भगत सिंह एक ऐसा नाम है, जिनके बलिदान को देश का हर नौजवान सदैव याद करता रहेगा, जिनके जज्वे को देश हमेशा सलाम करता रहेगा और जिनके विचार सदा देशवासियों को देश के प्रति ईमानदार रहने, देश की सेवा करने की प्रेरणा देते रहेंगे। उनके जीवन के अनेक ऐेसे प्रसंग हैं, जो प्रेरणाप्रद हैं, लेकिन सबसे मार्मिक उनकी फांसी से दो घंटे पहले का था, जब वकील प्राणनाथ मेहता उनसे मिलने आए और पूछा क्या वे देशवासियों के लिए कोई संदेश देना चाहेंगे? भगत सिंह का उत्तर था-आप मेरे दो नारे उन तक पहुंचाए, पहला-साम्राज्यवाद खत्म हो (डाउन विद इंपीरिलिज्म) और दूसरा इंकलाब जिंदाबाद (लांगलिव रेवाल्यूशन) जब मेहता जी ने उनसे पूछा आज तुम कैसे हो? तो भगत सिंह ने कहा हमेशा की तरह खुश हूं। उन्होंने पूछा क्या तुम्हेंकिसी चीज की इच्छा है? तो भगत सिंह बोले-हां मैं दोबारा इस देश में पैदा होना चाहता हूं, ताकि इसकी सेवा कर सकूं।

एक अन्य प्रसंग में जब भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी के तख्ते की ओर ले जाया जा रहा था तो जेल का वार्डन चरत सिंह उनके काम के समीप जाकर बोला वाहेगुरू से प्राथना कर लो। भगत सिंह इस पर हंसकर बोले-मैंने पूरी जिंदगी कभी परमात्मा को कभी याद नही किया, बल्कि उसे दुखियों और गरीबों की वजह से कोसा है। अब अगर में उससे माफी मांगूंगा तो वह कहेगा कि यह कायर है, जो माफी चाहता है क्योंकि इसका अंत निकट है।
भगत सिंह सिख परिवार में जन्मे थे, पर परिवार पर आर्यसमाज का भी गहरा प्रभाव था। पिता सरदार किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह भी स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रयत्नों में पूरी तरह संलग्न थे, किंतु भगत सिंह संसार के विभिन्न भागों में होने वाली क्रांतियों से पूरी तरह परिचित होना चाहते थे और अपने सभी प्रयासों को उसी अनुरूप ढालना चाहते थे। फ्रांस की राजक्रांति और रूस की बोल्शेविक क्रांति ने उन्हें बहुत प्रभावित और रोमांचित किया था। मार्क्स और लेनिन की पुस्तकों को वह बड़े मनोयोग से पढ़ते थे।
भगत सिंह प्राय: कहते थे-आजादी तो हमें मिल ही जाएगी, किंतु हमें इस पर भी विचार करना चाहिए कि आजाद भारत में हम किस प्रकार के समाज का निर्माण करेंगे।
कहीं गोरे साहबों की जगह काले साहब तो आकर हमारे सिरों पर नही बैठ जाएंगे। रूसी क्रांति के बाद सारे संसार में समाजवाद की चर्चा प्रारंभ हो गयी थी, जिसके कारण किसानों मजदूरों के हितों की चिंता, सर्वहारा वर्ग में उभरती क्रांति चेतना को देश के नोजवानों में फेेलाने के लिए भगत सिंह और उनके साथियों ने नौजवान भारत सभा की स्थापना की। उस समय तक वदंमारतम संभवत: सभी क्रांतिकारियों का सबसे प्रिय नारा था। भगत सिंह भी इसका प्रयोग करते थे। इसी के साथ उन्होंने नौजवानों को नारा दिया इंकलाब जिंदाबाद।
पहली बार इस नारे का प्रयोग तब हुआ, जब 30 अक्टूबर 1929 को साइमन कमीशन भारत पहुंचा था और उसके विरोध में साइमन कमीशन वापस जाओ के साथ इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गये। इस नारे की कुछ लोगों ने आलोचना भी की। इस पर भगत सिंह ने रामानंद चटर्जी को एक लंबा पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस नारे का अर्थ यह नही है कि सशस्त्र संघर्ष सदा चलता रहेगा। इंकलाब जिंदाबाद से हमारा अर्थ है-कभी पराजय स्वीकार न करने वाली वह भावना, जिसने जतिन दास जैसे शहीद पैदा किये। हमारी इच्छा है कि हम यह नारा बुलंद करते समय अपने अदर्शों की भावना को जिंदा रखें। हम यह स्वीकार करते हैं कि केवल बगावत को इंकलाब कहना ठीक नही है। हम इस देश में बेहतर परिवर्तन के लिए इस शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। भगत सिंह ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि प्राय: लोग पहले से बनी हुई चीजों के साथ जुड़ते हैं और बदलाव का नाम सुनते ही कांपने लगते हैं। लोगों की इस सुप्त सोच को क्रांतिकारी सोच से बदलने की जरूरत है।
फांसी से कुछ दिन पहले दो फरवरी 1931 को भगत सिंह ने अपने साथी नौजवानों को एक संदेश भेजा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंकलाब जिंदाबाद का नारा हमारे लिए बहुत पवित्र है। इसका प्रयोग हमें बहुत सोच समझकर करना चाहिए। भगत सिंह का यह भी कहना था कि हम इस देश में समाजवादी गणतंत्र की स्थापना चाहते हैं, हम अपना नारा कारखानों में काम करने वाले लाखों मजदूरों खेतों में काम करने वाले असंख्य गरीबों के पास ले जाना चाहते हैं। इंकलाब का संदेश ऐसी आजादी लाएगा कि जिसमें आदमी के हाथों आदमी की लूट असंभव हो जाएगी।
भगत सिंह की कविता की ये पंक्तियां बहुत पसंद थीं-
कमाल-ए-बुजदिली है अपनी ही आंखों में पस्त होना, अगर थोड़ी सी जुर्रत हो तो क्या कुछ हो नही सकता। उभरने ही नही देती बेईमानियां दिल की, नही तो कौन सा कतरा है जो दरिया हो नही सकता।
उनका कहना था कि आत्मविश्वास किसी भी युवा का सबसे बड़ा बल होता है और वह कहते थे कि अपने विचारों को क्रांतिकारी बनाओ, उन पर चर्चा करो और जीवन में उन्हें अपनाओ तभी क्रांति संभव है।
सिख परिवार में जन्म लेने के बावजूद वे इनसानियत को ही अपना धर्म मानते थे। उस समय छुआछूत व जात पांत का बोलबाला था। ऐसे में जेल के सफाई कर्मचारी को भुई वह बेबे (पंजाबी में मां का संबोधन) कहकर पुकारते थे। उस कर्मचारी ने जब भगत सिंह से पूछा वे उसे ऐसे क्यों बुलाते हैं? तो उनका जवाब था बचपन में बेबे ने मेरी गंदगी साफ की और अब तुम करते हो। इस नाते तुम मेरी बेबे जैसे ही तो हो। इसी प्रकार वह भैंस को मांसी कहते थे क्योंकि उनका कहना था-बचपन में मां का और अब भैंस का दूध पीता हूं तो इस नाते वह मेरी मां सी (मां जैसी) है।
इस तरह भगत सिंह के जीवन का हर प्रसंग कुछ न कुछ सिखाता है, प्रेरणा देता है। उनके व्यक्तित्व में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जबरदस्त जोश व उमंग थी। वे मस्तमौला व्यक्ति व सदैव प्रसन्नमुख थे, सकारात्मक विचारों के ऊर्जापुंज थे, इसी कारण तो वे कभी निराश नही हुए, यहां तक कि अपने जीवन के अंतिम समय में भी नहीं।
-अखण्ड ज्योति

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betnano
holiganbet giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpas giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
hitbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casibom giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş