भारत की तेजस्वी विदेश नीति और विश्व समाज

images (10)

इतिहास और विदेश नीति का चोली दामन का साथ है। दोनों का संबंध अन्योन्याश्रित है। विदेश नीति के सतत प्रवाह से इतिहास का निर्माण होता है और इतिहास विदेश नीति को संबल और मार्गदर्शन प्रदान करता है ।

भारत की प्राचीन काल से ही विदेश नीति बहुत ही उत्कृष्ट और मानवीय मूल्यों को लेकर बनाई जाती रही है। इसमें हिंसा और दूसरे देशों के भूभागों को छीनने की विस्तारवादी सोच का रंचमात्र भी स्थान नहीं है । यही कारण है कि भारत ने सदा ही अपने पड़ोसी देशों की संप्रभुता का सम्मान किया है। भारत की विदेश नीति के इस गुण को मध्यकालीन इतिहास के आक्रामक शासकों ने दरकिनार किया तो सारे संसार में उत्पात, उग्रवाद और उद्दंडता का बोलबाला हो गया । मर्यादाविहीन शासक लुटेरे बनकर एक दूसरे की सीमाओं को तोड़ने लगे। जिससे संपूर्ण संसार में अराजकता का परिवेश व्याप्त हो गया।
भारत में मुगलों और अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में जिस विदेश नीति का अनुपालन किया वह उनकी अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर निर्धारित की गई विदेश नीति थी। उसमें भारतीयता का पुट बहुत कम था । क्योंकि ये विदेशी शासक थे और विदेशी शासकों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और स्वार्थ होते हैं। कुल मिलाकर मुगल और अंग्रेजों के शासन काल में भारत की विदेश नीति स्वार्थवाद पर टिकी हुई थी, उसमें राष्ट्रवाद के लिए कोई स्थान नहीं था।
चाणक्य ने विदेश नीति के 6 सूत्रीय संकल्पों को सरकारों के द्वारा अपनाए जाने पर बल दिया है। जिसका उल्लेख इस पुस्तक में हमने यथास्थान किया है। कौटिल्य के इस प्रकार के चिंतन से आज की राजनीति भी बहुत कुछ सीख सकती है । हमारा मानना है कि भारत की सरकारों को आचार्य चाणक्य के विचारों को अक्षरश: लागू कर अपनी स्वीकृति प्रदान करनी चाहिए। भारत की वर्तमान मोदी सरकार आचार्य चाणक्य के दिए गए निर्देशों के अनुसार भारत की विदेश नीति का निर्धारण कर रही है । समय ने सिद्ध कर दिया है कि जब मोदी सरकार भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा का निर्वाह करते हुए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अनुरूप निर्णय ले रही है और तो उसके सार्थक परिणाम आ रहे हैं। मोदी सरकार ने तेजस्वी राष्ट्रवाद के निर्माण के लिए तेजस्वी विदेश नीति का एक ऐसा अदृश्य खाका तैयार किया है जिससे भारत संपूर्ण भूमंडल के देशों की नाभि बन गया है । अपने आपको विश्व का केंद्र बिंदु बना लेना ही किसी राष्ट्र की विदेश नीति की सफलता होती है। आज भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहित प्रत्येक वैश्विक मंच पर अपना अभिनय कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया है की अनायास ही सब देशों का ध्यान भारत की ओर हो गया है। यही कारण है कि जो देश भारत से सांप्रदायिक आधार पर घोर घृणा करते रहे हैं या पाकिस्तान के साथ होने का आभास कराते रहे हैं उन देशों में आज हिंदू मंदिरों का निर्माण हो रहा है।
भारत में मोदी सरकार ने सत्ता संभालने के पश्चात से चीन के चाल ,चरित्र और चेहरे को पहचानने का प्रशंसनीय कार्य किया है। अबसे पूर्व की कांग्रेसी सरकारों ने चीन के विषय में नादानी बरती थी, जिसका परिणाम देश को भारी कीमत देकर चुकाना पड़ा। मोदी सरकार के सत्ता संभालने के पश्चात भारत की विदेश नीति में आए परिवर्तन की ओर संकेत करते हुए चीन के एक ‘थिंक टैंक’ ने कहा है कि -‘मोदी सरकार के सत्ता पर काबिज होने के बाद से भारत की विदेश नीति काफी सक्रिय और मुखर हो गई है। साथ ही भारत की रिस्क लेने की क्षमता में भी उल्लेखनीय उछाल आया है।’
हमारा मानना है कि देश की विदेश नीति किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करने वाली तो हो परंतु अपने हितों का ध्यान रखने में भी सदा सजग और जागरूक रहे। देश के हितों की रक्षा करने में कभी भी मानवता या दिखावटी मानवीय मूल्य आड़े नहीं आने चाहिए। क्योंकि शत्रु शत्रु होता है ,वह आपकी किसी भी प्रकार की दरियादिली को स्वीकार नहीं करता। उल्टे उसका लाभ उठाने का प्रयास करता है। इसलिए मानवता और उदारता की बातें वहीं उचित होती हैं जहां उनका राष्ट्रीय हितों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता हो। भारतीय शासकों की नीतियां या कहिए कि भारत का राजधर्म याज्ञिक भावना पर निर्भर होकर चलता है। जैसे यज्ञ में सभी जीवधारियों का कल्याण करने की भावना अंतर्भूत होती है, वैसे ही भारत का राजधर्म भी प्राणीमात्र के कल्याण की योजनाओं को अपनी नीति का अनिवार्य अंग मानकर चलता है। इसके उपरांत भी हमारा मानना है कि विदेश नीति के क्षेत्र में इन सब चीजों की अपनी सीमाएं हैं। वहां हमें दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना पड़ता है। हम इतना कर सकते हैं कि दूसरों की संप्रभुता का सम्मान करें, परंतु जो हमारी संप्रभुता का सम्मान करना नहीं सीख सकता उसके प्रति हम सदैव सजग रहें और उस को कमजोर करने के प्रयासों में भी लगे रहना हमारी विदेश नीति का एक अनिवार्य अंग होना चाहिए।
वर्तमान भारत की सजग और जागरूक विदेश नीति का परिचय देते हुए 3 जुलाई 2020 को लेह में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जब राष्ट्रकवि रामधारीसिंह दिनकर जी द्वारा रचित ये पंक्तियां बोलीं तो लगा कि इन पंक्तियों के साथ सारा देश ही बोल रहा था कि :-

जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल
कलम आज उनकी जय बोल…

वास्तव में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विस्तारवादी पड़ोसी देश चीन को यह संकेत दिया था कि भारत ‘वीरभोग्या वसुंधरा’ में वैसे ही विश्वास नहीं रखता ? इसका इतिहास भी ‘वीरभोग्या वसुंधरा’ में विश्वास रखने वाले अनेकों क्रांतिकारियों, राजाओं, वीर योद्धाओं और सेनापतियों से भरा हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत आज भी अपने उन वीर योद्धाओं को इसीलिए स्मरण करता है कि हमारे भीतर भी वही पराक्रम, वही पौरुष और वही साहस का भाव अपने देश के प्रति बना हुआ है । वास्तव में ऐसा तेजस्वी नेतृत्व जब राष्ट्र को संबोधित करता है या राष्ट्र का नेतृत्व करता है तो निश्चय ही सारा देश तेजस्विता से सराबोर हो जाता है। यही कारण है कि सारा विश्व इस समय भारत की तेजस्वी विदेश नीति को बहुत ही ध्यान से देख रहा है।
भारत की इसी तेजस्वी विदेश नीति के फलस्वरूप चीन ने भी यह समझ लिया कि भारत अब उसके पंचशील के सिद्धांत या ‘हिंदी चीनी -भाई भाई’ के नारे के झांसे में नहीं आने वाला , क्योंकि संपूर्ण भारत इस समय तेजस्विता से भरा हुआ है और अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत कर वह चीन को सबक सिखाने की स्थिति में आ चुका है । यही कारण रहा कि विस्तार वादी और साम्राज्यवादी चीन अब भारत से 2 गज का फ़ासला रखकर बात करने में ही विश्वास रखता है। हमारा मानना है कि इसके उपरांत भी भारत को चीन जैसे राक्षस प्रवृत्ति के देश से सजग और सावधान रहने की आवश्यकता है ,क्योंकि इसका इतिहास धोखा और छल कपट करने वाला रहा है।
हमारा मानना है कि भारत चीन संबंध जहां चीन की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीति के कारण कभी सामान्य नहीं रह पाए, वहीं दलाईलामा का भारत में आकर रहना और भारत को अपनी शरणस्थली बनाकर चीन के प्रति षड्यंत्र करना भी इन संबंधों को असामान्य बनाए रखने में सहायक रहा है। माना कि भारत ‘अतिथिदेवो भव:’ में विश्वास रखता है ,परंतु अतिथि को भी यह समझना चाहिए कि उसका धर्म क्या है ? दलाई लामा भारत में रहकर अपने मत का प्रचार प्रसार कर रहे हैं और भारत के विरुद्ध ही माहौल बनाने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं ,इस पर भी भारत सरकार को ध्यान देना चाहिए।
इस सबके उपरांत भी भारत और सारे विश्व को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि चीन कि ‘देश हड़पो नीति: विश्व के लिए बहुत खतरनाक है । इस देश ने अपनी दादागिरी दिखाते हुए कई देशों को निगलकर अपने भीतर समाविष्ट कर लिया है। तिब्बत जैसे देश को उसने हड़प लिया और यह आश्चर्य की बात है कि संपूर्ण संसार इस विशेष घटना पर भी कुछ नहीं कर पाया ।जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ जो उस समय अस्तित्व में आ चुका था। विश्व शांति के लिए उस समय इस पर विशेष कार्य करना चाहिए था और चीन के विरुद्ध कठोर निर्णय लेकर उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देश उसी समय सबक सिखाते तो भविष्य की कई घटनाओं को रोका जा सकता था।
भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश ,नेपाल, बर्मा, श्री लंका आदि के आदि के विषय में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पड़ोस पहले’ की प्रशंसनीय विदेश नीति का निर्वाह किया ।यह अलग बात है कि पाकिस्तान जैसा छलिया और शत्रु देश भारत की इस नीति का भरपूर लाभ नहीं उठा पाया। क्योंकि उसकी फितरत में आतंकवाद इस प्रकार समाहित हो चुका है कि वह उससे बाहर जाकर कुछ सोच नहीं सकता। उसकी विदेश नीति में विनाश के कीटाणु स्पष्ट दिखाई देते रहते हैं।
वर्तमान में जिस प्रकार की विनाशकारी परिस्थितियां आतंकवाद और एक दूसरे देश को नीचा दिखाने की देशों की प्रवृत्ति के कारण बनी हुई हैं उस पर भारत के चिंतन को अब संयुक्त राष्ट्र और सभी देश व मंच बड़े ध्यान से सुन रहे हैं। क्योंकि ऐसी विनाशकारी नीतियों के कारण तीसरे विश्वयुद्ध की संभावनाएं कभी-कभी बड़ी खतरनाक स्थिति बनाती हुई दिखती हैं और लगता है कि तीसरा विश्व युद्ध कभी भी भड़क सकता है। इसके उपरांत भी भारत की सोच है कि हमको मानवता के हित में ऐसे प्रयास करते रहना चाहिए कि मानवता तीसरे विश्वयुद्ध की विभीषिकाओं में झुलसने से बची रहे। इसके लिए भारत के मानवतावाद और एकात्म मानववाद को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना समय की आवश्यकता है ।
भारत की मानवतावादी सोच को विश्व के सभी देश अपनी विदेश नीति में स्थान दें और स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना सीख लें। जिससे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ का वैदिक संकल्प साकार रूप ले सकता है। विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र सहित सभी वैश्विक संस्था और संस्थान भारत के इसी आदर्श को स्वीकार करें।
वर्तमान मोदी सरकार द्वारा जिस प्रकार अपने विदेश नीति में पड़ोस पहले की सोच को क्रियान्वित किया गया है ,वह भी बहुत ही प्रशंसनीय है। जो लोग यह मानते रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी मुस्लिमों से घृणा करते हैं उन्हें यह भी समझ लेना चाहिए कि यदि मोदी जी मुस्लिमों से घृणा करते तो वह पड़ोसी मुस्लिम देश पाकिस्तान के प्रति सत्ता में आते ही उदारता का प्रदर्शन न करते और ना ही ‘पड़ोस पहले’ की सोच को अपनी विदेश नीति का आधार बनाते । जब पाकिस्तान ने मोदी जी की ‘पड़ोस पहले’ की विदेश नीति का उपहास उड़ाना आरंभ किया या उसे हल्का करके लेना आरंभ किया तब मोदी जी ने उसके प्रति आंखें तरेरना आरंभ किया। वास्तव में मोदी जी के द्वारा ऐसा किया जाना भारत की नीतिगत सोच का प्रतीक है। शत्रु यदि आपकी शराफत और सादगी का अनुचित लाभ उठाने की स्थिति में आता हुआ दिखाई दे तो आपके इरादे फौलादी भी होने चाहिए अर्थात उसे यह भी पता होना चाहिए कि यदि तूने कुछ भी गलत करने का प्रयास किया तो अगला वाला तेरी आंखें निकाल लेगा। जब शत्रु देश ऐसा समझने लगे तब समझिए कि आपके देश की विदेश नीति मजबूत, सुरक्षित और देश के हितों को संरक्षण देने वाली है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
supertotobet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
supertotobet giriş
Bettilt Giriş
Supertotobet Giriş
Vdcasino Giriş
supertotobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
betmatik
betkom
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betmatik giriş
betpark giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
kralbet giriş
kralbet giriş
betorder giriş
betine giriş
xslot giriş
timebet giriş
timebet
timebet
vaycasino giriş
bettilt giriş
betine giriş
betine giriş
xslot giriş
xslot giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
Hititbet Giriş
timebet
meritking giriş
meritking
norabahis
norabahis
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
meritking giriş
pusulabet giriş
timebet
timebet
betpark giriş