images (16)

Dr D K Garg

एक बार पुरुरवा की मुलाकात उर्वशी नामक अप्सरा से हुई और दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे। पुरुरवा ने उसे अपनी पत्नी बनने के लिए कहा, लेकिन वह दो शर्तों पर राजी हो गई। सबसे ज़्यादा दोहराई जाने वाली शर्तें ये हैं कि पुरुरवा उर्वशी की पालतू भेड़ों की रक्षा करेंगे और वे कभी एक दूसरे को नग्न अवस्था में नहीं देखेंगे (प्रेम-क्रीड़ा के अलावा)।
पुरुरवा ने शर्तें मान लीं और वे खुशी-खुशी रहने लगे। इंद्र को उर्वशी की याद आने लगी और उसने ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कीं जहाँ शर्तें टूट गईं। सबसे पहले उसने भेड़ों का अपहरण करने के लिए कुछ गंधर्वों को भेजा, जब वे दोनों प्रेम कर रहे थे। जब उर्वशी ने अपने पालतू जानवरों की चीखें सुनीं, तो उसने पुरुरवा को अपना वादा न निभाने के लिए डांटा। उसके कठोर शब्द सुनकर पुरुरवा भूल गया कि वह नंगा था और भेड़ों के पीछे भागा। तभी, इंद्र ने बिजली चमकाई और उर्वशी ने अपने पति को नग्न देखा। घटनाओं के बाद, उर्वशी स्वर्ग लौट गई और पुरुरवा को दिल टूटा हुआ छोड़ गई। उर्वशी धरती पर आती थी और पुरुरवा को कई बच्चे पैदा करती थी, लेकिन वे पूरी तरह से फिर से नहीं मिल पाए

विश्लेषण : वेद मंत्रों में कोई इतिहास नहीं है। वेद मंत्रों के अनुसार वसिष्ठ कोई आदमी नहीं हुआ, न उर्वशी आदि ही कोई देहधारी जीव है। इसी प्रकार से अगस्त्य = अग+पर्वत, यहाँ अचल रूप से स्थिर जो प्रजाओं में नाना अज्ञान, उपद्रव विघ्न हैं वे ही अग रूप हैं, उन्हें जो विध्वंस करे वह अगस्त्य ” अगान् विध्रान् अस्यति विध्वंसयति यः सोऽगस्त्यः ” । ऋग्वेद में आया है कि अगस्त्यो यत्त्वा विश आजभार । ७ । ३३ । १० ॥
प्रजाओं के समस्त विघ्नों को विध्वस्त कर देते हैं, अत: प्रचार वा प्रचारक मण्डल का नाम यहाँ अगस्त्य कहा है। उर्वशी जिसको बहुत आदमी चाहें वह उर्वशी “याम् उरवो वहव उशन्ति कामयन्ते सा उर्वशी ” । पाठशाला, न्यायशाला आदि संस्थाओं को जहाँ-जहाँ बहुत आदमी मिलकर स्थापित करना चाहते हैं वहाँ-वहाँ ब्रह्मक्षत्रसभा की ओर से वह वह संस्था स्थापित होती है । अतः यहाँ संस्था का नाम उर्वशी है ।
किसी प्राकृतिक और वैज्ञानिक तथ्य को सरल, सुगम और सुबोध ढंग से पाठकों तक पहुंचाने के लिए वेदों में यत्र-तत्र कथानकों और उपाख्यानों का सहारा लिया गया है और इन रूपकात्मक आख्यानों में किसी वास्तविक घटना या ऐतिहासिक वृत्तान्त की तलाश करने में जुट गये। परिणाम में उन्होंने बात का बतंगड़ बना दिया और इन काल्पनिक कथानकों ने सत्य और नित्य प्राकृतिक इतिहास को गायब कर दिया। यही सचाई पुरुरवा और उर्वशी के उपाख्यान के साथ हुई।
पुरुरवा और उर्वशी शब्द ऋग्वेद मंत्र 5/41/19 में आये है —
उर्वशी वा बृहद्दिवा गृणानाभ्यूर्ण्वाना प्रभृथस्यायोः
ऋग्वेद के दशम मण्डल का ९५वां सूक्त पुरुरवा तथा उर्वशी का संवाद सूक्त है। उर्वशी को अप्सरा माना गया है जबकि पुरुरवा को प्रतिष्ठानपुरी का राजपुत्र कहा गया है। किन्तु ऋग्वेद में आये उर्वशी एवं पुरुरवा के संवादों से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि ये अप्सरा या राजपुत्र हैं। आचार्य सायण ने अप्सरा का अर्थ विद्युतरूपी स्त्री किया और उसे चंचल चित्त नारी का पर्याय बताया। स्वामी दयानन्द के पूर्व- कालिक अनेक विद्वानों तथा कतिपय पाश्चात्य वेदज्ञों ने भी इन्हें मानवशरीर धारी मानने से इन्कार किया है। अतः पुरुरवा- उर्वशी कथानक को असफल प्रेमकथा मानना उचित नहीं है।कुछ विद्वानों ने पुरुरवा को सूर्य और उर्वशी को विद्युत् लिखा है। अतः इनको प्राकृतिक पदार्थ माना जाना चाहिए। स्वामी दयानन्द ने नैरुक्त प्रक्रिया को अपनाते हुए पुरुरवा को यज्ञ और विद्वान् के अर्थ में लिया जब कि उर्वशी को यज्ञक्रिया, प्रज्ञा, वाणी और विद्या का प्रतीक बताया। पं० शिवशंकर शर्मा ने वैदिक इतिहासार्थ निर्णय में इन्हें ऊषा और सूर्य का प्रतीक माना है। पं० श्रीपाद दामोदर सातवलेकर ने उर्वशी को चंचल विद्युत बताया।

जहां तक इस उपाख्यान से प्राप्त होनेवाले संदेश या उपदेश का सम्बन्ध है यह निस्संकोच कहा जा सकता है कि इसमें जहां प्राकृतिक दृश्य का चित्रण किया गया है वहां सामान्य स्त्री-पुरुष के शाश्वत काम सम्बन्धों की भी विवेचना की गई है। प्राकृतिक पक्ष के विवेचन में कहा जा सकता है कि गर्जनशील पर्जन्य (बादल) पुरुरवा है और उसके मध्य में चमकने वाली विद्युत (बिजली) उर्वशी है , जिनके मेल से वृष्टि और वृष्टि से अन्न पैदा होता है।
इस सूक्त के मन्त्र ३ से यह शिक्षा मिलती है कि `कामिनी आसक्त ‘ व्यक्ति में वीरता की भावना नष्ट हो जाती है ,और उसमे बल वेग नहीं रहता। इस कथा से दाम्पत्य जीवन को संयम युक्त, मर्यादा पूर्ण व्यतीत करने की शिक्षा मिलती है। मनुष्य के लिए उचित है कि वह चंचल चित्त वाली रूपसियों के हास-विलास से दूर रहे। मन्त्र १५ में कहा है की वैश्याएं किसी की मित्र नहीं होती ,क्योकि उनकी मित्रता भेड़ियों के सामान क्रूर और धोखा देने वाली होती है। यह वाक्य उर्वशी ने स्त्री होते हुए कहा है। इस कथा से भी यही अभिप्राय निकलता है कि अप्सराएं तथा गन्धर्व जन (हास विलास तथा संगीत के प्रेमी) स्वभावतः श्रृंगारी वृत्ति वाले विलासी होते हैं। उनका प्रेम अस्थायी होता है। उर्वशी भी पुरुरवा को छोड़ कर चली जाती है। उसके प्रेम में गहराई नहीं है। ऐसी स्त्रियों की मैत्री स्थायी नहीं होती।
पुरुरवा-उर्वशी के उपाख्यान ने भावुक कवियों को मनमाने कथानकों की रचना के लिए प्रेरित किया। लेकिन ये सभी अलंकारिक काव्य है ,किसी विशेष जीवधारी से सम्बंधित नहीं है।

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
deneme bonusu
vaycasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş