एक से प्रेम, औरों से घृणा

यह प्रेम नहीं, व्यापार है

– डॉ. दीपक आचार्य

9413306077

dr.deepakaacharya@gmail.com

 

दुनिया में हर मामले में दो ही ध्रुवों पर सांसारिक मायाचक्र का निरंतर परिभ्रमण होता रहता है। दोनों ही ध्रुव एक-दूसरे के विपरीत हुआ करते हैं। व्यक्ति अपनी मानसिकता के अनुरूप इन्हें अंगीकार करता है और जीवन निर्माण में उत्प्रेरक या सहभागी मानकर पूर्ण साहचर्य के साथ अपनी जीवनयात्रा को आगे बढ़ाता रहता है।

इन्हीं में या तो पे्रम होता है अथवा दुश्मनी। कोई मित्र होता या शत्रु। लेकिन एक उस स्थिति वाले लोग भी होते हैं जो न किसी के शत्रु होते हैं, न मित्र। ऎसे लोग तटस्थ हुआ करते हैं। इन सभी प्रकार के लोगों में मुख्य रूप से दो प्रकार के लोग होते हैं। परस्पर प्रेम करने वाले होंगे या आपस में द्वेष रखने वाले।

सारी दुनिया इन दो पालों में ध्रुवीकृत होती है। जिन लोगों में प्रेम होता है, जिनके हृदय में ईश्वर या आनंद भरा होता है वे पूर्णता के साथ प्रेम करते money_tree5_3101हैं जबकि जिन लोगों के मन में मालिन्य होता है, हृदय प्रदूषणों से भरा होता है, आसुरी भावों के साथ जीने को ही जिन्दगी का अहम सच मानते हैं उन लोगों के मन में कूट-कूट कर द्वेष भरा होता है और इन लोगों के लिए वह हर इंसान दुश्मन है जो उनके काम नहीं आता या उनकी बातों को स्वीकार नहीं करता।

प्रेम का अर्थ व्यष्टि और समष्टि के प्रत्येक कारक को प्रभावित करता है। जहाँ प्रेम होगा वहाँ से जड़ता समाप्त होकर जीवंतता आ जाती है और हर कर्म ईश्वर की आराधना का हिस्सा हो जाता है। प्रेम किसी देहिक संबंध का नाम नहीं है बल्कि पारस्परिक कल्याण की संवेदनाओं की वह परिभाषा है जिसमें इस एक शब्द के माध्यम से ही सृष्टि को आनंददायी रूप में स्वीकार किया जा सकता है।

प्रेम किसी आडम्बर या पाखण्ड का नाम नहीं है बल्कि वह सनातन प्रवाह है जिसमें नहाने वाला भी मौज-मस्ती और शाश्वत आनंद में डूब जाता है, और द्रष्टा भी आनंद के महासागर में गोते लगाने लग जाता है। फिर प्रकृति तो इस प्रेम शब्द से ही पुलकित हो ऊर्जाओं के जाने कितने समंदरों में ज्वार उमड़ा दिया  करती है।

इंसान के लिए दो ही रास्ते हैं या प्रेम करे या फिर दुश्मनी। इनमें से दुश्मनी के मार्ग को सदियों से इंसान के लिए वज्र्य माना जाता रहा है। फिर बचता है सिर्फ प्रेम। इस प्रेम को पाने, प्रेम प्रदान करने और इसका अनुभव करते हुए आनंद की प्राप्ति और इससे ईश्वर को अपने भीतर अनुभव करने वाला ही प्रेमी होता है।

इस प्रेम को शब्दों, मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं या देहिक क्रियाओं में विभक्त नहीं किया जा सकता बल्कि प्रेम को आनंद का पर्याय मानते हुए चरम उल्लास की अनुभूति की जा सकती है। प्रेम ऎसा कारक है जिसे अंगीकार कर लेने वाला खुद भी मुक्त हो जाता है और अपने संपर्क में आने वाले दूसरे सभी लोगों की भी मुक्ति चाहने के लिए हर क्षण सर्वस्व समर्पण को तैयार रहता है।

प्रेम के मूल मर्म को समझ लेने वाला इंसान दुनिया में किसी भी एक से प्रेम करता है तो असली प्रेम वही है जिसमें व्यक्ति सभी से प्रेम करे, चाहे वह जड़-चेतन कुछ भी क्यों न हो, ईश्वर या इंसान, पशु आदि कोई भी हो सकता है।

जो एक से प्रेम करता है उसका प्रेम यदि सच्चा होता है तो वह सभी से प्रेम करता है। वास्तविक प्रेम करने वाला इंसान किसी दूसरे से कभी घृणा कर ही नहीं सकता।  दूसरी तरफ जो लोग किसी एक से प्रेम करते हैं और दूसरों के प्रति संवेदनशील नहीं रह पाते अथवा दूसरों से घृणा या शत्रुता भाव रखते हैं वे सच्चे प्रेमी कभी नहीं हो सकते हैं।

जो एक से प्रेम करता है तथा अन्यों से प्रेमपूर्वक व्यवहार न करे तो इसका सीधा सा अर्थ यही है कि उसका प्रेम आडम्बर और स्वार्थ के व्यापार से ज्यादा कुछ नहीं है। ऎसा प्रेमी जिससे प्रेम करता है उससे भी उसका संबंध स्वार्थ से ज्यादा कुछ नहीं होता बल्कि ऎसा व्यवहार प्रेम नहीं बल्कि बिजनैस की श्रेणी में आता है  और इसे प्रेम की संज्ञा नहीं दी जा सकती। शाश्वत प्रेम वही है जो किसी एक से बंधा नहीं रहकर जड़-चेतन सभी पर समान रूप से प्रतिभासित हो और सभी को प्रेम का आनंद अनुभव होता रहे।

—000—

Comment:

betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
Betgaranti Giriş
betgaranti girş
betnano giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
imajbet giriş
betasus giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
meritking giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
kulisbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hiltonbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
kulisbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
hiltonbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hiltonbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
meritking giriş