दैनिक भास्कर : 15 अगस्त 1947 के दिन ऐसे छपा था अखबार,

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8 वर्ष पहले

नई दिल्ली. आज दैनिक भास्कर खबरों का प्रेजेंटेशन ठीक उसी रूप में कर रहा है, जिस तरह ये 15 अगस्त 1947 को प्रकाशित हुई थीं। यह नई पीढ़ी को आजादी के दिन से रूबरू कराने का प्रयास है। इसके जरिए हम लाखों बलिदानियों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ये आजादी के ऐतिहासिक महत्व, खुशी और बंटवारे के दर्द से जुड़ी विशेष खबरें हैं। 15 अगस्त 1947 के दिन अखबारों में ऐसी छपी थीं खबरें…
वंदे मातरम् के नारे, लोग सड़कों पर- देशभर में भाषण सुने जा सकें इसलिए प्रमुख चौराहों पर रेडियो सेट लगाए गए हैं
कलकत्ता में : बंगाल के नोआखली की हिंसा का असर पूरे बंगाल में है। बापू नोआखली के एक मुस्लिम घर में रुके हैं। सुहरावर्दी जो गांधीजी के आलोचक माने जाते हैं, को बापू ने कलकत्ता में शांति बहाल करने के लिए आमंत्रित किया। जबकि गुस्से से भरी भीड़ सुहरावर्दी को सबक सिखाने को आमादा थी। गांधी जी लिखने के लिए चले गए थे, लेकिन फिर शोर होने पर उन्होंने खिड़की खोली और गुस्से से भरे युवक से बहुत धीरे से बात की। एकदम शांति छा गई। बापू ने सुहरावर्दी के खिलाफ बात करने वाले युवक को डांट लगाई। उन्होंने कहा सुहरावर्दी अब हमारे साथी हैं। वे शांति लाना चाहते हैं। आप गांधी को स्वीकार रहे हैं, तो उनके मित्र को भी अपनाएं। सुहरावर्दी बोले कि पिछले साल कलकत्ते में हुई मौतों की जिम्मेदारी लेता हूं आैर मैं बहुत शर्मिंदा हूं। तभी पुलिस अधिकारी ने घोषणा की कि शहर के अन्य हिस्सों में हिंदू-मुस्लिम आजादी का आनंद मना रहे हैं। वहां जो भीड़ कत्लेआम पर आमादा थी, वह सड़कों पर शोरगुल करते हुए नाचने लगी।
मद्रास में : स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मद्रास प्रोविन्स में सड़कों पर लोग तिरंगा ओढ़े वंदे मातरम और जय हिंद के नारे लगाते रहे। बादल घने छाए थे और बिजली कड़क रही थी। इधर अखबारों में विज्ञापन देने वालों की भीड़ भी अचानक बढ़ गई। एलफिन्स्टन थिएटर में सारे शो रद्द कर दिए गए और कर्मचारियों को बोनस बांट दिया गया। शहर में हिंदू अखबार में छपे संपादकीय की भी बातें जोरों पर है कि अब फ्रांस और पुर्तगाल भी अपने उपनिवेश भारत से छोड़कर जाएंगे। मद्रास में सबसे अच्छी बात यह रही कि देश विभाजन को लेकर दंगे यहां नहीं हो रहे हैं। शहर में निषेधाज्ञा लगी जरूर है, लेकिन लोग प्रसन्नता से घूम रहे हैं। प्रमुख चौराहों पर रेडियो सेट लगाए गए, जिससे शपथ विधि, इंडिया गेट पर ध्वजारोहण की कमेंट्री को लोग सुन सकें। ऑल इंडिया रेडियो ने यह व्यवस्था कराई है। इस पर हफीज़ जलंधरी की कविताएं चलीं। मंदिरों में ईश्वर का धन्यवाद देने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। जेल के दरवाजे कई अपराधियों के लिए खोल दिए गए आैर कई आईएनए नेताओं को भी रिहा किया गया है।
बॉम्बे में : 74 साल पुराने बॉम्बे सिविल सेक्रेटेरिएट पर आधी रात को तिरंगा फहराया गया। बॉम्बे के लोगों ने एक-दूसरे को अल सुबह से स्वतंत्रता के लिए बधाइयां देनी शुरू कर दी। लोग सड़कों पर निकल आए। बीजी खेर ने ध्वज फहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि हम सभी स्वतंत्र भारत के नागरिक हैं और आप सब आजाद हैं। ध्वज फहराते समय बॉम्बे गवर्नमेंट के समस्त मंत्री और विभागीय प्रमुख मौजूद रहे। हजारों की तादाद में लोग सेक्रेटरिएट की ओर जा रहे हैं। भारी-भरकम पुलिस बल लगाया गया है, लेकिन वे उस भीड़ पर काबू नहीं पा सके, जो सेक्रेटरिएट की ओर जश्न मनाने के लिए बढ़ रही थी। आधी रात के बाद का जो वक्त है, वह वैसे भी मुंबई में पैदल चलने वालों का स्वर्ग माना जाता है, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कारों को
फुटपाथ पर चलाना पड़ा। ट्रैफिक के सारे नियम टूट गए। ट्राम और बसों में न केवल लोग दरवाज़ों पर लदे नजर आए, वरन वे इनकी छतों पर भी बैठे थे। सरकारी भवनों पर लाखों की संख्या में दीए लगाए गए।
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा- ‘अतीत बीत चुका है और भविष्य हमारी राह देख रहा है’
राजधानी दिल्ली सहित समूचा देश भारत की स्वाधीनता के यादगार घटनाक्रम का साक्षी बनने के लिए जाग रहा है। दिल्ली में संविधान सभा हाॅल के भीतर और बाहर शंखों की ध्वनि के बीच भारत की आजादी की घोषणा का अपूर्व उल्लास, उमंग और उत्साह के साथ स्वागत किया गया। महात्मा गांधी की जय के नारे चारों ओर गूंजे। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा में स्वतंत्रता का प्रस्ताव पेश करते हुए लोगों के दिल को स्पर्श करने वाला भाषण दिया। उन्होंने कहा, “कई वर्ष पहले हमने नियति से साक्षात्कार किया था। हमने एक संकल्प लिया था। अब उसे पूरा करने का समय आ गया है। इस अवसर पर हम देश और जनता की सेवा की नई शपथ और नया संकल्प लें। अगर हम अपनी जिम्मेदारियों के महत्व को नहीं समझेंगे तो हम अपने कर्तव्यों का निर्वाह पूरी तरह नहीं कर पाएंगे।” नेहरू ने कहा, “आधी रात को जब दुनिया सो रही होगी तब भारत जीवन और स्वाधीनता की नई सुबह के साथ जागेगा। स्वतंत्रता और शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी आती है। आजादी का जन्म होने से पहले हमने घोर कष्ट उठाए और उस दर्द की याद से हमारे दिल भारी हैं। फिर भी, अतीत बीत चुका है और भविष्य हमारी राह देख रहा है। भविष्य आराम करने का नहीं है, बल्कि लगातार प्रयास करने का है, ताकि हम अपने वचन पूरे कर सकें।” नेहरू द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन मुस्लिम लीग के चौधरी खालिक उज्जमान और डॉ. राधाकृष्णन ने किया। आम राय से पारित प्रस्ताव में भारत की आजादी और उसके ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का सदस्य रहने की घोषणा की गई।
महात्मा गांधी की जय के नारे चारों ओर, संविधान सभा हाॅल के भीतर और बाहर शंख ध्वनि गूंजी- बापू दंगाग्रस्त नोआखली में रहेंगे
बापू दिल्ली नहीं आएंगे। वे बंगाल के नोआखली के बेलियाघाट (जो अब बांग्लादेश में है) के मुस्लिम बहुल इलाके में हैं। वहां वे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिए अनशन पर रहेंगे। गांधी जी ने ब्रिटेन में रहने वाली अपनी दोस्त अगाथा हेरिसन को एक पत्र लिखकर बताया है कि वे ईश्वर का धन्यवाद करते हैं कि देश को आजादी मिली है। नेहरू और पटेल ने बापू को पहले स्वाधीनता दिवस में शामिल हो अपना आशीर्वाद देने को कहा, लेकिन बापू ने यह कहकर मना कर दिया है कि ‘मैं दंगा रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा।’ 14 अगस्त की मध्यरात्रि को जब आजाद भारत की नींव रखी गई, तब तक बापू सो चुके थे। दरअसल, वे 9 बजे ही सोने चले गए थे। देशभर में मचे कत्लेआम से व्यथित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 15 अगस्त के दिन 24 घंटे का उपवास रखने की बात की है।
भारत-पाक बंटवारे में कुछ ऐसा भी हुआ। एक-एक चीज बांट ली गई। डिक्शनरी के ‘ए’ से लेकर ‘के’ अक्षर की प्रविष्टियां एक देश को मिली और बाकी पन्ने दूसरे देश के हिस्से में गए।
– बांसुरियां पाकिस्तान चली गईं, लेकिन ड्रम भारत में रह गए
भारत-पाकिस्तान के विभाजन की पूरी योजना पर 3 जून 1947 को सहमति बनी। दोनों पक्षों के नेताओं और अधिकारियों के पास इस कठिन काम को पूरा करने के लिए अधिक समय नहीं बचा था। सीमाओं का विभाजन तो हो गया, पर संपत्ति का आनुपातिक विभाजन बहुत पेचीदा मामला है। आबादी और अन्य कारणों को ध्यान में रखकर भारत को 80 और पाकिस्तान को 20 प्रतिशत संपत्ति और बाकी सामान मिलना है। संपत्ति के बंटवारे को लेकर कई हास्यास्पद स्थितियां पैदा हो रही हैं। बेहद अटपटे और विचित्र तरीके अपनाए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए अब तक एक देश से दूसरे देश गई टेबलों के साथ कुर्सियां नहीं हैं। पुलिस बैंड के वाद्य यंत्र तक नहीं छोड़े गए हैं। जैसे कि ड्रम भारत में रह गए हैं और बांसुरियां पाकिस्तान चली गईं हैं। जिन संपत्तियों को 4-1 के हिसाब से बांटना संभव नहीं हुआ, उनका निपटारा सिक्का उछालकर किया जा रहा है।.

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