अभिवादन में नमस्कार, नमस्ते या राम राम आदि? कौन सा अभिवादन* ??

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अभिवादन का महत्व
अभिवादन में नमस्कार, नमस्ते या राम राम आदि? कौन सा अभिवादन ??

भाग 1ये प्रस्तुति 3 भाग मे है।
Dr DK Garg

सभ्य मानव समाज में अभिवादन की परम्परा उतनी ही पुरानी है जितनी कि व्यवस्थित मानव समाज के अस्तित्व में आने की।भारतीय संस्कृति सहित विश्व की समस्त सभ्यताओं व संस्कृतियों में मनुष्यो के बीच सदैव से ही परस्पर अभिवादन की परम्परा रही है । अभिवादन का सम्पे्रषण अथवा प्रकटीकरण केवल भाषा व शब्दों से ही नहीं होता अपितु इसका प्रकटीकरण बिना कुछ बोले संकेतों, हाव-भाव, मनोभाव तथा भाव-भंगिमा आदि के माध्यम से भी होता है । मनुष्य से इतर पशु-पक्षी भी आपस में जब एक दूसरे से मिलते हैं तो वह भी अपने मनोभावों की ध्वनि अथवा संकेतों आदि से एक दूसरे तक प्रेषित करते हैं ।
परन्तु समय के प्रवाह के साथ अभिवादन परम्परा में भी बदलाव आता गया । नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम,गुड मॉर्निंग , जय गुरु देव, हरे कृष्णा, राधे राधे , सात श्री अकाल आदि ने अपना स्थान ले लिया और परिणामस्वरूप एक मात्रा अभिवादन नमस्ते विलुप्त होने के कगार पर आ गया है।
अभिवादन के महत्व को बताते हुए एक श्लोक आता है
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्यायशोबलम्।।

भावार्थ: अभिवादनशीलस्य यानि अभिवादन करने का जिसका स्वभाव हो और नित्यं वृद्धोपसेविनः का अर्थ है जो युवा अवस्था में वृद्ध पुरूषों का जो नित्य सेवन करता है ,तस्य यानी उसकी आयुः विद्याः यशः बलं चत्वारि वर्धन्ते उसकी आयु, विद्या, कीर्ति और बल, इन चारों की नित्य उन्नति हुआ करती है।
अभिवादन के लिए सर्वमान्य शब्द

प्रायः लोग अभिवादन के लिए नमस्ते और नमस्कार दोनों शब्दों का प्रयोग करते हैं ।कुछ लोग मानते हैं कि नमस्ते और नमस्कार दोनों का अर्थ एक ही है।किंतु ये दोनों भिन्न अर्थ वाले शब्द हैं।

नमस्ते का अर्थ

न का अर्थ “मैं” और असते का अर्थ है “आपका सम्मान करता हूँ”। अर्थात मैं आपका सम्मान करता हूँ।
नमस्ते अर्थात नमस्तुभ्यं सम्मानसूचक शब्द है। जिसका अर्थ है नमन है तुमको/आपको जोकि चेतन (सजीव) के लिए प्रयोग किया जाता है। “नमस्ते’ एक ऐसा शब्द है जिसका प्रयोग हम किसी से मिलते-जुलते हैं तो नमस्ते कह कर अपने आपको सामने वाले के समक्ष सहृदय पूर्ण समर्पित करते हैं।
नमस्कार शब्द का प्रयोग
नमस्कार में अंत मे कार धातु लगने से यह क्रियासूचक बन गया।
जड़(निर्जीव) वस्तुओं के लिए किया जाता है! जैसे सूर्य नमस्कार, चन्द्र नमस्कार, सागर नमस्कार इत्यादि इत्यादि

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