पल्ला की प्यास कौन बुझाएगा …..?

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मोहे सुन- सुन आवे हांसी रे
पानी में मीन प्यासी रे…..!

भक्ति काल में यह दोहा कबीर ने अज्ञानी मनुष्यो के लिए रचा जो भगवान के पास होते हुए भी भगवान से कोसो दूर है….. ना अब भक्ति काल है और ना भक्ति के सही स्वरूप को कोई समझना चाहता जमाना केवल समझता है विकास चकाचौंध मतलब की भाषा को ।बात न्यू इंडिया के ग्रेटर नोएडा शहर की करते हैं जिसकी लगभग 10 लाख की आबादी के लिए 8 अरब रुपए खर्च करते हुए इसके निवासीयो की प्यास बुझाने के लिए लगभग 25 किलोमीटर लंबी गंगा जल परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है जिसमें 2 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शामिल है एक गंगाजल से लबालब बहने वाली अपर गंगा कैनाल के निकट गाव देहरा गाजियाबाद के पास जहां से गंगाजल लिया गया है तो दूसरा ग्रेटर नोएडा के पल्ला गांव में स्थापित है। 2005 से लंबित पड़ी वर्ष 2022 आते-आते पूर्ण होने वाली इस परियोजना का उद्देश्य ग्रेटर नोएडा वासियों को खारे जल से मुक्ति दिलाने तथा गंगा का मीठा शुद्ध खनिज लवण से युक्त आरोग्य वर्धक जल उपलब्ध कराना है…. हालांकि आयुर्वेद के ग्रंथ सुश्रुत चरक संहिता के जल प्रकरण में पूर्व की ओर बहने वाली नदियों गंगा यमुना का जल इतना उत्तम नहीं माना गया है जितना पश्चिम की ओर बहने वाली सतलुज व्यास झेलम नदियों का माना गया है लेकिन गंगा का जल दिव्य है गंगा के जल की खुबिया आयुर्वेद मनीषियों को भी सोचने के लिए विवश कर देती हैं आज के आधुनिक जल वैज्ञानिकों के साथ-साथ अर्थात गंगा नदी का जल आयुर्वेद के नदियों के जल गुणधर्म संबंधित सिद्धांत के विपरीत अपवाद के रूप में स्थापित है गंगा का जल सब नदियों में उत्तम है ।भारत जैसे ‘सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया ‘की भावना सामूहिक परोपकार के सिद्धांत को प्रचारित करने वाले देश में कितना उचित है तमाम नैतिकता लोकतांत्रिक शिष्टाचार सविधान के समक्ष नागरिकों की समता के अधिकार को तिलांजलि देते हुए उस गांव के लोगों को इस परियोजना से लाभान्वित ना किया जाए जिसकी जमीन परियोजना के अहम पड़ाव मैन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अधिग्रहित कर ली गई या छीन ली गई। ग्रेटर नोएडा की गंगा जल परियोजना का महत्वपूर्ण अंतिम छोर पल्ला गाँव है जहां से मां गंगा के जल को दोहरे स्तर पर पुनः शुद्ध कर ग्रेटर नोएडा वासियों के घर किचन तक पहुंचाया जाएगा लेकिन 15000 की आबादी वाले गांव पल्ला को परियोजना से नहीं जोड़ा गया। पल्ला गांव का जल भी खारा है … पीने योग्य नहीं है यह एक प्राकृतिक तथ्य है जिन गांवों में जल स्तर ऊंचा रहता था अधिक जलभराव से क्षेत्र ग्रस्त रहता था वहा पानी इतना शुद्ध नहीं होता जहां जल गहराई से मिलता है वहां शुद्ध मीठा जल मिलता है। पल्ला ऐसा ही गांव रहा है गांव में एक मोहल्ले का नाम भी पनमार मोहल्ला है। गांव में अधिकांश परिवारों ने आरो लगा रखे हैं… आरो की सच्चाई आप सभी जानते हैं 1 लीटर जल शुद्ध होता है तो 10 लीटर जल की बर्बादी होती है ऐसा ही तर्क प्राधिकरण गंगा जल परियोजना को लेकर दे रहा है ग्रेटर नोएडा शहर की प्यास बुझाने के लिए भूजल का दोहन नहीं किया जाएगा इससे जल की बचत होगी लेकिन पल्ला गांव में भी तो वही स्थिति है ग्रामीण भी उन्हीं मुसीबतों का सामना कर रहे हैं उस पर भी फिर Ro का तिमाही खर्चीला मेंटेनेंस कभी फिल्टर खराब तो कभी मेंब्रेन खराब। शहर और गांव में इतना भेदवाव तो गोरे अंग्रेज भी नहीं करते थे जितना यह काले अंग्रेज करते हैं। कुछ हम भी जिम्मेदार हैं पल्ला गांव की ओर से आज तक इस विषय पर कोई मांग नहीं की गई कुछ जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसान धरने पर बैठे हैं लेकिन उनकी प्राथमिकता में स्वच्छ पेयजल शामिल है ही नहीं वह केवल बढ़ा हुआ मुआवजा चाहते हैं मुआवजा भी मिलना चाहिए लेकिन जल आरोग्य का आधार है जल को वेदों में भेषज (औषधि) कहा गया है जल से हमारा 60 से 70 फीसदी शरीर बना है कोशिका से लेकर नाखून बाल हड्डियां जितने भी अंग है यह जल से तर रहना पसंद करते हैं सभी के निर्माण फंक्शन लिए जल जरूरी है उस पर भी गंगा जैसा जल पान करने के लिए मिल जाए तो समझे सोने पर सुहागा। ग्रामीणों को स्वच्छ गंगा जल परियोजना में हिस्सेदारी क्यों नहीं मिली? यह बहुत वाजिब मुद्दा है हमें राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों पर भी सदा अलर्ट रहना चाहिए यह एक सीख है। पल्ला गांव से उत्तर प्रदेश के दो महत्वपूर्ण दल जो अब 2022 आते-आते बचे हैं एक भाजपा तो एक सपा दोनों के ही जिलाध्यक्ष वास्ता रखते हैं उसी गांव में पैदा हुए हैं। मैं उन से अनुरोध करता हूं इस जन आरोग्य हितकारी मुद्दे को वह अपने अपने स्तर से उठाएं साथ ही पल्ला गांव की नौजवान शक्ति से मेरा अनुरोध है वह इस स्वर्णिम अवसर को ना गंवाये अभी भी देर नहीं हुई है पहले पल्ला फिर कोई और अपना काम है लोकतांत्रिक रीति से विचार अग्नि भड़काना वह मैंने पुर्ण कर दिया है मैं ऐसा समझता हूं आगे आप जाने आपका काम… वैसे गंगाजल प्रयोजना में हिस्सेदारी तो ग्रेटर नोएडा के सभी 110 गांवों को मिलनी चाहिए जिनकी जमीन शहर को बसाने के लिए हड़पी गई हैं खैर छोड़िए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का इतना बड़ा दिल कहां आप केवल पल्ला गांव को ही नैतिकता के तहत गंगा जल परियोजना से संबंधित कीजिए। दोबारा भारी मतों से नवनिर्वाचित दादरी विधायक तेजपाल नागर जी भी अपना मत इस विषय पर रखें पल्ला गांव ने उनकी पार्टी का थैला वोटों से भर दिया है दोबारा।।।।।

आर्य सागर खारी ✍✍✍

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