तुलसी के आयुर्वेदिक गुण

tulsiतुलसी भोजन को शुद्ध करती है, इसी कारण ग्रहण लगने के पहले भोजन में डाल देते हैं।

मृत व्यक्ति के मुंह में डाला जाता है, धार्मिक पद्धति के अनुसार उस व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो, ऐसा माना जाता है।

तुलसी रक्त अल्पता के लिए रामबाण दवा है। नियमित सेवन से हीमोग्लोबीन तेजी से बढ़ता है, स्फूर्ति बनी रहती है।

तुलसी के सेवन से टूटी हड्डियां शीघ्रता से जुड़ जाती हैं।

तुलसी का पौधा दिन रात आक्सीजन देता है, प्रदूषण दूर करता है।

घर बनाते समय नींव में घड़े में हल्दी से रंगे कपड़े में तुलसी की जड़ रखने से घर पर बिजली गिरने का डर नहीं होता।

तुलसी की सेवा अपने हाथों से करें, कभी चर्म रोग नहीं होगा।

खाना बनाते समय सब्जी, पुलाव आदि में तुलसी रस का छींटा देने से उसकी पौष्टिकता व महक 10 गुना बढ़ जाती है।

उपयोग में सावधानी बरतें-

तुलसी की प्रकृति गर्म है, इसलिए गर्मी निकालने के लिये। इसे दही या छाछ के साथ लें, इसकी उष्ण गुण हल्के हो जाते हैं।

तुलसी अंधेरे में ना तोड़ें, शरीर में विकार आ सकते हैं। कारण अंधेरे में इसकी विद्युत लहरें प्रखर हो जाती हैं।

तुलसी के सेवन के बाद दूध भूलकर भी ना पियें, चर्म रोग हो सकता है।

तुलसी रस को अगर गर्म करना हो तो शहद साथ में ना लें। कारण गर्म वस्तु के साथ शहद विष तुल्य हो जाता है।

तुलसी के साथ दूध, मूली, नमक, प्याज, लहसुन, मांसाहार, खट्टे फल ये सभी का सेवन करना हानिकारक है।

तुलसी के पत्ते दांतो से चबाकर ना खायें, अगर खायें हैं तो तुरंत कुल्लाकर लें। कारण इसका अम्ल दांतों के एनेमल को खराब कर देता है।

तुलसी सेवन का तरीका-

इसे प्रातः खाली पेट लेने से लाभ होता है।

इसके पत्तों को या किसी भी अंग को सुखाना हो तो छाया में सुखाएं।

फायदे को देखते हुए एक साथ अधिक मात्रा में ना लें।

बिना उपयोग तुलसी के पत्तों को तोड़ना उसे नष्ट करने के बराबर है।

तुलसी से स्वास्थ्य लाभ पायें-

श्याम तुलसी(काली तुलसी) पत्तों का 2-2 बूंद रस 14 दिनों तक आंखों में डालने से रतौंधी ठीक होती है। आंखों का पीलापन ठीक होता है। आंखों की लाली दूर करता है।

तुलसी के पत्तों का रस काजल की तरह आंख में लगाने से आंख की रोशनी बढ़ती है।

तुलसी के चार-पांच ग्राम बीजों का मिश्री युक्त शर्बत पीने से आंव ठीक रहता है।

तुलसी के पत्तों को चाय की तरह पानी में उबाल कर पीने से आंव (पेंचिस) ठीक होती है।

अदरक या सोंठ, तुलसी, कालीमिर्च, दालचीनी थोड़ा-थोडा सबको मिलाकर एक ग्लास पानी में उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो शक्कर नमक मिलाकर पी जाएं। इससे फ्लू , खांसी, सर्दी, जुकाम ठीक होता है।

कभी-कभी किसी व्यक्ति में अधिक उत्तेजन (पागलपन) आ जाता है, ऐसे में लगातार तुलसी की पत्तियां सूंघे, मसलकर चबाएं, इसके रस को लें, सारे शरीर पर लगाएं, इससे पागलपन की उत्तेजना ठीक होने में लाभ मिलता है।

तुलसी की 4-5 पत्तियां, नीम की दो पत्ती के रस को 2-4 चम्मच पानी में घोट कर पांच-सात दिन प्रातः खाली पेट सेवन करें, उच्च रक्तचाप ठीक होता है।

कुष्ठ रोग में तुलसी की पत्तियां रामबाण सा असर करती हैं। खायें तथा पीसकर लगायें भी

तुलसी के पत्तों का रस एक्जिमा पर लगाने, पीने से एक्जिमा में लाभ मिलता है।

तुलसी के हरे पत्तों का रस (बिना पानी में डाले) गर्म करके सुबह शाम कान में डालें, कम सुनना, कान का बहना, दर्द सब ठीक हो जाता है।

तुलसी के रस में कपूर मिलाकर हल्का गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।

कनपटी के दर्द में तुलसी की पत्तियों का रस मलने से बहुत फायदा होता है।

10-12 तुलसी के पत्ते तथा 8-10 काली मिर्च के चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है।

तुलसी के सूखे पत्ते ना फेंके. ये कफ नाशक के रूप में काम में लाये जा सकते हैं।

तुलसी के पत्तों के साथ 4 भुनी लौंग चबाने से खांसी जाती है।

तुलसी के पत्ते 10, काली मिर्च 5 ग्राम, सोंठ 15 ग्राम, सिके चने का आटा 50 ग्राम और गुड़ 50 ग्राम, इन सबको पान व अदरक में घोंट लें तथा 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। जब भी खांसी हो सेवन करें।

तुलसी व अदरक का रस 1-1 चम्मच, शहद एक चम्मच, मुलेठी का चूर्ण एक चम्मच मिलाकर सुबह शाम चाटें, यह खांसी की अचूक दवा है।

गले की समस्या-

तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंककर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला बैठना ठीक हो जाता है।

यदि अधिक चोट लगी हो और अधिक खून बह रहा हो तो तुलसी के 20 पत्तों को पीसकर एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से बहता खून रुक जाता है।

गठिया- तुलसी के पंचाग (जड़, पत्ती, डंठल, फल, बीज) का चूर्ण बनाएं। बराबर का पुराना गुड़ मिलाकर 12-12 ग्राम की गोलियां बना लें। सुबह शाम गौ दूध या बकरी के दूध से 1-12 गोली खालें। गठिया व जोड़ों का दर्द में लाभ होता है।

तुलसी व अदरक का रस 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन से थोड़े ही दिनों में हड्डी में गैस की समस्या हल हो जाती है।

जोड़ों में दर्द हो तो तुलसी का रस पियें।

गला बैठने पर तुलसी की जड़ चूसें।

घाव-

तुलसी के पत्ते पीसकर जख्मों पर लगाने से रक्त मवाद बंद हो जाता है।

तुलसी के रस को नारियल के तेल को समान भाग में लें और उन्हें एक साथ धीमी आंच पर पकाएं। जब तेल रह जाए तो इसे रख लें। इसे फोड़े, फुंसी पर लगाएं।

तुलसी के बीजों को पीसकर गर्म करके घाव में भर दें लाभ होगा।

तुलसी के सूखे पत्तों का चूर्ण बना कर घाव में भर दें, कीड़े मर जाएंगे।

छाया में सुखाई तुलसी की पत्तियों में फिटकरी पीस लें, कपड़े से छानकर ताजे घाव पर लगाएं, घाव शीघ्र भर जाएगा।

तुलसी तथा कपूर का चूर्ण घाव में लगाने से घाव शीघ्र सूख जाता है।

ज्वर-

तुलसी के पत्ते का रस 1-2 ग्राम रोज पिएं, बुखार नहीं होगा।

तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, अदरक कूटकर पीसकर एक ग्लास पानी में इतना उबालें कि आधा रह जाए तो उतार कर नमक चीनी में इच्छानुसार डालकर पीयें, फिर ओढ़कर सो जाएं।

तुलसी के जड़ का काढा ज्वर नाशक होता है।

तुलसी सौंठ के साथ सेवन करने से लगातार आने वाला बुखार ठीक होता है।

तुलसी, अदरक, मुलैठी सबको घोटकर शहद के साथ लेने से सर्दी के बुखार में आराम होता है।

जहरीले जीव के काटने पर-

तुलसी पत्तों का रस उस स्थान पर लगाने से आराम मिलता है, सांप, ततैया, बिच्छू के काटने पर।

तुलसी का रस शरीर पर मलकर सोयें, मच्छरों से छुटकारा मिलेगा। मलेरिया मच्छर का दुश्मन है तुलसी का रस।

तुलसी के बीज खाने से विष का असर नहीं होता।

तुलसी की पत्तियां अफीम के साथ खरल करके चूहे के काटे स्थान पर लगाने से चूहे का विष उतर जाता है।

किसी के पेट में यदि विष चला गया हो तो तुलसी का पत्र जितना पी सके पिये, विष दोष शांत हो जाता है।

अन्य लाभ-

तुलसी की माला पहनने से टांसिल नहीं होता।

स्त्री रोग-यदि मासिक धर्म ठीक से नहीं आता तो 1 ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो पी जाएं।

मासिक धर्म के दौरान यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें।

तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के माड़ के साथ पिए 7 दिन। प्रदर रोग ठीक होगा। इस दौरान दूध भात ही खाएं।

तुलसी के बीज पानी में रात को भिगो दें। सुबह मसलकर छानकर मिश्री में मिलाकर पी जाएं। प्रदर रोग ठीक होगा।

तुलसी रस में शहद मिलाकर नियमित थोड़े दिनों तक लेते रहने से मेधा शक्ति बढ़ती है, यह एक प्रकार का टॉनिक है।

तुलसी की पिसी पत्तियों में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य एक बार पीने से आप निरोगी रहेंगे, गालों में चमक आएगी।

तुलसी के पत्तों का दो तीन चम्मच रस प्रातः खाली पेट लेने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

पानी में तुलसी के पत्ते डालकर रखने से यह पानी टॉनिक का काम करता है

संतोष कुमार

Comment:

norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
mariobet giriş
betvole giriş
mariobet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
mariobet giriş
betpas giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
dedebet
betkanyon
radissonbet
casinofast
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
norabahis giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betwild giriş
redwin giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
vegabet giriş
vegabet giriş
redwin giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
timebet giriş
timebet giriş