*राष्ट्र चिंतन* *ये सिख तो हिन्दुओं के दुश्मन हैं*

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सिख भी हिंदुओं का संहार और कत्लेआम चाहते हैं

आचार्य श्रीहरि

कनाडा में हिन्दू सभा मंदिर पर सिखों की हिंसा हुई, हमला हुआ, मंदिर को अपमानित करने का काम हुआ है, मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की कोशिश हुई, कुछ श्रद्धालु हमले के शिकार भी हुए है, पुलिस खामोश थी, कनाडा की सरकार उदासीन थीं। सबसे बड़ी बात यह है कि हिन्दुओं और सिखों के बीच इस तरह के हमलों से एक खाई बन गयी है, एक दूरी बन गयी है, तनाव के वातारण बन गये हैं, आपसी सदभाव समाप्त हो गया है, अब एक-दूसरे के खिलाफ हो गये हैं। सिखों ने कनाडा के हिन्दुओं को अपने हमलों और अपनी करतूतों से एक कर दिया है और उन्हें अपने सनातन प्रेम के लिए बाध्य किया है। क्योंकि अब तक हिन्दू इसी भ्रम में थे कि सिख भी हमारे हैं, भारतीय हैं, उनसे दूरी क्यों, उनसे दुश्मनी क्यों, उनसे अलगाव क्यों, एक होकर अपने अधिकारों के लिए लडेंगे और विकास के मार्ग पर चलेंगे। लेकिन इस तरह की समझ का अब कोई अर्थ नहीं रह गया है और न कोई वजूद रह गया है। सिख भी हमारे लिए उसी तरह के दुश्मन बन गये हैं जिस तरह के दुश्मन हमारे लिए मुसलमान हैं। मुसलमान भी न केवल देश के अंदर बल्कि विदेशों में भारतीयता की कब्र खोदते हैं और भारत को एक मुस्लिम देश में तब्दील करने की कोशिश करते हैं और अभियान चलाते हैं उसी प्रकार से सिख समुदाय भी अब भारतीयता की कब्र खोदते हैं और सनातन संहार का सपना देखते हैं, भारत विखंडन का सहचर बन जाते हैं, उदाहरण बन जाते हैं। यह कहना गलत है कि मुट्ठी भर सिख ही गुमराह हैं और इस तरह की हरकतों को अंजाम देते हैं, उन्हें संपूर्ण सिख समुदाय का समर्थन प्राप्त नहीं हैं। सच तो यह है कि सिखों की एक बहुत बडी आबादी और खासकर सिखों की युवा पीढी पूरी तरह से हिन्दुत्व और भारतीयता से दुश्मनी जरूर रखती है। जबकि गुरुद्वारा जाने वाले सर्वाधिक हिंदू होते हैं, हिंदू बड़े बेटे को सिख बनाते थे, ऐसी परंपरा आज भी पंजाब में है। नरेंद्र मोदी खुद गुरु नानक और गुरु गोबिंद सिंह के उपदेशों और शिक्षाओं का पालन करने में आगे रहते हैं।
जिहादियों की चरणवंदना में सिख आगे रहते हैं, जिहादियों की सेवा में सिख आगे रहते हैं। क्या आपने शाहीन बाग का उदाहरण भूल गये? शाहीन बाग में जिहादियों को चिकन बिरयानी खिलाने वाले कौन लोग थे? क्या बिन्द्रा नाम का सरदार शाहीन बाग के जिहादियों और भारत विरोधियों को चिकन बिरयानी नहीं खिलाता था? चिकन बिरयानी खिलाने के लिए सरदार बिन्द्रा ने अपना फलैट बेचने की घोषणा नहीं की थी? शाहीन बांग के भारत विरोधियों को रोटियां खिलाने के लिए, स्वादिष्ट भोजन खिलाने के लिए पंजाब से सिख महिलाओं और सिख पुरूषों की एक टोली-समूह नहीं आयी थी? क्या महीनों रह कर पंजाब की सिख महिलाओं और सिख पुरूषों की टोली ने जिहादियो की सेवा नहीं की थी? ये ही जिहादी जब अफगानिस्तान से तालिबान ने मार-मार कर खिखों को भगा दिया, अपनी मातृभूमि से बेदखल कर दिया तब सिखों की टोली से चिकन बिरयानी खाने वाले अपने मुंह पर चुप्पी की पट्टी डाल रखें थे, तालिबान के खिलाफ एक शब्द नहीं बोले थे और न ही अफगानिस्तान से जान बचाकर भारत आने वाले सिखों की मदद करने के लिए आगे आये थे। आज जम्मू-कश्मीर में सिखों की लडकियों और महिलाओं को लव जिहाद का शिकार बना रहे हैं फिर भी इनकी मुस्लिम भाईचारा से प्रेम नहीं जाता है। हिंसकों को खाना खिलाने का औचित्य क्या है, तेजाबी लोगों को भोजन खिलाने का औचित्य क्या है? भोजन तो भूख से तड़पते हुए लोगों का खिलाना पुण्य का का कार्य है। शाहीनबाग के जिहादी कोई भूखें और नंगे नहीं थे, वे तो धनवान थे, बडे-बडे काम करने वाले और नामी लोग थे, जिन्हें खैरात की जरूरत नहीं थी। आज स्थिति यह है कि भारत विरोधियों को भी खाना खिलाने के लिए ये सिख दौड़ पडते हैं।
कनाडा के हिन्दू मंदिर सभा पर हुई हिंसा कोई अचानक घटना नहीं थी बल्कि साजिशपूर्ण घटना थी और इस घटना के पीछे अमेरिका-यूरोप के सिख आतंकवादियों की संलिप्तता रही है। हर साल दीपावली के समय हिन्दू मंदिर महासभा में कार्यक्रम होते हैं और पूरे कनाडा के लोग उसमें शामिल होते हैं। कनाडा में सिख आतंकवादियों ने अपना नेटवर्क मजबूत कर रखा है। सिख आतंकवादी अराजक हैं, हिंसक हैं और कानूनों से भी उन्हें डर नहीं होता है। वे जब चाहते है तब भारत और सनातन विरोधी बयानबाजी कर लेते हैं। सबसे बडी बात यह है कि ये हिन्दुओं का विनाश करने और हिन्दुओं को भगाने के लिए सरेआम घोषणाएं करते हैं और धमकियां देते हैं। वे कहते हैं कि कनाडा में अब हिन्दुआंे को खैर नहीं, कनाडा में हिन्दुओं को अब रहने नहीं दिया जायेगा, उन्हें भागना ही होगा या फिर हिन्दू धर्म छोड कर सिख बनाना होगा, पंच निष्ठा को अपनाना होगा, अगर ऐसा नहीं करते हैं तो हिन्दुओं का जिंदा संहार कर दिया जायेगा, हिन्दुओं को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आयेगा। ऐसी धमकियां कोई चोरी -छिपे नहीं दी जाती है बल्कि सरेआम दी जाती है। ऐसी धमकियां देने वाले लोग हिंसक होते हैं, जहरीले होते हैं और अपराध की श्रेणी में आने वाले होते हैं, फिर भी इनके खिलाफ कानून की वीरता नहीं उठती है, इन्हें कानून का पाठ नहीं पढाया जाता है।
अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अमेरिका, यूरोप और कनाडा में सिखों के गुनाह और अपराध को संरक्षित किया जा रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी हिंसक लोगों को नहीं मिलनी चाहिए, घृणास्पद लोगों को नहीं मिलनी चाहिए। हिन्दुओं का संहार करने की धमकी देने वालों को नहीं मिलनी चाहिए, विखंडन मानसिकता के सहचरों को को नहीं मिलनी चाहिए। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कभी अभेरिका और यूरोप ने मुस्लिम जिहादियों को पाला पोसा था और उन्हें बढाया था। क्या यह सही नहीं है कि कभी ओसामा बिन लादेन को अमेरिका और यूरोप ने पाला था? जिस तरह से ओसामा बिन लादेन और उनके गिरोहों को अमेरिका ने संरक्षण दिया था और पोषण किया उसी प्रकार से पन्नू जैसे सिख आतंकवादियों को कनाडा, अमेरिका और यूरोप पाल रहा है। ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका पर हमला कर हजारों लोगों को मौत घाट उतरवा दिया था। ओसाबा बिन लादेन की तरह ही पन्नू जैसे सिख आतंकवादी भी आज न कल अमेरिका और यूरोप के लिए भस्मासुर साबित होंगे।
हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा घृणा और शत्रुता का भाव रखता है। इस कारण वह सिख आतंकवादियों को हिन्दुओं और भारत के खिलाफ उकसाता है। यही कारण है कि कनाडा की सरकार ने उन हिंसक सिखों को कानून का पाठ पढ़ाने के लिए आगे नहीं आयी जिन्होंने हिन्दू मंदिर सभा पर हमला करने और हिन्दू श्रद्धालुओं पर हिंसा फैलायी थी। जबकि कनाडा का विपक्ष यह मानता है कि सिखों की इस तरह की करतूत और हिंसा ठीक नहीं है और यह कनाडा की विविधता के लिए हानिकारक है। कनाडा का विपक्ष ऐसे हिंसकों और अमानवीय लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता है और हिन्दुओं की सुरक्षा की बात करता है। पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टि टूडो वोट बैंक की राजनीति के तहत चुप्पी साधे बैठे हुए हैं और कनाडा को सिख आतंकवादियों की शरणस्थली बना दिया है। जस्टिन टूडों की इस रूख से कूटनीतिक हिंसा चरम स्थिति तक पहुंच गयी है।

हिन्दुओं के लिए सिख दुश्मन बन गये हैं? इस विषय पर हिन्दुओ को अब आत्ममंथन करना चाहिए। सिर्फ कनाडा की ही बात नहीं है। पंजाब में इस तरह की घटनाएं आम हो गयी हैं। दर्जनों हिन्दू नेताओं की हत्या पंजाब में हुई है, इसके अलावा मंदिर के पुजारियों और सेवादारों की हत्याएं भी हुई हैं, उन पर हिंसा बरपी है। गौ हत्याएं भी आम हो गयी है। सिखों का इधर मुस्लिम प्रेम भी बढा है। पंजाब आज पूरी तरह से इस्लाम और ईसाई के चक्रव्यूह में कैद हो चुका है, सिखों का धर्मांतंरण भी चरम पर है, चर्च और मस्जिदों का जाल बढ रहा है। पर सिख आज ईसाइयों और मुसलमानों की इस करतूत के खिलाफ लड़ना छोड़ कर हिन्दुत्व को लहूलुहान बना रहा है। यह सिखों का आत्मघाती कदम है। हिंदुओं को भी अब सिखों से सावधान रहने की जरूरत है।

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आचार्य श्रीहरि
नई दिल्ली

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