बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन का दुष्परिणाम  ‘ब्वॉयज लॉकर रूम’

images (12)

ललित गर्ग

बच्चों को सोशल मीडिया पर आजादी देने की छूट का परिणाम है ‘ब्वॉयज लॉकर रूम’Image Source: Google
देश के स्कूली बच्चों में सेक्स एवं अश्लील मानसिकता का बढ़ता प्रचलन गंभीर चिन्ता का विषय है, एक त्रासदी है, विडम्बना है। ऐसे बहुत से बच्चों के ग्रुप सोशल साईट्स पर सक्रिय हैं जो अश्लीलता, अश्लील वेबसाइट्स और पोर्न फिल्मों में डूबे हैं।

दिल्ली में स्कूल जाने वाले नाबालिग बच्चे इंस्टाग्राम पर ‘बॉयज लॉकर रूम’ ग्रुप बनाकर गंदी बातें करते थे, नाबालिग लड़कियों के नग्न फोटोज शेयर करते और लड़कियों पर गलत कॉमेंट्स और फिर रेप तक करने की बातें होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसमें दिल्ली के अलग-अलग स्कूलों के 21 छात्रों के शामिल होने की पहचान हुई, ग्रुप का एक लड़का पकड़ा भी गया। पकड़ा गया छात्र नाबालिग है और अभी किसी स्कूल में ही पढ़ता है। जांच में पता चला है कि इस ग्रुप को एक सप्ताह पहले बनाया गया था। जैसे ही इस कथित ग्रुप का स्क्रीनशॉट्स वायरल हुआ इसे डिलीट कर दिया गया और ‘लॉकररूम 2.0’ के नाम से एक अन्य ग्रुप बनाकर फिर अश्लील दुनिया बना ली गई। इस ग्रुप में लड़कियों को भी जोड़ा गया था। समाज के विकृत, नैतिकताविहीन एवं चरित्रहीन होने की यह एक बानगी है। चौंका देने वाला किन्तु कटु सत्य तथ्य है कि सोशल मीडिया पर पनप रही नाबालिग बच्चों में सेक्स एवं अश्लील कृत्य की इस विकृत मानसिकता ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया है।

देश के स्कूली बच्चों में सेक्स एवं अश्लील मानसिकता का बढ़ता प्रचलन गंभीर चिन्ता का विषय है, एक त्रासदी है, विडम्बना है। ऐसे बहुत से बच्चों के ग्रुप सोशल साईट्स पर सक्रिय हैं जो अश्लीलता, अश्लील वेबसाइट्स और पोर्न फिल्मों में डूबे हैं। ज्ञान, नैतिकता एवं चरित्र का पाठ पढ़ने की उम्र में बच्चों का कामुक, अश्लील एवं विकृत सोच की अंधेरी राहों में अग्रसर होना भयावह एवं चिन्ताजनक तस्वीर को प्रस्तुत करता है। विडम्बनापूर्ण तो यह है कि इस विकृत सोच ने अब मासूम बच्चों को भी अपनी जब्त में लेना शुरू कर दिया है। पहले जहां यह चलन बेहद सीमित था वहीं आज इसकी पहुंच घर-घर एवं स्कूल-स्कूल तक है। इंटरनेट की पहुंच ने पोर्न फिल्मों को आम फिल्मों की सूची में ला खड़ा किया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार ब्रिटेन में बच्चे अब तेजी से पोर्न फिल्मों के आदी बनते जा रहे हैं और लगभग यही स्थिति भारत की है।

मदर टेरेसा ने कहा था, ‘कुष्ठ या क्षय रोग नहीं, वर्तमान का सबसे बड़ा रोग है अवांछित होने का भाव।’ इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप के फैलते जान ने जिस तरह से हमारी दुनिया को एक नया चेहरा दिया है, उसी तरह कुछ खास मानसिक विकृतियां भी पैदा की हैं। सोशल मीडिया अपने आप में रोग नहीं, लेकिन मनोवैज्ञानिक, शिक्षा-समाजशास्त्री इसे रोगों का घर मान रहे हैं। बच्चों के ‘बॉयज लॉकर रूम’ या ‘गर्ल्स लॉकर रूम’ एवं उनकी अश्लील-कामुक दुनिया चरित्र एवं नैतिकता पर गंभीर प्रश्न बनकर विकृत समाज की संरचना का कारण बन रही है। इन सोशल मीडिया पर हुए अध्ययनों पर भरोसा करें, तो यहां सक्रिय बच्चे एवं युवा वृद्धावस्था के रोगों जैसे स्पोंडलाइटिस, ऑर्थराइटिस, मति-भ्रम, स्मृतिलोप, कामुकता और अस्थिरता आदि के शिकार हो रहे हैं। इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताना नेत्र रोगों को तो निमंत्रण देता ही है, मोटोपा, अनिद्रा, इंटिंग डिसॉर्डर की समस्याएं भी इसी का परिणाम हैं। स्कूल नोटबुक भले अपडेट न हो, लेकिन फेसबुक प्रोफाइल मुस्तैदी से अपडेट की जा रही है। अश्लील साइट्स, पॉर्न वीडियो और पल्प लिटरेचर की आसान उपलब्धता के चलते, बच्चे मनोविकारों का शिकार हो रहे हैं। अब तनाव, अवसाद और इगो के साथ ही सेक्स अपराधों के नये चेहरे सामने आ रहे हैं, दुखद तो यह है कि इसमें बच्चे बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी कर रहे हैं। यह एक तरह का सोशल मीडिया एडिक्शन डिसॉर्डर और सोशल मीडिया ओवर यूज सिंड्रोम है।
बच्चों में बढ़़ती कामुक एवं अश्लील सोशल मीडिया गतिविधियां उन्मुक्त होने एवं अश्लीलता की अंधी सुरंगों में उतरने का एक माध्यम है, जो समाज एवं राष्ट्र के लिये खतरनाक साबित होती जा रही है। सोशल मीडिया पर बच्चों की बढ़ रही सेक्स एवं अश्लीलता की गतिविधियों की नई पनप रही संस्कृति अनेक विकृतियों का सबब बन रही है, जिससे नाबालिग बच्चों को कामुकता एवं यौन के नये साधन एवं सोच उपलब्ध होते हैं। ये बच्चे देर रात तक कामुकता, अश्लीलता एवं सैक्स से भरपूर दुनिया में खोये रहते हैं और बचपन की मासूमियत को अपराध के सायों में धकेलते रहते हैं। अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रन का कहना है कि 1998 से 2017 के बीच, भारत से बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट के द्वारा भेजे जाने के 38 लाख मामले सामने आए, जो कि पूरी दुनिया में इस तरह का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
सोशल मीडिया के बहुत ज्यादा उपयोग करने के घातक एवं नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव बच्चों पर ज्यादा पड़ रहे हैं। बच्चों पर सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा उपयोग करने का असर क्या पड़ रहा है, इस पर अनेक अध्ययन हो रहे हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन में निष्कर्ष निकला है कि जो बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग बहुत ज्यादा करते हैं, उनके मन में जीवन के प्रति असंतुष्टि का भाव ज्यादा रहता है। सोशल मीडिया पर लोगों को देख-देख कर बच्चों की आदत हो जाती है कि वे अपने अभिभावकों से अवांछित वस्तु या अवांछित इच्छाओं की पूर्ति की मांग भी करने लगते हैं। लगातार किए जा रहे अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकला है कि सोशल मीडिया के उपयोग की अधिकता बच्चों के मन में नाखुशी भर देती है। पहले ऐसा लगता था कि बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं और वे अपनी इस दुनिया में खुश होंगे। ब्रिटेन के इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकॉनामिक्स द्वारा ‘सोशल मीडिया यूज एंड चिल्ड्रन्स वेलबीइंग’ अध्ययन के दौरान 10 से 15 साल की उम्र के 4000 बच्चों से बातचीत की गई। जो निष्कर्ष निकला, वह यह था कि बच्चे सोशल मीडिया पर जितना समय बिताते हैं, वे उसी अनुपात में अपने घर-परिवार, स्कूल और जीवन के प्रति असंतुष्ट हैं। जो बच्चे सोशल मीडिया पर कम समय खपाते हैं, वे जीवन के दूसरे पहलुओं के प्रति ज्यादा संतुष्ट नजर आए। सोशल मीडिया पर कम समय व्यतीत करने वालों को अपना स्कूल और माता-पिता ज्यादा पसंद थे। इस अध्ययन में एक और दिलचस्प बात सामने आई, वह यह कि सोशल मीडिया का उपयोग करने का असर लड़कों की तुलना में लड़कियों पर ज्यादा है। इसका कारण शायद यह है कि लड़कियां ज्यादा भावुक होती हैं। अध्ययन में यह भी पता चला है कि साइबर बुलीइंग छात्राओं के साथ अधिक मात्रा में होता है।

भारत में इस तरह के सिलसिलेवार अध्ययन बहुत ही कम हुए हैं। जो हुए हैं, उनकी रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है, लेकिन अगर इस तरह के सर्वे और अध्ययन भारत में हों, तो यहां के नतीजे भी कोई बहुत अलग नहीं आने वाले। बच्चे को बढ़ती उम्र के साथ इंसानों की बजाए एक गैजेट से लगाव होने लगता है। वे उसे ही अपनी असली और सुरक्षित दुनिया समझने लगता है। फिर उसके मन से यह डर खत्म होने में ज्यादा देर नहीं लगती कि मुझे इंटरनेट पर सबकुछ कहन-करने और चर्चा करने की आजादी है।
बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ ‘काम इच्छा’ का उत्पन्न होना स्वाभाविक है। उनके मन में तरह-तरह के सवाल और ख्याल दस्तक देते हैं। ऐसे में अगर बच्चों को सही समय पर उपयुक्त जवाब न दिए जाएं तो वे राह से भटक सकते हैं। यह जिम्मेदारी मां-बाप और स्कूल के साथ शासन व्यवस्था की भी है। मां-बाप को जहां बच्चों को सही-गलत में स्पष्ट फर्क बताना होगा, वहीं शिक्षकों को सेक्स एजुकेशन के विषय को हल्के में टालने की आदत का त्याग करना होगा। रेप जैसे घिनौने ख्याल तभी जहन में आते हैं जब कोई पुरुष किसी महिला को कमजोर मानता है। चैट ग्रुप पर गैंगरेप की प्लानिंग करने वाले स्कूली छात्र इतने छोटे नहीं थे कि उन्हें पुलिस-अदालत और सजा के बारे में जानकारी नहीं थी। नागरिकों के मन में कानून का डर होने चाहिए कि अगर वो कुछ गलत करेंगे तो उन्हें सजा जरूरी मिलेगी। छात्रों को पता था कि उनकी चर्चा अपराध को अंजाम देने को लेकर थी। ऐसा न होता तो छात्र चैट के लीक होने के बाद ग्रुप को डिएक्टिवेट नहीं करते।

Comment:

betbox giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş
galabet giriş
galabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
galabet giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
Betgar güncel
Betgar giriş
Betgar giriş adresi
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betasus giriş
norabahis giriş
nitrobahis giriş
noktabet giriş
betvole giriş
betvole giriş
betkolik güncel giriş
betkolik güncel
betkolik giriş
yakabet giriş
betasus giriş
betnano giriş
romabet giriş
yakabet giriş
queenbet giriş
queenbet giriş
betnano giriş
winxbet giriş
betamiral giriş
livebahis giriş
grandpashabet giriş
wojobet giriş
wojobet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betkare giriş
kareasbet giriş
noktabet giriş
extrabet giriş
extrabet giriş
nisanbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betsat giriş
betsat giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betorder giriş
wojobet giriş
wojobet giriş
livebahis giriş
livebahis giriş
nisanbet giriş
nisanbet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betorder giriş
betsat giriş
betsat giriş
betgaranti giriş
betpark giriş