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भाजपा में राष्ट्रीय पटल पर उभरते मोदी की धमक से बढ़ीं कांग्रेस के युवराज राहुल की धड़कने

allवीरेन्द्र सेंगर
नई दिल्ली। भाजपा के तीन दिवसीय अधिवेश के दौरान, नरेंद्र मोदी की चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है। भले औपचारिक रूप से ‘पीएम इन वेटिंग’ के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी के नाम का ऐलान न हुआ हो, लेकिन पार्टी के अंदर इसका साफ संदेश चला गया है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मोदी ने अपने जोरदार भाषण का फोकस राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दों पर ही रखा। जबकि भाजपा के दूसरे मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों के विकास जैसे मुद्दों को उठाया। इस अवसर पर मोदी ने नेहरू-गांधी परिवार पर जमकर निशाने साधे। यहां तक कह डाला कि कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका ‘दीमक’ की तरह है इस पार्टी के नेता देश को दीमक की तरह खोखला करने में जुटे हैं। अब इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बगैर नाम लिए हुए कांग्रेस के ‘युवराज’ राहुल गांधी पर लगातार तीखे कटाक्ष किए
मोदी ने जिस अंदाज में भाषण किया है, उससे राजनीतिक हलकों में यही संदेश गया है कि वे दिल्ली के बड़े मुकाबले में कांग्रेस के सामने उतरने वाले हैं।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील भी कर डाली है कि कार्यकर्ता अब घरों से निकलकर लोगों तक पहुंचे और सत्ता परिवर्तन के लिए मुहिम तेज करें। क्योंकि बड़े परिवर्तन के लिए अब देश चल पड़ा है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। उन्हें इसमें कोई शक नहीं है। अपनी धुन में मोदी ने नारेबाजी के रूप में कई तीखे कटाक्ष भी किए हैं। वे यहां तक बोले कि ‘कांग्रेस फॉर कमीशन है, जबकि भाजपा फॉर मिशन है’। इस तरह की राजनीतिक जुमलेबाजी करते हुए मोदी ने भाजपा नेताओं का दिल जीता था।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित तमाम दिग्गज नेताओं ने तीन दिन तक अधिवेशन में लगातार मोदी के गुणगान गाए हैं। राजनाथ ने तो उन्हें पार्टी में सबसे लोकप्रिय होने का खिताब भी दे डाला है। वे कई बार दोहरा चुके हैं कि लोकसभा के चुनाव में मोदी बड़ी भूमिका में होंगे। यहां तालकटोरा स्टेडियम में संपन्न हुए राष्ट्रीय परिषद की दो दिन की बैठक में ज्यादातर वक्ताओं ने मुद्दों के बजाए, अपनी ऊर्जा मोदी ‘कीर्तन’ में लगाई। मोदी को बेमिसाल विकास पुरुष बताने के लिए पार्टी के लोगों में होड़ लगी रही। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में देशभर से करीब चार हजार प्रतिनिधि पहुंचे थे। अध्यक्ष की रोकटोक के बावजूद कई मौकों पर नेताओं ने मोदी के पक्ष में नारेबाजी कर दी।
ये लोग लगातार दबाव बनाते रहे कि इसी बैठक के मौके पर मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाए। जबकि शीर्ष नेतृत्व मोदी समर्थकों को यही समझाता रहा कि इसका औपचारिक ऐलान उचित समय पर संसदीय बोर्ड करेगा। ऐसे में वे लोग दबाव न बढ़ाएं।रविवार को राष्ट्रीय परिषद में समापन भाषण वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का हुआ था। आडवाणी के भाषण ने मोदीमय हुए पूरे माहौल को बदलने की कोशिश कर डाली। उन्होंने कह दिया कि मोदी बहुत ऊर्जावान नेता हैं। उनकी राजीतिक शैली अटल बिहारी वाजपेयी से काफी मिलती-जुलती है। शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह जैसे बेदाग छवि वाले मुख्यमंत्री हमारे पास हैं। इससे पार्टी की विश्वसनीयता बढ़ रही है। लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि लोकसभा चुनाव में यूपीए का मुकाबला करने के लिए एनडीए को अपना कुनबा और बढ़ाना होगा। कुछ और दल अपने साथ लाने होंगे। इसी के साथ जरूरी है कि पार्टी का नेतृत्व अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) को विश्वास में लेने की मुहिम तेज करे। क्योंकि सबको साथ लेकर ही चलने से बड़ा लक्ष्य मिल पाएगा। आडवाणी की इस ‘सीख’ के पार्टी में खास राजनीतिक निहितार्थ समझे जा रहे हैं।
यह माना जा रहा है कि अल्पसंख्यक वाली ‘लक्ष्मण रेखा’ बनाकर आडवाणी ने बहुत होशियारी से पार्टी के अंदर चल रही, मोदी आंधी को थामने की कोशिश कर दी है। क्योंकि मुसलमानों के मन में मोदी के लिए सकारात्मक सोच संभव नहीं है। दरअसल, 2002 में गुजरात में जिस तरह के भीषण दंगे हुए थे, इससे इस समुदाय के मन में मोदी की छवि नकारात्मक ही है। संघ परिवार के तमाम तत्व मोदी के जरिए हिंदुत्व की राजनीति को और मजबूत करने का सपना पाले हैं। मोदी समर्थकों ने गुजरात के विकास को खास एजेंडा बनाकर मोदी मुहिम शुरू की है। तीन दिवसीय अधिवेशन में पूरी पार्टी मोदी के जयकारे लगाने में ही व्यस्त रही। ऐसे में आडवाणी ने बड़े सधे तरीके से मोदी के ‘खतरों’ की तरफ अगाह कर दिया है। माना जा रहा है कि आडवाणी के रुख के चलते ही पार्टी ने मोदी को कोई नई भूमिका नहीं दी है। जबकि कयास यही थे कि कम से कम मोदी को लोकसभा चुनाव अभियान समिति का प्रमुख तो बना ही दिया जाएगा।
लेकिन आडवाणी कैंप की मुश्किल यह है कि ये लोग मोदी अभियान के मामले में कोई निर्णायक फैसला कराने की स्थिति में नहीं हैं। भाजपा के इस तीन दिवसीय आयोजन में जिस तरह से मोदी का नाम आगे किया गया है, उससे कांग्रेस के नेताओं को भी समझ में आ गया है कि ‘मोदी फैक्टर’ उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनेगा। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव ‘युवराज’ राहुल गांधी के नेतृत्व में लडऩे की तैयारी कर ली है। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर इसका संदेश भी दे दिया गया है। मणिशंकर अय्यर जैसे चर्चित कांग्रेसी कह भी देते हैं कि राहुल गांधी ही कांग्रेस के पीएम चेहरे होंगे। भाजपा रणनीतिकारों को लगता है कि राहुल के मुकाबले मोदी घाघ नेता हैं। भाषण कला में भी ‘युवराज’ पर भारी पड़ते हैं। ऐसे में चुनाव राहुल बनाम मोदी हो गया, तो इसका फायदा एनडीए के खाते में ही जाएगा।
इधर मोदी ने जिस तरह से चुटीले अंदाज में मनमोहन सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे निशाने साधने शुरू किए हैं, इसके माकूल जवाब की भी कांग्रेस में तैयारियां शुरू हो गई हैं। टीम राहुल के एक युवा सांसद ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि राहुल जी, मोदी की हर बात का जबाव पूरी दमदारी से दे देंगे। लेकिन वे सस्ती लोकप्रियता के लिए किसी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी नहीं कर सकते। यह जरूर है कि मोदी के तेवरों से युवराज की चुनौतियां बढ़ गई हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में 15 महीने का समय है, इसमें मुकाबले की पूरी तैयारी हो जाएगी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कह दिया है कि यदि कांग्रेस, भाजपा नेताओं की नजर में दीमक है, तो उनकी नजर में मोदी जैसे नेता सांप-बिच्छू से कम खतरनाक नहीं हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार आडवाणी की टिप्पणी को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मोदी की उम्मीदवारी के सवाल पर एनडीए में निर्णायक फूट पड़ जाएगी। जदयू नेतृत्व के प्रति कांग्रेसियों ने खास रणनीति के तहत मुलायम रुख अपनाना भी शुरू कर दिया है। रणनीति बनी है कि राहुल गांधी ऐसे ‘एंग्री यंग लीडर’ की छवि बना लें, जो कि आम आदमी के दुख-दर्द से बेचैन है और बड़े बदलाव के लिए राजनीतिक सपना पाले है।

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