मैं भारत की बेटी हूं…मुझे पाकिस्तान मत भेजो

पिछले दिनों तहसीलदार दादरी राजेश कुमार शुक्ला के खिलाफ वकीलों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया था। वकीलों का कहना था कि श्री शुक्ला एक भ्रष्ट अधिकारी हैं जिन्होंने नैतिकता और न्याय की सारी सीमाएं ही तोड़ दी हैं। इस संबंध में वकीलों की एक बैठक अध्यक्ष महीपाल सिंह भाटी की अध्यक्षता में हुई थी और उक्त अधिकारी के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने की योजना बनायी गयी थी। वकीलों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि उक्त अधिकारी का तहसील दादरी में न्यायालय में तब तक बहिष्कार जारी रहेगा जब तक कि उसका स्थानांतरण नही हो जाता है
बार एसोसिएशन अध्यक्ष श्री भाटी ने बताया था कि इस बार उक्त अधिकारी के साथ कोई समझौता न करने का निर्णय लिया गया था। क्योंकि पूर्व में तीन बार उक्त अधिकारी से बैठकर समस्याएं सुलझाने का प्रयास किया गया है लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पाते रहे हैं। श्री भाटी ने कहा कि अधिकारी के यहां छोटे से छोटा काम बिना पैसे नही होता है, जिससे वादकारी और क्षेत्र के किसान परेशान हैं। यद्यपि शासन की नीतियां किसानों को और वादकारियों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने की है लेकिन श्री शुक्ला जैसे अधिकारी शासन की नीतियों में रोड़ा बने बैठे हैं।
वकीलों का कहना है कि यदि उक्त अधिकारी का शीघ्र स्थानांतरण नही होता है तो वकील लोग काली पट्टी बांधकर जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने और नारेबाजी करने सहित अन्य कई प्रकार के विकल्पों को अपनाएंगे। बार एसोसिएशन की कार्यवाही से उच्चाधिकारियों को अवगत कराने तथा नियमित पत्राचार करने के लिए सचिव मणीन्द्र मोहन शर्मा को नियुक्त किया गया है। श्री शर्मा ने बताया कि अपने स्तर पर उक्त अधिकारी की भ्रष्ट कार्यशैली और निकृष्ट व्यवहार की सूचना मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, कमिश्नर मेरठ मंडल मेरठ, जिलाधिकारी सहित सभी जनप्रतिनिधियों और उच्चाधिकारियों को दे चुके हैं। श्री शर्मा ने बताया कि यदि आश्वयक हुआ तो उक्त अधिकारी के विरूद्घ त्रस्त वादकारियों के शपथपत्र और प्रार्थना पत्र भी उच्चाधिकारियों को प्रेषित किये जा सकते हैं। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी नागर, बीपी भाटी, राजपाल सिंह नागर, ऋषिपाल भाटी, राकेश कुमार आर्य, दयानंद नागर, जयपाल सिंह नागर, अनिल भाटी, मणीन्द्र मोहन शर्मा, ललित मोहन शर्मा, डीएस कौशिक, राकेश नागर, रणजीत शर्मा, महेन्द्र भाटी, रामकुमार खटाना, रूपेन्द्र सिंह तोंगड़, विनोद नागर आदि सहित दर्जनों अधिवक्ता उपस्थित थे। लेकिन विगत आठ अप्रैल को उक्त अधिकारी द्वारा दिये गये पत्र के आधार पर अधिवक्ताओं की बैठक उक्त अधिकारी के साथ संपन्न हुई। जिसमें उक्त अधिकारी ने अपनी कार्यशैली और व्यवहार में परिवर्तन लाने का आश्वासन दिया। जिस पर देर शाम अधिवक्ताओं की पुन: बैठक हुई। जिसमें श्री शुक्ला के खिलाफ चली जा रही हड़ताल को वापस लेने का निर्णय लिया गया। अध्यक्ष श्री भाटी ने बताया कि हड़ताल स्थगित कर दी गयी है।

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