Categories
राजनीति

राहुल गांधी ! आपके पीएम न तो चुप हैं और न छुपे हैं

प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ व रणनीतिकार चाणक्य का कथन है कि “शत्रु के साथ युद्ध केवल रणक्षेत्र मे व केवल हथियारों से Yही नहीं लड़ा जाता; युद्ध अपने व शत्रु देश के मानस मे उसकी मानसिकता को हथियार बनाकर भी लड़ा जाता है”। स्वाभाविक है कि चाणक्य के अनुसार युद्धकाल मे देश के नेतृत्व, विपक्ष व नागरिकों की सकारात्मक भूमिका ही प्राथमिक तत्व है। प्रशंसा की बात है कि युद्ध काल व शांति काल की भारतीय मानसिकता को चीन के समाचार पत्र द ग्लोबल टाइम्स ने भली भांति समझा, और लिखा है कि “भारत के कुछ एलीट क्लास के लोगों की गलत धारणा है कि अमेरिका ने अपनी भारत-प्रशांत रणनीति के जरिए भारत का परचम लहराया है। यह पत्र आगे लिखता है कि 2017 में जब डोकलाम क्षेत्र में भारतीय सेना ने अपनी सनक और अहंकार के कारण चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता को खुले तौर पर चुनौती दिया तब भारत के एलीट क्लास ने इसकी जमकर प्रशंसा की। चीन के प्रति भारतीय एलीट की मानसिकता खतरनाक है। निश्चित तौर पर यदि भारत के श्रेष्ठि वर्ग की, बुद्धिजीवियों की व मध्यम वर्ग की चीन के प्रति यदि नकारात्मक धारणा है तो वह इतिहास सिद्ध है व तथ्य आधारित है। निश्चित ही भारत का आम (वामपंथी एलीट नहीं) एलीट वर्ग या सुधिजन, श्रेष्ठिजन ही संकटकाल मे भारत का सच्चा साथ देता है व एक सकारात्मक वातावरण या नरेटिव का निर्माण करता है। दुर्भाग्य का विषय है कि चीनी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स द्वारा भारत के श्रेष्ठि वर्ग को दिये गए श्रेय को कांग्रेस नेता राहुल गांधी सिरे से खारिज किए दे रहे हैं। लगभग युद्धकाल जैसी परिस्थितियों मे जबकि देश पूरा ध्यान दुश्मन पर टिकाये हुये है, हमारे वीर शहीद सैनिको के अंतिम संस्कार हो रहे हैं, देश का नागरिक अपनी दलगत निष्ठाओं को परे रखकर देश की सरकार के साथ दृढ़ मानस के साथ खड़ा है तब कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी ढपली अपना राग लेकर आ गए हैं। दुर्भाग्य से राहुल गांधी की ढपली और राग सदा की तरह इस बार केवल बेसुरा ही नहीं है बल्कि अत्यधिक कर्कश और मूर्खतापूर्ण भी है। राहल गांधी ने चीन के विरुद्ध देश की सरकार संग खड़े होने के स्थान पर देश के दो तिहाई बहुमत वाले प्रधानमंत्री से पूछा – आप चुप क्यों हैं? कहां छुपे हैं?? इतने पर भी वे चुप न रहे और किसी थर्ड ग्रेड हिंदी फिल्म की तरह के डायलाग मार बैठे कि – चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारे सैनिकों को मारने की, और उनकी हिम्मत कैसे हुई हमारी भूमि हड़पने की। यदि बेतुकी बयानबाजी का यह दौर राहुल गांधी तक ही सीमित रहता तो कोई और बात थी किंतु सवा सौ वर्ष पुरानी यह कांग्रेस पार्टी अपने सुरजेवाला जैसे तमाम प्रवक्ताओं के साथ राहुल गांधी के पीछे खड़ी हो गई और बेहद अपरिपक्वतापूर्ण व्यक्तव्य जारी करने लगी। अपरिपक्वता की सीमा तो तब हो गई जब राहुल गांधी भारत चीन युद्ध को मोदी चीन युद्ध समझने लगे व इस चक्कर मे भारतीय सेना के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देना भी भूल गए व लोगों द्वारा स्मरण कराने के बाद व मोदी की आलोचना करने के घंटों बाद उन्हे भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि देने की बात याद आई और उन्होने अंततः तीन घंटे बाद श्रद्धांजलि का ट्वीट किया।

वैसे प्रारंभ से ही कांग्रेस का व विशेषतः गांधी परिवार की चीन समस्या के प्रति किस प्रकार की दब्बूपन व तदर्थवाद की नीति रही है इसका हमें बड़ा ही कटुक अनुभव है। हमारें इस कटु अनुभव को ठप्पा लगानें के लिए वह समझौता पर्याप्त है जो 29 अप्रैल, 1954 मे किया गया था। इस भारत-चीन समझौते में सर्वप्रथम उन पाँच सिद्धांतों को आधारभूत मानकर संधि की गई थी जिसे हमारी कालजयी संस्कृति में पंचशील कहा जाता है। पंचशील शब्द ऐतिहासिक बौद्ध अभिलेखों से लिया गया है जो कि बौद्ध भिक्षुओं का आचरण निर्धारित करने वाले पाँच निषेध या मापदंड होते हैं। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की सरकार ने यह संधि की थी। इस समझौते के परिचय को पंचशील से जोड़ा गया। 25 जून, 1954 को चीन के प्रधान मंत्री श्री चाऊ एन लाई भारत की राजकीय यात्रा पर आए और उनकी यात्रा की समाप्ति पर जो संयुक्त विज्ञप्ति प्रकाशित हुई उसमें घोषणा की गई कि वे पंचशील के पाँच सिद्धांतों का परिपालन करेंगे। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार और परस्पर सौहाद्र और विकास के आवश्यक सिद्धांतों के रूप में पंचशील के सिद्धांतों की व्यापक घोषणा कर इनकें पालन और इसकी मूल भावना के सरंक्षण का संकल्प किया था। किन्तु इतिहास साक्षी है कि चीन समय समय पर इस संधि की मूल भावना को ठेस पहुंचा भारत के हितों को चोटिल करता रहा और अंततः 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर इस संधि को ध्वस्त कर दिया था।

भारत चीन युद्ध के सदर्भों में भारत की कांग्रेस सरकारों का रवैया भी बड़ा ही रहस्यमयी रहा है जिससे चीन के क्रूर कारनामों के प्रति भारत का जनमानस अब भी अपरिचित है, और इस युद्ध से सम्बंधित दस्तावेज अब भी तालों में कैद हैं। बहुत सी मांगो और असंतोष के बाद भारत सरकार ने 1969 में भारत चीन युद्द्घ पर एक श्वेत पत्र प्रकाशित किया और इसके बाद 12 श्वेत पत्र जारी किये गए किन्तु इन सब में इन प्रश्नों के प्रति जो उत्तर होते थे उनमें सत्य और आत्मा का सदा अभाव ही रहा। आत्माहीन और महज शब्दों के खेल के रूप में प्रकाशित ये श्वेत पत्र और इनकें बाद की परिस्थितियां आज भी इस देश के जनमानस को यह जवाब नहीं दे पाई हैं कि चीन ने हम पर हमला कर हमारी 14000 किमी भूमि को कैसे कब्जा लिया?! 21 नवम्बर, 1962 को चीन स्वमेव ही इस कब्जे के बाद वापिस चला गया था। भारतीय संसद मे पंडित नेहरु के गंजें सर वाले कुख्यात दृष्टांत के बाद संसद भारत की एक एक इंच जमीं को चीन से वापिस लेनें के संकल्प और कसमें दोहराती रही पर हम एक एक इंच क्या एक इंच भी भूमि चीन से वापिस न ले पानें का दुःख साथ लिए चल रहे हैं। चीन ने तब हम पर क्यों आक्रमण किया, क्यों चीन वापस चला गया, क्या बातें हुर्इं, दस्तावेज क्या कहते हैं? ये सभी कुछ आज भी रहस्य ही है।

चीन ने पिछले वर्षों के मनमोहन शासनकाल मे कश्मीरी युवकों को भारतीय परिचय पत्रों पर नहीं वरन अन्य दस्तावेजों के आधार पर वीजा देना प्रारम्भ किया और भारत के भीतरी मामलों में सीधा अनुचित हस्तक्षेप किया था उसे भी सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली मनमोहन सरकार ने अनदेखा कर दिया था। ब्रह्मपुत्र पर बने बांध को भी अनदेखा किया गया और पाकिस्तान से ग्वादर बंदरगाह के अधिग्रहण को भी हल्के मे लिया गया था। अब हमारी दिल्ली को याद रखना होगा कि इतिहास के सिखाये सबक याद न रखनें से हम पुनः 1962 की स्थिति में खड़े हो सकते हैं। हमारें सभी पड़ोसी राष्ट्रों पाकिस्तान, श्रीलंका, बर्मा, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल आदि को चीन किसी न किसी प्रकार कृतार्थ कर अपनी शर्तों में बाँध चुका है इस स्थिति का व्यवस्थित चिंतन करने के स्थान पर और अपनी पिछली पीढ़ियों की गलतियों पर पश्चाताप करने के स्थान पर आज कांग्रेस अनुचित बयानबाजी कर देश को संकट मे न डाले तो ही उचित होगा।

आज जबकि इतिहास मे पहली बार चीन के भारतीय सीमा मे प्रवेश पर भारत ने अपनी दृढ़ प्रतिक्रिया दी है व इस उपक्रम मे हमने 20 भारतीय जवानों के वीरगति के दुख को झेलने के साथ ही 43 चीनी सैनिकों को मार गिराने का गौरव भी हासिल किया है तब निश्चित ही हमें राष्ट्रीय स्तर पर अधिक गंभीर, एकाग्र, एकात्म व एकसुर होना भी होगा व इस अनूरूप दिखना भी होगा। आशा है इस बात को कांग्रेस नेता राहुल गांधी व उनकी समूची कांग्रेस पार्टी अवश्य समझेगी।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betparibu giriş
betlike giriş
parmabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
parmabet giriş
betlike giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
klasbahis giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betebet giriş