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👉सैनिक कौन❓भारत के इसी समाज में पलकर 17- 20 साल की अल्हड़ उम्र में घर से निकला एक बच्चा, सख्त शारीरिक मानदंडों और अनुशासन के सांचे में ढलकर, भिन्न-भिन्न हथियारों का प्रशिक्षण पाकर, भारतीय सेना के लड़ाई के उचच् नियमो को पालन करने का जज़बा लेकर, जब देश की सीमाओं पर दुशमन से नज़र मिलाता है तो वह खुद को एक सैनिक पाता है और अपने आपको सबसे सौभाग्यशाली मानने लगता है l उसे यह एहसास दिलाया जाता है कि अब उसकी और उसके परिवार की सारी जिम्मेदारी प्रशासन और समाज की है और इसके बदले उसे देश के दुश्मनों को आगे बढ़ने से और देश को नुकसान पहुंचाने से, अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर भी रोकना और बरबाद करना है, जिसे वह सहर्ष स्वीकार करता है और जल, थल, वायु जहां भी भेजा जाएगा, कहीं भी, कभी भी, जाने की शपथ लेता है l
👉इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि भारतीय सेना दुनिया की श्रेष्ठतम सेना है l क्योंकि भारत वीरों और वीरांगनाओं की भूमि है और भारत का इतिहास अनेकों वीर-गाथाओं से भरा पड़ा
है l भारतीय सेना इन्हीं वीर-गाथाओं से प्रेरणा लेती है l सारागढ़ी से लेकर दूसरे विश्व युद्ध, रिजांगला, कारगिल तक और देश की आंतरिक सुरक्षा में तैनात भारतीय सैनिकों ने देश के दुश्मनों के सामने अपनी प्रचंड वीरता का प्रदर्शन कर, अपने शौर्य का लोहा मनवाया है l तभी तो कहा जाता है कि “72 हूरों की ख्वाहिश रखने वालों और 72 हूरों का मिलन” भारतीय सेना ही करवा सकती
है l
👉जैसे-जैसे समय गुजरता है उसकी युवावस्था और सेना की वर्दी एक दूसरे का भरपूर साथ निभाते हैं l परंतु यह साथ ज्यादा समय नहीं चल पाता और भरी जवानी में उस सैनिक को रिटायर होना पड़ता है वह भी ऐसे वक्त में जब परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उसपर सबसे ज्यादा होता
है l ऐसे ही मुशकिल वक्त में प्रशासन और समाज उसका साथ छोड़ते जान पढ़ते हैं l जरा सोचिए जिस बहादुर सैनिक ने कभी तरह-तरह के आधुनिक हथियार/उपकरण चलाकर, आज की तकनीक अपनाकर, तकनीकी लड़ाई लड़कर दुश्मन को धूल चटाई हो, बड़े दुख का विषय है कि नौकरी के नाम पर उसे सिर्फ चौकीदार/गार्ड के काबिल ही समझा जाता है l
👉एक और बहुत बड़ा प्रश्न आज हम सबके सामने है, और वह है, जिन वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनके परिवारों/वीर-नारियों, वीरता पदक विजेताओं और उन सैनिकों जिन्होंने अपनी जवानी वर्दी/देश के नाम कर दी, उनकी देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है❓ कहते हैं जो राष्ट्र अपने सैनिकों की देखभाल/सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता वह राष्ट्र अपनी खुद की सुरक्षा खतरे में डाल देता है l हालांकि मेरा यह मानना है कि सैनिकों को अपनी खुद की सुरक्षा के लिए किसी का मोहताज नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो “एक बार सैनिक होता है वह ताउम्र सैनिक” रहता है और “सैनिक सुरक्षा देनेवाले होते हैं मागंनेवाले नहीं” l लेकिन उसके लिए पहला कदम है उनका आपस में “अनुशासन में और संगठित होकर रहना” l जिसके लिए हम सैनिकों को आत्म-मंथन और गहन सोच विचार करना होगा और हम करेंगे l जरा सोचिए हम भारत के सैनिक जात-पात, उचं-नीच, थर्म-पथं से परे भारत के हर गावं, हर शहर, हर कोने में रहते हैं और गर्व से कहते हैं कि हम “सिर्फ और सिर्फ भारत के सैनिक हैं किसी पार्टी, जाति या धर्म विशेष” के नहीं l “भारत ही हमारी माता है और भारत ही हमारा धर्म” l
👉अभी हाल ही में कुछ ऐसी घटनाएं घटी हैं जो बेहद चिंताजनक हैं और उनपर विचार करना और ऐसे कदम उठाना आवश्यक हो गया है l ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाएं होने से रोकी जा सकें l राष्ट्र के सैनिकों पर पत्थरबाजी का काला धब्बा अभी तक धूमिल नहीं हुआ था कि जयपुर और मण्डी (गावं कैहनवाल) जैसी शर्मनाक घटनाएं हो जाती हैं l किसी मुदद्दे पर बिवाद होना कोई नई बात नहीं लेकिन एक सैनिक को उठाकर कमरे में ले जाना, पिटाई करके लहू-लुहान कर देना बेहद चिंता-जनक है और उससे भी ज्यादा शर्मनाक और चिंताजनक पुलिस का उदासीन रवैया है l
👉यकीन मानिए यह होता रहा है और आगे भी होता रहेगा l पुलिस प्रशासन और सरकारों का यह निरंकुश रवैया तब तक चलता रहेगा जब तक “हम सैनिक समाज अपने खुद के अंदर नहीं झांकते और संगठित होकर नहीं रहते” (ESM League) l हमें इस बात को समझना होगा कि “संगठन में ही शक्ति” है l संगठित समाज के साथ ऐसी घिनौनी हरकत करने से पहले कोई भी व्यक्ति 10 बार सोचता है l क्या आपने कभी मुस्लिम समाज, आर एस एस, बजरंग दल, शिव सैनिकों, करणी-सेना के साथ पुलिस/प्रशासन का ऐसा शर्मनाक और उदासीन रवैया सुना है ❓ और याद रहे हम सैनिक भारत के हर शहर में, हर गांव में, हर कोने में रहते हैं l इसलिए,
“जागो सैनिक, अब तो जाग जाओ” l
👉प्रशासन, सरकार से आग्रह है कि वह इस प्रक्रिया में हम सैनिकों का साथ दें और न्याय करें l “सैनिक समाज एक अनुशासित वर्ग” है और हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन/सरकार हम सैनिकों को उग्र होने का अवसर नहीं देंगे l मेरा मानना है कि “प्रशासन और सरकार को हम सैनिकों के इस अनुशासित समाज का इस्तेमाल समाज/भारत को जोड़ने में करना चाहिए” ना कि तोड़ने में l मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता हूं कि मुझे भगवान ने 41 साल “विश्व की श्रेष्ठतम सेना, भारत की सेना की वर्दी पहनने और पवित्र भारत भूमि” की सेवा करने का अवसर दिया l
Col Tara Pratap Singh Rana(Re-Attired), ESM League, Mandi (HP)

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