उगता भारत का संपादकीय : नए संसद भवन के निर्माण में इन बातों का भी रखा जाए ध्यान

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*संसद भवन के भीतर ही हो राज भवन, जिसमें संसदीय सत्र के चलने के समय राष्ट्रपति के रुकने का हो प्रबंध ।

* धर्म सभा या न्याय सभा का भी किया जाए प्रावधान।
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देश की नई संसद के निर्माण के लिए इस समय प्रक्रिया बड़े जोरों पर है । वर्तमान संसद भवन आगामी 2 वर्ष में इतिहास की वस्तु बनकर रह जाएगा । वैसे यदि इस संसदीय भवन के इतिहास पर विचार करें तो पता चलता है कि यह भवन अंग्रेजो के द्वारा भारत के किसानों की भूमि को जबरन छीन कर उस पर निर्मित किया गया था , यानि लोगों को उनकी जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया गया था। ऐसे में इस भवन को आजादी मिलने के तुरंत पश्चात ढहा देना चाहिए था । उसी समय सरकार को नए संसद भवन का निर्माण कर उससे देश को चलाने का निर्णय लेना चाहिए था। परंतु ऐसा नहीं किया गया , क्योंकि देश की पहली सरकार अंग्रेजों को अपना शत्रु न मानकर स्वयं को उनकी कृपा का पात्र मानती थी। इसलिए उसे संसद की दीवारों में से हमारे मजदूर किसानों की भूमि के छीने जाने की आह निकलती हुई दिखाई नहीं देती थी।
वर्तमान संसद भवन जनप्रतिनिधियों के बैठने के दृष्टिकोण से भी छोटा पड़ता दिखाई दे रहा है। कोई कारण है कि वर्तमान मोदी सरकार नए संसद भवन के बनाने की तैयारियां जोरों पर कर रही है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने नए संसद भवन के निर्माण के लिए बोलियां लगाने को आमंत्रण दिया था। टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने 861.90 करोड़ रुपये जबकि लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड ने 865 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बोली प्रक्रिया में टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने बुधवार को बाजी मार ली। अब वह 861.90 करोड़ रुपये में नए संसद भवन का निर्माण करेगी। 
उल्‍लेखनीय है कि नए संसद भवन के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमि‍टेड समेत सात कंपनियों ने पात्रता पूर्व बोलियां (फाइनेंशियल बीड्स) जमा की थीं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के ऑनलाइन निविदा पोर्टल के अनुसार, इन कंपनियों में… टाटा प्रोजेक्ट लि., लार्सन एंड टूब्रो लि., आईटीडी सीमेंटेशन इंडिया लि., एनसीसी लि., शपूरजी पलोनजी एंड कंपनी प्राइवेट लि., उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लि. और पीएसपी प्रोजेक्ट्स लि. शामिल थीं। 
बोली आमंत्रित करने वाले नोटिस में कहा गया था कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत मौजूदा संसद भवन के पास नई इमारत का निर्माण किया जाएगा। इसके 21 महीने में पूरा होने का अनुमान है। यही नहीं इस पर 889 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। केंद्र सरकार की प्रमुख निर्माण एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी ने कहा था कि नई इमारत का निर्माण ‘पार्लियामेंट हाउस एस्टेट’ की भूखंड संख्या 118 पर कराया जाएगा।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की ओर से कहा गया है कि परियोजना के पूरा होने तक मौजूदा संसद भवन में ही कामकाज होता रहेगा। माना जा रहा है कि अब संसद के मानसून सत्र के खत्‍म होने के बाद नए भवन पर काम शुरू होगा। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि नए भवन में सांसदों के बैठने के लिए 900 सीटें होंगी, जबकि संयुक्त सत्र में 1350 सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी। 2022 के जुलाई महीने में होने वाला मानसून सत्र नई संसद में आयोजित किए जाने की तैयारी है। 
हमारा मानना है कि वर्तमान संसद भवन के स्थान पर बनने वाले नए संसद भवन में भारतीयता का पुट दिखाई देना चाहिए । भारतीय स्थापत्य कला और भवन कला को इसमें पूरी तरह सम्मान और स्थान मिलना चाहिए । इसके अतिरिक्त रामायण काल, महाभारत काल और उस समय की राज्यसभा या संसद भवन के चित्र इस नए भवन की दीवारों पर कुछ इस प्रकार खुदवाये जाएं कि बैठने वाले जनप्रतिनिधियों को अपने गौरवपूर्ण इतिहास का बोध हो और उन बोलती हुई तस्वीरों के माध्यम से राष्ट्र के लिए समर्पित होकर कार्य करने का वे पाठ पढ़ सकें।
राष्ट्र , राष्ट्रीय भावना और राष्ट्रवाद को मजबूत करने वाली वैदिक ऋचाओं को और महाभारत रामायण या अन्य वैदिक वांग्मय के श्लोकों या सूत्रों को लेकर स्थान – स्थान पर उनका समायोजन किया जाना चाहिए। वैदिक ऋचाओं को ठीक उस स्थान पर सम्मान दिया जाए जहां से वह भविष्य में किसी आने वाले विदेशी मेहमान की नजरों के ठीक सामने पड़ती हों ।
हमारा मानना है कि इसी संसद भवन के भीतर एक राज भवन भी बनाया जाए । जिसमें संसद के सत्रों के चलने के समय राष्ट्रपति अपने अधिकारियों के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें । वैसे भी संसद का निर्माण लोकसभा राज्यसभा और राष्ट्रपति के मिलने से ही होता है । ऐसे में संसद में ही यदि राष्ट्रपति के लिए राजभवन भी होगा तो वह संसद की पूर्णता को सुनिश्चित करेगा।
इसके अतिरिक्त संसद के भीतर एक धर्म सभा और अथवा न्याय सभा भी होनी चाहिए। जिसमें देश के ऐसे प्रतिष्ठित विद्वान उपस्थित रहने चाहिए लोक हितकारी राज्य व्यवस्था के मर्मज्ञ हों। उन सिद्धांतों को जानते हों जिनसे न केवल देश के नागरिकों का अपितु प्राणी मात्र का कल्याण होना संभव है। इस धर्म सभा या न्याय सभा में पारित विचारों ,सुझावों, प्रस्तावों या विधेयकों पर संसद के अन्य दो सदन गंभीरता पूर्वक विचार करें। इस धर्म सभा या न्याय सभा के हाथ में उनको उदंडी और उत्पाती जनप्रतिनिधियों के आचरण पर नकेल डालने की शक्ति होनी चाहिए जो जनहित की उपेक्षा कर संसद में समय व्यतीत करने के लिए पहुंच जाते हैं और वहां रहकर किसी भी प्रकार का उत्पात मचाते हैं। जनप्रतिनिधियों के राष्ट्रविरोधी बोलों की समीक्षा करने और उन्हें उचित दंड देने का अधिकार भी इसी न्याय सभा या धर्म सभा के पास होना चाहिए।
इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए कि आने वाले विदेशी मेहमानों को हमारे संसद भवन के भीतर भारतीयता का झलकता हुआ वैभव दिखाई दे और उन्हें लगे कि भारत वास्तव में विश्व गुरु बनने की सामर्थ्य रखता है। इसके पास ऐसा शानदार अतीत है जिस पर न केवल भारत को बल्कि सारे विश्व को गर्व करना चाहिए । यदि इन सब बातों का ध्यान रखकर नया संसद भवन बनाया जा रहा है तो यह स्वागत योग्य ही कहा जाएगा और यदि यह केवल जनप्रतिनिधियों के ऐशोआराम के लिए एक आरामगाह के रूप में अर्थात आधुनिक सुख सुविधाओं से संपन्न भवन के रूप में बनाया जा रहा है तो इसे देश के पैसे की बर्बादी ही कहा जाएगा।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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