एक हिंदी शिक्षक की पाती हिंदी भाषियों के नाम

मित्रवर षड्यंत्र करके हिन्दी के योग्य शिक्षक- शिक्षिकाओं को निकाल कर अयोग्य को भर्ती करके हिन्दी की जड़  को काटा जा रहा है।
जी मित्रवर। आपने सही सुना है। देश के गद्दार विदेशों में भी हमें जीने नहीं दे रहे हैं। बार – बार लिखने पर भी भारत के तथाकथित सेक्युलर अधिकारी कान में रुई डाले बैठे हैं। ओमान में भारतीयों की दशा और विरोधियों की राजनीति पर कुछ कहना चाहता हूँ :-
यहाँ के इन्डियन स्कूल्स की शुरुआत भारतीयों की सहूलियत के लिए गुजरात के एक व्यापारिक संगठन रामदास खिमजी समूह ने की थी। कुछ अनबन के कारण एक भारतीय ऐम्बेसडर ने खिमजी के हाथ से लेकर सभी इन्डियन स्कूल्स को एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के अंतर्गत कर दिया जिन्हें हर दो साल पर यहाँ के भारतीय पैरेंट्स चयन करेंगे। बस यहीं से कुछ भारत विरोधी तत्व संख्याबल के आधार पर अपनी पकड़ बनाकर हिन्दी – हिन्दुस्तान के खिलाफ अपना एजेण्डा चलाने लगे। आज 90% से अधिक अधिकारी – शिक्षक- विभागाध्यक्ष ऐसे समुदाय से ही हैं। हिन्दी भाषी शिक्षक – हिन्दी विभागाध्यक्ष को पहले षड्यंत्र करके हटाकर फिर उनपर अपने कुछ अधिकारियों द्वारा दबाव बनाते हैं। ” यदि ग्रेच्युटी आदि चीजें चाहिए तो मैंने व्यक्तिगत कारणों से त्यागपत्र दिया है ऐसा लिख दो। ” हैरानी से बचने के लिए हिन्दी भाषी ऐसा ही लिखकर चले जाते हैं ।  उनके स्थान पर कुछ विशेष समुदाय के लोग अपेक्षाकृत कम योग्यता – अनुभव के होते हुए भी नौकरी पा जाते हैं , अब तो भारतीय अम्बेसडर को भी सलाह दी जाती है या जिम्मेदारी से बचने के लिए  दूतावास स्वयं ऐसे कहता है — ” ये बोर्ड का स्कूल का आन्तरिक मामला है। इसमें हस्तक्षेप नहीं करना है ” देश हित  – व्यक्तिगत भलाई – मानवाधिकार गया तेल लेने, ये इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि एक अधिकारी ने मुझसे कहा कि हम बोर्ड ऑफ डायरेक्टर व स्कूल के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे ? मेरे और मेरी पत्नी के बराबर योग्यता – अनुभव विशेष रूप से सीबीएसई से संबंधित कार्यों के बराबर यहाँ कम ही लोग हैं। मेरे स्कूल में तो कोई नहीं है फिर भी जैसे ही  2016-17 में क्लास- 10 की बोर्ड परीक्षा में मेरे पढ़ाए स्टूडेंट्स ने हिन्दी विषय में भारत के अतिरिक्त संसार के सभी सीबीएसई स्कूलों में उत्तम रिजल्ट दिया, जलन के कारण मुझे हिन्दी विभागाध्यक्ष पद से  हटवाकर हर श्रेणी में कम, जिन्होंने जनरल मीटिंग में कहा भी था कि मैं केवल क्लास – 1 से 5 तक ही पढ़ाना चाहती हूँ,  उन्हें हिन्दी विभागाध्यक्षा बना दिया गया जबकि उस समय हम दोनों के अतिरिक्त चार हिन्दी भाषी हिन्दी शिक्षक हर क्षेत्र में उनसे उत्तम थे। हिन्दी विभागाध्यक्षा बनते ही उन्होंने उस साल हिन्दी दिवस नहीं मनाने दिया , क्लास -6 से महारानी लक्ष्मीबाई कविता “वनली फॉर रीडिंग” के लिए करवा दिया। क्लास  – 7 से वीर कुंअर सिंह पाठ को भी स्कूल पाठ्यक्रम से हंटवा दिया। हिन्दी विभाग की मीटिंग में कोई कुछ बोल न सके इसके लिए स्पेशल ऑब्जर्वर बुलवाती रहीं, मिनिट्स  ऑफ मीटिंग बनवाना बंद करवाकर लोगों के निवेदन को छुपाने में लगी रहीं। भोजन अवकाश के समय अधिकतर गाय काटने आदि की बातें करती रहती हैं, समय सारणी में गड़बड़ी आदि के द्वारा हिन्दी विषय का स्तर गिराने में लगी रहीं फिर भी जहाँ मैं और सुनंदा मैम पढ़ाते थे – किसी तरह स्तर को बरकरार रखे जैसे — रिजल्ट अच्छा देने, पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन , हिन्दी स्टूडेंट्स को बड़ी प्रतियोगिताओं में अवसर दिलवाना , गैर भारतीय स्टूडेंट्स को हिन्दी सिखाकर स्टेज प्रोफर्मेंस आदि जिन्हें बंद करवाने के लिए हिन्दी विरोधी प्रिंसिपल ( जो हर मीटिंग में पैरेंट्स और टीचर्स की शिकायतें ही करते – करवाते हैं, “इंगलिश इज माइ रिलीजन” बोलते हैं। भारतीय राष्ट्रगान गाना भी बंद करवा दिये थे। 33 करोड़ देवता एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं बना सके जबकि अकेले  ईसामसीह ने 100 से अधिक  देश बनवा दिये आदि —-) ने षड्यंत्र करके नौकरी से ही निकलवाकर उसी समूह से भर्ती करना चाहते हैं। आगे आप खुद समझदार हैं  पर ऐसे कुत्सित कार्यों पर रोक  लगानी ही होगी । अत: सभी शुभ चिन्तकों से निवेदन है,  ” सीबीएसई  – शिक्षा, विदेश मंत्रालय , प्रधान मंत्री , मुख्य मंत्री व अपने इलाके के बिधायक एवं सांसद को भी बराबर लिखित भेजते रहिए। ” हम सभी हिन्दी प्रेमी अग्रिम मोर्चे पर रहकर लगातार लिख रहे हैं । राष्ट्र विरोधी मानसिकता को हराकर हिन्दी का ध्वज ऊंचा रखना है । विस्तृत विवरण के लिए वाट्स अप नंबर – +919428075674 पर संपर्क कर सकते हैं । ये केवल मेरी नौकरी का सवाल ही नहीं अपितु हिन्दी, हिन्दुत्व, हिन्दुस्तान के सम्मान की लड़ाई है जिसमें सभी देश प्रेमियों का सहयोग अपेक्षित है।
डॉ अशोक कुमार तिवारी
9428075674
ओमान

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *