कैग की रिपोर्ट बनाम कट्टर ईमानदार

arvind - kejriwal
  • राजेश कुमार पासी

अन्ना आंदोलन के दौरान केजरीवाल ने कैग की रिपोर्ट का हवाला देकर ही कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे । केजरीवाल कहते थे कि वो जब सत्ता में आएंगे तो इस रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही करेंगे । इस रिपोर्ट को आधार बनाकर ही अन्ना आंदोलन के दौरान लोकपाल कानून बनाने की मांग की जा रही थी। कैसी विडम्बना है कि दिल्ली में अपनी सरकार की कैग रिपोर्ट को केजरीवाल सरकार दबाकर बैठी हुई थी। दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की राज्य सरकार ने अपने पहले ही विधानसभा अधिवेशन में यह रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। वैसे भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान किया गया अपना वादा पूरा किया है। केजरीवाल चिल्ला-चिल्ला कर बोल रहे थे कि मोदी उनसे डरते हैं इसलिये झूठा केस बनाकर उन्हें जेल में डाल दिया है जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें अदालत ने जेल में डाला था और अदालत ने ही जमानत दी थी ।

कैग की रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि केजरीवाल सरकार ने अपने शासन में पूरी मनमानी करते हुए जनता के पैसों का दुरुपयोग किया है और इसके अलावा जबरदस्त तरीके से जनता के पैसे की चोरी की है। सवाल यह पैदा होता है कि केजरीवाल ऐसी हिम्मत कहाँ से लाये जो वो सरेआम देश की जनता को धोखा देते रहे और साथ-साथ कट्टर ईमानदार होने का ढिंढोरा भी पीटते रहे । कमाल की बात तो यह है कि वो न केवल खुद को कट्टर ईमानदार घोषित करते रहे बल्कि अपने साथियों को भी कट्टर ईमानदार और कट्टर देशभक्त होने का सर्टिफिकेट बांटते रहे । उन्होंने कई बात यह मांग की कि दिल्ली के शिक्षा मॉडल के लिए मनीष सिसोदिया को और दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सत्येंद्र जैन को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाना चाहिए । उनका बस चलता तो वो खुद को भारत रत्न दे देते लेकिन वो उनके हाथ में नहीं था । केजरीवाल अपने नेताओं को राजा हरिश्चंद्र से ज्यादा ईमानदार और शहीद भगत सिंह से ज्यादा बड़ा देशभक्त बताते थे । आज दिल्ली सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि जिस दिल्ली मॉडल का ढिंढोरा वो पूरी दुनिया में पीट रहे थे, वो कितना खोखला है ।

वास्तव में केजरीवाल अपने झूठ की फैक्ट्री इसलिए चलाते रहे क्योंकि उन्होंने दिल्ली सरकार के विज्ञापनों के माध्यम से करोड़ो रूपये मीडिया पर लुटा दिए थे। विज्ञापनों से होने वाली कमाई बंद होने के डर से देश का मीडिया उनके खिलाफ खबरें नहीं दिखाता था लेकिन इसके बावजूद वो मीडिया में अपने खबरें रोक नहीं पाये । केजरीवाल सोचते थे कि वो कुछ भी करें लेकिन देश का मीडिया जब उनकी खबरें नहीं दिखायेगा तो जनता को उनके घोटालों का पता नहीं चलेगा । जो पार्टी पारदर्शिता की दुहाई देती थी, उसकी सरकार ने सीएजी की रिपोर्ट को दबाकर रखा ताकि जनता तक उसकी सच्चाई नहीं पहुंच सके । संविधान की बात करने वाली पार्टी कैग जैसी संवैधानिक संस्था से बचती रही । केजरीवाल राजनीति को बदलने आये थे और उन्होंने राजनीति को ऐसे बदला कि वो खुद को दिल्ली का मालिक मानने लगे । वो भूल गये कि लोकतंत्र में सिर्फ जनता मालिक होती है, इसलिए 2025 के चुनाव में जनता ने उनकी सही जगह उन्हें दिखा दी है । खुद को दिल्ली का मालिक समझने वाले केजरीवाल सोचते थे कि वो कुछ भी कर सकते हैं जबकि दिल्ली तो पूरा राज्य भी नहीं है । हमारे संविधान में ऐसी कई व्यवस्थाएं हैं जिनके कारण कोई भी सरकार पूर्ण रूप से मनमानी नहीं कर सकती लेकिन केजरीवाल ऐसा करने की कोशिश करते रहे ।

2024 के लोकसभा चुनाव में केजरीवाल ने जनता से कहा कि अगर वो उन्हें दिल्ली की लोकसभा की सभी सात सीटों पर जीत दिला देती है तो उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें एक भी सीट नहीं दी । इससे स्पष्ट हो जाता है कि दिल्ली की जनता ने तो उन्हें 2024 में ही जेल जाने के लिए छोड़ दिया था । सीएजी की रिपोर्ट पेश करने पर आम आदमी पार्टी ने विधानसभा में जबरदस्त हंगामा किया है जिसके कारण स्पीकर को इस पार्टी के 21 विधायकों को सदन से निलंबित करना पड़ा है । मतलब साफ है कि आम आदमी पार्टी अभी भी इस रिपोर्ट को देश के सामने नहीं आने देना चाहती है ।

सीएजी रिपोर्ट में कुछ ऐसी बातें हैं कि अगर सरकार उनके खिलाफ कार्यवाही करती है तो उन्हें लंबी अवधि के लिए जेल जाना पड़ सकता है । शराब नीति के कारण दिल्ली सरकार को 2000 करोड़ रुपये के राजस्व की हानि हुई है क्योंकि सरकार ने इस नीति में जबरदस्त तरीके से मनमानियां की हैं । शराब नीति बनाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह ली गई लेकिन उन्हें माना नहीं गया । जिन कंपनियों की शिकायत थी और घाटे में चल रही थी, उन्हें लाइसेंस दे दिये गये । कई बड़े फैसलों पर कैबिनेट और एलजी की मंजूरी नहीं ली गई और शराब नीति के नियमों को विधानसभा में पेश नहीं किया गया । कोविड के नाम पर बिना किसी जरूरत के 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी गई । जहां शराब की दुकानें खोलने की अनुमति नहीं थी, वहां भी दुकानें खोल दी गई ।

जिस मोहल्ला क्लीनिक की सफलता का केजरीवाल पूरी दुनिया में ढिंढोरा पीट रहे थे, उसकी सच्चाई भी कैग रिपोर्ट ने देश के सामने रख दी है । रिपोर्ट कहती है कि 218 में से 41 मोहल्ला क्लिनिक स्टाफ की कमी के कारण 15 से 23 दिन तक बंद रहते थे । 2017 तक 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का दावा करने वाली सरकार ने 31 मार्च 2023 तक सिर्फ 523 मोहल्ला क्लीनिक ही खोले थे । कैग रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मोहल्ला क्लीनिकों में बुनियादी चिकित्सा उपकरणों जैसे बीपी मॉनिटरिंग,पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, थर्मामीटर, एक्सरे व्यूवर आदि की कमी पाई गई । 74 मोहल्ला क्लीनिकों में आवश्यक दवाएं भी नहीं थी । अक्टूबर, 2022 से मार्च 2023 की अवधि के दौरान मोहल्ला क्लीनिक में आने वाले 70 प्रतिशत मरीजों को देखने में एक मिनट से भी कम समय लगा । आप स्वयं विचार कीजिए कि एक डॉक्टर कैसे एक मरीज को एक मिनट से भी कम समय में देखकर दवा लिख सकता है । इसका मतलब साफ है कि मोहल्ला क्लीनिक के नाम पर जनता को मूर्ख बनाया गया है । बिना थर्मामीटर के मरीज का बुखार कैसे चेक किया गया होगा । अजीब बात है कि जिन मोहल्ला क्लीनिकों में आवश्यक सुविधाएं तक नहीं थी, उनका पूरी दुनिया में प्रचार किया गया ।

केजरीवाल के मुख्यमंत्री निवास जिसे शीश महल की संज्ञा दी गई, उनको लेकर कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली लोक निर्माण विभाग ने बंगले का दायरा 1397 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1905 वर्ग मीटर कर दिया । बंगले की निर्माण लागत अनुमान राशि से 342 प्रतिशत ज्यादा हो गई । इसका मतलब है कि केजरीवाल सरकार ने बंगले पर अनुमान से साढ़े तीन गुना ज्यादा राशि खर्च कर दी । बड़ी हैरानी की बात है कि टेंडर राशि से 290 प्रतिशत ज्यादा राशि का भुगतान कर दिया गया । मैं स्वयं सीपीडब्ल्यूडी में काम कर चुका हूं इसलिए मेरे लिए ज्यादा हैरानी की बात है कि ये कैसे हो सकता है । टेंडर राशि से 15-20 प्रतिशत ज्यादा राशि खर्च की जा सकती है लेकिन 290 प्रतिशत तो संभव ही नहीं है । इसी प्रकार अनुमानित राशि से ज्यादा से ज्यादा डेढ़ गुना खर्च होते मैंने देखा है लेकिन साढ़े तीन गुना तो संभव ही नहीं है । इसका मतलब साफ है कि इस मामले में केजरीवाल ने लोक निर्माण विभाग के अफसरों के साथ मिलकर जबरदस्त घोटाला किया है ।

इस रिपोर्ट में इतना कुछ है कि एक लेख में लिखना संभव नहीं है लेकिन आम आदमी पार्टी इस रिपोर्ट को भी झुठलाने की कोशिश करने वाली है । दिल्ली में भाजपा सरकार को बने सिर्फ एक सप्ताह हुए हैं लेकिन आम आदमी पार्टी शोर मचा रही है कि दिल्ली की महिलाओं को 2500 रुपये कब दिये जायेंगे जबकि पंजाब में उनकी सरकार बने तीन साल बीत चुके हैं लेकिन महिलाओं को 1000 रुपये देने वाली बात पर यह पार्टी चुप है । भाजपा सरकार केजरीवाल और उसके नेताओं को कोई रियायत देने वाली नहीं है । आने वाले समय में आम आदमी पार्टी के नेताओं को अपने किये कारनामों का भुगतान करना होगा । दिल्ली सरकार के हर विभाग में घोटालों की खबरें आ रही है और भाजपा सरकार इनकी जांच करने वाली है । केजरीवाल और उनके साथियों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है ।

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