Categories
प्रमुख समाचार/संपादकीय

आज का चिंतन-24/06/2013

साफ कह चुका है केदार
बंद करो यह बलात्कार वरना ….
डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com
दैव भूमि उत्तराखण्ड में अचानक जो कुछ हो गया, वह रौंगटे खड़े कर देने वाला है।  इसके बाद जो कुछ हो रहा है वह भी कोई कम दुःखी करने वाला नहीं है। अकस्मात शिव का तीसरा नेत्र खुल उठा और ताण्डव मचा गया।महामृत्युंजय के आँगन में मौत का ऎसा ताण्डव… लोग बह गए… लाशें बिछ गई….हाहाकार मचा हुआ है। जो मरे हैं उनकी कोई गिनती नहीं है, उनका भी कोई आंकड़ा नहीं है जिनकी साँसें चल रही है, भूख और प्यास, कँपकपाती शीत और लगातार बारिश का जो दौर केदारनाथ और उत्तराखण्ड में देखने को मिला, वह त्रासदी के महासागर की झलक दिखाकर हर किसी को व्यथित कर देने के लिए काफी है।जो तीर्थ यात्री, स्थानीय निवासी, पशु-पक्षी मारे गए हैंUntitled1 उन सभी दिवंगत आत्माओें की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, भगवान आशुतोष के आँचल में जिन लोगों ने देह त्याग दी है, उनके मोक्ष के लिए कामना करते हैं। इससे अधिक आवश्यकता है उन लोगों को बचाने की जो भयानक संकटों के बीच रहते हुए मौत से संघर्ष कर रहे हैं और जो किसी तरह आत्मविश्वास बनाए हुए इसी आशा में जी रहे हैं कि कुछ न कुछ होगा, और वे सुरक्षित लौट पाएंगे।

हम सभी का पावन फर्ज और सामाजिक उत्तरदायित्व है कि आपदा की इस घड़ी में जो लोग फंसे हुए हैं, मदद को आतुर हैं उन तक बिना किसी देरी के मदद पहुंचे और आपदाग्रस्त लोगों को तुरंत राहत का अहसास हो। उत्तराखण्ड के लिए जो लोग चिंतित हैं, जो वहाँ हैं उन सभी का दायित्व है कि मानवीय संवेदनाओं के साथ काम हो और जो सेवा, राहत एवं मदद का काम हो, वो सब कुछ निरपेक्ष भाव से हो और मानवता के लिए समर्पित हो।

उत्तराखण्ड की वादियों में विराजमान केदारनाथ के इस संहार ताण्डव से हमें कई सबक सीखने होंगे। हर किसी पर शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले भगवान आशुतोष को आखिर तीसरा नेत्र क्यों खोलना पड़ा। इसका जवाब और किसी को नहीं हमें ही ढूँढ़ना होगा।

सदियों और युगों से चली आ रही प्रकृति हमें संरक्षण देती हुई हमारा पालन भी करती रहती है। लेकिन जब इसके साथ हम चोट करने लगते हैं तब हश्र क्या होता है, इसे जानने के लिए केदारनाथ का ताण्डव काफी है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि भगवान भोलेनाथ की यह माया सिमट कर वापस वैसी ही हो जाएगी, जैसी दिगम्बर स्वरूपा कुछ दशकों पहले थी।

शिव के तीसरे नेत्र के ताण्डव से बचना है तो हमें शिव से जुड़े हुए सारे परिवार और परिवेश को समझना होगा। शिव अपने आप में प्रकृति का विराट स्वरूप हैं।  उन्होंने जिनका प्रादुर्भाव किया है उसकी रक्षा करना मानवी संस्कृति का अंग बना रहना चाहिए तभी शिव की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है।  आज केदार ने हमें सबक सिखाने के लिए अपने ही आँगन से आहट सुनाने का काम किया है।

प्रकृति के उपहारों को हम पूरे प्रेम और आनंद के साथ उपयोग में लाएं लेकिन अपने क्षुद्र स्वार्थों के लिए हम जो कुछ कर रहे हैं वह अपने आपमें मानवता और समूची प्रकृति के लिए किसी कलंक से कम नहीं है। सीधे और साफ-साफ शब्दों में कहा जाए तो हम प्रकृति के साथ बलात्कार की सारी हदों को पार करते जा रहे हैं और यही घोर कलियुग का संकेत देता है।

पहाड़ों के जिस्म को छेदने में हम पीछे नहीं हैंं, नदियों और जलाशयों को हमने अस्तित्वहीन कर दिया, पावन नदियों के महत्त्व को भुला दिया, पतितपावनी माँ गंगा के लिए हमारी संवेदनाएं जाने कहाँ खो गई हैं, धरती का श्रृंगार बने हुए पेड़-पौधों के साथ हम जो कर रहे हैं वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। जो हमें संरक्षित और सुरक्षित रखना था उसके साथ ही हमने विश्वासघात किया और वह भी इतना कि हमने अपनी ही जमीन को खिसका दिया।

बात उत्तराखण्ड की ही क्यों करें, हमारे आस-पास से लेकर अपने इलाकों में भी हम क्या कर रहे हैं, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है।  हम अपने ही आधारों को नष्ट करने लगे हैं और यही कारण है कि आज हमें चारों तरफ खतरे ही खतरे दिखाई देने लगे हैं।

इन खतरों की शुरूआत का सीधा का संकेत भगवान केदारनाथ ने दे दिया है।  उत्तराखण्ड दैव धाम कहा जाता है लेकिन वहाँ भी धर्म के नाम पर धंधों ने किस कदर पाँव पसार रखे हैं, यह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है। इसे तो वे ही अच्छी तरह बयाँ कर सकते हैं जो उत्तराखण्ड यात्रा कर चुके हैं।

धर्म के नाम पर धंधों का यह खेल अपने यहाँ से लेकर उत्तरारखण्ड की वादियों में भी फैला हुआ है और देश भर में। धर्म को धंधे का रूप देकर असंख्यों लोगों की किस्मत ही बदल गई है। चाहे वे संसार छोड़ बैठे बाबा,महामण्डलेश्वर और महंत-संन्यासी हों या फिर रेस्टोरेंंट, होटलें और धर्मशालाएं चलाने वाले, या खच्चरों का इस्तेमाल करने वाले।

इन सभी को लगता है जैसे धर्म वो अक्षय पात्र ही है जिसका इस्तेमाल कर चाहे जितना दूह लें, कोई सीमा नहीं है। लेकिन इस शोषण भरे दोहन में हमने सिर्फ और सिर्फ अपना ही स्वार्थ देखा है। जब आदमी समुदाय और परिवेश की उपेक्षा करता है, कहर बरपाता है, तब लगभग ऎसी ही स्थितियां सामने आती हैं।

केदार के संकेतों को आज भी हम नहीं समझ पाएं तो दुर्भाग्य और किसी का नहीं बल्कि हमारा ही है। बहरहाल हमारा पूरा ध्यान राहत और बचाव पर केन्दि्रत होना चाहिए। जो लोग उत्तराखण्ड के स्थानीय लोग हैं उन्हें भी पूरी मानवीय संवेदनाएं निभानी होंगी और जो लोग व्यवस्थाओं से जुड़े हैं उन्हें भी सब कुछ भूलभुलाकर अपना पूरा ध्यान तीर्थयात्रियों को बचाकर उन्हें अपने घर भेजने पर केन्दि्रत होना चाहिए।

धर्म और तीर्थ के नाम पर धर्म के जो भी धंधेबाज हैं उन्हें भी चाहिए कि वे भक्तों से बटोरे हुए अनाप-शनाप पैसों से भरी तिजोरियों और लॉकरों का मुँह अब खोलें क्योंकि जो धन भक्तों का दिया हुआ है वह भक्तों के काम ही आना चाहिए, तभी उसका उपयोग है।

जो जहाँ हैं वहाँ अपने प्रयास करें और सारी शक्ति उत्तराखण्ड के आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए लगाए,तभी हमारे मानव होने का कोई अर्थ है। वरना केदारनाथ के तीसरे नेत्र का रूख हमारी तरफ भी हो सकता है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betvole giriş
betvole giriş
fenomenbet
betvole giriş
betkanyon
betvole giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betvole giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
timebet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
vaycasino giriş
kulisbet giriş
mariobet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
grandbetting giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betvole giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
imajbet giriş
damabet
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betvole giriş
betpark giriş
betvole giriş
betpark giriş
celtabet giriş
betpipo giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
superbahis giriş
perabet giriş
perabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
mariobet giriş
betvole giriş
mariobet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
mariobet giriş
betpas giriş
hititbet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
dedebet