ओ३म् “वेदों के आचरण से ही मनुष्य को अभ्युदय एवं निःश्रेयस प्राप्त होते हैं”

IMG-20230918-WA0027

==========
हमें मनुष्य जीवन जन्म-जन्मान्तरों में दुःखों से सर्वथा मुक्त होने के लिए एक अनुपम साधन के रूप में मिला है। यह हमें परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है। माता-पिता, सृष्टि तथा समाज हमारे जन्म, इसके पालन व उन्नति में सहायक बनते हैं। हमें अपने जीवन के कारण व उद्देश्यों पर विचार करना चाहिये। इस कार्य में वेद व वैदिक साहित्य हमारे सहायक होते हैं। बिना वेद व वैदिक साहित्य के हम मनुष्य जीवन के सभी रहस्यों को भली प्रकार से नहीं जान सकते। वेद व वेदानुकूल ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश का अध्ययन कर हमारे जीवन की गुत्थी सुलझ जाती है। वेदाध्ययन से ही ज्ञात होता है हमारा यह संसार तीन अनादि व नित्य सत्ताओं वा पदार्थों ईश्वर, जीव तथा प्रकृति से मिलकर बना व संचालित हो रहा है। हम जीव कहलाते हैं जो अनादि व नित्य सत्ता हैं। हमारी आत्मा की कभी उत्पत्ति नहीं हुई है और न कभी इसका नाश वा अभाव ही होता है। यह संसार में सदा से है और सदा रहेगा। हमारा जीवात्मा सूक्ष्म एवं अल्प परिमाण वाला है। मनुस्मृति में इसका परिणाम बताते हुए कहा गया है कि सिर के बाल के अग्र भाग के यदि 100 टुकड़े किये जायें तथा उस एक सौवें टुकड़े के भी सौ भाग किये जायें तो जो बाल के अग्रभाग का जो दस हजारवां भाग है, उसके बराबर व उससे भी सूक्ष्म हमारा जीवात्मा है।

हमारा यह आत्मा चेतन सत्ता है। चेतन सत्ता (ईश्वर व जीव) ज्ञान व कर्म करने की शक्ति से युक्त होते हैं। इसके लिये जीवात्मा को मनुष्य या अन्य प्राणी योनियों में से किसी एक योनि में जन्म लेना आवश्यक होता है। मनुष्य योनि सभी प्राणी योनियों में सबसे श्रेष्ठ है। मनुष्य योनि में ही यह सम्भव है कि हम ईश्वर व प्रकृति का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यह ज्ञान वेदों के द्वारा उपलब्ध होता है। ज्ञान का मूल ईश्वर व उसका ज्ञान वेद ही है। यदि ईश्वर न होता तो न तो वेद होते और न ही यह ईश्वर रचित व संचालित संसार ही होता। प्रश्न होता है कि क्या ईश्वर ने यह संसार अपने किसी सुख के लिए बनाया? इसका उत्तर मिलता है कि ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप है। वह हर काल में आनन्द से युक्त है। वह अपने लिये संसार नहीं बनाता। उसका स्वभाव धार्मिक, दयालु, न्यायकारी व करूणा से युक्त है। जीव असहाय व अल्प शक्ति से युक्त सत्ता हैं। इनको सुख देने व मोक्ष आदि का अमृतपान कराने के लिये ही परमात्मा ने इस संसार को रचा है व इसे चला रहा है। ईश्वर के गुणों व कर्तव्यों को जानकर हमें भी उसके अनुसार ही आचरण व व्यवहार बनाना व करना है। इसी में मनुष्य जीवन व आत्मा की सार्थकता व सफलता होती है। ईश्वर को यथार्थरूप में जान लेने तथा वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लेने पर मनुष्य का जीवन व कर्तव्य पथ प्रशस्त हो जाता है। वेदों के अधिकांश रहस्यों को ऋषि दयानन्द जी ने सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ में प्रस्तुत किया है। मानव जीवन को इसके उद्देश्यानुसार चलाने व जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को प्राप्त कराने में सत्यार्थप्रकाश की महती भूमिका है। जो बन्धु वेद और सत्यार्थप्रकाश आदि वैदिक साहित्य की उपेक्षा करते हैं, वह सत्य ज्ञान को प्राप्त न होने से अपने जीवन को उसके उद्देश्य व लक्ष्य की ओर न चलाकर उससे प्राप्त होने वाले लाभों से वंचित रह जाते हैं। अतः सबको वेद ज्ञान की प्राप्ति के लिये ऋषि दयानन्द के ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश, उपनिषदों, दर्शनों, मनुस्मृति सहित वेदों का अध्ययन करना चाहिये। इससे मनुष्य को ईश्वर, जीवात्मा व सृष्टि विषयक आवश्यक ज्ञान प्राप्त हो जाता है और कर्तव्य व सत्य आचरणों के द्वारा वह जीवन के चार पुरुषार्थों को प्राप्त होकर अपने मनुष्य जीवन को सफल करता है।

वेदों से ही हमें ईश्वर व जीवात्मा के सत्यस्वरूप सहित भौतिक जगत के उपादान कारण प्रकृति विषयक यथार्थ ज्ञान भी प्राप्त होता है। वेदाध्ययन से हमें विदित होता है कि ईश्वर एक सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है। ईश्वर सर्वज्ञ है। वह जीवों को उनके कर्मानुसार जन्म व मरण की व्यवस्था करने सहित उन्हें सुख व दुःख प्राप्त कराता है। ईश्वर ने अपना व संसार का परिचय देने के लिए ही सृष्टि की आदि में अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न ऋषियों व मनुष्यों को वेदज्ञान दिया था। वेद न होते तो हमें ईश्वर, आत्मा व सृष्टि का परिचय कदापि प्राप्त न होता। हमें संसार की आदि भाषा, जो सभी भाषाओं की जननी है, वह भी परमात्मा से वेदों के द्वारा ही मिली है। वेदों की भाषा संस्कृत संसार की समस्त भाषाओं से उत्कृष्ट भाषा है। इसका ज्ञान इसका अध्ययन कर ही प्राप्त किया जा सकता है। हमारे समस्त ऋषि व विद्वान इस वेद भाषा व वेदज्ञान को सर्वोत्तम व आनन्ददायक जान व अनुभव कर अपना समस्त जीवन वेदाध्ययन एवं वेदाचरण में ही व्यतीत किया करते थे। ऋषि दयानन्द ने हमें वेदों के प्रायः सभी रहस्यों से अपने वेद प्रचार कार्यों, उपदेशों, जीवन चरित तथा अपने ग्रन्थों सत्यार्थप्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, संस्कारविधि, आर्याभिविनय तथा वेदभाष्य आदि के माध्यम से परिचित वा उपलब्ध कराया है। इस समस्त साहित्य का अध्ययन करने सहित उपनिषद, दर्शन, मनुस्मृति आदि प्राचीन ग्रन्थों का अध्ययन कर हम मानव जीवन को सुखी व उन्नत बना सकते हैं। ऐसा करते हुए हम आत्मा को ईश्वर की उपासना से प्राप्त होने वाले सुख व आनन्द का भी अनुभव कर सकते हैं। वेदाध्ययन व वेदों के अनुसार आचरण करने से मनुष्य की आत्मा की उन्नति होकर उसे इस जीवन में सुख तथा परजन्म में सुखद परिस्थितियां व उत्तम परिवेश प्राप्त होता है जो उसे अमृत व मोक्ष की ओर ले जाता है। अतः मनुष्य को वेदाध्ययन अवश्य ही करना चाहिये और ऐसा करते हुए वेदानुसार जीवन व्यतीत करते हुए उसे अपने देश, समाज व परिवार के प्रति कर्तव्यों को पूरा करना चाहिये।

जो मनुष्य वेदों का अध्ययन व उसके अनुसार आचरण करते हैं वह आत्मा को क्लेशरहित उत्तम अवस्था प्रदान करते हैं। जो मनुष्य वेदों से दूर रहते, उनकी आलोचना करते अथवा मत-मतान्तरों की बातों में फंसे रहते हैं, उनकी आत्मा वेदज्ञानियों के समान उन्नत नहीं होती। इस जन्म में तो वह पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार कुछ सुख भोग सकते हैं परन्तु उनका परजन्म अर्थात् मृत्यु के बाद का पुनर्जन्म श्रेष्ठ योनियों व उत्तम सुखों से युक्त नहीं होता। हमारा परजन्म उन्नत व सुखी तभी बनता है कि जब हम अपने वर्तमान जन्म में वेदानुकूल जीवन व्यतीत करते हुए शुभ, श्रेष्ठ व उत्तम कर्मों को करें। वेदानुकूल, शुभ व पुण्य कर्मों का फल ही जन्म-जन्मान्तरों में सुख व उन्नति हुआ करता है और वेदों की शिक्षाओं के विपरीत आचरण व व्यवहार करने का परिणाम वर्तमान जन्म व परजन्म में दुःख व पतन हुआ करता है। यह युक्ति एवं तर्क से सिद्ध सिद्धान्त है। सत्यार्थप्रकाश को पढ़कर इन बातों को जाना जाता है और अपना सुधार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से ऋषि दयानन्द ने जी ने सत्यार्थप्रकाश आदि ग्रन्थों को लिखा है। सत्यार्थप्रकाश मनुष्य को वेद, परमात्मा तथा मोक्ष की प्राप्ति के साधनों से जोड़ता है व उन्हें प्राप्त कराने में सहायक होता है। अतः सबको सत्यार्थप्रकाश एवं वेदाध्ययन का लाभ उठाना चाहिये।

मनुष्य का आत्मा अनादि, अनुत्पन्न, सनातन, अविनाशी तथा अमर है। जन्म व मरण धर्मा होने से इसके जन्म व मृत्यु होते रहते हैं। जन्म व मृत्यु दोनों ही दुःख देने वाले होते हैं। जीवन में सुख भी मिलता है। संसार में सुख अधिक और दुःख कम हैं। यदि हम शुभ कर्मों का ही आश्रय लें तो हमारे जीवन में सुख अधिक होंगे तथा दुःख कम होंगे। दुःखों को पूरी तरह से दूर करने का एक ही उपाय हैं कि हम मोक्ष के साधनों को जानें और उनका आचरण करें। मोक्ष संबंधी शंकाओं को दूर करने के लिए ऋषि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश के नवम समुल्लास में विस्तार से विचार प्रस्तुत किये हैं और इसके समर्थन में प्राचीन वैदिक साहित्य से प्रमाण दिये हैं। सब मनुष्यों को इस अध्याय को अवश्य पढ़ना व समझना चाहिये। यदि हम मोक्ष के साधनों को अपनाते हैं तो इसे हम जीरो रिस्क वाला कह सकते हैं। इसकी प्राप्ति के लिये प्रयत्न करने से हमें हानि कुछ नहीं होती और लाभ बहुत बड़ा होता है। हमारे ऋषि मुनि बहुत विद्वान व ज्ञानवान होते थे। उन्होंने परीक्षा व विवेचना कर मोक्ष प्राप्ति को ही सर्वोत्तम सुख बताया है। इसी के लिये सब मनुष्यों को प्रयत्न करने चाहिये। मोक्ष की प्राप्ति होने पर हमें ईश्वर के सान्निध्य में ब्रह्म का आनन्द प्राप्त होता है और हम मोक्षावधि 31 नील 10 खरब वर्ष से अधिक अवधि के लिये दुःखों से पूरी तरह से निवृत्त हो जाते हैं। अतः वेदों व सत्यार्थप्रकाश आदि ग्रन्थों सहित समस्त वैदिक सत्साहित्य से हमें लाभ उठाना चाहिये। इसी से हमारा व समस्त मानव जाति का कल्याण होगा। मनुष्य जीवन के कल्याण का वेद मार्ग से उत्तम दूसरा कोई मार्ग नहीं है। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betlike giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
parmabet giriş
piabellacasino giriş
betovis giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
milanobet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betgaranti mobil giriş
parmabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
savoybetting giriş
parmabet giriş
jojobet giriş
betlike giriş
betcup giriş
hitbet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betcup giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş