सबसे कम अवस्था में फांसी पाने वाले क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जयंती के अवसर पर

सबसे कम अवस्था में क्रांतिकारी गतिविधियों में सम्मिलित होने के अपराध में फांसी चढ़ने वाले महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस का आज जन्म दिवस है । 1889 में आज ही के दिन जन्मे इस महान क्रांतिकारी ने अंग्रेज अधिकारी किंग्स फोल्ड पर हमला किया था। यह घटना 30 अप्रैल 1908 की है । जब खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी यूरोपीयन क्लब के बाहर किंग्सफोर्ड के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे । शाम को 8:30 पर किंग्सफोर्ड को क्लब से बाहर निकलना था और हमारे यह दोनों महान क्रांतिकारी बस उन्हीं क्षणों की प्रतीक्षा कर रहे थे । निर्धारित समय पर जैसे ही किंग्सफोर्ड की गाड़ी क्लब से बाहर निकली, किंग्सफोर्ड के बाहर आकर गाडी में बैठते ही उन्होंने बम और पिस्तौल से गाडी पर हमला कर दिया ।

दुर्भाग्यवश उस गाड़ी में वकील कैनेडी की पत्नी और पुत्री थी । जिनकी इन दोनों क्रांतिकारियों द्वारा किए गए हमले में मृत्यु हो गई। यद्यपि तब तक हमारे दोनों क्रांतिकारी वहां से भाग चुके थे । उन्हें यह पूर्ण विश्वास हो गया था कि उन्होंने अपना ‘लक्ष्य ‘ प्राप्त कर लिया है। कुछ समय उपरांत जब इन दोनों क्रांतिकारियों को इस तथ्य का पता चला कि किंग्सफोर्ड को न मार कर उन्होंने तो निर्दोष महिलाओं को मार दिया है तो उन्हें अपने किए पर बहुत अधिक दुख हुआ ।

मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड को मारने की असफल योजना के बाद भागने के लिए खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने अलग अलग रस्ते अपनाए थे । 1 मई को जब खुदीराम को गिरफ्तार कर लिया गया तो प्रफुल्ल चाकी मुजफ्फरपुर के एक घर में रुक गये । प्रफुल्ल चाकी को मुजफ्फरपुर से हावड़ा जाते समय रास्ते में एक जगह रेल बदलनी थी और रेल बदलते समय दुर्भाग्य से उनको ब्रिटिश पुलिस के सब-इंस्पेक्टर नन्दलाल बेनर्जी ने देख लिया । नंदलाल बनर्जी ने प्रफुल्ल चाकी को गिरफ्तार करने के लिए अपने साथियों को संकेत किया । जब प्रफुल्ल चाकी ने नंदलाल बनर्जी के उद्देश्य को समझा तो उन्होंने उन पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसानी आरंभ कर दी। अब प्रफुल्ल चाकी ने नन्दलाल बेनर्जी को मारने के लिए गोली चलाई लेकिन उनका प्रयास असफल रहा । जब प्रफुल्ल चाकी ने देखा कि अब वह जयचंद बने नंदलाल बनर्जी से बच नहीं पाएंगे तो उन्होंने अपनी ही पिस्टल से स्वयं को गोली मार ली । इस प्रकार वह देश के लिए शहीद हो गये ।

उसके पश्चात ब्रिटिश सरकार ने खुदीराम बोस को पकड़ने की योजना बनाई और यह घोषणा कर दी कि जो कोई भी खुदीराम बोस को पकड़वाने में सहायता करेगा उसे ₹1000 पुरस्कारस्वरूप दिए जाएंगे ।अब जैसे ही खुदीराम बोस को पता चला कि पुलिस उनका पीछा कर रही है उन्होंने रेलवे स्टेशन जाने के बजाय मेदिनीपुर भागने लगे । अब ओयेनी में पानी पीने के लिए रुके और तभी कांस्टेबल उसके पास आये और उसके इतने तेज भागकर आने का कारण पूछा ।

अब खुदीराम फंस गया था और उसने बिना सोचे समझे अपने कपड़ो से दो पिस्तौले निकाली और अंधाधुंध 37 गोलिया चलायी । केवल 18 वर्ष के खुदीराम ने हवलदारो के दाँत खट्टे कर दिए लेकिन अंत में उनको गिरफ्तार कर लिया गया । 1 मई 1908 को मुजफ्फरपुर हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया । जब उनको ले जाया जा रहा था वो जोर जोर से “वन्दे मातरम ” का नारा लगा रहे थे और लोग उस युवा को देखकर आश्चर्य कर रहे थे । जब उनको मुज्जफरनगर ले जाया गया तब उन्होंने ह्त्या का दोषी होना स्वीकार कर लिया ।

पुलिस ने उसके साथी का नाम और क्रांतिकारी संगठन का नाम बताने को कहा लेकिन खुदीराम ने कुछ नही बताया । हालंकि बाद में प्रफुल्ल चाकी के मृत शरीर को जब उनके सामने लाया गया तो उनकी आँखों में आंसू आ गये क्योंकि जिसके साथ वे इतने दिन से आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे उसी की लाश उनके सामने थी । अब अंग्रेजो की बर्बरता इतनी बढ़ गई थी कि उन्होंने प्रफुल्ल चाकी के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए और आगे की जांज के लिए कलकता भेज दिया गया ।

2 मई 1908 को खुदीराम को जेल में डाल दिया गया और 21 मई से पूछताछ आरम्भ हो गयी । ब्रिटिश सरकार के वकील बिनोदबिहारी मजूमदार और मन्नुक थे जबकि खुदीराम राम बोस के बचाव पक्ष में उपेन्द्रनाथ सेन , कालिदास बाबु और क्षेत्रनाथ बंदोपाध्याय थे । 23 मई 1908 को खुदीराम बोस ने कोर्ट में अपना पहला बयान दिया और अपने वकीलों के कहने पर मुजफ्फरपुर हत्याकांड में संलिप्त होने से मना किया ।अब जांज आगे बढी और 13 जून को निर्णय की अंतिम तारीख बताया ।

अब खुदीराम बोस के विपक्ष के वकीलों को अनजान पत्र मिले जिसमे उन्होंने कलकता में फिर धमाके की बात कही । ये सारी योजना खुदीराम के वकीलों ने खुदीराम बोस की मौत की सजा टालने के लिए रची ताकि सरकार को यकीन हो जाए कि मुजफ्फरपुर हमले में किसी ओर का हाथ है | हालांकि ब्रिटिश सरकार किसी भी कीमत पर एक क्रांतिकारी को जाने नही देना चाहती थी इसलिए खुदीराम बोस की मौत की सजा सुनाई गयी । अब खुदीराम बोस ने फांसी का विरोध किये बिना अपने अधिवक्ताओं को भी उच्च न्यायालय में अपील करने से मना करते हुए कहा कि उनके भाग्य में फांसी लिखी हुयी है तो उन्हें वही मौत मिलेगी ।

फिर भी कुछ वकीलों ने खुदीराम बोस को उच्च न्यायालय में अपील करने से मना लिया , जिससे कि उनको फांसी के स्थान पर उम्रकैद की सजा मिल जाए ।8 जुलाई 1908 को उच्च न्यायालय की सुनवाई हुयी और नरेंद्रकुमार बसु खुदीराम बोस के लिए खड़े हुए और खुदीराम को बचाने के लिए कई दलीले दी । अब उच्च न्यायालय ने 13 जुलाई को अंतिम निर्णय सुनाते हुए खुदीराम बोस को फांसी दिए जाने के निर्णय को ही अंतिम माना।

11 अगस्त 1908 को जनता के सामने खुदीराम बोस को फांसी लगा दी गयी ।इससे युवाओं में क्रोध बढ़ गया और न्यायालय के बाहर जाकर नारे लगाने लगे । इस प्रकार इस क्रांतिकारी की मौत ने भी भारत के युवाओं के खून को खौलाने का काम किया और उनकी भावनाओं के अनुरूप क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाने में सहायता मिली । हंसते-हंसते वह बलिदान हो गए , पर बलिदान से पूर्व वह एक ऐसा इतिहास लिख गए जिसने अंग्रेजो को भारत से उखाड़ फेंकने का सराहनीय कार्य किया । भारत के इतिहास में आज भी खुदीराम बोस को सबसे कम अवस्था में देश के लिए बलिदान देंने के लिए जाना जाता है ।

आज अपने ऐसे महान क्रांतिकारी को उनकी जयंती के पावन अवसर पर विनम्र पुष्पांजलि।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
pusulabet giriş
parmabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betparibu giriş
betlike giriş
parmabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
parmabet giriş
betlike giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
klasbahis giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
mariobet giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
betparibu giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
parmabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betnano giriş
restbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betlike giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
betnano giriş