Mughal-History-
मजहब ही तो सिखाता है आपस में बैर रखना पुस्तक से ….
  • डॉ राकेश कुमार आर्य

भारत के लाखों करोड़ों वर्ष के इतिहास को गहरे गड्ढे में दबाकर भारतद्वेषी इतिहासकारों ने केवल और केवल मुगल काल को प्रमुखता देते हुए उसे कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि जैसे, आज का भारत मुगलों के स्वर्णिम शासन काल की ही देन है। इनका ऐसा प्रयास देखकर यह लगता है कि यदि भारत वर्ष के इतिहास से मुगल काल को निकाल दिया जाए तो फिर भारतवर्ष के पास ऐसा कुछ भी नहीं बचेगा जिस पर वह गर्व और गौरव की अभिव्यक्ति कर सके।

यही कारण है कि मुगल वंश के सभी शासकों के हिन्दू विरोधी उत्पीड़नात्मक कार्यों को भुलाकर कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है जैसे उन्होंने भारत, भारतीयता और भारतीयों के लिए ही अपना जीवन खपाया और उनका शासन पूर्णतया लोक कल्याणकारी राज्य था। वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर तो कुछ और भी आगे बढ़कर कहती हैं कि मुगल विदेशी नहीं थे। बाबर तो विदेशी था, परन्तु उसके आगे आने वाले उसके वंशज पूर्णतया भारतीय थे। क्योंकि उनका जन्म भारत वर्ष में हुआ था। रोमिला थापर जैसे इतिहासकारों की बुद्धि पर सचमुच तरस आता है। क्योंकि यही वह इतिहासकार हैं जो आर्यों, शक, हूण, कुषाण (जो कि वास्तव में मूल रूप से भारतीय ही थे) आदि को आज तक विदेशी मानते हैं जो कि बाबर से सदियों पहले कथित रूप से भारत आए थे। यदि उन्हें विदेशी मान भी लिया जाए तो भी वे भारतीय समाज और संस्कृति में इस प्रकार घुल मिल गए कि उन्हें आज 5 अलग से खोजना भी लगभग असम्भव है।

जिन आर्यों के धर्म पर हम भारतीयों को नाज है,
जिनकी मर्यादा विश्व में कल बेजोड़ थी और आज है।
उनको विदेशी मानना इस राष्ट्र का भी अपमान है,
जो लोग ऐसा कह रहे समझो वह कोढ़ में खाज हैं।।

यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद तथ्य है कि यदि इन इतिहासकारों की सोच के अनुसार इन सभी को विदेशी मान भी लिया जाए तो उनके वंशज तो आज तक भी विदेशी ही हैं, जबकि मुगल शासक बाबर के वंशज उसके भारत आगमन के 5 वर्ष पश्चात् (अर्थात् 1530 ई0 में जब बाबर मरा और उसका पुत्र हुमायूँ गद्दी पर बैठा) ही तुरन्त भारतीय हो गए।

मुगलवंश का संस्थापक बाबर एक विदेशी लूट गिरोह का मुखिया था। वह जब भारत आया तो उसके पास भारत के प्रति लूट की योजना के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं था। यही कारण था कि उसने भारत आने के पश्चात् भारत को जमकर लूटा। भारत को सांस्कृतिक रूप से लूटने का भी उसने हरसम्भव प्रयास किया। इसी आक्रमणकारी के समय उसके सेनापति मीर बाकी खान के आदेश से अयोध्या स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री रामचन्द्र जी का मन्दिर भी तोड़ा था। यह घटना 1528 ईस्वी की है।

बाबर भी चाहता था गाजी बनना

बाबर की गाजी बनने की तीव्र इच्छा थी। बाबर ने अपने विजय पत्र में अपने आपको मूर्तियों की नींव का खण्डन करने वाला कहा है। ऐसा करके ही वह गाजी की पवित्र उपाधि को प्राप्त कर सका था। गाजी की इस पवित्र उपाधि को प्राप्त करके उसे उतना ही चैन मिला था जितना एक कट्टर मुसलमान को मिलना चाहिए अर्थात् हिन्दू विरोध और हिन्दू धर्म स्थलों के प्रति अश्रद्धा बाबर के भीतर एक संस्कार के रूप में पूर्व से ही विद्यमान थी। यही कारण था कि जिस समय अयोध्या स्थित रामचन्द्र जी का मन्दिर तोड़ा गया, उस समय बाबर ने हजारों की संख्या में हिन्दुओं का नरसंहार किया था। कहा जाता है कि मन्दिर के तोड़े जाने से आहत हिन्दू लोगों ने बाबर की सेना का भरपूर विरोध किया था। जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दुओं ने अपना बलिदान दिया था।

बाबर के इस कुकृत्य के विरुद्ध हिन्दुओं ने पिछली शताब्दियों में लगभग छः दर्जन युद्ध लड़े हैं। जिसमें लाखों हिंदुओं का बलिदान हुआ है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् सारे तथ्यों के होते हुए भी शान्ति के मज़हब को मानने वाले लोगों ने इस वथ्य को हर बार झुठलाने का प्रयास किया कि वहाँ पर कभी राम मन्दिर था। साम्प्रदायिक सोच और साम्प्रदायिकता के प्रति पूर्णतया समर्पित रहने की उनकी भावना ने उन्हें ऐसा करने से बार-बार रोका। इस पवित्र स्थल हेतु श्रीगुरु गोविंदसिंह जी महाराज, महारानी राज कुँवरी तथा अन्य महान योद्धाओं और वीरांगनाओं ने भी संघर्ष कर बलिदान दिये हैं।

मन्दिर के लिए हिन्दुओं ने दिए हैं अप्रतिम बलिदान

हिन्दुओं के प्रति बाबर भी हर मुस्लिम बादशाह की भाँति कट्टर और निर्दयी था। उसने अपने पहले आक्रमण में ही बाजौर में 3000 से भी अधिक निर्दोष और निरपराध हिन्दुओं की हत्या कर दी थी। यहाँ तक कहा जाता है कि उसने इस युद्ध के दौरान एक पुश्ते पर मृत हिन्दुओं के सिरों को काटकर उनका स्तम्भ बनवा दिया था। इसी प्रकार के नरसंहार उसने ‘भेरा’ पर आक्रमण के समय भी किए थे।

बाबर ने जब सैयदपुर, लाहौर तथा पानीपत पर आक्रमण किया तो बूढ़े, बच्चे महिलाओं का जमकर नरसंहार किया था। कहते हैं कि गुरुनानक जी ने बाबर के इन वीभत्स अत्याचारों को अपनी आँखों से देखा था। उन्होंने इन आक्रमणों को ‘पाप की बारात’ और बाबर को ‘यमराज’ की संज्ञा. दी थी।

संस्कृति रक्षार्थ बलिदान जिसने हैं दिए,
भारत भूमि के लिए प्राण जिसने हैं दिए।
इतिहास के वे लाल अमूल्य मोती भी खरे,
प्रणाम उसको ही करें लाल अपने खो दिये ।।

बाबर ने मुसलमानों की सहानुभूति पाने के लिए हिन्दुओं का नरसंहार ही नहीं किया, अपितु अनेक हिन्दू धर्मस्थलों को भी नष्ट किया। उसी के शासनकाल में सम्भल में एक मन्दिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण करवाया गया। उसके सदर शेख जैना ने चन्देरी के अनेक मन्दिरों को नष्ट किया। यही नहीं ग्वालियर के निकट उरवा में अनेक जैन मन्दिरों को भी नष्ट किया था।

हिन्दुओं के प्रति हुमायूँ व अकबर का दृष्टिकोण

जो सोच हिन्दुओं के प्रति बाबर की रही, वही उसके पुत्र हुमायूँ की भी रही। यद्यपि वह स्थायी रूप से कभी शासन करने में सफल नहीं हो पाया, परन्तु जब भी और जितनी देर भी वह बादशाह रहा उतनी देर उसने हिन्दुओं के प्रति वैसे ही उत्पीड़नात्मक कार्यों को जारी रखा जैसे उसके पिता ने जारी रखे थे।

हुमायूँ के पश्चात् उसके पुत्र अकबर ने राज्यसिंहासन संभाला। उसके शासनकाल को तो वामपंथी और कांग्रेसी इतिहासकारों ने भारत के लिए बहुत ही अधिक शुभ माना है। यद्यपि वह भी हिन्दुओं के प्रति कभी उदार नहीं रहा। उसके शासनकाल में हिन्दुओं के उत्पीड़न का क्रम पूर्ववत जारी रहा।

अकबर के विषय में उसके समकालीन इतिहास लेखक अहमद यादगार का कहना है कि :-

बैरम खाँ ने निहत्थे और बुरी तरह घायल हिन्दू राजा हेमू के हाथ पैर बाँध दिये और उसे नौजवान शहजादे के पास ले गया और बोला, आप अपने पवित्र हाथों से इस काफिर का कत्ल कर दें और ‘गाज़ी’ की उपाधि कुबूल करें, और शहजादे ने उसका सिर उसके अपवित्र धड़ से अलग कर दिया।

(नवम्बर, 5 AD 1556)

(तारीख-ई-अफगान, अहमद यादगार, अनुवाद एलियट और डाउसन, खण्ड VI, पृष्ठ 65-66)

इस कथन से स्पष्ट है कि अकबर ने गाजी का पद प्राप्त करने के लिए ही हेमू का वध अपने हाथों किया था। उसने अपने आपको इस बात के लिए बहुत ही अधिक सौभाग्यशाली माना था कि वह 14 वर्ष की अवस्था में ही गाजी हो गया था।

अबुल फजल ने आगे लिखा- हेमू के पिता को जीवित ले आया गया और नासिर-उल-मलिक के सामने पेश किया गया। जिसने उसे इस्लाम कबूल करने का आदेश दिया, किन्तु उस वृद्ध पुरुष ने उत्तर दिया, मैंने अस्सी वर्ष तक अपने ईश्वर की पूजा की है; मैं अपने धर्म को कैसे त्याग सकता हूँ?

मौलाना परी मोहम्मद ने उसके उत्तर को अनसुना कर अपनी तलवार से उसका सर काट दिया।

(अकबरनामा, अबुल फजल एलियट और डाउसन, पृष्ठ 21)

बनवा दी थी हिन्दुओं के कटे सिरों की ऊँची मीनार

इस विजय पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अकबर ने कटे हुए सिरों से एक ऊँची मीनार बनवा दी थी। जिससे कि साधारण हिन्दुओं के मन में उसके शासन का भय व्याप्त हो जाए। यदि अकबर उदार और लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाला शासक था तो उसे ऐसा कार्य कदापि नहीं करना चाहिए था। इसके विपरीत वह अपनी प्रजा के सभी लोगों को समान रूप से देखता और उन्हें समान रूप से न्याय देने की नीति पर विचार करता, परन्तु उसने ऐसा नहीं किया।

चोटी जनेऊ हितार्थ शीश अपने कटवा दिए,
अकबर ने जिनके मुंड से मीनार थे चिनवा दिए।
वे पूर्वज हमारे महान थे और महान उनकी सोच थी,
उनके किए पर गर्व हमको आजाद हम करवा दिए ।।

इसके अतिरिक्त अकबर के बारे में यह भी सत्य है कि उसने 02 सितम्बर 1573 को अहमदाबाद में 2000 हिन्दुओं के सिर काटकर अब तक की सबसे ऊँची सिरों की मीनार बनवायी। इस प्रकार हिन्दुओं को आतंकित करने और उनके सिरों से मीनार बनवाने का शौक अकबर को कुछ वैसे ही चढ़ गया था, जैसे किसी शराबी को हर शाम को जाम टकराने का शौक चढ़ जाता है। लोक कल्याणकारी शासन की नीतियों में विश्वास रखने वाले और प्रजाहितचिंतक शासक के लिए यह सारी बातें शोभनीय नहीं होतीं। इनको वही शासक करता है या कर सकता है जो मज़हबी दृष्टिकोण से लोगों में अंतर करके देखने का अभ्यासी हो।

अकबर को महान बताने वालों को अकबर के ‘महान’ कार्यों पर विचार करते हुए उसके ‘अकबरनामा’ को अवश्य पढ़ना चाहिए। ‘अकबरनामा’ के अनुसार 3 मार्च 1575 को अकबर ने बंगाल विजय के दौरान इतने सैनिकों और नागरिकों की हत्या करवायी कि उससे कटे सिरों की आठ मीनारें बनायी गयीं। 1575 तक के आते-आते अकबर के शासन काल को भी भारत वर्ष में 20 वर्ष हो चुके थे। यदि अकबर की मानसिकता अपने सभी प्रजाजनों के मध्य न्याय करने की रही होती तो वह कम से कम 20 वर्ष तक शासन करने के उपरान्त तो सम्भल सकता था, परन्तु वह नहीं संभला और निरन्तर हिन्दुओं के कटे हुए सिरों की मीनार बनाने में आनंद लेता रहा। माना जा सकता है कि अकबर अपने निजी विचारों में उदार रहा हो, परन्तु उसकी हिन्दुओं के प्रति नीति तो उसके बारे में यही स्पष्ट धारणा बनाने के लिए हमें प्रेरित करती है कि वह मज़हबपरस्ती का शिकार था और मज़हबी दृष्टिकोण के कारण ही वह हिन्दुओं से घृणा करता था।

राजपूत योद्धाओं की कर दी थी हत्या

अकबर की चित्तौड़ विजय के विषय में अबुल फजल ने लिखा था- अकबर के आदेशानुसार प्रथम 8000 राजपूत योद्धाओं को बंदी बना लिया गया, और बाद में उनका वध कर दिया गया

प्रातःकाल से दोपहर तक अन्य 40000 किसानों का भी वध कर दिया गया, जिनमें 3000 बच्चे और वृद्ध थे।

(अकबरनामा, अबुल फजल, अनुवाद एच. बैबरिज)

बंदी बनाए लाल पहले फिर काट डाले शीश थे,
अकबर के यह कारनामे बताओ कैसे उच्च थे?
क्षत्रिय योद्धा हमारे हर प्रकार से आदर्श थे,
वह आदर्श के आदर्श हैं आदर्श हमारे उत्कर्ष के ।।

अकबर के बारे में दिए गए इस विवरण से हमें पता चलता है कि वह अपने विरुद्ध लड़ रहे सैनिकों के प्रति ही कठोर नहीं था बल्कि हिन्दू किसानों और बच्चों के प्रति भी कठोर था। स्पष्ट है कि किसान और बच्चे उसके विरुद्ध कहीं लड़ाई नहीं लड़ रहे थे। ऐसे में उसे अपनी तथाकथित उदारता का परिचय देते हुए किसानों और बच्चों पर किसी प्रकार की कठोरता का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए था।

क्रमशः

– डॉ राकेश कुमार आर्य

Comment:

vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
restbet giriş
vaycasino giriş
restbet giriş
Vaycasino Giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betasus giriş
betasus giriş
bahiscasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
bets10 giriş
bets10 giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betcio giriş
betcio giriş
betcio giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betcio giriş
nakitbahis giriş
nakitbahis giriş
betnano giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
hiltonbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
hiltonbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
milosbet giriş
milosbet giriş
milosbet giriş
milosbet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
galabet giriş
betnano giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş