बाबरी सोच के सबसे बड़े पैरोकार बन गए हैं राहुल गाँधी,

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अस्वस्थ आडवाणी और बलिदानी कारसेवकों का अपमान, ये कैसा घमंड? आखिर कब तक हिन्दू कांग्रेस को गले पाले रखेंगे? शर्म करो!

राहुल गांधी कांग्रेस की परंपरागत हिंदू विरोध की राजनीति के प्रतीक बनकर उभरे हैं । उन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाने का ठेका से ले लिया है, जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था ।उनकी सोच स्पष्ट करती है कि उन्होंने इतिहास से कोई शिक्षा नहीं ली है और वे मुस्लिम तुष्टिकरण के घातक परिणामों को जानकर भी उस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। अपेक्षा की जाती थी कि वह इतिहास से शिक्षा लेंगे और कांग्रेस के पतन के कारणों पर आत्म मंथन करते हुए अपनी नीतियों में परिवर्तन करने का संकेत देंगे। परंतु वर्तमान में उनकी पार्टी की थोड़ी सी ताकत क्या बढ़ गई है वह ताकत में मदहोश होते दिखाई दे रहे हैं ? उन्हें लग रहा है कि वह जिस रास्ते पर बढ़ रहे हैं उसी से उन्हें सत्ता की प्राप्ति हो जाएगी। इस लेख में विद्वान लेखक द्वारा इस बात पर बड़ी गंभीरता से प्रकाश डाला गया है कि उनकी नीतियां किस प्रकार एक बार फिर देश के लिए घातक हो सकती है ?

  • डॉ राकेश कुमार आर्य

जिस तरह राहुल गाँधी द्वारा हिन्दुओं का मजाक बनाया जा रहा, उसे देख शर्म आती है उन हिन्दुओं पर जो कांग्रेस को वोट देते हैं। कांग्रेस और इसको समर्थन देने वालों को मालूम होना चाहिए कि सनातन धर्म 4+ वर्षों प्राचीन है, जिसे समाप्त करने आए असंख्य राक्षसों का वध करने अनेक देवी-देवताओं ने भिन्न-भिन्न रूपों में अवतार लिया और सनातन की रक्षा की।
राहुल के इस अराजक अभियान में गूगल भी शायद अपना समर्थन दे रहा है। कल(जुलाई 6) शीर्षक
“8 कैमरामैन और डायरेक्टर लेकर स्टेशन पहुँचे राहुल गाँधी, ‘नकली’ लोको पायलट वाले वीडियो के लिए पहले से तय थी स्क्रिप्ट: रेलवे अधिकारी ने बताया – नहीं था कोई ‘असली’ कर्मचारी; राहुल के खिलाफ एक्शन की तैयारी” को मेरे फेसबुक और groups से भी हटा दिया। क्यों? सिर्फ इसलिए कि राहुल के विरुद्ध है.
राहुल गाँधी की हिन्दू-घृणा थमने का नाम नहीं ले रही है, वो लगातार जगह-जगह जाकर इसका प्रदर्शन कर रहे हैं। अब राहुल गाँधी ने गुजरात के अहमदाबाद पहुँच कर गलतबयानी की है। उन्होंने कहा कि जो आंदोलन लालकृष्ण आडवाणी ने चालू की थी, जिसका केंद्र अयोध्या था, उसे I.N.D.I. गठबंधन ने अयोध्या में हरा दिया है। हिन्दुओं को इस समझना होगा कि बीजेपी फैज़ाबाद सीट हारी है, अयोध्या नहीं। बल्कि अयोध्या क्षेत्र से बीजेपी जीती है। राहुल गाँधी ने झूठा दावा किया कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में अयोध्या का एक भी व्यक्ति नहीं था।
उन्होंने इस दौरान झूठ बोला कि अयोध्या के लोगों को जमीन के बदले मुआवजा नहीं मिला। जनता में इस कदर झूठ परोसा जा रहा है, जिसे देख लगता है कि कुर्सी के भूखे नेताओं का कोई चरित्र ही नहीं। कुछ ही दिन News18 के लाइव शो ‘भईया जी कहिन’ में एक युवती ने इसी मुद्दे पर बोलने पर एंकर ने उस महिला से नाम, पता, मकान लिखकर दीजिए, ताकि बीजेपी वालों को बोलकर मुआफजा दिलवाया जा सके। देखिए वो बेशर्म महिला आधा-अधूरा पता देकर गायब हो गयी, यानि सनातन विरोधियों द्वारा किस तरह झूठ परोसा जा रहा है।

राहुल गाँधी सोच-समझ कर राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने वाली बात कही, क्योंकि उन्होंने खुद कहा कि वो ‘बड़ी बात’ कह रहे हैं। अयोध्या में समाजवादी पार्टी के नेता अवधेश प्रसाद की जीत में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के योगदान की बात करते हुए इन कार्यकर्ताओं को ‘बब्बर शेर’ कहा। उन्होंने इस दौरान एक रहस्यमयी भाषा सांसद के हवाले से ये भी दावा कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी की जगह अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन 3 बार सर्वे से पता चला कि वो यहाँ से लड़ेंगे तो उनका राजनीतिक करियर हार के बाद चौपट हो जाएगा।

ये पहला मौका नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह की बातें की हों। लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार अभियान के दौरान उन्होंने ‘शक्ति के विनाश’ की बात कहीं थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई शक्ति से है। जबकि भारत में शक्ति पूजा की परंपरा रही है, माँ दुर्गा को शक्ति कहा जाता है। असम में कामाख्या हों, कश्मीर में शारदा, तमिलनाडु में मिनाक्षी हों या फिर गुजरात में अम्बा और समलेश्वरी, माँ शक्ति की विभिन्न रूपों में भारत के कोने-कोने में उपासना की जाती है।

543 में 99 सीटें मिलने से उत्साहित राहुल गाँधी ने तीसरी मोदी सरकार के पहले संसद सत्र में बतौर नेता प्रतिपक्ष अपने पहले भाषण में भी उत्साहित होकर हिन्दुओं को हिंसक बता दिया। उन्होंने इस दौरान भगवान शिव को लेकर भी अनर्गल बयान दिया कि वो अपने त्रिशूल को जमीन में एक तरफ गाड़ देते हैं। उन्होंने शिव के अभय मुद्रा को कांग्रेस के चुनाव चिह्न से जोड़ दिया। सदन में टोके जाने के बावजूद वो बार-बार भगवान शिव की तस्वीर दिखाते रहे।

राहुल गाँधी ने एक तरह से हिन्दू घृणा का लहू चख लिया है, जैसे कोई जंगली जानवर किसी आदमी का खून चख लेता है तो वो मनुष्यों को मार कर खाने के लिए ही खोजता रहता है। कई बार ऐसे जानवरों को या तो पकड़ कर हमेशा के लिए कैद करना पड़ता है, या फिर उसका काम तमाम करना पड़ता है। राहुल गाँधी ने अब राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने की बात कही है। राम मंदिर के निर्माण के साथ ही जो आंदोलन सफल हो गया, अब उसे कौन हरा सकता है?

शायद राहुल गाँधी को पता नहीं है, राम जन्मभूमि आंदोलन को हराने वाले कितने आए और कोशिश कर के धूल में मिल गए। मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई, लालू यादव ने लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करवाया और मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा कि भगवान श्रीराम काल्पनिक थे। जब ये तीनों नहीं कर पाए, राहुल गाँधी को लगता है कि उनसे हो पाएगा? अब तो रोज लाखों की संख्या में लोग राम मंदिर में दर्शन भी कर रहे हैं।

असल में ये सारा घमंड कांग्रेस के 99 या सपा के 37 सीटें जीतने का नहीं, बल्कि अयोध्या जीतने का है। फैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र, जिसके अंतर्गत अयोध्या आता है, वहाँ से समाजवादी पार्टी ने जातीय गणित बिठा कर मिल्कीपुर से 9 बार विधायक रहे अवधेश प्रसाद को खड़ा किया, जिन्होंने भाजपा के 2 बार के सांसद लल्लू सिंह को हैट्रिक लगाने से रोक दिया। इस तरह 54,567 वोटों से ये सीट I.N.D.I. गठबंधन के खाते में चला गया।

इसके बाद से ही संसद में बार-बार भाजपा को अवधेश प्रसाद का चेहरा दिखा कर चिढ़ाया जाने लगा। कभी राहुल गाँधी उन्हें अपने बगल में बिठाते हैं तो कभी अखिलेश यादव। अवधेश प्रसाद एक तरह से इन दोनों नेताओं के लिए एक मेडल हो गए हैं जिन्हें वो हमेशा गले में पहन कर रखना चाहते हैं, या यूँ कहें कि एक ट्रॉफी हो गए हैं कि जब चाहो दोनों हाथों में लेकर ऊपर उठा दो वाहवाही लूटने के लिए। भाजपा को नीचा दिखाने के लिए उन्हें एक कड़ी मिल गई है।

चूँकि अयोध्या भाजपा की राजनीति का एक केंद्र रहा है, इसीलिए वहाँ से पार्टी की हार को लेकर उसे बार-बार चिढ़ाया और हतोत्साहित किया जा रहा है। राहुल गाँधी ने ये बयान ऐसे समय में दिया है जब 96 वर्षीय पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। 7 दशक से भी अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहे एक नेता और उसके योगदानों का अपमान करने के लिए राहुल गाँधी ने ये समय चुना है।

छद्म धर्मनिरपेक्ष नीतियों के खिलाफ लालकृष्ण आडवाणी सितंबर 1990 में राम रथ यात्रा निकाली थी, जिसे अयोध्या पहुँचना था लेकिन रास्ते में बिहार के समस्तीपुर में लालू यादव की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लालकृष्ण आडवाणी ने ये रथयात्रा सिर्फ राम मंदिर के लिए नहीं निकाली थी, बल्कि इसका उद्देश्य था देश की सांस्कृतिक पहचान को पुनः पुष्ट करना। उनका स्पष्ट मानना था कि बाबरी मस्जिद के पक्ष में अभियान चलाने वाले श्रीराम के सामने बाबर को खड़ा कर रहे हैं।

सन् 1527 में बाबर के सेनापति मीर बाक़ी ने अयोध्या में राम मंदिर को ध्वस्त कर वहाँ बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था, जिसे दिसंबर 1992 में हिन्दुओं ने कारसेवा कर के ध्वस्त कर दिया और नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहाँ मंदिर निर्माण शुरू हुआ। हिन्दुओं ने इस मंदिर के लिए प्राचीन काल से लेकर अब तक कई युद्ध लड़े, कभी हथियारों से, कभी राजनीतिक, तो कभी न्यायिक। अब जब मंदिर का निर्माण पूरा होने वाला है, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी है, अनेक बलिदानों का उद्देश्य पूरा हुआ, आंदोलन सफल हुआ।

लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को केवल राम मंदिर को पुनर्स्थापित करने के लिए नहीं खड़ा किया था, बल्कि उन उद्देश्य इससे भी बड़ा था। वो मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्रीय सिद्धांत को हमेशा के लिए जमींदोज करना चाहते थे। वो चाहते थे कि देश के हिन्दू-मुस्लिम सभी स्वीकार करें कि उनकी पहचान राम से है, विदेशी आक्रांता बाबर से नहीं। आज घमंड देखिए कि फैज़ाबाद से जीतने वाले सांसद को ‘अयोध्या का राजा’ कह दिया जाता है, जबकि ये वो राज्य है जहाँ भरत ने भी अपने बड़े भाई श्रीराम की पादुका को सिंहासन पर रख कर उनकी अनुपस्थिति में शासन किया।

न तो अवधेश प्रसाद ‘अयोध्या के राजा’ हैं, और न ही राम जन्मभूमि आंदोलन असफल हुआ है। गुजरात के गोधरा में महिलाओं-बच्चों समेत 59 रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जला दिया गया था। मुलायम पुलिस की गोलीबारी में दर्जनों कारसेवक मारे गए। आज राहुल गाँधी ने ‘राम जन्मभूमि आंदोलन की हार’ की बात कर के उन सबका अपमान किया है, ये सिर्फ हिन्दू धर्म का ही अपमान नहीं है। राहुल गाँधी ने शायद गुजरात के 10% मुस्लिमों के वोट के लिए ये किया है।

आरबीएल निगम

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