सनकी जो दुनिया को सुखी करके चला गया

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“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””आज जितने भी तकनीकी उपकरण है जिनका हम सुख सुविधा मानव कल्याण में प्रयोग करते हैं, चंद घंटों कुछ महीनों में इनका अविष्कार नहीं हो गया था| इनके अविष्कारको ने पूरी एकाग्रता से अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया| मानव जीवन को सर्वाधिक सुखी प्रभावित यदि किसी ने किया है वह है बिजली ( electricity) इससे चलने वाले उपकरण मोटर मशीन ट्रांसमिशन आदि आदि…|ऋग्वेद के अनेक मंत्रों में बिजली को इंद्र अर्थात ऐश्वर्या का हेतु कहा गया है हजारों मंत्रों में परमात्मा प्रेरणा दे रहा हे !मनुष्यो इस बिजली के गुण धर्मों को जानो इसको जान कर सुखी हो जाओ… उस प्रभु की महिमा का गान करो|

“पूरब ने वेद भगवान की आज्ञा को ठुकराया, पश्चिम ने उन का पालन कर धरा को चमत्कृत किया”जब जब कोई व्यक्ति एकाग्र हो कर किसी भौतिक या अध्यात्मिक विषय में मन बुद्धि को लगाता है तो परमात्मा उसे सिद्धि देता है सफलता प्रदान करता है चाहे वैज्ञानिक हो या कोई ईश्वर भक्त योगी..|18 56 में यूरोप के छोटे से सुंदर लेकिन गरीब देश क्रोएशिया में एक गरीब परिवार में निकोला टेस्ला का जन्म हुआ | पूरा परिवार ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन था निकोला टेस्ला की बाइबिल की मान्यता में कोई रुचि नहीं थी वह तो बिजली को देख कर अचंभित चकित होता रहता था| घंटों पार्कों में बैठकर कल्पना के आकाश में विचरण करता था| स्कूल में दाखिला हुआ दसवीं तक की परीक्षा उत्तीर्ण की… यूरोप की शिक्षा व्यवस्था की खासियत यह है हमारे यहां जो पीजी लेवल पर पढ़ाया जाता है वह उस समय यूरोप में दसवीं के विद्यार्थी को पढ़ा दिया जाता था…!निकोला टेस्ला ने आगे के लिए हंगरी के ग्रेज पॉलिटेक्निक स्कूल में 3 वर्षीय कोर्स में दाखिला लिया पहली साल बहुत अच्छे अंक अर्जित किए, स्कूल के प्राध्यापक ने निकोला टेस्ला की सफलता के विषय में उनके परिजनों को बताया… निकोला टेस्ला सुबह 3:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक अपने स्कूल की प्रयोगशाला में कठिन परिश्रम करते थे…| सब कुछ ठीक चल रहा था पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के दूसरे वर्ष में निकोला टेस्ला को जुआ खेलने का व्यसन लग गया | स्कॉलरशिप ट्यूशन फीस के सारे पैसे जुए में निकोला टेस्ला हार गए… धीरे-धीरे मेधावी छात्र फिसड्डी हो गया नौबत यहां तक आ गई निकोला टेस्ला अपने 3 वर्ष के कोर्स को कभी पूरा ही नहीं कर पाए बिना डिग्री प्रमाण पत्र के हारे थके मन से अपने घर वापस आ गए|उनके कारण परिवार और अधिक कर्ज में डूब गया ऐसे ही संकटों से से जूझते हुए 1879 में उनके पिता का निधन हो गया | पूरी जिम्मेदारी निकोला टेस्ला के कंधे पर आ गई परिवार की रिश्तेदारों की मदद से उन्हें हंगरी बुडापेस्ट के एक नवनिर्मित टेलिफोन एक्सचेंज में ड्राफ्ट्समैन की नौकरी मिल गई… उनका मन उस नौकरी में कहां लगने वाला था नौकरी के दौरान ही फुर्सत के क्षणों में उन्होंने एंपलीफायर का आविष्कार किया जी हां वही एंपलीफायर जो छोटी साधारण ध्वनि को तीव्र ध्वनि संकेतों में तब्दील कर देता है…. उनकी इस ख्याति से उन्हें महान अविष्कारक उद्योगपति थॉमस अल्वा एडिसन की फ्रांस में स्थित कंपनी में मात्र इलेक्ट्रीशियन की नौकरी मिली… उन दिनों थॉमस अल्वा एडिसन अपने आविष्कारों के बल पर अमेरिका के सर्वाधिक धनी व्यक्तियों में उनकी गिनती थी जेपी मॉर्गन जैसे बैंककर उनके पीछे घूमते थे उनके अविष्कार patent में निवेश करने के लिए| उन दिनों अमेरिका बस रहा था उसका महाशक्ति के रूप में निर्माण हो रहा था| थॉमस अल्वा एडिसन प्रतिभा को चंद मिनटों में ही पहचान लेते थे उन्होंने निकोला टेस्ला की प्रतिभा को भाप लिया उन्हें अमेरिका में स्थित अपनी मुख्य कंपनी में बुला लिया|विद्युत बल्ब के अविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन अपनी कंपनी की आरएंडी लैब में डीसी मोटर पर काम कर रहे थे उन्होंने हंसते हुए निकोला टेस्ला से कहा कि यदि तुम इस डीसी मोटर की खामियों में सुधार कर दो तो मैं तुम्हें $50000 दूंगा उस जमाने में यह बहुत बड़ी रकम थी |यहां मैं बताना चाहूंगा उस जमाने में पूरे अमेरिका में डीसी मोटर ही प्रयोग में लाई जाती थी… डीसी करंट अर्थात डायरेक्ट करंट इसमें विद्युत धारा केवल एक दिशा में ही बहती है अधिकतम 100 वोल्ट की ऊर्जा को ही प्रवाहित किया जा सकता है… डीसी मोटर अधिक विशाल अधिक बिजली की इनमें खपत होती थी out put बहुत कम मिलता था |विषय की ओर लौटते हैं विलक्षण प्रतिभा के धनी निकोला टेस्ला ने एडिशन की चुनौती को स्वीकार करते हुए महज 2 दिनों में डीसी मोटर का नायाब संशोधित नमूना पेश कर दिया यह देखकर एडिशन दंग रह गए निकोला टेस्ला ने इनाम स्वरूप 50,000 डॉलर रकम के विषय में कहा तो एडिशन ने मजाक उड़ाते हुए कहा तुम हम अमेरिकियों के मजाकिया स्वभाव से परिचित नहीं हो मैं मजाक कर रहा था…|मेहनती परिश्रमी इमानदार निकोला टेस्ला को यह बहुत बुरा लगा उन्होंने एडिशन की कंपनी को उसी समय छोड़ दिया |
न्यूयॉर्क में ही कर्ज लेकर अपनी एक अलग प्रयोगशाला स्थापित की… अब यहीं से निकोला टेस्ला की दिव्य अविष्कारों से चमत्कृत मानव सभ्यता को योगदान यात्रा की शुरुआत होती है |निकोला टेस्ला ने डीसी मोटर डीसी करंट की खामियों को भाप लिया था उन्होंने दुनिया की पहली एसी मोटर अर्थात अल्टरनेटिंग करंट मोटर का आविष्कार किया… इसका परिणाम यह हुआ छोटी तेज घूमने वाली मोटर बनने लगी जिनमें बिजली की खपत होती थी एसी करंट में करंट को किसी भी दिशा में मोड़ा जा सकता है जबकि डीसी करंट में ऐसा संभव नहीं है… औद्योगिक जगत में क्रांति आ गई… थॉमस अल्वा एडीसन , निकोला टेस्ला दोनों एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी बन गए यह शत्रुता मरते दम तक रही…|थॉमस अल्वा एडिसन ने एसी करंट के प्रयोग से हजारों लोगों की भीड़ में एक हाथी को मार दिया यह तर्क दिया कि A.C. करंट मानव सभ्यता के लिए बहुत नुकसानदायक सिद्ध होगा… इससे शॉर्ट सर्किट भयंकर अग्निकांड होंगे… मनुष्य का जीवन नरक बन जाएगा|(यहां हमें यह सीख लेनी चाहिए एक ईश्वर भक्त योगी का जीवन ही क्रोध ईर्ष्या द्वेष से मुक्त होता है वैज्ञानिक भी इन मानस रोगों से नहीं बच पाते |)धुन के पक्के निकोला टेस्ला यहां कहां रुकने वाले थे उन्होंने टेस्ला कॉइल का अविष्कार किया! फिर इलेक्ट्रॉनिक् ट्रांसफार्मर का आविष्कार भी किया| अब बिजली को आम व्यक्ति के घर-घर पहुंचाना संभव हो गया लोगों के सुख में आशातीत वृद्धि हो गई…. टेस्ला यहीं नहीं रुके उन्होंने जल विद्युत परियोजनाओं के लिए यंत्रों का आविष्कार किया पहाड़ों जलप्रपात से बिजली को अमेरिका के घर घर तक पहुंचा दिया| एसी जनरेटर का भी आविष्कार किया |दसवीं पास टेस्ला को बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी, आइंस्टाइन मैक्स प्लांक जैसे भौतिक शास्त्री पत्र लिखकर शुभकामनाएं देते थे| वह हजारों लोगों की भीड़ में वैज्ञानिकों की इंजीनियरों की भीड़ में अपने खोजे गए उपकरणों का प्रदर्शन करते थे… एक ऐसा उपकरण उन्होंने बनाया जो आकाश से बिजली लेकर 1000000 volt उर्जा बना सकता है….. रेडियो कम्युनिकेशन स्मार्टफोन ड्रोन विमान का डेमो दुनिया को एक सदी पहले ही दे दिया था… कैमरा एक्सरे मशीन पर भी Tesla न हीं सबसे पहले काम किया मारकोनी जिसे रेडियो का inventor कहा जाता है उससे 10 वर्ष पहले Tesla इस पर काम कर चुके थे |टेस्ला कहते थे जब रेडियो संदेशों का वॉयरलैस ट्रांसमिशन हो सकता है तो बिजली को भी बिना तारों के खंभों के भेजा जा सकता है ऐसे विमान बनाए जाएंगे जिनमें ईंधन से नहीं वायरलेस बिजली से चलेंगे |टेस्ला ने Death Ray अर्थात मृत्यु की किरण नामक wapon भी बनाया जिसकी सहायता से 20 किलोमीटर दूर से ही किसी कबूतर आकाशीय object को मार गिराया जा सकता है… Teli पावर जैसे electronic weapon को भी Invent किया जिसकी सहायता से उसके विद्युत चुंबकीय बल से दुनिया के समस्त उपकरणों को खींच कर नष्ट किया जा सकता है… इसकी विध्वंसक शक्ति को देखकर इसके प्रदर्शन निर्माण पर रोक लगा दी है…. महाभारत में ऐसे ही अस्त्र का भीष्म व द्रोण पर्व में उल्लेख मिलता है जो समस्त विपक्षी महारथियों के धातु के बने अस्त्रों को आकर्षित कर नष्ट कर देता था सुदर्शन चक्र के विषय में भी ऐसा ही लिखा है|थॉमस अल्वा एडिसन टेस्ला में यही अंतर था एडिशन व्यवहार कुशल सामाजिक थे जबकि टेस्ला मैं यह सामाजिक कला नहीं थी वह उपकरणों में ही उलझे रहते थे टेस्ला केवल 3 घंटे की नींद लेते थे| एडिशन बिजनेस माइंड थे आविष्कारों को भुनाना जानते थे टेस्ला ऐसा नहीं कर सके… उनके खोजे गए अधिकतर उपकरण का पेटेंट भी नहीं हो पाया|गरीब घर में पैदा होने वाला बच्चा मरते दम तक भी गरीब रहा अपना 30 वर्ष से अधिक का अमेरिका में बिताया जीवन उन्होंने न्यूयॉर्क के एक होटल में ही किराए के कमरे में गुजारा… टेस्ला की प्रयोगशाला में आग लग गई उनका बहुत महत्वपूर्ण रिसर्च कार्य जलकर नष्ट हो गया… टेस्ला और अधिक कर्जदार हो गए कुछ कर्जा तो उन्होंने कबूतरों को दाना खिलाने के नाम पर लिया वह कबूतरों से बहुत प्रेम करते थे पूरे न्यूयॉर्क में घूमकर कबूतरों को दाना खिलाते थे.. टेस्ला आजीवन अविवाहित रहे वह कहा करते थे इसका उन्हें बहुत लाभ मिला अपनी शक्तियों को एकाग्र कर रहे इतने अविष्कार कर पाए… Tesla पूरी तरह शाकाहारी थे प्रतिदिन 12 से 14 किलोमीटर की वॉक करते थे कहा करते थे इससे दिमाग सक्रिय रहता है…|ऐसे ही एक दिन कबूतरों को दाना डालने की जल्दबाजी में होटल की सीढ़ियों से गिर पड़े उनकी अनेक पसलियां टूट गई महीनों कमरे में ही पड़े रहे… 9 से अधिक यूरोपीय भाषाओं के जानकार 85 वर्षीय टैसा लाने लोगों से बात करना पूरी तरह बंद कर दिया होटल के कमरे की खिड़की पर आने वाले कबूतरों से वार्तालाप करते थे कहा करते थे कि वह कबूतरों की भाषा को जानते हैं , 7 जनवरी 1943 को टेस्ला जैसा महा मेधावी मानव चिर निंद्रा में विलीन हो गया|विज्ञान तकनीक में उनके योगदान के लिए उनके नाम पर म्यूजियम बनाया गया है दुनिया के अनेक देशों की संस्थाओं का नामकरण किया गया है भौतिकी में मैग्नेटिक फ्लक्स की मापन इकाई का नाम उनके सम्मान में टेस्ला रखा गया है…..!टेस्ला को भारतीय 6 दर्शनों में वेदांत दर्शन बहुत प्रिय था|हमें प्रेरणा लेनी चाहिए ऐसे व्यक्तित्व से|लेकिन ईश्वर ऐसे असंख्य टेस्लाओं का गुरु है| टेस्ला जैसे आविष्कारक ईश्वर के द्वारा दिए गए बुद्धि बल संसाधनों से ही सब कुछ कर पाते हैं मूल में सब ईश्वर के परोपकार से ही दबे हुए हैं…|आर्य सागर खारी ✍✍✍

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