संसद में हुई संविधान पर जोरदार बहस : प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी फॉर्म में आकर किया विपक्ष पर हमला

narendra modi

गाजियाबाद ( ब्यूरो डेस्क )कांग्रेस ने संविधान पर बहस कराकर एक बार फिर अपनी फजीहत करा ली है। उम्मीद की जाती थी कि संविधान पर बहस करने के मुद्दे को कांग्रेस के नेता राहुल गांधी अपने पक्ष में भुनाने में सफल होंगे। इस बहस के बहाने वह भाजपा के उन सभी प्रयासों की पोल खोलेंगे, जिससे यह सिद्ध हो कि वह संविधान की उपेक्षा करते हुए या संवैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से उनकी व्याख्या कर रही है और संविधान के प्रावधानों के विपरीत जाकर व्यवस्था को अपने ढंग से हांकने का काम कर रही है। परन्तु उनके भाषण ने सबको निराश कर दिया। लगभग 25 मिनट के अपने भाषण में उन्होंने इधर-उधर की बातें तो कि परंतु कोई कोई तोड़ मुद्दा वह नहीं उठा पाए। जबकि सदन के नेता प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए राहुल गांधी समेत सारे विपक्ष के खोखले भाषणों की पोल खोल दे। उन्होंने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने सत्ता में रहते हुए संविधान और संवैधानिक तंत्र का न केवल दुरुपयोग किया बल्कि संविधान को अपने ढंग से अपने पक्ष में तोड़ने मोड़ने का भी काम किया। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, उनकी बेटी इंदिरा गांधी और फिर इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी की सरकारों के समय में हुए संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा करते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश ऐसे संशोधन थे जो कांग्रेस पार्टी ने अपने स्वार्थ के लिए किए थे। इन संवैधानिक संशोधनों से देश की जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ था।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने 50 मिनट के भाषण में कहा कि हमारा देश बहुत तेज गति से विकास कर रहा है। भारत बहुत जल्द विश्व की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी सरकार के संकल्प को देश का संकल्प बताते हुए कहा कि यह 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प है कि जब हम आजादी की शताब्दी बनाएंगे, हम देश को विकसित भारत बनाकर रहेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के संविधान निर्माताओं की भावनाओं के विपरीत जाकर कांग्रेस ने धारा 370 को संविधान में असंवैधानिक ढंग से स्थापित करवाया था। इसके बाद बहुत ही गलत ढंग से धारा 35 ( a) को संविधान में जोड़ दिया गया । प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि जिस समय इस धारा को संविधान में जोड़ा गया उस समय की सरकार अंतरिम सरकार के रूप में काम कर रही थी और उस सरकार ने संसद को बिना विश्वास में लिए ही राष्ट्रपति के माध्यम से इस धारा को संविधान में जुड़वा दिया था। जबकि उस समय देश की चुनी हुई सरकार काम नहीं कर रही थी, यह एक कार्यकारी मंत्रिमंडल था। जिसे किसी प्रकार का नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं था। प्रधानमंत्री ने कहा कि धारा 370 देश की एकता पर रुकावट था, इसलिए धारा 370 को हमने जमीन में गाड़ दिया।
1975 में जब देश में तत्कालीन इंदिरा सरकार ने आपातकाल लागू किया तो उस घटना को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश संविधान के 25 वर्ष पूरे कर रहा था, उसी समय हमारे संविधान को नोंच दिया गया, आपातकाल लाया गया। संवैधानिक व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिया गया, देश को जेलखाना बना दिया गया, नागरिकों के अधिकारों को लूट लिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को ताला लगा दिया गया, कांग्रेस के माथे पर यह जो पाप है वह धुलने वाला नहीं है।
“1952 में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को एक चिट्ठी लिखी थी। उस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था, ‘अगर संविधान हमारे रास्ते के बीच में आ जाए तो हर हाल में संविधान में परिवर्तन करना चाहिए’। 1951 में ये पाप किया गया लेकिन देश चुप नहीं था। उस समय के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें चेताया कि ये गलत हो रहा है, लेकिन पंडित जी का अपना संविधान चलता था और इसलिए उन्होंने इतने वरिष्ठ महानुभावों।की सलाह मानी नहीं। ये संविधान संशोधन करने का ऐसा खून कांग्रेस के मुंह लग गया कि समय-समय पर वो संविधान का शिकार करती रही.”
जो परंपरा नेहरू जी ने शुरू की थी, इस गलत परंपरा को आगे चलकर इंदिरा जी ने आगे बढ़ाया। राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने संविधान को एक और झटका दिया। संविधान द्वारा देश के नागरिकों को दी गई सबको समानता, सबको न्याय की भावना को चोट पहुंचाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो का फैसला सुनाया था, लेकिन उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की भावना को नकार दिया। उन्होंने वोट बैंक की खातिर संविधान की भावना की बलि चढ़ा दी और कट्टरपंथियों के सामने सर झुकाने का काम किया।”
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नेताओं द्वारा ‘ संविधान संविधान’ चिल्लाते रहने की प्रवृत्ति पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि करीब 6 दशक में 75 बार संविधान बदला गया। जो बीज देश के पहले प्रधानमंत्री जी ने बोया था ,उस बीज को खाद-पानी देने का काम एक और प्रधानमंत्री ने किया, उनका नाम था श्रीमति इंदिरा गांधी। 1971 में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया था, उस फैसले को संविधान बदलकर पलट दिया गया था, 1971 में संविधान संशोधन किया गया था। उन्होंने हमारे देश की अदालत के पंख काट दिए थे।”
370 के बारे में तो सबको पता है लेकिन 35-ए के बारे में पता बहुत कम है। भारत के संविधान का अगर कोई पहला पुत्र है तो ये संसद है लेकिन उसका भी इन्होंने गला घोटने का काम किया। 35-ए को संसद में लाए बिना उन्होंने देश पर थोप दिया. राष्ट्रपति के आदेश पर ये काम किया गया और देश की संसद को अंधेरे में रखा गया।
“कांग्रेस को एक शब्द बहुत प्रिय है। उनका सबसे प्रिय शब्द है – ‘जुमला’। देश को पता है हिंदुस्तान में अगर सबसे बड़ा जुमला कोई था और वह 4 पीढ़ी ने चलाया, वह जुमला था – ‘गरीबी हटाओ’. यह ऐसा जुमला था, जिससे उनकी राजनीति की रोटी तो सेकी जाती थी लेकिन गरीब का हाल ठीक नहीं होता था।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी परिवार पर हमला करते हुए कहा, कांग्रेस के एक परिवार ने 55 साल राज किए. हर स्तर पर इस परिवार ने संविधान को चुनौती दी। इस परिवार के कुविचार, कुनीति लगातार चल रही है। कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को चोट पहुंचाई। पीएम मोदी ने आगे कहा, कांग्रेस के मुंह संविधान संशोधन का खून लग गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर हमला करते हुए, अध्यादेश फाड़ने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, अहंकार से भरे लोगों ने कैबिनेट का फैसला फाड़ा था। राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा, एक अहंकारी व्यक्ति ने अध्यादेश फाड़ा था।कांग्रेस ने हर मौके पर संविधान की मूल भावना को चोट पहुंचाई. संविधान से खिलवाड़ करना इनकी आदत है।
प्रधानमंत्री मोदी जब कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं पर जमकर हमला कर रहे थे ,उस समय राहुल गांधी का चेहरा देखने लायक था। यद्यपि उन्होंने अपने लगभग 25 मिनट के भाषण में भाजपा को खरी खोटी सुनाने का भरपूर प्रयास किया, परंतु उनके तरकश में कोई ऐसा तीर नहीं था जो सीधे सरकार के कलेजा में जाकर लगता और वह घायल होते हुए दिखाई देती। यदि विश्लेषकों की मानें तो राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पटकनी देने का एक और अवसर खो दिया है और अभी कुछ समय पहले लोकसभा चुनावों के पश्चात प्रधानमंत्री मोदी जिस प्रकार आत्मविश्वास खोते हुए दिखाई दे रहे थे, वह 14 दिसंबर को हुई बहस के समय अपनी पूरी फॉर्म में आकर हमले पर हमला करते जा रहे थे। जिससे लग रहा था कि उनका आत्मविश्वास लौट आया है।

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