Categories
प्रमुख समाचार/संपादकीय

आर्थिक क्षेत्र में क्या हम सचमुच आजाद हैं

विकास कुमार गुप्ता
ईस्ट इंडिया कंपनी को चार्टर निर्गत होता है भारत के लियें। 20-20 साल के लिये इसे चार्टर (अधिकार पत्र) दिया जाता रहा। पहला चार्टर सन् 1600 में दिया गया। ब्रिटिश संसद में परिचर्चा के दौरान बिलियम फोर्स कहता है कि हमें भारत में फ्री ट्रेड करना है। और वह फ्री ट्रेड का अर्थ समझाते हुए कहता है कि हमें भारत में ऐसी नीति बनानी है कि यहां सिर्फ ब्रिटेन की वस्तुएं बिके। समूचे बाजार पर ब्रिटिश वस्तुएं काबिज हो। भारत की वैश्विक निर्यात उस समय लगभग 35 प्रतिशत हुआ करता था जब हम गुलाम थे और आज 0.01 प्रतिशत रह गया है Untitledऔर आगे वह कहता है कि उसके लिये हमें भारत के कपड़ा, मसाला और स्टील उद्योगों पर जबरदस्त टैक्स लगाना होगा चूंकी यही उद्योग यहां की रीढ़ है। और अपने माल को टैक्स फ्री करना होगा। फिर पॉलीसी बनायी जाती है। जब ब्रिटिश संसद में फ्री ट्रेड की पॉलीसी को लेकर डिबेट चल रहा था तो विलियम फोर्स का प्रतिवाद करते हुए एक सांसद ने कहा की अगर हम 97 प्रतिशत इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, कस्टम एक्साइज, चुंगी नाका जैसे टैक्स लगायेंगे तो भारतीय व्यापारी मर जायेंगे तब विलियम फोर्स कहता है कि यही तो हम चाहते है कि या तो वे मर जायें या फिर बेईमान हो जाये। हमारे दोनो हाथों में लड्डू है। अगर वे बेईमान हो जायेंगे तब भी हमारे शरण में आ जायेंगे और यदी मरेंगें तो ना रहेंगे व्यापारी ना चलेगा यहां का व्यापार। इस तरह अंग्रेजों ने यहां विभिन्न प्रकार के टैक्स का कानून बनाकर यहां के उद्योग व्यवस्था को नष्ट किया। उन्होंने अपना फ्री ट्रेड चलाने के लिये यहां से फ्री कच्चा माल जोकि अंग्रेजों का ही था सारे जंगल अंग्रेजों के थे और वर्तमान की सभी सरकारी भूमि उस समय अंग्रेेजों की थी अब उनके जाने के बाद सरकार की है को ले जाने के लिये ट्रेन चलाया। और ट्रेन के मालगाड़ी में लादकर पहले वे मुम्बई ले जाते और फिर मुम्बई से ब्रिटेन। ब्रिटेन के और भी गुलाम देश थे जैसे मलेशिया तो वे यहां से रबर ले जाते थे। हमारे यहां से कपास और स्टील के अयस्क सरीखे अन्य वस्तुएं अंग्रेज ले जाते रहे। और फिर वहां से माल तैयार कर यहां लाकर बेचते रहे। लेकिन आजादी के 66 साल बीत जाने के बाद भी हम असहाय है। हम मान सकते है कि पहले अंग्रेज थे लेकिन आज लोकसभा, राज्य सभा से लेकर थाने, न्यायालय तक सभी जगह भारतीय है। तो फिर क्यों हम हमारे ब्यापारियों और आमजन पर ये गुलामी वाले कानून थोप रहे है। 1947 में ब्रिटिष प्रधानमंत्री एटली द्वारा निर्देशित लार्ड माउंट बेटन से हमारे देश के नेताओं ने डोमिनियन स्टेट के मेम्बर होने की तर्ज पर ब्रिटिश संसद में पास कानून इंडियन इंडिपेन्डेन्स एक्ट के पारित होने पर आजादी ली। 1857 के सैनिक विद्रोह के बाद यहां सीधे ब्रिटिश संसद का शासन हो गया। इतिहास गवाह है भारत के लाखों कपड़ा कारिगरों के हाथों को सिर्फ इसलिए काटा गया ताकि यहां का प्रसिद्ध कालीन/कपड़ा उद्योग नष्ट हो जाये। फिर स्टील उद्योग को नष्ट करने के लिये यहां इंडियन फॉरेस्ट एक्ट लगाकर स्टील के अयस्क को जंगलों से लेने के लिए मना कर दिया गया। और कानून बनाया गया कि स्टील के अयस्क को लेने वालों को 50 कोड़े लगवाये जाये और फिर भी वह नहीं मरे तो उसे गोली मार दी जाये। और आज भी फॉरेस्ट एक्ट का कानून यहां चल रहा हैं। जापान की कम्पनी निप्पर डेरनों आज हमारे जंगलों से स्टील के अयस्क कौड़ियों के दामों पर खरीद रही है। और माल बनाकर यहां बेच रही है। हमारे जंगलों, खाद्यान्नों से विदेषी कंपनीयां कौड़ियों के दाम पर प्राकृतिक सम्पदायें खरीद रही है और अपने देश ले जाकर अथवा यहीं माल तैयार कर यहां बेच रही हैं। हमारे देश का आदिवासी खाने बनाने के लिए पेड़ की एक डाली काटे तो जेल लेकिन सिगरेट बनाने वाली अमेरिका की आइटीसी कम्पनी करोड़ो पेड़ काटे तो… कानून। दरअसल अंग्रेजों से जब हमने समझौता कर आजादी प्राप्त की थी तब उस समय 128 विदेषी कंपनीयां अंग्रेजों के 1947 में जाने के बाद यहां उसी सम्मान में रही जिस सम्मान में अंग्रेजों के समय रही और आज भी हैं और वैश्वीकरण के बाद तो इनकी संख्या हजारों में हो चुकी है।
इंडिया गेट के दीवार पर जो शहिदों के नाम हैं दरअसल वे सभी सैनिक भारतीयों के खिलाफ अंग्रेजों के तरफ से लड़े थे। भारत के जिन-जिन गद्दारों ने अंग्रेजों का साथ दिया और जो-जो उपाधियां अंग्रेजी सरकार इन्हें देके गयी थी उन्हें आज भी भारत उतना ही मान सम्मान देता है। पानी, पेप्सी, साबुन, सिगरेट से लेकर सभी उत्पाद हमारे देश में विदेशी कंपनीयों के पटे पड़े है। जब हम जीरो तकनीकी की वस्तुओं को बेचने के लिए वैश्विक स्तर की प्रतियोगिता करायेंगे और तीसपर भी सैकड़ों प्रकार के कमरतोड़ टैक्स यहां के व्यापारियों से लेंगे तो वहीं होगा जो आज हो रहा है। जब हम विदेशी कंपनीयों को लाइसेंस देकर समूचे जंगल और प्राकृतिक सम्पदा को उनके सुपुर्द कर देंगे तब क्या होगा? जब हम कर्जा ले लेकर इतने अधिक कर्ज में डूब जायेंगे की हमारे देश के बजट का बहुतायत हिस्सा कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाये तो क्या होगा?
फूट डालों राज करों की अंग्रेजों की नीति का संरक्षण आज हमारे देष के राजनीतिज्ञ भली भांति कर ही रहे है। कभी जातीवाद, तो कभी सेकुलरवाद, कभी ब्राह्मणवाद, यादव, कुर्मी, बनिया से लेकर हर तरफ तो फूट है। सब लगे है अपने लिये।
दरअसल सरकारी नीति ही ऐसी है कि ईमानदारी से कोई कार्य हो ही नहीं सकता। इतने ऐफिडेविट और सरकारी कार्य के होने में कमीशन लागत और घूस की मिलावट का तिलिस्म ही ऐसा है कि 100 में निन्यानवे परेषान है। नाना पाटेकर का एक संवाद है सौ में निन्यानवे बेइमान फिर भी मेरा देश महान।

लेखक -विकास कुमार गुप्ता

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
deneme bonusu
vaycasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş