उगता भारत के प्रकाशन का 10 वां वर्ष आरंभ

ugtabharat-team

दुनिया का इतिहास पूछता रोम कहां यूनान कहां है ?

यदि किसी का झगड़ालू स्वभाव है तो यह उसकी वीरता नहीं है , अपितुउसका अपनी जीवनी शक्ति अर्थात ऊर्जा को अपव्यय करने का एक निकृष्टतम माध्यम है । इसी प्रकार यदि कोई बात-बात पर चीखता चिल्लाता या चिड़चिड़ाता है तो यह भी उसकी वीरता नहीं ,अपितु यह भी उसकी जीवन शक्ति को अपव्यय करने का ही एक माध्यम है । वीरता शांत रहने में है ।

शांत रहकर सकारात्मक ऊर्जा को अनुसंधान और शोध में लगाकर द्विगुणित कर संसार के लिए उपयोगी बनाने का मंथन कार्य जो लोग करते हैं उनकी बुद्धि तीव्र होने के कारण वही संसार में बलशाली कहीं जाते हैं। संस्कृत की कहावत है कि बुद्धिर्यस्य बलम तस्य अर्थात जिसके पास बुद्धि है वही बलशाली है । इसीलिए हमारे ऋषियों ने मेधाशक्ति की उपासना करने को जीवन का लक्ष्य बनाया।

यद्यपि संसार के लोग ऐसे लोगों को ही वीर मानते हैं जो अपने निकटस्थ लोगों का जीना दूभर कर देते हैं और अपने जीवन को तो नर्क बनाते ही हैं , साथ ही समाज के लोगों का जीवन भी नरक बना डालते हैं।

हमें संसार में रहकर परमपिता परमेश्वर की उन विधायी शक्तियों का अवलोकन करना चाहिए , जो शांत रहकर संसार की व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने में लगी रहती हैं। मानो वह भी साधना कर रही हैं , और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर संसार के लोगों को भी यह संदेश दे रही हैं कि शांत और निर्भ्रान्त रहकर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर लगे रहो , जो कार्य तुम्हें मिला है उसे पूर्ण निष्ठा के साथ संपादित करने का प्रयास करो , सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी ।

जब 9 वर्ष पहले हमने अपने इस ‘ उगता भारत ‘ समाचार पत्र का शुभारंभ किया था तो बहुत सारी समस्याएं ,कठिनाइयां , कष्ट आदि हमारी दृष्टि में थे कि ये सब आएंगे और हमें भटकाने का प्रयास करेंगे । परंतु ईश्वर की अनुकंपा और आप जैसे प्रबुद्ध पाठकों का शुभ आशीर्वाद हमारे साथ रहा और हम एक-एक कर कठिनाइयों को पार करते चले गए। इसी का परिणाम है कि आज यह समाचार पत्र अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है । सच ही तो कहा है :–

लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती ।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।

हमने अपने इस पत्र के माध्यम से भारत के इतिहास के पुनर्लेखन का कार्य आरंभ किया । देखते ही देखते लोगों की जिह्वा पर हमारा पुरुषार्थ और हमारा उद्यम बोलने लगा । यद्यपि यह बहुत भारी चुनौती थी , परंतु हम इसको स्वीकार कर आगे बढ़े तो धीरे धीरे वे परिस्थितियां बनीं कि देश के इतिहास के बारे में छाई अनेकों भ्रांतियों का समाधान होना आरम्भ हो गया । हम देखते ही देखते अंधकार को चीरते – चीरते आगे बढ़ते चले गए । यह मेरे लिए बहुत ही संतोष और परम सौभाग्य का विषय है कि मेरे हिय प्रिय अनुज राकेश को इस बात के लिए भारत सरकार ने पुरस्कृत किया। मुझे लगा कि मेरा जीवन , मेरी प्रेरणा , मेरी सोच , मेरा चिंतन सब कुछ मेरे प्रिय अनुज की लेखनी के माध्यम से

साकार हो उठा , मेरा हृदय पुलकित तो उठा । आंखें छलछला उठीं ।

मैंने सदा ही प्रिय अनुज राकेश को यह संदेश देने का प्रयास किया :-

असफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो ।

क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो ।।

जब तक न सफल हो नींद चैन को त्यागो तुम ,

कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती ।।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती —-

इतिहास के क्षेत्र में किए गए अनुसंधानात्मक कार्यों के लिए अब जब ‘ मेरे लाल ‘ को विभिन्न पुरस्कार मिल रहे हैं तो मैं स्वयं को पुरस्कृत हुआ अनुभव करता हूं । मुझे लगता है कि बचपन में मैंने अपने अनुज के बारे में जो सपने संजोए थे अब वे साकार हो रहे हैं । ‘मेरा ‘ उगता भारत अर्थात उदीयमान भारत सबको प्रिय लग रहा है ।

हमने बीते 9 वर्ष में अनेकों लोगों के मन मस्तिष्क से भारत के धर्म , संस्कृति और इतिहास के अनछुए पक्षों और पहलुओं को प्रकट कर उनकी भ्रांतियों का समाधान करने में आशातीत सफलता प्राप्त की है। अलसाई हुई आंखों को खोल कर कई लोगों ने आश्चर्य और कौतूहल के साथ हमसे पूछना आरंभ किया कि सच क्या है और जब उन्होंने सच को समझा तो उनका जीवन भारी परिवर्तन अनुभव करने लगा ।

कई लोगों ने सार्वजनिक मंचों से पत्र के राष्ट्रवादी चिंतन की भूरि – भूरि प्रशंसा की । जिससे हमें और भी अधिक ऊर्जा मिली कि हमें और भी अधिक अच्छा कार्य करना है । जिससे मां भारती की जय जयकार सर्वत्र हो , हमारा कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का संकल्प पूर्ण हो और वसुधैव कुटुंबकम के आदर्श को हम प्राप्त कर वास्तविक वैश्विक शांति का परिवेश स्थापित करने में सफल हों।

हमने प्रयास किया कि वास्तविक राष्ट्रधर्म को पहचान कर पत्रकारिता धर्म के साथ उसका समन्वय स्थापित करें और धर्म के इसी सर्वमंगलमयी स्वरूप को विश्व धर्म के रूप में स्थापित कराने में सहयोगी व सहभागी बनें । सचमुच भारत के भीतर वह क्षमताएं हैं जो आज भी विश्व को वास्तविक शांति का पाठ पढ़ा सकती हैं । किसी कवि ने कितना सुंदर कहा है :–

दुनिया का इतिहास पूछता रोम कहाँ यूनान कहां है ? घर घर में शुभ अग्नि जलाता वह उन्नत ईरान कहां है ? दीप मुझे पश्चिमी गगन के व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा , किंतु चीर कर तम की छाती चमका हिंदुस्तान हमारा।।

अब हम जब दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं तो फिर अपने पाठकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि भारतीय धर्म , संस्कृति और इतिहास के क्षेत्र में किए जाने वाले अपने उद्यम और पुरुषार्थ को हम पहले से भी अधिक उत्साह के साथ संपादित करने का प्रयास करेंगे । आशा है आपका सहयोगात्मक आशीर्वाद हमारे साथ पूर्ववत बना रहेगा।

शेष सब प्रभु इच्छा पर निर्भर करता है । इत्योम शम : ।

देवेंद्र सिंह आर्य

चेयरमैन उगता भारत

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
timebet
timebet
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino
vaycasino giriş
gobahis giriş
gobahis giriş
vdcasino giriş
pusulabet giriş
betorder giriş
betorder giriş
ikimisli
ikimisli
ikimisli
hititbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betplay
betplay
hititbet giriş
hititbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
meritking giriş