कार्टूनिस्टों पर कार्यवाही से पहले…अपने गिरेबां में झांकें सांसद

14 मई को लोकसभा में सरकार ने घोषणा की कि वह एनसीई आरटी की पाठ्य पुस्तकों में छपे राजनीतिज्ञों के कार्टूनों को लेकर गंभीर है और न केवल ये कार्टून हटाये जाएंगे अपितु ऐसी पुस्तकों को भी हटाया जाएगा जो कि राजनीतिज्ञों के प्रति किसी भी प्रकार से घृणा को फेेलाने का काम करती हैं। सीबीएसई की 9वीं और 11वीं की पुस्तकों में राजनीतिज्ञों के कार्टूनों को लेकर अधिकांश सांसदों ने अपना विरोध व्यक्त किया था और इस प्रकार छपी हुई सामग्री को राजनीतिक व्यवस्था और राजनीतिज्ञों के विरूद्घ एक गंभीर साजिश करार दिया था। अधिकांश सांसदों ने इस प्रकार की सामग्री के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को इस सबके लिए जिम्मेदार ठहराया जिस पर कपिल सिब्बल ने सदन को आश्वस्त किया कि इस विषय में एनसीईआरटी के अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समुचित ध्यान दिया जाएगा।
कार्टून बनाना निस्संदेह एक विधा है। एक कार्टूनिस्ट अपने कार्टून के माध्यम से बहुत कुछ कह देता है। जितना किसी लेखक का एक लेख अपनी बात को स्पष्टï कर पाता है कई बार तो उससे भी अधिक एक कार्टून स्पष्टï कर जाता है। कार्टून किसी भी प्रचलित व्यवस्था की उल्टी रीति पर एक व्यंग्य होता है तो कई बार व्यवस्था की सुव्यवस्था को झलकाने वाला और हमारे भीतर व्यवस्था के प्रति और भी सम्मान पैदा करने वाला होता है। मनुष्य का यह स्वभाव है कि उसे प्रशंसा अच्छी लगती है और आलोचना बुरी लगती है। किसी भी कार्टूनिस्ट को यह अधिकार नहीं होता कि वह किसी व्यक्ति की भावनाओं को आहत करे। व्यक्ति की गरिमा का ध्यान रखना प्रत्येक कार्टूनिस्ट का पहला काम है लेकिन सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्तियों के सार्वजनिक जीवन पर व्यंग्य करने और व्यंग्य के माध्यम से सार्वजनिक व्यक्ति की वास्तविकता को सही सही बयान करना उसका लक्ष्य अवश्य होता है। इसीलिए भारतीय संविधान ने व्यक्ति को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उसके मौलिक अधिकार के रूप में प्रदान की है। कार्टून स्वयं में एक अभिव्यक्ति है। अपनी अभिव्यक्ति को अभिव्यक्त करने से पहले हर कार्टूनिस्ट उसकी सीमाओं का ध्यान रखता है। सबसे अच्छा कार्टून वही होता है जो संबंधित व्यक्ति (जिसका कार्टून बनाया गया है) को भी हंसा दे, या अपने कर्म के प्रति गंभीर बना दे, सोचने के लिए बाध्य कर दे ऐसा कार्टून बनाया जाना उतना ही आवश्यक है जितना एक लेख लिखना। लेखक का लेखन उच्छ्रंखल नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार कार्टूनिस्ट का कार्टून उच्छ्रंखल नहीं होना चाहिए। क्योंकि उच्छ्रंखलता विद्वेष को जन्म देती है। हां कार्टून स्वतंत्र अवश्य होना चाहिए क्योंकि कार्टून की स्वतंत्रता से सदप्रेरणा निकलती है। इसलिए सरकार कार्टून की उच्छ्रंखलता को समाप्त करे, कार्टून की स्वतंत्रता को नहीं। कार्टून की समाप्ति खतरनाक होगी इसको मर्यादित करने के रक्षोपाय खोजना उचित होगा। इसके लिए कानून बनाने का निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं है, अपितु कार्टूनिस्टों के लिए मात्र नैतिक आचार संहिता तैयार करना ही पर्याप्त है। देश में संकट प्रतिभा का नहीं है, संकट नैतिकता का है और उसका उल्लंघन सर्वत्र हो रहा है इसलिए हमारे कई सांसद भी इस संकट से अछूते नहीं हेँ, अच्छा हो कार्टूनिस्टों पर शिकंजा कसने से पहले अपने गिरेवां में भी झांक लिया जाए।

Comment:

grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betvole giriş
betvole giriş
fenomenbet
betvole giriş
betkanyon
betvole giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betvole giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
timebet giriş
maxwin
realbahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
meritking giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
meritking giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kulisbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
grandbetting giriş
hititbet giriş
superbahis giriş
süperbahis giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betvole giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş