मौलिक अंतर है अटल जी की भाजपा और मोदी की भाजपा में

images (53)

 

अजय कुमार

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल जी के 96वें जन्मदिन पर एक तरफ केन्द्र की मोदी और राज्यों की भाजपा सरकारें तमाम कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं तो दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है कि यदि अटल जी जीवित होते तो वह आज की भाजपा में कितना प्रसांगिक होते

25 दिसंबर का दिन हिन्दुस्तान की तारीख में अहम स्थान रखता है। 25 दिसंबर को जहां पूरी दूनिया ‘क्रिसमस डे’ मनाती है, वहीं भारत में ‘क्रिसमेस डे’ के अलावा इस दिन को भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन को भी मनाया जाता है। 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शिन्दे की छावनी में ब्रह्ममुहूर्त में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। कहा जाता है कि महात्मा रामचंद्र वीर द्वारा रचित अमर कृति ‘विजय पताका’ पढ़कर अटल जी के जीवन की दिशा ही बदल गई थी। अटल जी ऐसे भारत निर्माण की कल्पना करना चाहते थे जिसमें जनता भूख-डर से, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।

ग्वालियर में जन्मे और 16 अगस्त 2018 को दिल्ली में दुनिया से ‘कूच’ कर गए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 96वें जन्मदिन पर केन्द्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर 25 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के किसानों से संवाद का कार्यक्रम रखा है। इस संवाद में उत्तर प्रदेश के करीब 2500 इलाकों से किसान हिस्सा लेंगे। वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जयंती पर आगरा में अटल जी के पैतृक गाँव बटेश्वर में 14 करोड़ रुपये की विकास परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है। बहुउद्देश्यीय सुविधा वाली इस परियोजना में ‘भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी संस्कृत संकल्प केंद्र’ बनाकर इसमें एक खुला थियेटर, लाइब्रेरी और बच्चों के लिए पार्क और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही गांव में हाई मास्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। कई अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों ने भी अटल जी की याद में कार्यक्रम रखे हैं।

बहरहाल, अटल जी के 96वें जन्मदिन पर एक तरफ केन्द्र की मोदी और राज्यों की भाजपा सरकारें तमाम कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं तो दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है कि यदि अटल जी जीवित होते तो वह आज की भाजपा में कितना प्रसांगिक होते। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मोदी-आडवाणी से इतर मोदी-शाह की भाजपा काफी बदल चुकी है। अटल और मोदी का सरकार चलाने का तरीका एकदम अलग है। मोदी-शाह की भाजपा अपने विरोधियों को उन्हीं की शैली और जुबान में जवाब देती है। मोदी-शाह वाला भाजपा आलाकमान ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ करने में गुरेज नहीं करता है। मौजूदा भाजपा नेृतत्व यह नहीं भूला है कि किस तरह से अटल जी की सरकार एक वोट से गिर गई थी। तब अटल जी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस और उनके साथ खड़े विपक्षी नेताओं से कहा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब संख्याबल हमारे साथ होगा। बात 28 मई, 1996 की है जब अटल जी सदन में अपनी सरकार का बहुमत नहीं सिद्ध कर पाए थे, तब अटल जी ने अपने भाषण में कहा था, ‘अध्यक्ष महोदय, हम संख्याबल के सामने सिर झुकाते हैं। मैं अपना इस्तीफा राष्ट्रपति जी को देने जा रहा हूं।’

आज मोदी के साथ जबर्दस्त संख्या बल है। इसी संख्या बल के सहारे उन्होंने कश्मीर से धारा-370 हटा दी। नागरिकता संशोधन कानून ले आये। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति दिला दी। अयोध्या में भगवान राम लला का भव्य मंदिर निर्माण भले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हो रहा हो, लेकिन इसमें मोदी सरकार की इच्छाशक्ति का भी योगदान कम नहीं थी। विपक्ष के हो-हल्ले की चिंता किए बिना मोदी सरकार ने जीएसटी और नोटबंदी जैसे कड़े फैसले लिए। अटल जी को भले संख्याबल के सामने झुकना पड़ गया था, मोदी के साथ ऐसा कुछ नहीं है। बल्कि इसके उलट मोदी सरकार संख्याबल के सहारे विपक्ष के नापाक मंसूबों पर पानी फेरने में लगा है। अटल जी राजनीति में विरोधियों से संवाद पर जोर देते थे, लेकिन मोदी सरकार विपक्ष से उतना ही संवाद करती है, जितने से उसका कामकाज बाधित नहीं हो। इसीलिए वह अपने फैसले के खिलाफ होने वाले विरोध-प्रदर्शनों की भी चिंता नहीं करती है।

आज की तारीख में यह कहा जाए कि करीब 41 वर्ष पुरानी अटल-आडवाणी युग से काफी आगे निकल गई तो ऐसा कहना गलत नहीं होगा। अटल बिहारी वाजपेयी से नरेंद्र मोदी युग तक बीजेपी ने अपने 41 वर्षों के संघर्ष में तमाम तरह के उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। 10 सदस्यों के साथ जिस बीजेपी की नींव पड़ी थी, वह आज पहाड़-सी ऊंचाई छू रही है। आज भाजपा के देश में 18 करोड़ के करीब सदस्य हैं। केंद्र से लेकर 18 राज्यों में अपनी या गठबंधन की सरकार है और पार्टी के 303 लोकसभा सांसद हैं। बीजेपी देश ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा भी करती है।

अप्रैल 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विजयाराजे सिधिंया, सिकंदर बख्त जैसे नेताओं ने मिलकर बीजेपी का गठन किया था। तब बीजेपी की कमान अटल बिहारी वाजपेयी को सौंपी गई थी और पार्टी ने उनके नेतृत्व में सत्ता के शिखर तक पहुंचने का सपना देखा था। चार साल के बाद 1984 में लोकसभा चुनाव हुए तो भाजपा मात्र 2 सीटों पर सिमट गई। इस हार ने बीजेपी को रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा और पार्टी की कमान कट्टर छवि के माने जाने वाले नेता लालकृष्ण आडवाणी को सौंपी गई। एक तरफ कट्टर छवि वाले लालकृष्ण आडवाणी तो दूसरी तरफ पार्टी का उदार चेहरा समझे जाने वाले अटल बिहारी वाजयेपी की सियासी जुगलबंदी देखने लायक थी। आडवाणी भले ही पार्टी अध्यक्ष थे, लेकिन अटल जी को वह ‘राम’ की तरह मानते थे। कभी भी दोनों नेताओं के बीच मनभेद नहीं देखा गया।

खैर, आडवाणी के कंधों पर अब बीजेपी के नेतृत्व की जिम्मेदारी थी तो पार्टी पर नियंत्रण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का था। आडवाणी हिंदुत्व व राममंदिर मुद्दे को लेकर आगे बढ़े और इसके बाद ये रास्ता बनता हुआ सत्ता से शीर्ष तक चलता चला गया। यहां एक बात का और जिक्र जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी पर अक्सर आरोप लगता रहता था की उसकी छवि कट्टर हिन्दुवादी थी। 1988 में भाजपा का एक फैसला उसके लिए टर्निंग प्वांइट साबित हुआ। इसी वर्ष हिमाचल के पालमपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अयोध्या मुद्दे को पार्टी के एजेंडे में शामिल कर लिया गया। लालकृष्ण आडवाणी की चर्चित सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा ने बीजेपी में नई ऊर्जा का संचार किया और आडवाणी की लोकप्रियता भी बढ़ी और वह संघ से लेकर पार्टी की नजर में काफी बुलंदी पर पहुंच गए। इसी के चलते बीजेपी को 1989 के लोकसभा चुनाव में नई संजीवनी मिली, जब बीजेपी दो सीटों से सीधे देश में दूसरे नंबर की पार्टी बन गई। इसी दौरान छह दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने और आडवाणी का नाम ‘जैन हवाला डायरी’ में आने के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आडवाणी से दूरी बना ली।

तत्पश्चात, बीजेपी और संघ परिवार ने आडवाणी की बजाय उदारवादी छवि वाले अटल बिहारी वाजपेयी के चेहरे के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। 1995 में मुंबई अधिवेशन में वाजपेयी को बीजेपी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। हालांकि, पार्टी की कमान आडवाणी के हाथों में रही। अटल-आडवाणी की जोड़ी ने बीजेपी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने का काम किया। बीजेपी ने 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में पहली बार 13 दिन की सरकार बनाई। इसके बाद 1998 में पार्टी की 13 महीने तक सरकार चली। 1999 में फिर एक ऐसा वक्त आया, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर प्रधानमंत्री अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। इस तरह वह सबसे लंबे समय तक गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे, लेकिन 2004 में बीजेपी की सत्ता में वापसी नहीं करा सके। इसके चलते बीजेपी को 10 साल तक सत्ता का वनवास झेलना पड़ा। यहीं से बीजेपी में मोदी युग की शुरुआत हुई। संघ की इच्छानुसार भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनाव के लिए पीएम उम्मीदवार चुना और अध्यक्ष बने अमित शाह। अमित शाह गुजरात में मोदी सरकार में भी मंत्री रहे थे। फिर मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने वो कर दिखाया, जो अभी तक नहीं हुआ था। 2014 में बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार किया और आसानी से सरकार बनाई।

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के साथ ही बीजेपी की तीन धरोहर अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर युग की समाप्ति हो गई। यह कहना गलत नहीं होगा कि अटल जी ने भले ही स्वास्थ्य कारणों से राजनीति को अलविदा कह दिया था, लेकिन आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के सामने सक्रिय राजनीति से अलग हो जाने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं बचा था। अब भाजपा में मोदी युग चल रहा है। अटल युग समाप्त होने और मोदी युग के आगमन के साथ पार्टी का नेता ही नहीं संगठन, चुनाव लड़ने का तरीका, सरकार चलाने का तौर तरीका, फैसले लेने और उन्हें शिद्दत से लागू करने की तत्परता, पार्टी की नई पहचान बन गई। बीजेपी अकेले या सहयोगियों के साथ सत्ता की उस ऊंचाई पर पहुंच गई, जहां पहुंचने की उसके संस्थापकों ने कल्पना भी नहीं की होगी। बीजेपी दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में है तो सवाल यह भी खड़ा होने लगा है कि अटल और मोदी में कौन बड़ा नेता है।

अटलजी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला जाए तो अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को और मृत्यु 16 अगस्त 2018 को हुई थी। भारत के तीन बार के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहले 16 मई से 1 जून 1996 तक तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। अटलजी न केवल सफल नेता रहे बल्कि वे हिंदी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता भी थे। भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक अटल 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य अटल जी लोकसभा के लिए दस और राज्य सभा के लिए दो बार चुने गए थे। अटल जी लोकसभा का पहला चुनाव उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से जीते थे। अटलजी ने लखनऊ के लिए संसद सदस्य के रूप में कार्य किया। 2005 में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्त हुए। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारंभ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमंत्री पद के 5 वर्ष बिना किसी समस्या के पूरे किए। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने के कारण इन्हें भीष्म पितामह भी कहा जाता है। अटलजी ने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मंत्री थे।

आज भले प्रधानमंत्री मोदी को सख्त फैसले लेने के लिए जाना जाता हो, लेकिन अटलजी भी देशहित में कोई फैसला लेने में हिचकिचाते नहीं थे। उनकी सरकार के कुछ फैसले इसकी मिसाल हैं। अटल सरकार ने निजीकरण को बढ़ावा दिया, विनिवेश की शुरुआत की तो संचार क्रांति का दूसरा चरण भी अटल राज में ही शुरू हुआ था। इसके अलावा सर्व शिक्षा अभियान, पोखरण का परीक्षण, पोटा कानून, संविधान समीक्षा आयोग का गठन, जातिवार जनगणना पर रोक जैसे फैसले लेकर अटल सरकार ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

Comment:

İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
betpark giriş
Hitbet giriş
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
hitbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
casibom
casibom
casibom giriş
casibom giriş
casibom
casibom
hititbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
yakabet giriş
bahisfair giriş
bahisfair
betnano giriş
betorder giriş
betorder giriş
timebet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
timebet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
kolaybet giriş
betpark
betpark
vaycasino
vaycasino
betgaranti
casibom
casibom
casibom
casibom
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
casibom giriş
betplay giriş
betplay giriş
roketbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
casibom güncel giriş
casibom giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betplay giriş
olaycasino
olaycasino
betnano giriş
pokerklas
pokerklas
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
roketbet giriş
betplay giriş
timebet giriş
yakabet giriş