‘गंदों’ में से ‘कम गंदे’ को चुनने की सुविधा देता है ये लोकतंत्र

पिछले दिनों राष्ट्रवादी चिंतन धारा के लब्धप्रतिष्ठित लेखक श्री शिवकुमार गोयल जी से मिलने का अवसर मिला। श्री गोयल संत साहित्य के प्रख्यात लेखक तथा आध्यात्मिक जगत की एक महान विभूति के रूप में विख्यात रहे भक्त स्व. रामशरण दास जी के सुपुत्र हैं। अब 75वें वर्ष में उनकी जीवन नैया चल रही है। इस लंबे काल खण्ड में उन्होंने कितने ही भटकते यात्रियों को पार लगाने का प्रेरणास्पद कार्य किया है। वह राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और सुविचारों के ध्वजवाहक हैं। राजनीति और समाज को वह आजीवन ‘हिंदुत्व’ की उदात्त जीवन शैली को अपनाकर वास्तविक अर्थों में सभ्य और सुसंस्कृत संसार बनाने के लिए प्रेरित करते रहे हैं अपने जीवन को उन्होंने मोमबत्ती की तरह जिया है, स्वयं अंधेरे में रहकर जैसे मोमबत्ती दूसरों को प्रकाश देती है, वैसे ही स्वयं की परवाह न करते हुए राष्ट्र, राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पित रहने वाले इस महान लेखक और संपादक से जब हमारी मुलाकात हुई तो बातों का सिलसिला कुछ यूं चल पड़ा।…
प्रश्न : गोयल साहब आपकी कितनी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं?
उत्तर : मेरी कुल पुस्तकें तीन दर्जन से अधिक हैं जो अभी तक प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें प्रमुख हैं-हिमालय के प्रहरी, हमारे वीर जवान, माटी है बलिदान की, क्रांतिकारी सावरकर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, हनुमानप्रसाद पोद्दार, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, स्वामी विवेकानंद, विवेकानंद जीवन और विचार, आजादी के द्वीप, न्याय की कहानियां, धर्म निरपेक्षता के घातक परिणाम, अमर सेनानी सावरकर, डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी-जीवन यात्रा, वीर सावरकर-चरित्र हनन की घिनौनी साजिश, भारत की वीर गाथाएं, धर्म क्षेत्रे, प्रेरणा की गंगोत्री, शहीदों की गाथाएं, जवानों की गाथाएं, क्रांतिकारी आंदोलन, कारगिल के वीर, मैं सावकर बोल रहा हूं, शाह आयोग के आमने-सामने, अटल बिहारी वाजपेयी, सबसे बड़ी जीत, सोने का महल, नीति कथाएं, प्रेरक बोध कथाएं, चुनौतियों से घिरा भारत, विलक्षण विभूति इत्यादि।
प्रश्न: आपको अभी तक कौन-कौन से सम्मान प्राप्त हो चुके हैं?
उत्तर: सन 2000 में बड़ा बाजार लाइब्रेरी (कलकत्ता) का भाई हनुमानप्रसाद पोद्दार राष्ट्रसेवा सम्मान, राज्यपाल आचार्य विष्णुकांत शास्त्री तथा श्री सुंदर सिंह भंडारी के कर कमलों द्वारा प्रदत्त। सन 2001 में कुशल संपादन के लिए प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया। सन 2002 में राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने केन्द्रीय हिंदी संस्थान के गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत। प्रसिद्घ क्रांतिकारी दुर्गा भाभी द्वारा मातृश्री पुरस्कार से अलंकृत। उपराष्ट्रपति बी.डी जत्ती द्वारा हिमालय के प्रहरी के लिए सम्मानित।
सन 2006 में अग्रोहा विकास ट्रस्ट का सेठ द्वारका प्रसाद सर्राफ पुरस्कार हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने प्रदान किया।
सन 1987 में श्यामसुंदर चौधरी साहित्य पुरस्कार गाजियाबाद
सन 1987 में ला. जगत नारायण सम्मान से अलंकृत।
सन 2004 में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती दिल्ली द्वारा साहित्य भारती सम्मान से अलंकृत।
सन 2009 में साहित्य मंडल नाथ द्वारा सम्मानित।
वीर सावरकर पुस्तक शकुंतला सिरोठिया बाल साहित्य पुरस्कार से अलंकृत।
सन 1981 में आराधकश्री पुरस्कार से अलंकृत। इसी प्रकार कई अन्य पुरस्कार भी मुझे दिये गये हैं।
प्रश्न: लेखन के विषय में अब कैसा लगता है?
उत्तर: आर्य जी, लिखने के लिए अब मन नही करता। (कुछ गंभीर होकर कहते हैं) बहुत लिखा, बड़ी उमंग से और उत्साह से लिखा, लेकिन कोई बहुत अच्छा परिणाम देखने में नही आया। जिस भावना और उम्मीद से लेखन क्षेत्र में आया था कि अपनी महान संस्कृति के प्रति जागरण लाएंगे और एक भव्य भारत का निर्माण करेंगे वह बात पूरी नही हो पायी।
प्रश्न: आखिर इसके लिए कारण क्या रहे?
उत्तर:देखिए आज की पत्रकारिता और आज का लेखन स्वतंत्रता के बाद की पीढ़ी के हाथों में है, निश्चय ही लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्घति से जन्मी पीढ़ी आज के लेखन का नेतृत्व कर रही है। सारी चीजें उसी के हाथ में हैं इसलिए लेखन का पश्चिमीकरण और व्यावसायीकरण हो गया है, मिशनरी भावना तो समाप्त हो चुकी है। लेखन से समाज में जागृति लाने तथा अपने देश के गौरवमयी अतीत की उज्ज्वल आशाओं के सितारों को वर्तमान के धरातल पर उतारने का उद्देश्य समाप्त हो गया है, इसलिए लेखन की शिक्षा भटक गयी है। फलस्वरूप जिस दिशा में हमें बढ़ना चाहिए था उस दिशा में नही बढ़ सके हैं।
इसके पश्चात वो अतीत की यादों में खो गये। मैथिलीशरण गुप्त, भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार जैसी स्वनामधन्य विभूतियों को याद करने लगे और कहने लगे कि मेरे लेखन का उद्देश्य इन महान विभूतियों की अनुभूतियों की गंगा धारा में डुबकी लगाकर आगे बढ़ना था। पूज्य पिता स्व. भक्त रामशरण दास जी के श्री चरणों में बैठकर सीखने को बहुत कुछ मिला। उनके दिव्य जीवन ने मेरे अंत:करण पर अमिट छाप छोड़ी और जीवन में सदा आगे बढ़ने का संकल्प बलवती होता चला गया।
अब आजकल भाषा और व्याकरण पर लेखन में कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। जिसकी जैसी इच्छा होती है वो वैसे ही लिखने लगता है, वर्त्तनी दोष बहुत अधिक बढ़ गया है। कविता केवल श्रंगार में डूबकर रह गयी है। कविता में कोई आवाह्न करता कवि दिखाई नही देता।
प्रश्न: वर्तमान राजनीति पर आप क्या कहेंगे?
उत्तर:आज की राजनीति पथ भ्रष्ट है। भाजपा अटल जी के बिना अधूरी है। फिर भी यह पार्टी किन्हीं अर्थों में कांग्रेस और साम्यवादियों से बेहतर है। कम से कम आतंकवाद से निपटने के लिए इसका दृष्टिकोण तो कांग्रेस और उसके जैसे अन्य राजनीतिक दलों से बेहतर ही है। (कुछ दुख के साथ कहते हैं)…पर जब भाजपा ने सत्ता में आने के बाद अपने सिद्घांतों से समझौता किया तो उस समय इससे भी निराशा ही हाथ लगी थी। जिस शेख अब्दुल्ला को राष्ट्रघाती माना गया था और भाजपा उसे इसी रूप में देखती थी सत्ता में आने पर भाजपा ने उसी शेख के बेटे फारूख अब्दुल्ला को केन्द्र में मंत्री बना दिया। यह बात भाजपा के लिए सही हो सकती थी लेकिन इससे एक और संकेत गया कि भाजपा कांग्रेस से भी अधिक तुष्टिकरण के खेल में लग गयी है। जिन बीमारियों के ईलाज के लिए भाजपा को सत्ता सौंपी गयी थी, उनका उपचार छोड़ भाजपा बीमारियों को ही खाना परोसने लगी। फिर भी मैं इतना कहूँगा कि वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा ही एक उम्मीद की किरण है। मैं आशावादी हूं और आशा करता हूं कि भाजपा अपनी गलतियों से सबक लेगी। इस समय अटल जी की कमी इस पार्टी में खल रही है उनके रहते नेतृत्व का संकट नही आता था।
प्रश्न: आप कैसा भारत देखना चाहते हैं?
उत्तर : मैं समन्वयवादी उदात्त विचारों के धनी भारत को बनता देखना चाहता हूं। परंतु मेरे समन्वयवाद का अर्थ किसी का अनुचित तुष्टिकरण करना नही है, किसी को आरक्षण का लालच देकर समाज में जाति, संप्रदाय, भाषा के नाम पर देश में विघटनवाद को बढ़ावा देना नही है, मेरा विचार है कि कानून सबके लिए समान हो और जाति, संप्रदाय आदि की संकीर्ण भावनाओं की दीवारों को गिराकर भव्य भारत के निर्माण के लिए राष्ट्रचेतना को बलवती किया जाए।
प्रश्न : भ्रष्टाचार और राजनीति पर आपका क्या विचार है?
उत्तर : देखिए, अभी कल अन्ना जी मेरे पास आए थे। उनसे अच्छी बातें हुईं। परंतु मैं देख रहा हूं कि अन्ना जी, केजरीवाल और बाबा रामदेव ये सब कुछ समय बाद देश की जनता के लिए नीरस हो जाएंगे। 2014 के चुनाव के समय हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण के लक्ष्य को भूल जाएंगे और हमारी वोट जाति, संप्रदाय, क्षेत्र, भाषा आदि को लेकर दी जाएगी। उसका परिणाम वही होगा कि राजनीति पर फिर भ्रष्ट लोगों का दबदबा बना रह जाएगा। हमें गंदे लोगों में से सबसे कम गंदे को छांटने की सुविधा यह लोकतंत्र देता है, जबकि उम्मीदवारों में से सबसे बेहतर और सबसे अच्छे को चुनने का अधिकार होना चाहिए। अभी हम देख रहे हैं कि हम कभी कभी तो गंदों में से सबसे कम गंदे को भी चुनने के अधिकार से वंचित कर दिये जाते हैं, क्योंकि गनबल और धनबल लोकतंत्र पर हावी हो जाते हैं और निहायत गंदा आदमी चुनाव में जीतकर हमारा जनप्रतिनिधि बन जाता है।
प्रश्न: उगता भारत के पाठकों के लिए आप क्या कहेंगे?
उत्तर : यह समाचार पत्र पाठकों में राष्ट्रवाद और संस्कृति प्रेम को जिस प्रकार भर रहा है वह बीते समय के पत्रकारों की याद दिलाता है। मैं इसके बावजूद पाठकों से कहना चाहूंगा कि देश धर्म और संस्कृति के प्रति जागरण हेतु उठ खड़े हों, भारत की संस्कृति पर हो रहे हमले का जबाव दें और मिशन के रूप में एक आंदोलन को जन्म दें।
याद रहे जैसे आदमी के लिए नित्य स्नान से तन बदन को चुस्त दुरूस्त रखना आवश्यक हो जाता है वैसे ही धर्म संस्कृति के सुविचारों से देश की संतति को चुस्त दुरूस्त रखा जाना आवश्यक होता है, इसलिए वैचारिक आंदोलन निरंतर जारी रहना चाहिए।
उस अभियान को यह पत्र चला रहा है तो पाठकगण उस अभियान को और भी कारगर बनायें।

Comment:

betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
İmajbet güncel
Safirbet resmi adres
Safirbet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş
galabet giriş
galabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
galabet giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş