कर्मयोगी योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में शानदार वापसी

मृत्युंजय दीक्षित

कर्मयोद्धा योगी ने तोडे़ कई मिथक: भारतीय जनता पार्टी के कर्मयोद्धा योगी आदित्यनाथ जी ने कई राजनैतिक मिथकों को तोड़ते हुए प्रचंड बहुमत प्राप्त कर उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी उपयोगिता को साबित कर दिया है। वह 1985 के बाद प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जिनके नेतृत्व में पार्टी दूसरी बार सत्तारूढ़ हुई है। लगातार पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने वाले वह प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री बन गये हैं। योगी जी के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश की राजनीति में चले आ रहे कई मिथक भी टूट गये हैं। प्रदेश में सबसे बड़ा मिथक यह टूटा है कि दोबारा सरकार में आना मुश्किल होता है लेकिन योगी जी के करिश्माई नेतृत्व में यह मिथक टूट गया। प्रदेश की सियासत में यह भी कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है उसकी कुर्सी चली जाती है यह मिथक 1988 से बना हुआ है लेकिन योगी जी ने यह मिथक भी तोड़ दिया है। यूपी में एक्सप्रेस से जुड़ा अंध विश्वास भी टूटा जिसकी शुरूआत 2003 से हुयी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने यमुना एक्सप्रेस वे की नींव रखी लेकिन वह उसका उदघाटन नहीं कर सकीं और यही हाल बाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भी हुआ था।
गोरक्षपीठाधीष्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के अजेय योद्धा साबित हुए । वह 1998 से लगातार लोकसभा सदस्य बनते रहे और 2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, फिर उसके बाद वह 2022 में गोरखपुर शहर से विधानसभा का चुनाव लड़े और एक रिकार्ड बनाकर विधानसभा सदस्य और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं । मुख्यमंत्री योगी ने राम मंदिर आंदोलन के नायक महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आने बाद मात्र 22 वर्ष की आयु में दीक्षा ली और 15 फरवरी 1994 को गोरक्षापीठ के उत्तराधिकारी के रूप में मठ का दायित्व संभाला। राजनीतिक दायित्व भी उन्हें गोरक्षपीठ से विरासत में मिला है।
शपथ समारोह और मंत्रि परिषद: “जो राम लो आये हैं ,हम उनको लेकर आयेगें” जैसे गीतों और बुलडेजर बाबा के नाम से लोकप्रिय हो चुके प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भव्य शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के साथ ही योगीराज के द्वितीय का शुभारम्भ हो चुका है। प्रदेश के भगवाधारी मुख्यमंत्री की ताजपोशी में लखनऊ के अटल बिहारी बाजपेयी स्टेडियम में उमड़ी हजारों की भीड़ भव्य व दिव्य शपथ ग्रहण समारोह की साक्षी बनी। प्रदेश राजनीति ने लम्बे समय के बाद ऐसा अदभुत क्षण आया था जब कोई मुख्यमंत्री सभी मिथकों को तोडते हुए लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बना है वह भी प्रचंड बहुमत के साथ। शपथ ग्रहण समारोह के दिन पूरा लखनऊ भगवा ही भगवा नजर आ रहा था और चारों ओर उत्साह व जोश का वातावरण था। “हम निकल पड़े हैं प्रण करके नये भारत का नया उत्तर प्रदेश बनाने” के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी , गृहमंत्री अमित शाह व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जे. पी. नडडा जी सहित 12 राज्यों के मुख्य मंत्रियों ,कई केंद्रीय मिंत्रयों तथा हजारों की भीड़ की गवाही के बीच योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली।
समारोह के समय इकाना स्टेडियम में केसरिया जनसमुद्र हिलोरें ले रहा था और जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्टेडियम के अंदर प्रवेश हुआ और उपस्थित जनसमुद्र ने जिस प्रकार से मोदी- मोदी के नारे लगाने शुरू किये थे उससे यह साफ हो गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का दूर दूर तक कोई प्रतिद्वंदी नहीं है और मोदी नाम की लहरें जनता के आम जन के ह्रदय में हिलोंरें लेती हैं ।
नया मंत्रिमंडल: लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह मंत्रिमंडल कई मायने में अलग है और इसमें केंद्रीय नेतृत्व की इच्छाओं की अमिट छाप भी दिखलायी पड़ रही है। मंत्रिमंडल को नये सिरे सें संवारा गया है और नये चेहरे भी लिये गये हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दो उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य तथा ब्रजेश पाठक के साथ 52 मंत्रियों ने शपथ ली है। नयी मंत्रिपरिषद में पुराने मंत्रिमंडल से 22 मंत्रियों को किनारे कर दिया गया है और 32 नये चेहरों को अवसर दिया गया है। मंत्रिमंडल में 16 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 20 को राज्यमंत्री पद का दायित्व दिया गया है। मंत्रिमंडल में दूसरे दलों को छोडकर भाजपा में शामिल हुए चेहरों को भी जगह देकर से राजनैतिक विरोधियों को एक संदेश दिया गया है। मंत्रिमंडल लगभग युवा है, ऊर्जावान है और फिलहाल साफ सुथरी छवि का है। जिन पुराने चेहरों को हटाया गया है उनमें से अधिकांश चेहरां की छवि पिछली सरकार में साफ नहीं थी और कुछ चेहरों की चुनाव प्रचार के दौरान निष्क्रियता भी सामने आयी थी।
प्रचंड बहुमत के साथ वापस आयी भाजपा सरकार के योगी मंत्रिपरिषद में सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन को साधने का भी भरपूर प्रयास किया गया है। मंत्रिमंडल में अनुभव के साथ युवा लोगों पर भरेसा जताया गया है। एक प्रकार से नई टीम में अनुभवी नेताओं का सम्मान रखा गया है और तीन मंत्री ऐसे हैं जिनकी आयु 40 साल से भी कम है। 40 से 60 वर्ष की आयु के 36 मंत्री बने हैं। टीम में सबसे कम उम्र के संदीप सिंह 31वर्ष के मंत्री बने हैं। मंत्रिमंडल में पसमांदा मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले दानिश आजाद अंसारी 32 वर्ष की उम्र में मंत्री बने हैं।
मंत्रिमंडल के माध्यम से भाजपा ने जातिगत समीकरणों को साधने का भी प्रयास किया है। मंत्रिमंडल में ब्राहमण, महिलाओं के साथ पिछड़ा वर्ग से बीस और आठ लोग दलित वर्ग से लिये गये हैं। सात अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति से मंत्री बनाये गये हैं। चुनाव प्रचार के दौरान हल्ला मचाया जा रहा था कि पश्चिम में इस बार जाट समाज भाजपा से बहुत नराज है और वह भाजपा को इस बार वोट नहीं देगा लेकिन इस बार भी यह सभी चर्चाएं बेकार साबित हो गयी और जाट समाज ने भाजपा को भरपूर आशीर्वाद दिया है जिसका प्रतिफल उन्हें मिला और मंत्रिमंडल में उन्हें भी पर्याप्त सम्मान और जगह दी गयी है। मंत्रिमंडल पर पूरी नजर डालने से पता चलता है कि इसमें सबका साथ,सबका विकास और विष्वास सभी के प्रयास के नारे की अमिट छाप भी दिखलायी पड़ रही है। राजनैतिक विरोधियां ने ब्राहमण समाज को बरगलाने की खूब कोषिश की थी और वर्ग संघर्ष को बढ़ाकर भाजपा को हराने का प्लान तैयार किया था लेकिन इस सबके बावजूद ब्राहमण समाज ने भी बीजेपी को दिल खोलकर वोट दिया है और जिसका असर भी मंत्रिमंडल के चयन में दिखलायी पड़ रहा है। मंत्रिमंडल में पश्चिम से 23 ,मध्य से 12, पूर्वाचल से 14 बुंदेलखंड से चार चेहरो को मंत्री बनाया है। प्रदेश सरकार में छह मंत्री ऐसे भी हैं जो अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं है और यह किस सदन से सदस्य बनेंगे यह आगामी दिनों में तय होगा।
योगी आदित्यनाथ ने अपनी हिंदूवादी छवि, अपराधियों के प्रति कठोर कार्रवाई, अवैध कब्जों पर बुलडोजर ,कोरोना काल में किये गये सेवा कार्य और निःशुल्क राशन वितरण सहित केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के लार्भार्थयों तथा विकास के मुददों के बल पर प्रदेश की जनता से समर्थन माँगा था और जनता ने भी योगी व मोदी की जोड़ी पर पूरा भरेसा जताते हुए अपना प्रचंड आशीर्वाद दिया है । आने वाले चौबीस महीनो में भाजपा सरकार को जनता के विश्वास पर एक बार फिर खरा उतरना होगा ताकि आगामी 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा चिंतामुक्त होकर लोकसभा की 80 में से 75 सीटों पर अपना परचम फहरा सके।

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