प्रजातंत्र की विधान सभा और वेद की समिति

29_05_2012-puranasप्रजातंत्र की विधानसभायें अथवा संसद कैसी हैं? यह तो हम रोज देख रहे हैं। किंतु वेद का अनोखा चिंतन जिन समितियों के गठन की बात करता है, वह कैसी होंगी, यह ऋग्वेद का ये मंत्र बताता है :-

समानो मंत्र: समिति: समानी समानं मन: सह चित्तमेषाम् ।
समानं मन्त्रभि मंत्रये व: समानेन वो हविषा जुहोमि।।
‘ऐश्वर्य के अभिलाषी इन तुम सबका गुप्त और गंभीर विषयों की मंत्रणा करने का विचार करने का स्थान समान हो, जिसमें तुम समान रूप से जा सको। तुम्हारी राज्य सभायें और दूसरी सभायें समान हों, जिनके सदस्य सब बन सकें, तुम्हारा मन समान हो, जिसमें परस्पर के लिए प्रेम हो, मन से प्राप्त किया जाने वाला तुम्हारा ज्ञान भी एक साथ हो, परस्पर के सहयोग से मिलकर प्राप्त किया जाए, तुम सबको समान रूप से मिलकर की जाने वाली मंत्रणा और विचार की मैं मंत्रणा देता हूं सलाह देता हूं, तुम सबको समान रूप से परस्पर के लिए किये जाने वाले त्याग के द्वारा ऐश्वर्य और अभ्युदय प्राप्ति के लिए यज्ञ में मैं नियुक्त करता हूं।’
वेद का आदेश है कि राष्ट्र-चिंतन के लिए हम सबका एक ही स्थान हो। तुम्हारी राज्य सभायें और दूसरी सभायें एक समान हों-तुम्हारे मन समान हों। आगे वेद ने इस मन की समानता को इस प्रकार कहा है। ‘समान व आकूति:’ अर्थात तुम्हारे संकल्प एक समान हों। मन की समानता के लिए ‘समाना हृदयानि च’ तुम्हारे हृदय एक समान हों। मन, संकल्प और हृदय की एकता वेद ने क्यों चाही? इसलिए कि ‘यथा व सुसहासति’ जिससे तुम्हारा भली-भांति परस्पर मिलकर साथ रहने से अभ्युदय हो, और यह अभ्युदय तभी होगा जब ‘अभयं मित्रादभयं मित्रात्’ की शत्रु रहित मित्र भाव की सामाजिक स्थिति मानव विकसित कर लेगा। जो कि मानव समाज के लिए आवश्यक है।
आज का प्रजातंत्र समानता के आदर्श पीटता है किंतु व्यवहार असमानता का करता है। कारण है विधिक प्रक्रिया से बलात समता का भाव मानव हृदय में ये प्रजातंत्र रोपना चाहता है। जबकि वेद की आदर्श सामाजिक व्यवस्था में स्नेहपूर्ण हार्दिक समानता की स्थापना पर बल दिया गया है।
अथर्ववेद में कहा गया है:-‘सहृदयं सामंनस्य विद्वेषं अर्थात-हे-मनुष्यो मैं परमेश्वर तुम्हारे लिए हृदय की समानता और मन की समानता और इनसे उत्पन्न होने वाली अविद्वेष की अवस्था करता हूं। तुम्हें परस्पर ऐसी प्रीति में बांधना चाहता हूं जैसे-‘वत्व’ जातमिवाधन्या’-नये उत्पन्न हुए बछड़े को गाय स्नेह करती है। वसुधा को कुटुम्ब मानने वाले हमारे ऋषियों ने इस प्रकार के आदर्श सामाजिक जीवन का चित्रांकन किया था। कारण मात्र एक ही था कि हर मानव के व्यक्तित्व का पूर्ण विकास संभव हो सके और हर व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा को कोई ठेस न पहुंचने पाए। वर्तमान लोकतंत्रात्मक विश्व व्यवस्था में इसी प्रकार की विश्व व्यवस्था की आवश्यकता है। इसी से वसुधैव कुटुम्बकम् और कृण्वन्तो विश्वमाय्र्यम् के अपने प्राचीन वैदिक राष्ट्र के आदर्श को हम पुन: प्राप्त कर सकेंगे।
आज हमने स्वयं को ‘कुटुम्ब-ही-कुटुम्ब है’ की संकीर्ण विचारधारा तक कैद कर लिया है। जिससे स्नेह के तंतु पत्नी पति और अपने बच्चों से आगे फूटने ही बंद हो रहे हैं। जबकि कुछ लोग तो वासनात्मक प्रेम के वशीभूत होकर इस झूठे स्नेह को केवल पति-पत्नी के मध्य तक ही सीमित कर रहे हैं। जिस संतान को स्नेह नही मिला, उसे आप मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील कैसे मान सकते हैं? क्योंकि उसे बचपन में स्वार्थ का परिवेश मिला था इसलिए वह स्वार्थी तो हो सकता है इससे आगे स्नेहपूर्ण आचरण करने वाला मानवतावादी कदापि नही हो सकता। लोकतंत्र को चाहिए कि इस ओर ध्यान दिया जाए क्योंकि मानवता के प्रति उजड़ते हुए ये मूल्य मानवता के विनाश का कारण बन रहे हैं। लोकतंत्र की प्राथमिकता मानवता का विकास होना चाहिए। यह तभी होगा जब वेद की इस प्रार्थना को अंगीकार किया जाएगा-हे सर्वाधिक ऐश्वर्यवान प्रभो! आप हमारे दायें बायें शत्रुओं का अभाव कर दो। हमारे पीछे की ओर शत्रुओं का अभाव कर दीजिए। और हे पराक्रमी भगवान! हमारे आगे प्रकाश कर दीजिए। यह स्मरणीय है कि शत्रुओं का अभाव हमारे अच्छे व्यवहार और मानवीय दृष्टिकोण के अपनाने से ही संभव है।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
savoybetting giriş
grandpashabet giriş
jojobet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
restbet giriş
safirbet giriş
betnano giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pumabet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betnano giriş
betwild giriş
betnano giriş
dedebet giriş
betnano giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
maxwin giriş
süperbahis giriş
betnano giriş
betwild giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
cratosroyalbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş