क्या गांधी परिवार के घोटाले को दबाने के लिए किया जा रहा कांग्रेस का सत्याग्रह?

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मृत्युंजय दीक्षित 

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की राजनीति को चमकाने व जीवित करने के लिए ऐसा पालटिकल ड्रामा कर रहे हैं जिसमें न ही कोई तथ्य है और नहीं कोई तर्क है। राहुल गांधी कांग्रेस के न तो अध्यक्ष हैं और नहीं किसी बहुत बड़े पद पर हैं और वह केंवल वायनाड से सांसद भर हैं।

बहुचर्चित नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी कार्यवाही में तेजी लाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पूछताछ प्रारंभ कर दी है और उनकी माता और कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को भी पूछतांछ के लिए बुलाया है। कांग्रेस के कुछ नेताओं से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है। जब गांधी परिवार को पूछताछ का सम्मन मिला तो सोनिया गांधी व उनकी बेटी प्रियंका गाँधी वाड्रा कोरोना से पीडित हो गये जिसमें श्रीमती सोनिया गांधी अस्पताल में जाकर  भर्ती हो गयीं जबकि  प्रियंका जल्दी ठीक होकर पूछताछ के विरुद्ध सत्याग्रह में शामिल हो गयीं। 

भ्रष्टाचार के मामले में गाँधी परिवार से पूछताछ को लेकर कांग्रेस के नेता जिस प्रकार से सड़क पर उतरकर गुंडागर्दी करते हुए सरकारी एजेंसी के काम में बाधा पहुंचाकर उसे सत्याग्रह का नाम दे रहे हैं वह बहुत ही हास्यास्पद है तथा केवल इसी बात की पुष्टि करता है कि आज कांग्रेस के नेता केवल गांधी परिवार की चरणवंदना को ही राजनीति और सत्य मानते हैं।

वास्तव में कांग्रेस का सत्याग्रह कांग्रेस परिवार का हजारों करोड़ का घोटाला दबाने के लिए किया जा रहा है। 
राहुल गाँधी से पहले तीन दिन की पूछताछ के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस ने जिस प्रकार के हिंसक प्रदर्शन और बयानबाजी करी है उससे पार्टी के सत्याग्रह की कलई खुल गयी है। यह साफ दिखाई  पड़ रहा है कि काग्रेस के सत्याग्रह में जो सामान्य लोग आये वह पैसे देकर बुलाये गये हैं यह बात प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों ने खुद ऑन कैमरा स्वीकार की है तथा उन्हें यह भी नहीं पता है कि वह किसलिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की राजनीति को चमकाने व जीवित करने के लिए ऐसा पालटिकल ड्रामा कर रहे हैं जिसमें न ही कोई तथ्य है और नहीं कोई तर्क है। राहुल गांधी कांग्रेस के न तो अध्यक्ष हैं और नहीं किसी बहुत बड़े पद पर हैं और वह केंवल वायनाड से सांसद भर हैं। इसके बावजूद राहुल गांधी के पूछताछ के लिए जाते समय उनका मनोबल बढाने के लिए कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूपेश बघेल अपने राज्यों के कामकाज को छोड़कर दिल्ली में ही डेरा डालकर बैठ गये हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्य में चल रहे आरक्षण आंदोलन व लगातार बिगड़ रही कानून व्यवस्था तथा विकास के कामों को गति देने पर कोई रूचि नहीं की चिंता किये बिना दिल्ली में बैठे हैं। 
राहुल गांधी जब ईडी कार्यालय के अंदर जाते हैं तब कुछ कांग्रेसी नेता अपनी वफ़ादारी दिखाने के लिए बिना अनुमति के अंदर घुसने और अधिकारियों पर दबाव डालने का प्रयास करते हैं और जब उन्हें बाहर किया जाता है तब वह लोग बाहर आकर मोदी सरकार पर तानाशाही का आरेप लगाते  हैं । 
ईडी की कार्यवाही पर कांग्रेसी नेता ऐसे बवाल कर रहे है जैसे राहुल गांधी से सवाल पूछना कोई बहुत बड़ा अपराध हो। कांग्रेस सांसदों की वफादारी का प्रदर्शन उन्हीं के संसदीय व संवैधानिक ज्ञान पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर ईडी की कार्यवाही पर हस्तक्षेप करने की मांग की हैं। वहीं दूसरी ओर एक और सांसद विनय तन्खा ने वित्तमंत्री, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि ईडी से पूछतांछ की आंतरिक जानकारी बाहर क्यों आ रही है। तात्पर्य यह है कि आज कांग्रेस नेशनल हेराल्ड मामले में पूछतांछ से बौखला गई है और वह येनकेन प्रकारेण यह कार्यवाही रोकना चाह रही है लेकिन अब ऐसा संभव नही है । 
जब से गांधी परिवार से पूछतांछ का सिलसिला प्रारम्भ हुआ है तब से सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक कांग्रेस के नेताओं की जुबान भी और जहरीली होती जा रही है। आज कांग्रेस गांधी परिवार की भक्ति में पीएम मोदी की मौत की चाह रख रही है और देश में आग लगाने की धमकी दे रही है। गांधी के नाम पर कांगेस आज देशभर में हिंसक प्रदर्शन करने  पर उतर आयी है। जब कांग्रेस को देश की जनता के लिए वास्तविक प्रदर्शन करना चाहिए था उस समय वह गांधी परिवार को बचाने के लिए हिंसक प्रदर्शन कर रही है। यह कैसा सत्याग्रह है। कांग्रेस के नेताओं ने तो लगता है कि महात्मा गांधी का इतिहास भी ठीक से नहीं पढ़ा है या फिर जो पढ़ा है वह भी बहुत ही सेलेक्टिव है। इतिहास की पुस्तकें गवाह है कि जब गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन के दौरान हिंसक घटनाएं हुई थीं तब उन्होंने अपने आंदोलन को ही समाप्त कर दिया था। महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के दौरान किसी के खिलाफ नफरत बढ़े भाषण नहीं दिये गये।

कांग्रेस पार्टी तथा कांग्रेस के नेताओं के सोशल मीडिया एकांउट से भी नफरत भरे संदेश प्रसारित किये जा रहे हैं। सबसे अधिक निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा जा रहा है और उनके प्रति ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा जो सभी समाज में प्रयोग नहीं होते। 
कांग्रेस के नेता लगातार हिंसक होने की और पुलिस वालों से बदला लेने की धमकी दे रहे हैं। आज राहुल गांधी व सोनिया गांधी को बचाने के लिए जितने भी लोग सडक पर उतर रहे हैं वह सभी जेल जा चुके हैं या फिर जाने की तैयारी कर रहे हैं। जिसमें पूर्व वित्त व गृहमंत्री पी चिदम्बरम 102 दिन तक जेल यात्रा कर चुके हैं तथा अब उनका बेटा भी जेल यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहा है। इसी प्रकार वर्तमान कांग्रेस में उन नेताओं की लम्बी कतार है जो जेल यात्रा पर जा चुके हैं या फिर जाने की तैयारी कर रहे हैं और वही तथाकथित भ्रष्टाचार में संलिप्त नेता गांधी परिवार के घोटालों को बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। 
कांग्रेस के वर्तमान सत्याग्रह पर यही कहा जा सकता है कि सबको सन्मति दे भगवान। यह सत्याग्रह केवल कांग्रेसी युवराज को दोबारा अध्यक्ष बनाने के लिए ही हो रहा है और इसमें कोई दम नहीं है। यह केवल एक नकली पालिटिकल ड्रामा बनाया गया है।

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