आओ समझें: सनातन धर्म का स्वरूप

भाई परमानंद

सनातन का अर्थ है नित्य। वैदिक धर्म का नाम सनातन धर्म अत्यंत उपयुक्त है। अन्य किसी भी भाषा में इसके लिए रिलीजन शब्द है, पर धम्र का भाव रिलीजन में पूरी तरह से नही उतर पाता। रिलीजन शब्द धर्म के उस भाव को लिए हुए है, जो बहुत सीमित और संकुचित है, पर सनातन धर्म इतना विशाल है कि इसमें हमारे इस जन्म के ही नही, अपितु पूर्वजन्म और भविष्य जन्म के सभी विषयों और परिणामों का पूर्णतया समावेश होता है।
शास्त्रों में धर्म की परिभाषा धारणाद धर्म: की गयी है। अर्थात धर्म वह है जो हमें सब तरह के विनाश और अधोगति से बचाकर उन्नति की ओर ले जाता है। अत: रिलीजन की तरह धर्म शब्द सीमित और संकुचित अर्थवाला नही है। उदाहरणार्थ वेद केवल पारलौकिक सुख प्राप्ति का मार्ग बताकर ही नही रह जाते, अपितु इस लोक में सर्वांगीण उन्नति और समृद्घि के पथ का भी प्रदर्शन करते हैं।
सनातन धर्म के अर्थ
पहला अर्थ-व्याकरण की दृष्टिï से सनातन धर्म शब्द में षष्ठी तत्पुरूष समास है, जैसे सनातनस्य धर्म इति सनातनधर्म: सनातन का धर्म। सनातन में लगायी गयी षष्ठी विभक्ति स्थाप्य स्थापक सम्बंध बोधक है। दूसरे शब्दों में-जिस प्रकार ईसाई, मुहम्मदी, जरथुस्त्र तथा बौद्घधर्म अपने साथ ही ईसा, मुहम्मद, जरथुस्त्र तथा बुद्घ के भी बोधक हैं, उसी प्रकार सनातन धर्म भी यह बताता है कि यह धर्म उस सनातन अर्थात नित्य तत्व परमात्मा द्वारा ही चलाया गया है, किसी व्यक्ति के द्वारा नही।
सनातन धर्म को छोड़कर और सभी धर्मों को दो भागों में बांटा जा सकता है-1. वे धर्म जो पूर्वकाल में थे, पर अब विद्यमान नही हैं। 2. वे धर्म जो पूर्वकाल में नही थे पर अब हैं। पर सनातन का अंतर्भाव इन दोनों में से किसी में भी नही किया जा सकता, क्योंकि यह धर्म अन्य धर्मों के जन्म से भी पूर्व विद्यमान था और अब भी विद्यमान है।
पर, भविष्य में? इस प्रश्न के प्रसंग में हमें यज्जन्यं तदनित्यम (जो उत्पन्न होने वाला है, वह अवश्य नष्टï हो जाएगा) यह प्राकृतिक नियम ध्यान में रखना पड़ेगा। इस नियम का कोई अपवाद न अब तक हुआ और न आगे कभी होगा ही। उदाहरण स्वरूप-सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश तथा धर्म के संस्थापन के लिए जब भगवान मानव शरीर के रूप में अवतरित होते हैं और अपना कार्य पूरा कर लेते हैं, तब वे चले जाते हैं, इस प्रकार भगवान का अवतरित दिव्य शरीर भी इस प्राकृतिक नियम का अपवाद नही है।
दूसरा अर्थ
सनातन धर्म अनादि और अनंत है। क्योंकि सृष्टिï की उत्पत्ति के समय से लेकर सृष्टिï प्रलय तक यह विद्यमान रहता है। यह सनातन इसलिए नही है कि यह सनातन ईश्वर द्वारा स्थापित है अपितु यह स्वयं भी सनातन या नित्य है। यह प्रलय तक अस्तित्व में रहेगा, प्रलय के बाद भी यह नष्टï होने वाला नही, अपितु गुप्तरूप में तब भी यह अवस्थित रहता है। पुन: सृष्टिï के साथ ही यह लोगों की रक्षा और उन्नति करने के लिए प्रकट हो जाता है। व्याकरण की दृष्टिï से दूसरे अर्थ का बोधक कर्मधारय समास है, जिसके अनुसार सनातन धर्म इस पद का विग्रह होता है-सनातनश्चासौ धर्मश्च अर्थात सनातन रूप से रहने वाला धर्म।
इसका अर्थ यह नही कि दूसरे धर्म झूठे हैं। इसके विपरीत हमारा तो यह कथन है कि सभी धर्म किसी न किसी रूप में उस अंतिम लक्ष्य तक मनुष्य को पहुंचाते ही हैं, पर वे किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा स्थापित होने के कारण समय के साथ नष्टï भी हो जाते हैं, यह सनातन धर्म ही ऐसा है जो सृष्टिïकाल में सारी रचना को उन्नति की और प्रेरित करता है, प्रलय में सूक्ष्मरूप से रहता है और अगले कल्प में पुन: प्रकट हो जाता है।
तीसरा अर्थ
इसमें भी सनातन धर्म कर्मधारय समास में है, पर यहां सनातन पद में दूसरे अर्थ की अपेक्षा कुछ और विशेषता है। यहां उसका विग्रह होगा-
सना सदा भव: सनातन: सनातनं करोति इति सनातनयति, सनातनयतीति सनातन: सनातनश्जासौ धर्म: इति सनातन धर्म:।
यह सनातन केवल इसलिए नही है कि यह सनातन परमात्मा द्वारा संस्थापित है, यह धर्म सनातन इसलिए भी नही है कि यह स्वयं में अविनश्वर है, अपितु यह सनातन इसलिए है कि इस धर्म में विश्वास रखने वाला तथा इस धर्म पर चलने वाला भी सनातन हो जाता है। यह धर्म अपने अनुयायी को भी अमर बना देता है।
इसको और गहरा समझने के लिए हमें और राज्यों की ओर भी तुलनात्मक दृष्टिï से देखना पड़ेगा। ग्रीस, रोम, सीरिया, असीरिया, पर्शिया, बेबीलोन, चाल्डियन, फीनिशिया, मिस्र, जिनेवा, तथा दूसरे भी साम्राज्य जिन्होंने सारी दुनिया को हिला दिया था, आज पृथ्वी की सतह से सर्वथा समाप्त हो चुके हैं। उनके पास धनबल, जनबल, सैन्यबल सभी कुछ था, पर लोगों को सनातन या अमर बनाने की शक्ति उन साम्राज्यों के पास नही थी। यही उनके संपूर्ण विनाश का कारण बना। पर भारत के पास यह शक्ति थी, इसलिए वह आज तक जीवित रहा। इसमें संखय नही कि इसका जीवित रखने में सनातन धर्म एक मुख्य कारण रहा है, जो–
1. सनातन तत्व अर्थात परमात्मा द्वारा संस्थापित है (पहला अर्थ सनातनस्य धर्म: षष्ठी-तत्पुरूष समाज अर्थात सनातन का धर्म)
2. स्वयं भी सनातन है (दूसरा अर्थ सनातनश्चासौ धर्म: कर्मधारय समास)
3. अपने अनुयायियों को भी सनातन नित्य तथा अमर बना देता है(तीसरा अर्थ सनातनयति इति सनातन: सनातनश्चासौ धर्म: इति सनातन धर्म:) यहां एक प्रश्न उठता है कि इस धर्म के अनुयायी अमरत्व का स्वरूप क्या हे? इस प्रश्न का उत्तर हमें सनातन धर्म शब्द के चौथे अर्थ में मिलेगा।
क्रमश:

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
betpark giriş
betpark giriş
savoybetting giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betnano giriş
restbet giriş
safirbet giriş
betnano giriş
restbet giriş