क्या वो जातिवादी थे? नहीं वो सबसे पहले देशभक्त थे। धर्मरक्षक थे। श्री राम और श्री कृष्ण की संतान थे। गौ, वेद, जनेऊ और यज्ञ के रक्षक थे।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
betpark giriş
betpark giriş
savoybetting giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş