रक्त-रंजित मुद्रा की चकाचौंध-6

blood_dripमुजफ्फर हुसैन
गतांक से आगे…….
अब तो 8 से 10 प्रतिशत भी मिल जाए तो भगवान को धन्यवाद देना चाहिए और वहां की सरकार का सम्मान करना चाहिए। शहरीकरण के लिए महामार्ग बनते चले गये, जंगलों के बीच कारखाने स्थापित होते चले गये, रेल और विमानों के दौडऩे, उनके उतरने और ठहरने के लिए अधिक से अधिक जमीन का शोषण होता चला गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि हमारी जमीन रेगिस्तान बनी चली गयी। सहारा, थार और अरबस्तान के रेगिस्तान किस तेजी से बढ़ रहे हैं, यह बताने की आवश्यकता नही। जब जंगल नही होंगे तो फिर पशु पक्षी कहां रहेंगे? अपना घर बनाने के लिए इनसान ने इन बिन बोले जानवरों का घर छीन लिया। इस कारण उनकी जन्म् दर लगातार घट रही है। अब तो उनकी कुछ जातियों को दुर्लभ प्राणियों की संज्ञा देकर उन्हें केवल प्राणी घर के पिंजरों तक सीमित कर दिया गया है। भारत में पाये जाने वाले पक्षियों में 15 जातियां तो बिलकुल नदारद हो गयीं हैं। यही स्थिति पशुओं की है। हम सभी महसूस करते हैं कि मुरदों, कंकालों पर टूट पडऩे वाले गिद्घ नही दिखाई पड़ते। गुटरगूं का शोर करते हुए कबूतर कितने ही कम हो गये हैं और सवेरा होते ही हमारे आंगन में चहकने व फुदकने वाली चिडिय़ां कहीं चली गयीं? बरसात में पपीहे की आवाज आ जाए तो जरूर समझना कि हम भारत में रहते हैं। कोयल की कूक की प्रतीक्षा कौन नही करता, लेकिन अब वसंत का समाचार देने वाली यह चिडिय़ा भी इक्की दुक्की पेड़ की डाली पर कूकती सुनाई पड़ती है। उर्दू के कवियों से पूछने का मन होता है कि गुल फूल तो है, लेकिन बुलबुल कहां है? सावन में नाचते दिखाई पडऩे वाले मोर तो बहुत दूर, अब किसी खेत में चुगते भीनजर आ जाएं तो बड़ी बात है। प्रसिद्घ पक्षी निष्णात एंथरियोलॉजिस्ट स्व. डा. सलीम अली ने मालवा के रतलाम जिले में लुप्त पक्षी खरमोर ढूंढ़ निकाला था। वे अपनी इस सफलता पर इतने खुश थे कि उन्हें जब अमेरिका की एक संस्था ने पुरस्कार स्वरूप एक बड़ी रकम दी थी, उसमें से एक बड़ा भाग उन्होंने इस पक्षी की रक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार को अनुदान स्वरूप दिया था। वह धनराशि कहां है, यह आज भी जावरा परिसर के पेड़ पौधे और खरमोर जैसा दुर्लभ पक्षी अपनी मौन भाषा में पूछते रहते हैं?
कुदरत के इन पहरेदारों का दुश्मन कौन है?
सन 1960 और 70 के दशक तक भारत में कीटनाशक पेस्ट्रीसाइट औषधियों का चलन नही था। अमेरिका को इस पर बड़ा आवश्र्य था कि भारत जैसा कृषि प्रधान देश अपनी खेजी की रक्षा करने के लिए इन दवाओं और रसायनों का उपयोग नही करता?
क्रमश:

Comment:

betnano giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betnano giriş
betnano giriş
betamiral giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkare giriş
noktabet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
galabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
betplay giriş
betplay giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
noktabet giriş
betasus giriş
betkare giriş
betkare giriş
noktabet giriş
restbet güncel
imajbet giriş
imajbet güncel giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betnano giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
fikstürbet giriş
fiksturbet giriş
fiksturbet
betplay giriş
betplay
betplay giriş
betasus giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betplay giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş