ब्रह्मचारी हनुमान जी विवाहित और पुत्रवान भी

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डा. राधे श्याम द्विवेदी
पौराणिक शास्त्रों में रामभक्त के रूप में हनुमानजी की एक विशेष पहचान रखते हैं। उनके सभी भक्त यही मानते आए हैं कि वे बाल ब्रह्मचारी हैं। वाल्मीकि, कम्बन आदि किसी भी रामायण और रामचरित मानस में बालाजी के इसी रूप का वर्णन मिलता है। वे एक बाल ब्रह्मचारी के रूप में भी पूजे जाते हैं। सभी यही जानते हैं कि हनुमानजी ने कभी विवाह नहीं किया और जीवनभर एक ब्रह्मचारी भक्त के रूप में भगवान राम की सेवा करते रहे हैं । इसका यह अर्थ नहीं कि हनुमान बाल ब्रह्मचारी नहीं हैं ।पवनपुत्र का विवाह भी हुआ था उनके पुत्र भी रहे फिर भी और वो बाल ब्रह्मचारी भी रहे।
कुछ शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी के अविवाहित होने की बात पूरी तरह से सच नहीं है।भले ही लोग एक ब्रह्मचारी के रूप में उनकी पूजा करते हैं । शास्त्रों के अनुसार उन्होंने एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन शादियां की है।
1. हनुमान जी की पहली पत्नी सुवर्चला है
पराशर संहिता में हनुमान जी की पहली पत्नी सुवर्चला का उल्लेख मिलता है। सुर्वचला सूर्य की पुत्री हैं। हनुमानजी सूर्य के शिष्य थे और सूर्य को उन्हें नौ विद्याओं का ज्ञान देना था। हनुमान जी ने पाँच विद्या आसानी से सीख ली लेकिन बाकी चार विद्या एक विवाहित ही सीख सकता था। बाकी चार विद्याओं को सीखने के लिए सूर्यदेव ने हनुमान को विवाह के लिए आदेश दिया और उनकी पत्नी के रूप में अपनी पुत्री सुवर्चला का चुनाव किया जो हमेशा तपस्या में लीन रहती थी। अपनी शिक्षा पूर्ण करने के लिए हनुमान सूर्य पुत्री सुवर्चला के साथ शादी के बंधन में बांध गए। शादी के बाद सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई।इससे हनुमान जी का व्रत भी अखंडित रहा।
तेलंगाना के खम्मम जिले में बना एक खास मंदिर याद दिलाता है कि रामदूत के उस चरित्र को विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था। तेलंगाना के एक मंदिर में हनुमानजी और उनकी एक धर्मपत्नी की मूर्ति भी स्थापित है । इस मंदिर में अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं हनुमान जी। मान्यता है कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के बाद घर में चल रहे पति पत्नी के बीच के सारे तनाव खत्म हो जाते हैं। यहां हनुमान जी अपने ब्रह्मचारी रूप में नहीं बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान हैं।
2.अनंगकुसुमा का विवाह हनुमान जी से हुआ था
पउम चरित के अनुसार जब रावण और वरूण देव के बीच युद्ध हुआ तो, वरूण देव की तरफ से हनुमान ने रावण से युद्ध किया और रावण के सभी पुत्रों को बंदी बना लिया। युद्ध में हारने के बाद रावण ने अपनी दुहिता अनंगकुसुमा का विवाह हनुमान से कर दिया।
3. हनुमान जी का विवाह सत्यवती से भी
रावण और वरुण देव के बीच हुए इस युद्ध में हनुमान वरुण देव के प्रतिनिधि के रूप में लड़े और उन्होंने वरुण देव को विजय दिलाई। इस विजय से खुश होकर वरूण देव ने हनुमान जी का विवाह अपनी पुत्री सत्यवती से कर दिया।
एक पुत्र के पिता भी रहे हनुमान जी
पौराणिक कथा के अनुसार जब रावण के आदेश से हनुमान जी की पूँछ में आग लगा दी गयी। तो जलती हुई पूँछ से हनुमान ने सम्पूर्ण लंका नगरी को जला डाला। तीव्र गर्मी से व्याकुल तथा पूँछ की आग को शांत करने हेतु हनुमान समुद्र में कूद पड़े, तभी उनके पसीने की एक बूँद जल में टपकी जिसे एक मछली ने पी लिया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इसी मछली से मकरध्वज उत्पन्न हुआ, जो हनुमान के समान ही महान् पराक्रमी और तेजस्वी था। मकरध्वज को उनका पुत्र कहा जाता है। ‘
एक दिन पाताल के असुरराज अहिरावण के सेवकों ने उस मछली को पकड़ लिया। जब वे उसका पेट चीर रहे थे तो उसमें से वानर की आकृति का एक मनुष्य निकला। वे उसे अहिरावण के पास ले गए। अहिरावण ने उसे पाताल पुरी का रक्षक नियुक्त कर दिया। यही वानर हनुमान पुत्र ‘मकरध्वज’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
फिर भी आजीवन ब्रह्मचारी रहे हनुमान जी
भले ही शास्त्रों में इन विवाहों का जिक्र है लेकिन ये तीनों विवाह कुछ विशेष परिस्थितियों में किए गये थे और हनुमान जी ने कभी भी अपनी पत्नियों के साथ वैवाहिक जीवन का निर्वाह नहीं किया और आजीवन ब्रह्मचारी बने रहे।

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