अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर विशेष

मित्रो ! आज अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस है । यूनेस्को की ओर से 1966 से हम 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में मनाते चले आ रहे हैं । इससे हमको ऐसा लगता है कि जैसे साक्षर होते ही व्यक्ति सुसभ्य ,सुसंस्कृत और मानवीय गुणों से भरपूर हो जाता है और वह समाज की मुख्यधारा से जुड़कर चलने लगता है ।हमारा मानना है कि साक्षर व शिक्षित होना सुसभ्य और सुसंस्कृत होने की गारंटी नहीं है । यदि हम आज के समाज में हो रहे अपराधों पर एक दृष्टि डालें तो पता चलता है कि समाज में अपराध करने में पढ़ा लिखा व्यक्ति आगे है । सामाजिक मूल्यों को तोड़ने में पढ़ा लिखा व्यक्ति आगे है , माता-पिता , घर परिवार , समाज व सब संबंधों में केवल और केवल पैसा को देखने के आदी भी सब पढ़े लिखे समाज के लोग हैं। भ्रष्टाचार करने में सबसे आगे अधिकारी , कर्मचारी और वही लोग हैं जो अपने आप को पढ़ा-लिखा मानते हैं ।इनकम टैक्स बचाने की तरकीब आपको एक पढ़ा लिखा व्यक्ति बताता है । गलत ढंग से केस जीतने की तरकीब भी आपको एक पढ़ा लिखा व्यक्ति ही बताता है । आपके रोग को अधिक से अधिक कैश करने की तरकीब भी एक पढ़ा लिखा व्यक्ति ही डॉक्टर के रूप में सोचता है ।जिन लोगों ने देश की वैदिक संस्कृति को मानने से इनकार किया है या उसे मानने में संकोच अनुभव करते हैं और उसके स्थान पर पश्चिमी संस्कृति को अपनाने में गर्व अनुभव करते हैं , वह भी पढ़े लिखे लोग ही हैं । भारतीय भाषा , भारतीय भूषा , भारतीय भोजन , भारतीय लोगों और भारतीय समाज से घृणा करने वाले भी यह पढ़े लिखे लोग ही हैं । इतना ही नहीं देश के इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर उसे विकृत करने वाले लोग भी पढ़े लिखे ही रहे हैं । वृद्ध माता-पिता को वृद्धावस्था में मारने – पीटने , उपेक्षित करने और उन्हें वृद्ध आश्रम में ले जाकर निष्प्रयोज्य भंडार में पड़ी वस्तु के समान फेंक देने का काम भी ये पढ़े लिखे लोग ही कर रहे हैं ।देश में जितने भी मिलावट के काम हो रहे हैं उनमें भी पढ़ा लिखा व्यक्ति ही आपको खड़ा मिलेगा । खाद्य और पेय पदार्थों को मनुष्य के मारने के लिए तैयार करने वाले लोग भी पढ़े-लिखे ही हैं।कुल मिलाकर समाज में जितनी भी अस्त-व्यस्तता है उस सब के लिए जिम्मेदार आज का पढ़ा लिखा व्यक्ति है । यहां तक कि आतंकवाद की ट्रेनिंग भी पढ़ा लिखा व्यक्ति ही देता है । देश को भी आज तक पढ़े लिखे लोगों ने लूटा है । नेता , अधिकारी , उद्योगपति यह सब पढ़े लिखे ही तो होते हैं और यही देश को लूटते हैं । सामाजिक अस्त-व्यस्तता , अराजकता और लूट के इन कामों में लगे इन लोगों को ही हम ” बड़े आदमी ” या सभ्य समाज के गणमान्य लोग कहकर महिमामंडित करते हैं ।जबकि इनके कार्य तो एक साधारण व्यक्ति से भी गिरे होते हैं । फिर कैसे कहें कि पढ़े-लिखे या साक्षर लोग समाज की शोभा होते हैं ?इन सारे अपराधों को एक अच्छा कार्य कैसे साबित किया जाए ? – पढ़ा-लिखा साक्षर व्यक्ति इसी युक्ति की खोज में लगा रहता है । सारे पाप कर्मों को करते-करते भी वह उन्हें पाप नहीं मानता । जबकि इन सभी कार्यों को भारतीय संस्कारों में विश्वास रखने वाला व्यक्ति पाप मानता है । वह अनपढ़ होकर भी इन सारे कार्यों से बचने का प्रयास करता है । ईश्वर से प्रार्थना करता है कि मुझे दुर्गुणों से बचाकर सद्गुणों की ओर ले चलो । इसलिए हमारी दृष्टि में वह संस्कारित व्यक्ति इन पढ़े लिखों से कहीं अधिक सम्माननीय है।भारत के गांव देहात में जाइए , आज भी आपको इन पढ़े-लिखे साक्षर लोगों से अधिक सुसभ्य , सुसंस्कृत , एक दूसरे का सम्मान करने वाले , माता-पिता का सम्मान करने वाले सामाजिक मूल्यों की रक्षा करने वाले लोग आपको भरपूर मात्रा में मिल जाएंगे , लेकिन उन्हें हम हेय दृष्टि से देखते हैं और इन लुटेरों को हम बड़ा आदमी कहते हैं ? जिसके काबिल ये नहीं होते ।ऐसे में इस प्रकार के साक्षरता दिवस मनाने का क्या औचित्य ?डॉ राकेश कुमार आर्यसंपादक : उगता भारत

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