स्वामी रामभद्राचार्य जी के नाम खुली चिट्ठी

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स्वामी रामभद्राचार्य जी,
कुलाधिपति
जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश

विषय – महर्षि दयानन्द के विरुद्ध असत्य टिप्पणी करने के सन्दर्भ में।

आदरणीय स्वामी जी,
सादर नमस्ते। आशा है आप सकुशल होंगे।

दिनांक 20 जुलाई 2024 को आपके यूट्यूब चैनल पर से एक वीडियो अपलोड हुआ है जिसका शीर्षक है -“आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने कर दी बहुत बड़ी भूल। आर्यसमाज”।

इस वीडियो में आप यह कह रहे हैं कि, ‘‘महर्षि दयानन्द ने सबसे बड़ी भूल कर दी। उन्होंने यह कह दिया कि रामायण और महाभारत सब काल्पनिक हैं।’’

इस विषय में कृपया यह लिखित स्पष्टीकरण देने का कष्ट करें कि महर्षि दयानन्द ने अपने कौन से ग्रन्थ में व्यास कृत महाभारत और वाल्मीकि कृत रामायण को काल्पनिक बताया है? इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए आपसे विशेष आग्रह है। आप स्वयं आचार्य हैं और आपके अनुयायी आपको जगद्गुरु मानते हैं , तो अवश्य ही इन वचनों के कहने के पीछे आपके पास महर्षि दयानन्द के ग्रन्थों का प्रमाण होगा। कृपया वही प्रमाण हमें प्रस्तुत करने का अनुग्रह करें।

महर्षि दयानन्द ने अपने कालजयी ग्रन्थ “सत्यार्थ प्रकाश’’ के तृतीय समुल्लास में वाल्मीकि रामायण तथा व्यास कृत महाभारत को पढ़ने के लिए स्पष्ट लिखा है। तीसरे, छठे तथा ग्यारहवें समुल्लास में भी उन्होंने महाभारत तथा रामायण के अनेक पात्रों का उल्लेख किया है। उनके पूना के प्रवचनों में भी रामायण और महाभारत का उल्लेख है। उनके जितने भी शास्त्रार्थ हुए उन सारे शास्त्रार्थों में भी उन्होंने वाल्मीकि रामायण और व्यास कृत महाभारत के प्रक्षेप भाग को छोड़कर उन्हें प्रमाण माना है।

इतना ही नहीं – महर्षि दयानन्द ने श्रीराम और श्रीकृष्ण को आप्त पुरुष माना है। प्रत्येक आर्य समाज का व्यक्ति उन्हें अपना आदर्श मानता है और आर्य समाज के जयघोष में इन दोनों महापुरुषों का जयघोष भी हमेशा किया जाता है। इसलिये आपका यह कथन कि महर्षि दयानन्द ने महाभारत और रामायण को काल्पनिक बता दिया, सर्वथा असत्य और छल, कपट से परिपूर्ण है।

आपसे यह अपेक्षा है कि आप या तो अपने कथन का प्रमाण प्रस्तुत करें अथवा सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट करें। क्योंकि आपके इस कथन से सम्पूर्ण आर्यजगत आक्रोशित है और सभी सनातन धर्म प्रेमियों में अकारण भ्रामकता की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

आपके और आपके सभी भक्तों को यह भी ज्ञात होना चाहिये कि विधर्मियों द्वारा जब इन दोनों महापुरुषों का अपमान करने के लिए ‘‘सीता का छिनाला’’ और “कृष्ण तेरी गीता जलानी पडेगी’’ यह दोनों ग्रन्थ लिखकर उनका अपमान किया गया, तब श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम पर कथा करके करोड़ों कमाने वाले कथावाचकों ने तब कुछ भी नहीं किया था। तब केवल आर्य समाज के ही पंडित चमूपति जी ने विधर्मियों को जवाब देने के लिये ‘‘रंगीला रसूल’’ नामक पुस्तक लिखी थी, जिसे आर्य समाजी महाशय राजपाल ने छापा था और इस कृत्य के लिए विधर्मियों ने उनकी हत्या कर दी थी।

इसी प्रकार जब पंजाब में मिर्जा गुलाम अहमद द्वारा श्री कृष्ण की नकली कहानियाँ बनाकर तथा स्वयं को श्रीकृष्ण का अवतार घोषित करके निर्दोष हिन्दुओं का धर्मान्तरण किया जा रहा था, तब उनके विरुद्ध आर्यसमाज के ही पंडित लेखराम जी ने अपने प्राणों की आहुतियां दी थी।

इससे यह स्पष्ट है कि महर्षि दयानन्द ने और उनके अनुयायियों ने सत्य सनातन धर्म की रक्षा के लिये सदैव अपने प्राणों की आहुति दी है।
आपने अपने वीडियो में यह बोला है कि, ‘‘मैं गंगा की सौगन्ध ( शपथ) खाकर कहता हूं कि प्रत्येक वेदमन्त्र से मैं राम कथा दिखा सकता हूं।’’ आपके इस वचन का हम स्वागत करते हैं तथा इस विषय पर शास्त्रार्थ द्वारा अपना पक्ष सिद्ध करने के लिए हम आपको आमन्त्रित करते हैं। आर्यसमाज के विद्वान् निम्न विषय पर आपके साथ शास्त्रार्थ करने के लिए तत्पर हैं-
1. क्या महर्षि दयानन्द वाल्मीकि रामायण और व्यास कृत महाभारत को काल्पनिक मानते थे?
2. क्या प्रत्येक वेदमन्त्र में राम कथा का वर्णन है?
3. क्या पाणिनि अष्टाध्यायी सूत्रों में रामकथा का वर्णन है ?
4. क्या वेदों में हिन्दू शब्द है?
. उपरोक्त विषय पर शास्त्रार्थ करने के लिए आप अपनी अनुकूलता के अनुसार हमें तिथि सूचित कर दें तथा शास्त्रार्थ के नियम , स्थान , मध्यस्थ और अन्य व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए अपने अधिकृत प्रतिनिधि का नाम सूचित कर दें। वेद का प्रचार- प्रसार करना महर्षि दयानन्द और उनके द्वारा स्थापित आर्यसमाज का एक मात्र उद्देश्य है और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आप जैसे विद्वान्‌ से शास्त्रार्थ करना सनातन धर्म के लिए बहुत ही लाभकारी होगा।
. आशा है आप शास्त्रार्थ के लिए अपनी सहमति अवश्य देंगे।

दिनांक 27 जुलाई 2024
दिन-शनिवार

भवदीय,
आचार्य मनोज (वैदिक पुरोहित)
आर्य समाज अम्बाला हरि.

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