बढ़ते धर्मोपदेशक और नैतिकता का होता पतन

निर्मल रानी
भारतवर्ष किसी ज़माने में विश्वगुरु कहा जाता था। कोई इस बात को स्वीकार करे या न करे परंतु भारतीय प्राचीन संस्कृति तथा इसकी समृद्ध विरासत पर विश्वास रखने वाले लोगों का आज भी यह मानना है कि हमारे देश ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। खासतौर पर ज्ञान,अध्यात्म व मानवता के क्षेत्र में। अध्यात्मवाद संबंधी ज्ञान वर्षा का यह सिलसिला भारत में अभी भी थमा नहीं है बल्कि समय के साथ-साथ इसमें और तेज़ी आती जा रही है। ज़ाहिर है आज के दौर में हम स्वामी दयानंद सरस्वती या स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों, उन जैसे चिंतकों तथा अध्यात्मवादियों को तो शायद वापस नहीं ला सकते।
फिर भी हमारे देश में उनकी जगह लेने का दावा करने वालों, स्वयं को उन जैसा बताने वाले तथाकथित अध्यात्मवादियों,धर्मगुरुओं, धर्मोपदेशकों तथा प्रवचनकर्ताओं की मानों बाढ़ सी आ गई है। शायद इस समय देश का कोई भी जि़ला, शहर,कस्बा यहां तक कि गांव ऐसा नहीं बचा है जहांकि वर्ष में कई-कई बार ऐसे धर्माधिकारियों के प्रवचन आयोजित न किए जाते हों। इसी प्रकार टेलीविजऩ के तमाम चैनल ऐसे उपदेशकों के उपदेश प्रसारित कर जहां समाज को इन ‘धर्मगुरुओं’ के सद्वचनों से सराबोर करने की ज़िम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं वहीं यही धर्मगुरु भी उन टीवी चैनल पर अपने ‘उपकार’ की वर्षा कर उन्हें भी बाज़ार में बने रहने के लिए अपनी भरपूर ‘सहायता’ कर रहे हैं। दावे के साथ यह बात कही जा सकती है कि गुजऱे ज़माने में ऐसे धर्मापदेशकों की सं या इतनी अधिक नहीं थी जितनी कि आज दिखाई दे रही है। इसी के साथ-साथ उसी गुजऱे दौर में अपराध,अनैतिकता व अमानवीयता का ग्राफ भी इतना ऊंचा नहीं था।
सवाल यह है कि जब भारतीय समाज में उपदेशकों, प्रवचनकर्ताओं व अध्यात्मवादियों की सं या में दिन-प्रतिदिन इज़ाफा होता जा रहा है फिर आखिर उन उपदेशों व प्रवचनों का समाज पर अच्छा प्रभाव पढऩे के बजाए हमारे समाज में बुराईयां ही क्योंकर बढ़ती जा रही हैं? छलकपट, मक्कारी,बेईमानी,हत्या, चोरी-डकैती, ठगी व बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों में इज़ाफा क्यों होता जा रहा है? हमारा समाज इनके प्रवचनों को सुनने के बाद उनसे सबक क्यों नहीं लेता? या फिर इन उपदेशकों के उपदेश समाज पर अपना प्रभाव छोड़ नहीं पाते? सर्वप्रथम तो इस विषय पर चिंतन व मंथन करने से पूर्व हमें न केवल कल और आज के धर्मगुरुओं,अध्यात्मवादियों व धर्माधिकारियों की सोच-समझ वफि़क्र के मध्य के अंतर पर नजऱ डालनी होगी बल्कि कल और आज के समाज की इच्छाओं,आकांक्षाओं, उम्मीदों तथा उनके चरित्र पर भी गौर करना होगा। यदि हम गुजऱे ज़माने के किसी भी सिद्ध पुरुष समझे जाने वाले अध्यात्मवादी धर्मगुरु पर नजऱ डालें तो हमें उसके भीतर त्याग,तपस्या, कुर्बानी के साथ-साथ अपार ज्ञान के भी दर्शन होंगे। कल के धर्मगुरु न तो सांसारिक व भौतिक इच्छाओं के गुलाम हुआ करते थे न ही उन्हें धन-संपत्ति,वैभव,दिखावा, शोहरत आदि की लालच हुआ करती थी। ज़ाहिर है सांसारिक इच्छाओं से विमुख ऐसे अध्यात्मवादी या धर्मगुरु जब ईश्वर की तपस्या करते थे या ईश्वर का ध्यान करते थे तो उनकी तपस्या भी कारगर व प्रभावी साबित होती थी तथा ईश्वर भी ऐसे त्यागी व तपस्वी अध्यात्मवादियों को अपने आशीर्वाद, अपनी कृपा तथा अपने करम से नवाज़ता था। उनकी दुआएं व उनकी प्रार्थनाएं पूरी करता था। इसी प्रकार से कल का समाज भी वैसा ही था। वह भी अपने गुरु से भौतिकतावादी उम्मीदें लगाकर नहीं रखता था। कल का समाज अपने गुरु से गाड़ी, बंगला,कारोबार, धनवर्षा जैसी उम्मीदें लेकर उनके पास नहीं जाता था। बल्कि उसे अपने मार्गदर्शक से सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा की दरकार होती थी। वह अपने गुरु या उपदेशक से यह सीखने-समझने व सुनने का इच्छुक रहता था कि सदाचारी जीवन कैसे व्यतीत किया जाए। सद्मार्ग पर कैसे चला जाए। समाज में कल्याणकारी कार्य कैसे किए जाएं? और वह समाज उस समय के उन प्रभावशाली धर्मगुरुओं व अध्यात्मवादियों के सद्वचनों पर अमल करते हुए व उनके बताए हुए सद्मार्गों पर चलते हुए सद्कर्म में लगा रहता था। और बुराईयों से दूर रहने की सफल कोशिश करता था। परिणामस्वरूप हमारा समाज तुल्नात्मक दृष्टि से अपराधों से दूर था। नैतिकता के पतन का वह स्तर कम से कम नहीं था जो आज देखने को मिल रहा है। जैसे घिनौने व जघन्य अपराध आज घटित हो रहे हैं वह कल देखने व सुनने को नहीं मिलते थे। बाप-बेटी, भाई-बहन व पड़ोसियों आदि के मध्य पवित्र रिश्तों का बंधन देखने को मिलता था। लोगों में वचनबद्धता दिखाई देती थी। आम लोग ईश्वर से भयभीत होकर बुरे कामों से दूर रहने की कोशिश करते थे। अपने गुरुओं व मार्गदर्शकों के प्रति उनमें आदर व स मान की भावना होती थी। और यही सब बातें हमारे कल के समाज को नियंत्रित रखती थीं और सामाजिक वातावरण इतना अधिक प्रदूषित नहीं था जितना कि आज दिखाई दे रहा है। ठीक इसके विपरीत आज के दौर में उन्हीं प्राचीन या गुजऱे ज़माने के धर्मगुरुओं की वेशभूषा धारण किए हुए अनगिनत धर्माधिकारी व प्रवचनकर्ता इस समय भारतीय समाज को कथित रूप से अध्यात्म का ज्ञान दिए जाने का बीड़ा उठाए हुए हैं। हमारा समाज भी परंपरा के अनुसार इनके मुखारबिंदों से निकलने वाले प्रवचनों को सुने बिना शायद नहीं रह सकता। तभी इनके समागम में हज़ारों से लेकर लाखों तक की भीड़ उमड़ती देखी जा सकती है। यह बातें खबरों में भी आ चुकी हैं कि कई ऐसे धर्मगुरुओं के सत्संग या धार्मिक आयोजन में इतनी अधिक भीड़ उमड़ी कि नियंत्रण के बाहर हो गई जिसके परिणास्वरूप भगदड़ मच गई और कई लोग हताहत भी हो गए। मोटे तौर पर तो ऐसी खबरों को सुनकर यही महसूस होता है कि गोया समाज का बहुत बड़ा वर्ग शायद अभी भी अध्यात्म की तलाश में भटकता फिर रहा है। तभी तो ‘अध्यात्मवादियों’ के सत्संग में हज़ारों व लाखों की भीड़ उमड़ती है। पंरतु यदि हम इसी घटना पर सूक्ष्म नजऱ डालें तो हम यह पाएंगें कि दरअसल यह भीड़ लालची व भौतिकतावादी भीड़ है जोकि लंगर, प्रसाद तथा कपड़े व बर्तन जैसे उपहार लेने के लिए बेक़ाबू हो जाती है। जिसका नतीजा भगदड़ या अव्यवस्था के रूप में दिखाई देता है। गोया प्रवचन या सत्संग में आमंत्रित करने वाला तथाकथित धर्मगुरु लोगों को सांसारिक लालच देकर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करता है तो दूसरी ओर ऐसे लोगभी स्वयं को उस आकर्षण से दूर न रख पाते हुए अपने गुरु के सदवचनों अथवा उपदेशों को सुनने के बहाने चंद उपहारों के या लंगर-भंडारे की लालच में उनकी ओर खिंचा चले आते हैं। स्पष्ट है कि इस निमंत्रण तथा भागीदारी दोनों ही में कहीं भी अध्यात्मवाद का कोई दर्शन नजऱ नहीं आता। भारी भीड़ बुलाकर गुरु अपनी शक्ति तथा अपने अनुयाईयों की सं या का प्रदर्शन करता चाहता है तो समाज चंद वस्तुओं की लालच में उसकी ओर खिंचा चला आता है। आजकल जिधर नजऱ डालिए उधर फिल्मकार उमेश शुक्ला द्वारा निर्देशित ओ माई गॉड फिल्म की तर्ज के धर्मगुरु दिखाई दे रहे हैं। बड़े अफसोस की बात है कि पिछले दो-तीन वर्षों में तमाम ऐसे पाखंडी अध्यात्मवादी बेनकाब हुए जो बलात्कार, सेक्स स्र्कैंडल चलाने, लड़कियों की खरीद-फऱोख्त करने, तमाम प्रकार के अवैध व्यापार करने, सरकार व लोगों की ज़मीनों पर अवैध कब्ज़ा करने तथा व्याभिचार करने जैसे अपराधों में नामज़द पाए गए। अभी भी ऐसे कई पाखंडी धर्मगुरुओं पर अदालत में मुकद्दमे चल रहे हैं। परंतु आश्चर्य की बात तो यह है कि ऐसे ढोंगी व पाखंडी अध्यात्मवादियों के असली चेहरे बेनकाब होने के बावजूद उनके अनुयाईयों में कोई कमी नहीं आ रही है। ऐसी खबरें सुनने के बाद इनके अनुयायी उनसे विमुख होने के बजाए ऐसे आरोपों को अपने गुरु के विरुद्ध रची जा रही साजि़श की संज्ञा देते हैं। एक प्रकार से यह कहा जा सकता है कि ऐसे पाखंडी धर्मगुरुओं व प्रवचनकर्ताओं के अनुयायी अपने गुरुओं के काले कारनामों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं। और आज के ऐसे गुरुओं व उनके वर्तमान अनुयाईयों के मध्य संबंध भी पूरी तरह भौतिकतावादी हैं। यानी जैसा गुरु वैसे चेले। आज अपने गुरुओं के समक्ष अधिकांश लोग धन-संपत्ति, कारोबार,अधिक मुनाफा, अपने दुश्मन को नीचा दिखाने की युक्ति जैसी प्रार्थनाएं लेकर आते हैं। उसी प्रकार आज का धर्मगुरु अपने अनुयाईयों से यह कहता सुनाई नहीं देता कि रिश्वतखोरी से दूर रहो, अनैतिक कार्यों से धन मत कमाओ तथा ऐसे धन को धर्म व परिवार पर व समाज कल्याण आदि पर खर्च करने की कोशिश मत करो। बजाए इसके आज के धर्मगुरु अपने अनुयाईयों से यही उम्मीद रखते हैं कि वे रिश्वतखोरी, टैक्सचोरी, लूट अथवा अनैतिकता की जैसी भी कमाई हो लाकर उन्हें भेंट करें। ज़ाहिर है इन परिस्थितियों में हम यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि हमारा समाज सही दिशा पर चलेगा तथा अपने मार्गदर्शकों से निर्देशित होगा? और शायद यही वजह है कि हमारे देश में जैसे-जैसे तथाकथित धर्मगुरुओं व अध्यात्मवादियों की बाढ़ सी आती जा रही है वैसे-वैसे हमारे समाज में नैतिकता का भी बहुत तेज़ी से पतन होता जा रहा है।

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
hitbet
interbahis giriş
hitbet giriş
betgaranti giriş
grandpashabet
jojobet
betgaranti giriş
jojobet
kolaybet giriş
kolaybet giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
kolaybet
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti
xslot giriş
xslot giriş