Categories
राजनीति

मुसलमानों को कांग्रेस ने सिर्फ धोखा दिया

डा. मनीष कुमार
यह मुसलमानों को याद करने का मौसम है। उनकी समस्याओं पर बहस का मौसम है। यह मुसलमानों को ख़तरे बताने का मौसम है। यह मुसलमानों को डराने का मौसम है। यह चुनाव का मौसम है। यही वजह है कि हर राजनीतिक दल में मुसलमानों के प्रति प्रेम उमड़ रहा है। मुसलमानों के दु:ख पर आंसू बहाए जा रहे हैं। ऐसा हर चुनाव से पहले होता है। हर बार मुसलमानों को बरगलाने के दांव खेले जाते हैं। हाल तो यह है कि एक बार घडिय़ाल के आंसू पर यकीन हो जाए, गिरगिट के रंग पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन देश के राजनीतिक दलों की चालबाजी पर एक फ़ीसद भी यकीन करना मूर्खता होगी। दरअसल, राजनीतिक दलों की नजऱों में मुसलमान इंसान नहीं, महज एक वोटबैंक हैं, जिन्हें कुछ झूठे वादे करके, बहला-फुसला कर, पैसे देकर, आरएसएस एवं मोदी का खौफ दिखाकर भ्रमित किया जा सकता है और वोट लेकर उन्हें दुत्कार कर फेंका जा सकता है। हकीकत भी यही है। मुसलमान जज्बाती लोग हैं, धर्म की राह पर जीवन बिताने वाले लोग हैं, ईमान पर चलने वाले लोग हैं। इसीलिए राजनीतिक दलों को लगता है कि उन्हें बेवकूफ बनाना आसान है। अफसोस तो इस बात का है कि इन राजनीतिक दलों को मुस्लिम समुदाय के अंदर ही कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो अपने स्वार्थ की खातिर पूरे समुदाय के भविष्य का सौदा कर लेते हैं। 2014 का चुनाव सिर पर है, इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि पिछले 10 सालों में यूपीए सरकार ने किस तरह मुसलमानों की हालत दलितों से भी बदतर कर दी है। कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों पर डोरे डालने शुरू कर दिए। पर्दे के पीछे और पर्दे के आगे कोशिशें हो रही हैं। एक तरफ़ मुस्लिम नेताओं से बातचीत हो रही है, तो दूसरी तरफ़ टीवी में प्रचार। स्वयं सोनिया गांधी एवं मनमोहन सिंह द्वारा सम्मेलन करके मुसलमानों को लुभाने की कोशिश की जा रही है। चौथी दुनिया लगातार मुसलमानों की समस्याओं और हकीकत पर रिपोर्टें छापता रहा है और हम बड़ी जि़म्मेदारी के साथ यह बताना चाहते हैं कि यूपीए सरकार मुसलमानों को लेकर जितनी भी बातें कह रही है, वे सरासर झूठ हैं और लोगों को गुमराह करने वाली हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान चौथी दुनिया ने कांग्रेस के सबसे बड़े झूठ का पर्दाफाश किया था। हमने साबित किया था कि किस तरह चुनाव से पहले सलमान खुर्शीद ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण की बात कहकर मुसलमानों के साथ एक भद्दा मजाक किया। कांग्रेस पार्टी को यह भी बताना चाहिए कि वह आरक्षण का मामला कहां दब गया? अब कांग्रेस पार्टी आरक्षण पर क्यों नहीं कुछ बोलती या फिर जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां मुसलमानों को आरक्षण देने का ऐलान क्यों नहीं करती? दरअसल, कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को धोखा देकर वोट पाने की जुगत में है, इसलिए एक के बाद एक झूठ बोला जा रहा है। चाहे वह सोनिया गांधी हों या मनमोहन सिंह या फिर यूपीए का कोई मंत्री या नेता, सब के सब झूठ बोल रहे हैं। मनमोहन सिंह ने 2006 में कहा था कि सरकारी संसाधनों पर पहला हक़ अल्पसंख्यकों का है। जब उन्होंने यह कहा था, तो लगा कि मुसलमानों की समस्याएं ख़त्म होने वाली हैं। अब चुनाव होने वाले हैं। मनमोहन सिंह की विदाई तय हो चुकी है। आज यही कहा जा सकता है कि मुसलमानों के ताल्लुक से देश के किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयानों में यह बयान सबसे बड़ा छलावा साबित हुआ। वोट न जाने इंसान से क्या-क्या करा लेता है। मनमोहन सिंह ने मुसलमानों के हालात समझने के लिए सच्चर कमेटी का गठन किया था, ताकि यह पता चल सके कि मुसलमानों की हालत क्या है और समस्याओं को कैसे सुलझाया जा सकता है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने कांग्रेस को आईना दिखाया। सच सामने आ गया। रिपोर्ट ने बताया कि कांग्रेस की नीतियों की वजह से मुसलमानों की हालत दलितों जैसी है। रिपोर्ट आई और चली गई। अब सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का इस्तेमाल सर्फ़ि रिसर्च में होता है। मुसलमानों के मुद्दे वहीं के वहीं पड़े हैं। वही भूख, वही अशिक्षा, वही बेरोजग़ारी, वही दंगे और वही लाचारी। मनमोहन सिंह ने 2006 में कहा था कि सरकारी संसाधनों पर पहला हक़ अल्पसंख्यकों का है। जब उन्होंने यह कहा था, तो लगा कि मुसलमानों की समस्याएं ख़त्म होने वाली हैं। अब चुनाव होने वाले हैं। मनमोहन सिंह की विदाई तय हो चुकी है। आज यही कहा जा सकता है कि मुसलमानों के ताल्लुक से देश के किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयानों में यह बयान सबसे बड़ा छलावा साबित हुआ। लेकिन कांग्रेस का चरित्र देखिए। चुनाव आते ही हलचल होने लगती है। कांग्रेस ने एक और कमेटी बनाई। इसका नाम था रंगनाथ मिश्र कमीशन। मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर इसकी रिपोर्ट में भी इसी बदहाली को बताया गया और इससे बाहर निकलने की दवा लिखी गई, लेकिन केंद्र सरकार ने तो अपनी फितरत के अनुसार इसे संसद में पेश ही नहीं किया। दो-तीन सालों तक इसकी रिपोर्ट सड़ती रही, लेकिन जब चौथी दुनिया ने पूरी रिपोर्ट को छापा, तो सरकार को इसे संसद में पेश करने को मजबूर होना पड़ा। अफ़सोस की बात यह है कि रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट को जिस तरह से संसद में रखा गया, उससे तो यही लगता है कि सरकार की कथनी और करनी में घोर विरोधाभास है। सरकार की मंशा पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि उसने रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट के साथ कोई एटीआर नहीं रखी। अब तक देश की जनता को यह पता भी नहीं चल पाया कि सरकार इस रिपोर्ट का क्या करना चाहती है और कांग्रेस पार्टी का रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट पर रवैया क्या है। शायद राजनीति में मर्यादा का उल्लंघन कोई अपराध नहीं होता, झूठ बोलने को गुनाह नहीं माना जाता, इसलिए चुनाव से ठीक पहले यूपीए सरकार के आला नेता अपनी पीठ थपथपाने वोट के बाज़ार में कूद पड़े। दिल्ली के विज्ञान भवन में बीती 29 जनवरी को अल्पसंख्यक कल्याण एवं विकास कार्यों से संबंधित एक कॉन्फ्रेंस हुई। यह कॉन्फ्रेंस बड़े प्रचार-प्रसार के साथ बुलाई गई। पूरे देश में इसे टीवी चैनलों के माध्यम से लाइव दिखाया गया। यहां पहले सोनिया गांधी का भाषण हुआ। उन्होंने मुसलमानों को बहलाने के लिए कई झूठ बोले। सोनिया गांधी ने कहा कि अल्पसंख्यकों की विभिन्न स्कीमों की वजह से उनके विकास में दस गुना तेजी आई है। अजीब मजाक है। मजे की बात यह है कि यह इतना बड़ा झूठ है कि किसी अख़बार को छापने की हिम्मत नहीं हुई। वैसे सच्चर कमेटी बताती है कि मुसलमानों की हालत दलितों जैसी है और सोनिया गांधी दस गुना विकास का सपना दिखा रही हैं। सोनिया गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि मुसलमानों को स्कॉलरशिप की योजनाओं का लाभ हो रहा है और उनकी बेरोजग़ारी दूर हो रही है। जब भाषण में झूठ ही बोलना था, तो कम से कम उन्होंने यह भी बता दिया होता कि पिछले 10 सालों में कितने मुस्लिम छात्रों को स्कालरशिप मिली और कितने लोगों को सरकार की नीतियों की वजह से नौकरी मिली। सच्चाई यह है कि यूपीए सरकार वक्त-वक्त पर, विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मद्देनजऱ सर्फ़ि घोषणाएं करती रही, जिनका मकसद मुसलमानों को फायदा पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें झांसा देकर वोट लेना था। 2006 में प्रधानमंत्री ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 15 सूत्रीय कार्यक्रम की भी घोषणा की थी, लेकिन सरकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों की बदहाली दूर करने में विफल रही। पिछले 10 सालों में मुस्लिम समुदाय विकास की मुख्य धारा से बाहर हो चुका है। इसकी कई वजहें हैं। शिक्षा और शिक्षा का स्तर एक बड़ी वजह है। मुस्लिम युवा वर्तमान की प्रतियोगी दुनिया में पिछड़ रहे हैं। निजी क्षेत्र में पक्षपात का भी मामला है। सरकारी क्षेत्र में भी जहां इंटरव्यू का मामला होता है, वहां भी वे भेदभाव के शिकार होते हैं। मीडिया और राजनीति ने ऐसा वातावरण बना दिया है, जिससे मुसलमान मुख्य धारा से विमुख होते जा रहे हैं। इसके बावजूद सोनिया गांधी ने यूपीए सरकार की तारीफ की और कहा कि प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम का एकमात्र मकसद अल्पसंख्यकों को लाभ पहुंचाना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, लेकिन किन-किन योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा है, यह बताना वह भूल गईं। सोनिया ने कहा कि नई रोशनी योजना के तहत बहुत काम हुआ है, जिसमें लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं के कल्याण के लिए कई क़दम उठाए गए। सोनिया गांधी को शायद हकीकत का पता नहीं है कि 2009 में गठित नई रोशनी योजना, जो 2012 तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही और जब डेढ़ साल पहले शुरू हुई, तो पैसों की बंदरबांट बहुसंख्यक संगठनों के बीच कर दी गई। महिलाओं के लिए नई रोशनी योजना के अंतर्गत ग्यारह राज्यों में 25 संगठनों को धनराशि प्रदान की गई, जिनमें अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित संगठनों को दरकिनार कर दिया गया। मुस्लिम संगठनों को यह कहकर पैसा देने से इंकार कर दिया गया कि वे आवश्यक पैमाने पर पूरे नहीं उतर पाए। सोनिया गांधी को तो कम से कम यह ज़रूर पता होगा कि पूर्व आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर ने किस कारण से नेशनल एडवाइजरी कमेटी से इस्तीफा दिया था। हर्ष मंदर इस बात से नाराज थे कि योजनाओं को सीधे मुसलमानों से न जोड़कर अल्पसंख्यकों से क्यों जोड़ दिया गया। 10 सालों तक यूपीए सरकार और प्रधानमंत्री अल्पसंख्यकों की योजनाओं की बात तो करते रहे, लेकिन आज हालात यह हैं कि यूपीए सरकार एक भी योजना सफल होने का दावा करने की स्थिति में नहीं है। इस कॉन्फ्रेंस में सोनिया गांधी के बाद मनमोहन सिंह ने भाषण दिया। उन्होंने वक्फ़ बोर्ड के बारे में बात की और बताया कि उनके उपहार मोर्टगेज एवं एक्सचेंज पर रोक लगा दी गई है, लेकिन वह यह नहीं बता सके कि आज भी वक्फ़ की अनगिनत संपत्तियां सरकारी एवं ग़ैर-सरकारी संस्थाओं के क़ब्जे में क्यों हैं। कई लोगों का मानना है कि वक्फ़ की संपत्तियों का अगर ढंग से सर्फ़ि मैनेजमेंट हो जाए, तो देश के मुसलमानों की समस्याएं ख़त्म हो सकती हैं। इस पर कोई काम तो हुआ नहीं, लेकिन मनमोहन सिंह दावा करते हैं कि सच्चर कमेटी के अधिकतर सुझावों पर अमल किया जा चुका है। केंद्रीय मंत्री के रहमान खान का दावा है कि उनके मंत्रालय ने सच्चर कमेटी की 76 अनुशंसाओं में से 73 को लागू कर दिया है। चौथी दुनिया ने जब पड़ताल की, तो पता चला कि आरंभिक 22 अनुशंसाओं में 12 अनुशंसाओं को यूपीए सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया है। यूपीए सरकार के मंत्री लगातार झूठ बोल रहे हैं। सरकार ने अपनी ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) में अल्पसंख्यक मंत्रालय को 7 हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किए थे। मंत्रालय का दावा है कि उसने उन रुपयों में से 6,824 करोड़ रुपये ख़र्च कर दिए हैं। जबकि सच्चाई यह है कि मंत्रालय ने राज्यों को जो राशि आवंटित की थी, उनमें से अधिकतर राशि ख़र्च ही नहीं की गई। हाल में जारी सोशल डेवलेपमेंट रिपोर्ट 2012 के अनुसार, 2007-2012 के दौरान राज्य सरकारों ने केंद्र की ओर से जारी की गई अल्पसंख्यकों से संबंधित धनराशि में से आधी रकम भी ख़र्च नहीं की। 12 राज्यों ने अल्पसंख्यकों से संबंधित पैसा 50 प्रतिशत से भी कम ख़र्च किया, जिनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और असम जैसे राज्य सूची में ऊपर हैं। कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां पर केवल 20 प्रतिशत राशि ही ख़र्च की गई। सच्चाई यह है कि अल्पसंख्यक मंत्रालय ने वर्ष 2008-09 में केंद्र सरकार को 33.63 करोड़, 2009-10 में 31.50 करोड़ और 2010-11 में 587 करोड़ रुपये इसलिए वापस लौटा दिए, क्योंकि उन पैसों को ख़र्च ही नहीं किया जा सका। अल्पसंख्यक मंत्रालय की असमर्थता को देखते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई थी। अल्पसंख्यकों की बहुलता वाले 90 जि़लों में बहुक्षेत्रीय विकास के तहत विभिन्न योजनाओं पर ख़र्च करने के लिए केंद्र की ओर से इस मंत्रालय को जो 462.26 करोड़ रुपये दिए गए थे, वे भी इसने केंद्र को लौटा दिए। इसी प्रकार पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के 24 करोड़, मैट्रिक स्कॉलरशिप के 33 करोड़, मैरिट कोमेंस स्कॉलरशिप के 26 करोड़ और वक्फ़ बोर्ड के कंप्यूटरीकरण के 9.3 करोड़ रुपये की धनराशि अल्पसंख्यक मंत्रालय ख़र्च करने में असफल रहा और नतीजतन यह पूरी धनराशि इसे केंद्र को वापस करनी पड़ी। ऐसी स्थिति में, अल्पसंख्यकों, विशेषत: मुसलमानों के विकास के बारे में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के सभी दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। सच्चर कमेटी ने सबसे अधिक ज़ोर मुसलमानों की अशिक्षा एवं पिछड़ेपन को दूर करने पर दिया था, लेकिन 7 वर्ष बाद भी मुस्लिम समुदाय की शिक्षा के लिए ठोस क़दम नहीं उठाए गए हैं। सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए अलग से किसी प्रकार के आरक्षण की व्यवस्था भी अब तक नहीं की जा सकी है। हक़ीक़त यह है कि पिछले 10 सालों में मुस्लिम समुदाय विकास की मुख्य धारा से बाहर हो चुका है। इसकी कई वजहें हैं। शिक्षा और शिक्षा का स्तर एक बड़ी वजह है। मुस्लिम युवा वर्तमान की प्रतियोगी दुनिया में पिछड़ रहे हैं। निजी क्षेत्र में पक्षपात का भी मामला है। सरकारी क्षेत्र में भी जहां इंटरव्यू का मामला होता है, वहां भी वे भेदभाव के शिकार होते हैं। मीडिया और राजनीति ने ऐसा वातावरण बना दिया है, जिससे मुसलमान मुख्य धारा से विमुख होते जा रहे हैं। सरकार को इन बातों की चिंता नहीं है. मुसलमानों से जुड़े किसी भी आंकड़े पर आप नजऱ डालें, तो पता चलता है कि उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक हालत दलितों से ज़्यादा खराब है। मुसलमानों की बस्तियों में स्कूल नहीं हैं, अस्पताल नहीं हैं, रोजग़ार के अवसर नहीं हैं। समझने वाली बात यह है कि शिक्षा को लेकर सरकारी आंकड़े भ्रमित करने वाले होते हैं। अपना नाम लिखने और पढऩे वालों को हम शिक्षित मान लेते हैं। गांवों में रहने वाले मुसलमान मदरसे में पढ़ते हैं। वे शिक्षित लोगों की गिनती में तो आ जाते हैं, लेकिन उन्हें उनकी पढ़ाई का फायदा नौकरी या रोजग़ार दिलाने में नहीं मिलता। गऱीबी की वजह से मुस्लिम बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। समाज के हर क्षेत्र में देश के मुसलमान पिछड़ रहे हैं और उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है या यूं कहें कि उन्हें सहायता नहीं दी जा रही है। आर्थिक नीतियां ऐसी अपनाई गई हैं, जिनसे मुसलमानों की स्थिति पिछले 10 सालों में बद से बदतर होती जा रही है। सरकार की नव-उदारवादी आर्थिक नीति गऱीबों को और गऱीब बना रही है। गांवों में जीना मुश्किल हो रहा है। मुसलमान गऱीब हैं। इसलिए वर्तमान अर्थिक नीति का सबसे बुरा प्रभाव उन्हीं पर पड़ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि छोटे एवं मंझोले कृषक मुसलमानों को जीने के लिए अपनी बची-खुची ज़मीन बेचनी पड़ रही है। वे धीरे-धीरे किसान से मज़दूर बनते जा रहे हैं। अब देश में 60 फ़ीसद से ज़्यादा ग्रामीण मुसलमानों के पास जमीन नहीं है। हैरान करने वाली बात यह है कि हर साल एक फ़ीसद जमीन मुसलमानों के हाथ से खिसक रही है। मुसलमानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ़ गांवों से जमीन जा रही है, तो दूसरी तरफ़ सरकार की नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों का बुरा असर पड़ रहा है। कामगार और अपने हुनर के जरिए पैसा और नाम कमाने वाले व्यापार धीरे-धीरे बंद होने लगे हैं। पारंपरिक व्यापार में ताला लग चुका है। ऐसे लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई है। मुसलमान इस बाज़ार संचालित आर्थिक व्यवस्था से बिल्कुल विमुख होता जा रहा है। शहरों में जो रा़जगार भी मिलते हैं, वे सबसे निम्न किस्म के होते हैं। मुसलमान सरकार की नीतियों की वजह से पहले मुख्य धारा से विमुख होते गए और अब पिछले 10 सालों में बदले हुए सामाजिक और आर्थिक परिवेश में वे खुद को तिरस्कृत महसूस कर रहे हैं। लेकिन दु:ख इस बात का है कि कांग्रेस पार्टी इस पर अफ़सोस जताने और माफी मांगने के बजाय खुद की पीठ ठोंक रही है, खुद को ही सर्टिफिकेट दे रही है। एक तरफ़ मुस्लिम समुदाय की मूलभूत समस्या है और दूसरी तरफ़ तेजी से बदलता हुआ सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश है। मुसलमानों के सामने ख़तरनाक चुनौती है। ख़तरनाक इसलिए, क्योंकि हम इतिहास के ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां थोड़ी-सी चूक या देरी पूरे मुस्लिम समुदाय को समाज के सबसे निचले स्तर पर ले जाएगी। दलित विकास की राह पर आ चुके हैं। कई अनुसूचित जातियां काफी आगे निकल चुकी हैं। कई पिछड़ी जातियां ऊंची जातियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। अल्पसंख्यकों में भी जैन, सिख, ईसाई पारसी वगैरह पहले से ही काफी आगे हैं। सर्फ़ि मुसलमान पिछड़ रहे हैं। ऐसी क्या बात है कि मुस्लिम समुदाय ही अकेला बच गया है, जो अशिक्षा, बेरोजग़ारी, बीमारी और अतीत काल की ओर जा रहा है। इसे मुस्लिम समुदाय को ही रोकना होगा। अलग-अलग विचारधाराओं के नाम पर दुकान चलाने वाले राजनीतिक दलों से कोई आशा नहीं करनी चाहिए। चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के साथ मुस्लिम वोटों का सौदा करने वाले सामाजिक और धार्मिक नेताओं से भी आशा नहीं करनी चाहिए। विभिन्न राजनीतिक दलों में मौजूद मुस्लिम नेताओं से भी कोई उम्मीद नहीं है। पुरानी पीढ़ी से भी उम्मीद नहीं है, क्योंकि उनके दिमाग में कई तरह के पूर्वाग्रह मौजूद हैं। वर्तमान समस्याओं से निपटने और भविष्य का नक्शा तैयार करने के लिए नई पीढ़ी, यानी युवा ही आगे आएंगे और मुस्लिम समुदाय को इस दलदल से निकालेंगे। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
deneme bonusu
vaycasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
betpark giriş
betpark giriş
savoybetting giriş