Categories
प्रमुख समाचार/संपादकीय

खून का बदला खून-3

शांता कुमार
गतांक से आगे…..
सांडर्स की लाश रक्त से लथपथ सड़क पर पड़ी हुई अंग्रेजी साम्राज्य का उपहास कर रही थी। अब आजाद ने अपने स्थान से चेतावनी दी-चलो भगतसिंह और राजगुरू आगे बढ़े और पीछे से मार्ग सुरक्षित करने के लिए आजाद खड़े हो गये। इतने में हेड कांस्टेबल चंदन सिंह गालियां देता हुआ अपने दो साथियों को लेकर आगे बढ़ा। आजाद ने कड़क कर कहा, खबरदार! पीछे हटो। चंदन सिंह के साथ के सिपाही रूक गये, पर उसे शायद मौत बुला रही थी, इसलिए वह आगे बढ़ने लगा। उसे बढते देख आजाद के मौजेर पिस्तौल की सनसनाती गोली उसके सीने को पार कर गयी। बेचारा बांहें फैलाता हुआ, मुंह के बल धरती पर गिर पड़ा। उसकी तड़पती लाश को देखकर किसी ने आगे बढ़ने का साहस नही किया। डीएवी होस्टल में पहुंचकर आजाद राजगुरू को अपनी साईकिल पर बिठाकर गोल बाग से होते हुए मजग की ओर चल दिये। उनके पीछे पीछे अन्य लोग भी आ गये
क्रांतिकारियों के होस्टल छोड़ते ही पुलिस की भारी संख्या ने होस्टल को घेर लिया। संगीनें तानें बंदूकें लिए, साम्राज्यशाही के कुत्त चारों ओर सांडर्स के हत्यारों की खोज करने लगे। होस्टल का प्रत्येक कमरा खोज डाला गया। हर कोने की तलाशी ली गयी। प्रत्येक छात्र से पूछताछ की गयी। रास्ते पर मिलने वाले हर व्यक्ति को पकड़ लिया जाता था और उससे घंटों पूछताछ की जाती थी।
लाहौर जैसे नगर में पुलिस थाने के बिलकुल सामने दिनदहाड़े एक अंग्रेज अधिकारी की गोलियों से हत्या। कितने साहस की बात थी। उस पर कमाल यह कि हत्या करने वाले बचकर साफ निकल गये। साम्राज्यवाद की छाती पर सांस लोटने लगा और देशभक्तों का सीना प्रसन्नता व गौरव से फूल उठा। उन्होंने सिद्घ कर दिया कि भारत की जवानी अभी रक्तहीन नही हुई है, राष्ट्र के अपमान का बदला चुकाने के लिए इस देश के युवक बड़े से बड़ा बलिदान दे सकते थे। समाचार पत्रों ने देश के कोने कोने में इस समाचार को पहुंचा दिया। हजारों की सब जगह खोज होने लगी। स्टेशन पर सैकड़ों सीआईडी वाले सूंघने लगे। लाहौर का वातावरण बड़ा क्षुब्ध और आतंकित हो गया।
सांडर्स की हत्या के बाद दूसरे ही दिन प्रजातंत्र सेना ने एक वक्तव्य तैयार किया और तीन चार दिन के बाद लाहौर की दीवारों पर जगह जगह लाल पर्चे चिपकाए गये। वे पर्चे इस प्रकार थे-
नोटिस- हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना
नौकरशाही सावधान!
जेपी सांडर्स की हत्या से लाला लाजपतराय की हत्या का बदला ले लिया गया। यह सोचकर कितना दुख होता है कि सांडर्स जैसे एक मामूली पुलिस अफसर के कमीने हाथों ने देश की 30 करोड़ जनता द्वारा सम्मानित एक नेता पर हमला करके उनके प्राण ले लिये। राष्ट्र का यह अपमान हिंदुस्तानी नवयुवकों और मर्दों को एक चुनौती थी।
आज संसार ने देख लिया कि हिंदुस्तान की जनता निष्प्राण नही हो गयी है, उसका खून जम नही गया है। वह अपने राष्ट्र के सम्मान के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा सकती है और यह प्रमाण देश के उन युवकों ने दिया है, जिनकी स्वयं इस देश के नेता निंदा और अपमान करते हैं।
अत्याचारी सरकार सावधान!
इस देश की दलित, पीड़ित और जनता की भावनाओं को ठेस मत लगाओ। अपनी शैतानी हरकतें बंद करो। हमें हथियार न रखने देने के लिए तुम्हारे सब कानून और चौकसी के बावजूद पिस्तौल और रिवॉल्वर इस देश की जनता के हाथ आते रहेंगे। यह हथियार यदि सशस्त्र क्रांति के लिए पर्याप्त न भी हुए तो यह राष्ट्रीय अपमान का बदला लेते रहने के लिए तो काफी रहेंगे ही। हमारे अपने लोग हमारी निंदा और अपमान करें। विदेशी सरकार चाहे हमारा कितना भी दमन कर ले, परंतु हम राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए तथा विदेशी अत्याचारों को सबक सिखाने के लिए सदा तत्पर रहेंगे। हम सब विरोध और दमन के बावजूद क्रांति की पुकार को बुलंद रखेंगे और फांसी के तख्तों से भी पुकारते रहेंगे-इंकलाब जिंदाबाद।
हमें एक आदमी की हत्या करने का खेद है। परंतु यह आदमी निर्दयी, नीच और अन्याय पूर्ण व्यवस्था का अंग था, जिसे समाप्त कर देनाा आवश्यक था। इस आदमी का वध हिंदुस्तान में ब्रिटिश शासन के कारिंदे के रूप में किया गया है। यह सरकार संसार की सबसे बड़ी अत्याचारी सरकार है। मनुष्य का रक्त बहाने के लिए हमें खेद है, परंतु क्रांति के स्थल पर बहाना अनिवार्य हो जाता है। हमारा उद्देश्य ऐसी क्रांति से है, जो मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण का अंत कर देगी।
इस घोषणा पत्र द्वारा हत्या का प्रयोजन जनता को स्पष्टï कर दिया गया। इससे क्रांतिकारियों के प्रति बड़ी सदभावना का वातावरण बन गया। सब ओर उनकी प्रशंसा होने लगी। लालाजी की दुखद मृत्यु से पीड़ित पंजाब की जनता के घावों पर मरहम का यह फाहा इतना उपयुक्त रहा कि धन जन से क्रांतिकारियों की सहायता होने लगी। अहिंसा के मानने वाले डा. गोपीचंद भार्गव ने भी अपने गुरू लाला लाजपतराय की हत्या का बदला लिये जाने के कारण सहानुभूति से क्रांतिकारियों को 200 रूपये दिये। कुछ समय के लिए डा. साहब हिंसा अहिंसा का भेद भूल गये क्योंकि आघात उनके अपने ही गुरू पर हुआ था। डा. साहब मनोविज्ञान के कितने सुंदर उदाहरण हैं। उन दिनों के कांग्रेस अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू ने भी समाचार पत्रों को वक्तव्य देते हुए कहा था-हम चाहते हैं कि इस अहिंसा की नीति पर आचरण करें। यही हमारा लक्ष्य है। इस पर भी यदि हिंसात्मक कार्य हो जाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी उस सरकार पर है, जिसके कर्मचारियों की ओर से लाहौर लखनऊ और कानपुर की निस्हाय जनता पर अत्याचार हुए हैं। अगर सरकार की ओर से इसी प्रकार नेताओं पर आक्रमण होते रहेंगे तो उसका परिणाम भी वही होगा, जैसा कि सरकार कहती है कि सांडर्स के संबंध में हुआ है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट झलक मिलती है कि अहिंसा पर विश्वास रखने की बात करते हुए भी सांडर्स की हिंसक हत्या पर प्रत्येक देशभक्त आत्म संतोष का अनुभव कर रहा था।
सरकार ने इस घटना को अपने साम्राज्य के विरूद्घ एक करारी चोट समझा। वह इस हत्या का पता लगाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी। रायबहादुर तुताराम डिप्टी सुपरिटेंडेंट को विशेष अधिकारी के नाते इस हत्या का भेद खोजने के लिए नियुक्त किया गया। नौजवान भारत सभा तथा कुछ अन्य 22 नौजवानों को पुलिस ने पकड़ लिया। उनको कठोर यातनाएं देकर भेद जानने का यत्न किया जाने लगा। उन सबमें केवल एक हंसराज बोहरा ऐसा था जो हत्या के सारे रहस्य को जानता था, पर उसने सब यातनाएं झेलने के बाद भी कोई कमजोरी न दिखाई। सात दिन अपना सिर पटकते रहने के बाद जब पुलिस को कोई सफलता न मिली तो उसे छोड़ दिया गया।
सांडर्स वध की घटना के दिन क्रांतिकारियों के पास मकान में दीया जलाने के लिए तेल मोल ले सकने तक के लिए भी पैसे न थे। हत्या के बाद मजंग वाले मकान पर आए तो खाने के लिए कुछ न था। अत: आजाद के कहने पर जयगोपाल अपने मित्र वंशीलाल के पास जाकर 10 रूपये मांग लाया, तब सब भोजन कर सके। देश के बंधन खोलने के लिए निकले ये वीर कितनी भुखमरी में तथा आर्थिक कठिनाई में समय व्यतीत करते थे-यह अनुमान लगााया जा सकता है। क्रमश:

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
pumabet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betwild giriş
dedebet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
maxwin giriş
süperbahis giriş
betwild giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpark giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
betpas
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
casinofast giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
superbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
süperbet giriş
superbet
cratosroyalbet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
betnano giriş
safirbet giriş
betkanyon giriş
sonbahis giriş
betorder giriş
betorder giriş