सादगीपूर्ण ढंग से विवाह समारोह संपन्न कर ‘उगता भारत’ परिवार ने की मिसाल कायम

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ग्रेटर नोएडा। (संवाददाता ) ‘उगता भारत’ समाचार पत्र के संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य की सुपुत्री आयु0 श्वेता आर्या का पाणिग्रहण संस्कार विगत 26 नवंबर को संपन्न हुआ। इस विवाह समारोह में पूर्णतया सादगी का ध्यान रखा गया । साथ ही इस कोरोना काल में सरकार द्वारा निर्धारित 100 की संख्या से भी कम लोगों को आमंत्रित किया गया।


इस संबंध में ‘उगता भारत’ समाचार पत्र के चेयरमैन श्री देवेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि इस समय सामाजिक स्तर पर कई बुराइयों से हमें जूझना पड़ रहा है । अधिक भीड़ को आमंत्रित करना लोगों ने अपना स्टेटस संबल बना लिया है । जिससे फिजूलखर्ची तो होती ही है साथ ही सड़कों पर बेकार का जाम लगाने में भी शादी समारोह अधिक भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त कितना ही डीजल ,पेट्रोल फुकता है। जिससे राष्ट्रीय हानि होती है। इसके अलावा लोगों को दूर-दूर शादियों में जाकर अपना समय ,धन और ऊर्जा का अपव्यय करना पड़ता है।
श्री आर्य ने कहा कि समाज के संजीदा लोगों को समाज सुधार का दृष्टिकोण अपनाकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए । उन्होंने कहा कि आज जब हम डिजिटल इंडिया के जमाने में जी रहे हैं तो कार्डों को छपवाना और फिर उनको बांटना फिजूलखर्ची के सिवाय कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्डों को बांटते समय भी लोग एक दूसरे को मिठाई या स्वीट ड्राई फ्रूट्स के डिब्बे भेंट कर रहे हैं । जिससे समाज में एक बेकार की फिजूलखर्ची को बढ़ावा मिलता जा रहा है । यदि हम इन सब चीजों को समाप्त कर इन पर खर्च होने वाले पैसे को या तो अपनी बेटी को दें या किसी गरीब की बेटी की शादी करने में सहायता करें तो सारा समाज सकारात्मक ऊर्जा से भर जाएगा ।


उन्होंने कहा कि हमें मोबाइल फोन से लोगों को आमंत्रित करने का काम भी आरंभ करना चाहिए। श्री आर्य ने कहा कि वह स्वयं मोबाइल फोन से आमंत्रित होना पसंद करते हैं और यही अपेक्षा दूसरे लोगों से भी करते हैं कि वह भी बिना किसी कार्ड के बुलावे के केवल मोबाइल पर दी गई सूचना के आधार पर उपस्थित हों, इसके लिए समाज के जागरूक लोगों को पहल करनी चाहिए।
विवाह समारोह के बारे में जानकारी देते हुए उगता भारत के संपादक डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि हमें विवाह समारोह में अपने चंदा लोगों को ही आमंत्रित करना चाहिए जिससे हम एक दूसरे के साथ आत्मीय भाव से बातचीत कर सकें और एक दूसरे के साथ भरपूर आनंदित क्षणों को गुजार सकें। अधिक भीड़भाड़ करने से ना तो किसी के साथ परिचय होता है और ना ही किसी को समय दिया जा सकता है। इस प्रकार अधिक भीड़भाड़ वाले शादी समारोह केवल एक मेला बनकर रह जाते हैं । जिसमें सम्मेलन की भावना कहीं भी प्रकट नहीं हो पाती । इस प्रकार के समारोहों से लोगों में तनाव पैदा होता है और बजाय निकटता के दूरी का भाव बनता है।


आर्य ने कहा कि इस विवाह समारोह में वर पक्ष के चौधरी ओमवीर सिंह भाटी और उनके परिजनों ने भी भरपूर सहयोग किया। दूल्हा बने गौरव भाटी और उनके पिता ओमवीर सिंह भाटी सहित सभी परिजनों का दृष्टिकोण सकारात्मक रहा। उन्होंने भी इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि सारे काम सादगी पूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए, जिससे समाज के लिए एक मिसाल बन सके।
कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री रवि चाणक्य ने उपस्थित होकर वर वधु को अपना आशीर्वाद प्रदान किया और दोनों के सफल गृहस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति के संस्कार व्यक्ति का निर्माण करते हैं। यद्यपि धन संपदा जीवन के लिए महत्वपूर्ण है परंतु शुभ संस्कार धन संपदा से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वर वधु दोनों को ही धनसंपदा के साथ-साथ शुभ संस्कारों को अंगीकार करके चलते रहने का संकल्प लेना चाहिए। उसी से उनका जीवन सुख और आनंद से भरा रहेगा।
इस अवसर पर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा पंडित नंदकिशोर मिश्र ,राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया, राष्ट्रीय विधिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष इक्रांत शर्मा व राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री विपिन खुराना ने भी उपस्थित होकर वर वधु को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। बाबा पंडित नंदकिशोर मिश्र ने कहा कि पाणिग्रहण संस्कार भारत की संसार को एक बहुत ही बेहतरीन देन है। पश्चिम का जगत भारत के विवाह समारोहों को प्रारंभ से ही कौतूहल की दृष्टि से देखता रहा है। वह आज तक भी विवाह को एक संविदा मान कर चलता है। जिससे उनके परिवार में बिखराव की स्थिति बनी रहती है और पशु संस्कृति का सा व्यवहार पति पत्नी एक दूसरे के साथ करते हैं। जबकि भारत वर्ष में विवाह को एक नियमित संस्था के रूप में अपनाया जाता है जिसके माध्यम से चरित्रहीनता की कोई गुंजाइश व्यक्ति के लिए नहीं रह पाती। यही कारण है कि भारत की विवाह संस्कार जैसी नियमित संस्था को अपनाकर ही संसार में स्थाई सुख शांति आ सकती है।


विवाह समारोह में पहुंचे राष्ट्रीय राष्ट्र निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ आनंद कुमार ने कहा कि भारत के सोलह संस्कारों को संसार समझ नहीं पाया। जिस कारण संसार में नैतिक पतन निरंतर होता चला गया और आज भी होता जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि भारत अपने 16 संस्कारों की पवित्र परंपरा से दूर होता जा रहा है और पश्चिम की ओर भाग रहा है। उन्होंने कहा कि सादगी पूर्ण ढंग से विवाह समारोह संपन्न कर वर वधु को 16 संस्कारों के बारे में बताया जाना चाहिए । विवाह समारोह में उपस्थित हुए 18 57 की क्रांति के महानायक धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना और समाजशास्त्री डॉ राकेश राणा ने भी समाज सुधार की भावना पर बल दिया और शादी समारोहों में हो रही फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की बात कही।
विवाह समारोह में ‘उगता भारत’ के संरक्षक श्री विजेंद्र सिंह आर्य , मेजर वीर सिंह आर्य, सह संपादक श्रीनिवास आर्य, महाप्रबंधक एलएस तिवारी सहित कई बुद्धिजीवियों और समाज चिंतकों ने उपस्थित होकर वर-वधू को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

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