ललित मोदी का पोल-खोल मिशन

संजय कपूर

रोज ललित मोदी के नए ट्वीट्स सामने आते हैं और रोज एक नया हंगामा बरप जाता है। ललित मोदी अपने ट्विट्र हैंडल के जरिये भारत में उथलपुथल मचाए हुए हैं। हाल ही में ललित मोदी के दो भिन्न् रूप देखने को मिले। मोंटेनीग्रो के रूमानी नजारों की पृष्ठभूमि में बैठकर वे एक टीवी चैनल के एडिटर पर तंज कसते हुए आक्रामक लहजे में उनसे बात कर रहे थे। जब इस आशय का संकेत किया गया कि वे भारतीय कानून की नजर में एक भगोड़े हैं तो वे भडक़ उठे। उन्होंने छूटते ही कहा, मुझे एक भी ऐसी एफआईआर दिखा दीजिए, जो मेरे खिलाफ दर्ज हो और जो मुझे अपराधी साबित करती हो। फिर उन्होंने अपने बचाव में उन अमीर और रसूखदार लोगों के नाम लेना शुरू कर दिए, जो कि उनकी आलीशान जिंदगी और अनैतिक तौर-तरीकों के साझेदार थे। उन्होंने कहा अगर मेरी मदद की गई तो क्या हुआ? क्या दोस्त एक-दूसरे की मदद नहीं करते? ललित मोदी का दूसरा रूप तब नजर आया, जब इसके कुछ ही समय बाद वे एक अन्य टीवी चैनल के समक्ष किंचित रक्षात्मक और डरे हुए नजर आ रहे थे।

जाहिर है, मोदी ने उस टीवी चैनल से वादा किया था कि वे उसे इंटरव्यू देंगे, लेकिन उनके वकीलों ने उनको सख्त हिदायत दे रखी होगी कि वे जहां तक संभव हो, अपना मुंह बंद रखने की कोशिश करें। यह भी मुमकिन है कि दिल्ली से किसी ने उन्हें यह हिदायत दी हो कि अगर उन्हें आगे भी मदद की उम्मीद हो तो थोड़ा कम बोलने की कोशिश करें। या यह भी हो सकता है कि मोदी के खुलासों से असुरक्षित महसूस कर रहे रसूखदारों ने उन्हें धमकाया हो। जो भी हो, यह तय है कि महज चंद ही घंटों में ललित मोदी के तेवरों में आमूलचूल बदलाव आ गया था। बहरहाल, यह हालत भी ज्यादा देर कायम नहीं रही और वे फिर से पहले की तरह ट्वीट पर ट्वीट करने लगे। यह तो साफ है कि न केवल ललित मोदी को लंदन में पर्याप्त सुरक्षा प्राप्त है, बल्कि वे यह भी जानते हैं कि उनके पास कुछ ऐसी कहानियां और कुछ ऐसे राज हैं, जो अच्छे-अच्छों को उनसे बचकर चलने को मजबूर कर सकते हैं। ललित मोदी आज कइयों की पोल खोलने में सक्षम हैं। यही उनकी निडरता और आत्मविश्वास का राज भी है। क्या आश्चर्य नहीं कि यूपीए सरकार के राज में भी कोई ललित मोदी का कुछ बिगाड़ नहीं पाया था और आज एनडीए सरकार भी कुछ इस अंदाज में उनका बचाव कर रही है, मानो वे उनकी ही पार्टी के सदस्य हों।

ललित मोदी मुख्यत: क्रिकेट प्रशासक के रूप में चर्चित रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा किए जा रहे खुलासों की रेंज बताती है कि बात केवल क्रिकेट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खेल, मनोरंजन और राजनीति के दुनिया के हर कोने तक सड़ांध फैल चुकी है और हमाम में सभी नंगे हैं। और रायसीना हिल्स तो जैसे भ्रष्टाचार की गंगोत्री है। ललित मोदी को सभी की पोलपट्टी पता है और वे ऐसे घायल शेर की तरह हैं, जो अपनों को भी नहीं बख्शता। पिछले कुछ दिनों से ललित मोदी का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। सवाल उठता है कि ललित मोदी को गुस्सा क्यों आता है? क्या उनसे यह वादा किया गया था कि एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद उन पर दर्ज मामलों को वापस ले लिया जाएगा और उनकी भारत में बाइज्जत वापसी हो जाएगी?

पहले ललित मोदी ने सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे से अपने करीबी रिश्तों को अपने पक्ष में भुनाया और अब वे उन्हीं रिश्तों को अपने लिए ढाल की तरह इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं। बड़ी चतुराईपूर्वक उन्होंने वे दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए, जिनमें वसुंधरा राजे ने एक ब्रिटिश अदालत में यह सत्यापित किया था कि ललित मोदी एक भलेमानुष हैं। हो भी क्यों ना, आखिर मोदी के राजे परिवार से दोस्ताना के साथ ही कारोबाराना रिश्ते जो थे। जल्द ही यह पता लगा लिया गया कि मोदी से वसुंधरा के रिश्ते मुख्यमंत्री के रूप में उनके पिछले कार्यकाल के समय से ही करीबी रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने इन खुलासों में खासी दिलचस्पी दिखाई और तत्परता से उनके इस्तीफे की मांग करने लगी। लेकिन ललित मोदी के ट्वीट-वार से खुद सोनिया गांधी और उनके परिजन भी कहां बच सके हैं। शुरू में भाजपा मोदी के हमलों से थोड़ी भौंचक लगी, लेकिन उसके बाद वह अपनी दोनों वरिष्ठ नेत्रियों के पक्ष में मजबूती से खड़ी नजर आई। उसने कहा कि सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे इस्तीफा नहीं देंगी। भाजपा द्वारा अपने लोगों के बचाव का मुख्य आधार यह है कि प्रथमदृष्टया उसमें पैसों के आपसी लेनदेन का मामला नजर नहीं आता है, बात केवल मैत्रीपूर्ण सहायताओं तक ही सीमित है। बहरहाल, ललितगेट के नाम से मशहूर हो चुके इस कांड के केंद्र में क्रिकेट है। यह इकलौता ऐसा खेल है, जिसमें राजनीति, सट्टा, कारोबार, चमक-दमक और अपराध सभी शामिल हैं। हालत यह है कि बीसीसीआई के क्रियाकलापों पर खुद सर्वोच्च अदालत नजर रखती है। शरद पवार, अरुण जेटली, राजीव शुक्ला, मुकेश अंबानी, अमित शाह, सुब्रत राय, जगमोहन डालमिया, एन. श्रीनिवासन सहित कई बड़े नाम इस खेल से जुड़े हैं। ललित मोदी द्वारा आईपीएल नामक नोट छापने की मशीन का आविष्कार करने के बाद से तो अमीरों और रसूखदारों की क्रिकेट में दिलचस्पी और बढ़ गई। अंडरवल्र्ड, काला धन और सट्टेबाजी के तार भी इससे जुड़ गए। जैसे-जैसे आईपीएल का दायरा बढ़ा, सड़ांध का दायरा भी विस्तृत हुआ। आज यह हालत है कि कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह गया है। ललित मोदी को आईपीएल कमिश्नर के पद से तब हटा दिया गया था, जब एक जांच समिति ने उन्हें दक्षिण अफ्रीका में हुए दूसरे आईपीएल में जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त पाया था। उस जांच समिति के अध्यक्ष अरुण जेटली थे। यह गौर करने की बात है कि अभी तक ललित मोदी ने अरुण जेटली पर हमला नहीं बोला है। लेकिन एन. श्रीनिवासन और राजीव शुक्ला के साथ ही जेटली भी उनके निशाने पर हैं। वास्तव में हर वह व्यक्ति उनके निशाने पर है, जो आज उनके साथ खड़े होने को तैयार नहीं है। एक अन्य गौरतलब बात यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ललित मोदी के मुंह से अभी तक केवल सराहना ही सुनने को मिली है। हम यह भी देख सकते हैं कि ललित मोदी का निशाना उन लोगों पर ही है, जो कि प्रधानमंत्री के प्रतिकूल हैं या अतीत में रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री उन सभी लोगों पर कार्रवाई करेंगे, जिन पर ललित मोदी द्वारा आरोप लगाए गए हैं। वे अपनी ना खाऊंगा ना खाने दूंगा वाली छवि पर बट्टा लगाने को राजी नहीं होंगे। अभी तक तो प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं।

उनके करीबी लोगों का कहना है कि वे भीषण दुविधा की स्थिति में हैं। वे टीवी चैनलों द्वारा मचाए गए शोर के आधार पर अपनी महत्वपूर्ण नेत्रियों को बर्खास्त कर उन्हें संतुष्ट करें या मामला रफा-दफा होने का इंतजार करें? उन्हें यह बात भी भलीभांति पता होगी कि ललित मोदी कोई चलताऊ शख्स नहीं है।

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