8 सितम्बर विश्व साक्षरता दिवस पर विशेष-   महिलाओं में भी साक्षरता व शिक्षा का विस्तार हो

hq720 (1)

 

     – सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत” 

एवी के न्यूज सर्विस

 

 

साक्षरता और अंततः शिक्षा आज हमारी एक महती आवश्यकता और व्यक्तित्व निर्माण सर्वांगीण विकास के लिए एक अत्यंत आवश्यक जरूरत है। सर्वप्रथम तो सवाल उठता है कि शिक्षा हम मनुष्यों के जीवन में – क्यों आवश्यक है और साक्षरता एवं शिक्षा को क्यों महत्व दें? इसके उत्तर में हम कह सकते हैं कि शिक्षा (साक्षरता ) हमें राष्ट्र समाज, समुदाय और अंततः परिवार मे प्रेम, सहृदयता, सहयाग, साहनुभूति, इमानदारी, व्यक्तित्व निर्माण, कर्तव्यपालन आदि सदगुणों से परिचय कराती है। अब सवाल उठता है। कि साक्षरता क्या सिर्फ पुरुषों की बपौती है क्या महिलाओं को साक्षर होने का अधिकार नहीं है? मानवता का संदेश देने वाले ‘ आचार्य विनोबा भावे’ का इस संबंध में कथन है। शिक्षा जीवन के बीच से आनी चाहिए और साक्षरता का अधिकार स्त्री पुरुषों को समान रूप से प्राप्त होना चाहिए’ अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2024 की थीम “बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना: आपसी समझ और शांति के लिए साक्षरता” है। ये थीम संचार को बढ़ावा देने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच आपसी समझ को प्रोत्साहित करने के लिए कई भाषाओं में शिक्षा प्रदान करने के महत्व पर केंद्रित है।

 पिछले कुछ वर्षों से महिला साक्षरता शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह एक बेहद सुखदकारी स्थिति है। अंतराष्ट्रीय बालिका वर्ष में भी बालिकाओं को शिक्षा की दिशा में प्रशंसनीय कार्य हुआ था किंतु इन सबसे भी ऊपर बालिका शिक्षा के लिए वर्ष 1660 को ही सुखद स्मृति के रूप में याद किया जायेगा जिसके तहत ‘दत्तक पुत्री शिक्षा योजना’ बालिका साक्षरता अभियान ‘महिला आक्षरता’ में अत्यधिक ध्यान देकर इन्हें कार्यरूप प्रदान किया गया। जिसे इस योजना का लाभ उठाकर आज ऐसी अनेक महिलाएं निरक्षरता के गहन अंधकार से बाहर निकल सकीं हैं जो आर्थिक अभाव के कारण या तो कभी स्कूल जा ही नहीं पाती या जाती भी हों तो उन्हें बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी। कमोवेश छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों में भी बालिकाओं की यही स्थिति है।

    एक अनुमान के अनुसार देश मे सैंतीस प्रतिशत से भी अधिक ऐसी महिलाएं हैं जो परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से अपनी स्कूली शिक्षा तक पूरी नहीं कर पाती। अनेकों महिलाऐं तो कभी स्कूल का मुंह भी नहीं देख पाती। छोटे जिलों या कस्बों में हालांकि इस दिशा में जन जागृति आनी अभी बाकी है किंतु इस दिशा में सरकार. संस्थाओं के प्रयास निरंतर चल रहे हैं देखें वे अपने उद्देश्य में कहां तक सफलीभूत होती है ।

      इतना तो हम जानते ही हैं कि साक्षरता समाज की संस्कार व्यवस्था है। आज का समाज एक प्रतियोगी श्रेष्ठता की स्थापना इसके लिए ये परम आवश्यक है कि एक प्रतियोगी को जन्म देने वाली माता जो उसे पालती पोसती है बड़ा करती है। उसमें भी श्रेष्ठता का गुण अनिवार्य होना जरुरी है जैसे टेढ़े मेढ़े पौधे की लकड़ी कोई काम की नहीं होती, अर्थात जब एक महिला ही सुसंस्कत नहीं हो पायेगी तो वह श्रेष्ठ प्रतियोगी और संस्कारवान भविष्य कैसे दे सकती है- ‘मुझे सुशिक्षित माताएं मिले तो मैं एक सुदृढ राष्ट्र का निर्माण कर सकता हूं।’ नेपोलियन की यह उक्ति आज भी प्रासंगिक है जितनी की कल किसी राष्ट्र के सुदृढ़ निर्माण मे सुशिक्षित और सुसंस्कति महिलाओं की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है ।

     ज्ञान की पहली सीढ़ी साक्षरता है। मानवता में मानवीय गुणों का आविर्भाव भी साक्षरता से संभव है । इस दृष्टि से इसे जीवन का मार्ग दर्शी प्रकाश भी निरुपित किया गया है । आशा है महिलाओं में पूर्ण साक्षरता के माध्यम से निरक्षरों के उत्थान में समुचित राष्ट्र उत्थान के लिए नई ज्योंति का जो ज्योतिपुंज प्रज्जवलित किया गया है। वह अब निरंतर गतिशील और प्रकाशवान रहेगा।

    इस दिशा में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के निर्देशानुसार महिला कार्यशाला का भी आयोजन जगह जगह किया जा रहा है पूरे देश में। इसमें देश की प्रतिष्ठित अनेक महिलाओं ने अपनी भागीदारी के साथ समाज में उनकी स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में विशेष काम किया है।

      अंतत अपनी बात अभी तक तो हमने महिलाओं में (शिक्षा) साक्षरता समान रूप से दिये जाने की दिशा में जो कुछ भी सफलता पायी है वह तो कुछ भी नहीं है यह तो सिर्फ शुरुवाती पहल है। अभी तो हमें बहुत कुछ करना बाकी है। महिलाओं में समान रूप से साक्षरता के माध्यम से बाकी है, देश को सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में द्रुतगति से आगे बढ़ाना होगा और समस्त जन खुशहाल शिक्षित और स्वस्थ हो ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना होगा। महिला साक्षरता (शिक्षा) के माध्यम से देश की सर्वांगीण विकास पर भी जोर देना चाहिए। इस संबंध में में सबसे ज्यादा जोर देश में शत प्रतिशत साक्षरता तथा शारीरिक क्षमताओं में वृद्धि पर भी देना चाहूंगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि महिलाओं में साक्षरता नाममात्र की हो उसके साथ उपयोगी शिक्षा को भी जोड़ा गया। कैसी योजनाएं व लक्ष्य बनाये जायें कि अमुक सन् तक देश के सभी जन कम से कम प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर जायें तथा अमुक सन् तक सभी कम से कम माध्यमिक शिक्षा पायें हुए हों । 

     मेरा यह मतलव नहीं कि शासन अन्य सभी कार्य छोड़कर केवल इसी में लग जाये। अन्य योजनाएं व कार्यक्रम भी अवश्य चलते रहें। पर सर्वाधिक प्रधानता महिलाओ में साक्षरता को ही देनी चाहिए एक शिक्षित देश राज्य यहां तक कि शिक्षित महिला ही देश के सर्वागिण विकास को तेज कर सकती है। और इसके लिए हम आप सभी को प्रयत्न करना ही होगा। 

 

      -सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत”

एवी के न्यूज सर्विस

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vipslot giriş
vipslot giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
aresbet giriş
aresbet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
Grandpashabet Giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
vipslot giriş
vipslot giriş
orisbet giriş
orisbet giriş
bahiscasino giriş
bahiscasino giriş
perabet giriş
perabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş